शुक्रवार, 1 जून 2012

फायबर

रेशा [ अनुपलब्ध कार्बोज ] 
फाइबर की संरचना शुगर के कणों से होती है. ये कण रासायनिक संरचना के कारण एक-दूसरे से मजबूती से जुडे होते हैं. मनुष्य की आंतों के लिए इन्हें तोड पाना संभव नहीं होता. घुलनशील फाइबर के कण हमारी आंतों में पहुंचने के बाद फैटी एसिड में बदल जाते हैं. जिनसे शरीर को सीमित मात्रा में कैलोरी मिलती है. यह पानी में नहीं घुल पाता और पाचन क्रिया के अंत तक साबुत रहता है. यह उत्सर्जन प्रक्रिया द्वारा शरीर से बाहर निकल जाता है और कब्ज दूर करने में सहायक होता घुलनशील फाइबर के सेवन से चार ग्राम कैलोरी बनती है. लेकिन अघुलनशील फाइबर में कोई कैलोरी नहीं होती. घुलनशील फाइबर का सेवन धीरे-धीरे शरीर के एलडीएल (लो डेंसिटी लिपोप्रोटीन) यानी, नुकसानदेह कोलेस्ट्रॉल के स्तर को भी नियंत्रित करता है. अघुलनशील फाइबर चोकर, मूंगफली, सूखे मेवों और पत्तेदार हरी सब्जियों में पाया जाता है, घुलनशील फाइबर मुख्यत: ओट, बींस, सेब, केला, पपीता, संतरा, अमरूद जैसे गूदेदार और रेशेदार फलों में भी पाया जाता है. घुलनशील फाइबर का सेवन धीरे-धीरे शरीर के एलडीएल (लो डेंसिटी लिपोप्रोटीन) यानी, नुकसानदेह कोलेस्ट्रॉल के स्तर को भी नियंत्रित करता है.