शुक्रवार, 17 फ़रवरी 2012

शब्द मंगल: भावना वैदेही की कविता

शब्द मंगल: भावना वैदेही की कविता: पढ़ लो प्रिय, मन की भाषा / मुझसे कुछ ,न कहा जाता // जाने कैसा मौन लिए , बेसुध मन अकुलाता है / शीत -निशा ढलते-ढलते पागलपन बढ़ जाता है //...