सोमवार, 11 जून 2012

नपुसंकता = उनका ह्रदय ज्यादा धड़कता ,भय ज्यादा सताता ,शिकायते ज्यादा करते ,आत्म विश्वास कमजोर पड़ जाता ,सुनने की क्षमता कमजोर तथा बोलले की आदत ज्यादा पड जाती .और इस प्रकार आदमी नपुसंकता को प्राप्त करता है



नपुसंकता =
  भागवत गीता में भगवान कृष्ण अर्जुन से कहते है की हे अर्जुन नपुसंकता को मत प्राप्त हो ,तुज में यह उचित  नही जान पडती .हे परन्तप ,ह्रदय की तुच्छ दुर्बलता को त्याग कर युद्ध के लिए खड़ा हो जा .यह उपदेश गीता के दूसरे अध्याय में सुनाया इस बात में गहराई से अनुसंधान देखा जाये तो मालूम होता है की इस युद्ध भूमि से पहले अर्जुन एक ब्रह्न्ला नारी के रूप में अज्ञात वास एक वर्ष का निकला था जिस के कारण महिलाओ में बैठने से सभी लक्षण पुरुष के मिट गए थे और सभी महिलाओं वाले आचरण आ गए थे .आज भी अगर देखा जाये तो आप को अगल बगल जो पुरुष महिलाओ में अधिक बैठक करता उस में महिलाओ जैसे लक्षण पैदा हो ही जाते है और उन लोगो हो बातचीत और व्यवहारिक लक्षण को देखकर उप नामों से पुकारते भी है . परन्तप यानि हल्का ,कमजोर या निर्बल लक्ष्य या तप .ह्रदय की दुर्बलता महिलाओ की कमजोर होती है क्योकि शारीरिक तुलनात्मक  अध्यन किया जाये तो भी मालूम होता ओसत वशा के तन्तु पुरुष में कम पाए जाते है और जिस पुरुष में वशा की मात्रा ज्यादा होती उनका ह्रदय ज्यादा धड़कता ,भय ज्यादा सताता ,शिकायते ज्यादा करते ,आत्म विश्वास कमजोर पड़ जाता ,सुनने की क्षमता कमजोर तथा बोलले की आदत ज्यादा पड जाती .और इस प्रकार आदमी नपुसंकता को प्राप्त करता है