गुरुवार, 21 जून 2012

लौरी का कमाल= भारत में माता अपने बच्चो को मानसिक तथा शारीरिक ऊर्जा के लिए अच्छी नींद आये उस के लिए लोरी सुनती है

लोरी का कमाल = भारत में माता अपने बच्चो को मानसिक तथा शारीरिक ऊर्जा के लिए अच्छी नींद आये उस के लिए लोरी सुनती है ,यशोदा बनकर अपने पुत्र को नन्द लाला श्री कृष्ण बना कर गाती, लल्ला लल्ला लोरी दूध भरी कटोरी ,दूध में पतासा लल्ला करे तमासा. जिस से अपने बच्चे को अच्छी नींद भी आती है .मगर कमाल देखिये लोरी का गीत आज दैनिक भास्कर २१/६/२०१२ को जिसका शीर्षक था माँ का गाना सुनकर कोमा से जागी ७ साल की बेटी ,मस्तिष्क हेमरेज [ रक्तस्त्राव ] के बाद कोमा में चली गई सात वर्ष की बालिका यहां करीब सप्ताह भर बाद अपनी माँ के मुह से गायिका एडील का अपना प्रिय गीत सुनकर जाग गई .लंकाशायर के ट्रावडेन की चारलोट नेव के मस्तिष्क को भारी क्षति पहुचा था और वह देखने या बोल पाने में असमर्थ हो गई थी .मस्तिष्क में रक्त स्त्राव रोकने के लिए उसका दो बार आपरेशन किया गया ,जिसके बाद वह कोमा में चली गयी थी .चिकित्सको ने उसकी माँ लीला से कह दिया की बालिका की बचने की संभावना नही है .सप्ताह भर बाद ३१ वर्षीय लीला बालिका से मिलने अस्पताल पहुची तभी रेडियो पर गायिका एडील का एक गीत `रोलिंग इन ड दिप`शुरू हो गया .यह गीत माँ-बेटी मिलकर गाया करती थी .लीला इसे खुद गाकर बालिका को सुनाने लगी और चालोंट मुस्कराने लगी .इसे देखकर चिकित्सक आश्चर्यचकित रह गए .उनका आश्चर्य तब और बढ़ गया ,जब दो मिनट के भीतर वह बोलने और चलने में भी समर्थ हो गईऔर थोडा थोडा देखने भी लगी .अब वह एक घंटे के लिए स्कुल भी जाती है .इस को हम भारतीय आध्यात्मिक द्रष्टिकोण से देखे तो मालूम होता की हमारी पांचो इन्द्रियों का ज्ञान को कर्मेन्द्रिया तथा ज्ञानेन्द्रिया का अनुसंधान को महत्व देना चाहिए .