बुधवार, 20 जून 2012

राग बुढ़ापा = .राग बुढ़ापा बाधक कई धर परिवारों में यह कहते हुए भी सुनते की माताजी-पिताजी अपना ध्यान रखिये खास करके खान पान का ,वो ही भोजन खाए जिस से ऊर्जा मिलती रहे ,बुढ़ापे में दांत और आत कमजोर होती है

राग बुढ़ापा = राग बुढ़ापा के साधक और बाधक ,राग बुढ़ापा करीब करीब लम्बी आयु प्राप्त होने से सुख और दुःख की उन अवस्थाओ में एक दुखो की स्वय व् समय की देंन होती जिस से उस पड़ाव का अनुभव देखना पड़ता है .जहा बहुधा बचपन का पुनर्वागमन होता है .जिसमे साधक शूल की भाती राग बुढ़ापा को जीवन जीने  बाध्य होना पड़ता है .और परिवार के लोगो का भी बढ़ावा होता है .ठीक इस के विपरीत राग बुढ़ापा बाधक लोग व् समाज, फुल की तरह जीवन जीने को सहायता करते है .राग बुढ़ापा साधक धारणात्मक  लोक प्रचलित नकारात्मक ज्ञान वाले इन को बेटे बुहुए पर्याप्त भोजन समय पर नही देते या इनका भोजन मांगना अनुचित भी होता है .घरेलू दावत या मेहमानों के साथ नही बिठाया जाता और कई बार यह भी सुनने में आता की अब बुढापे में दूध पिने के दिन थोड़े ही है ,दूध तो बच्चे पिते है .इस प्रकार के तानो से भी सुनने से अंदर ही अंदर धुटन के साथ नकारात्मक कल्पनाओ में भूल कर बार बार नकारात्मक लगाव साथ ही बलवंत हो जाता है .राग बुढ़ापा बाधक  कई धर परिवारों में यह कहते हुए भी सुनते की माताजी-पिताजी अपना ध्यान रखिये खास करके खान पान का ,वो ही भोजन खाए जिस से ऊर्जा मिलती रहे ,बुढ़ापे में दांत और आत कमजोर होती है इस लिए खाना पचने वाला ही खाए .बीमारियों से बचाव करे वो ही भोजन करे .मौसम के अनुसार ही भोजन करे .घर में दावत या मेहमानों के खाने में आदर के साथ भोजन परोसे तो बूढ़े माँ बाप की गरिमा रह जायेगी और आप के परिवार का आदर्श माप दंड, मान दंड जिन्दा रह जायेगा . राग बुढ़ापा बाधक के बोल कडवे जरूर होते परन्तु राग बुढ़ापा को दूर जरूर करते है जो वैज्ञानिक तथ्यात्मक रुझान जो मनुष्य के फायदेमंद रहेंगे.