रविवार, 5 अगस्त 2012

वीर्य = .वीर्य ही तो समाज का दाता है, वीर्य ही नारी का श्रंगार है, वीर्य ही पिता है. वीर्य हीनता तो विषाद है, वीर्य के अनेक प्रकार है .

वीर्य =  वीर्यवान जिस में वीर्य की संतुलित मात्रा हो, नर जात सभी में वीर्य पाया जाता है. पुराने जमाने में आशीर्वादात्मक सुभाशीष देते, आज वीर्य शब्द पर वीर्यपात या पतलापन पर ठगी के प्रचार ज्यादा दीखता है. जिसमे आत्म विश्वास के कमी, डरपोक या वाकई अल्प वीर्यवान इस से पीड़ित है. वे लोग ज्यादा फसते जिस को शर्म का धर्म मान कर किसी को नही बता कर अपने स्वंय के द्धुआरा पत्र-पत्रिका में निदानात्मक उपचार खुद ही करते है, और यह स्वंय का उपचार रोज रोज नई नई खबरों से अपने शरीर पर परीक्षण में हारते जुहारी की भाती दोगुना साहस करते है और अपने आप को आत्मघाती बीमारी की चपेट में ले लेते और फसते जाते है .फिर शीघ्र पतन का होना, गैस का बनना , पेट खराब का होना, कमज़ोरी का होना, कम ताकत का होना ,विश्वास की कमी का होना और अपनी स्त्री के सामने शर्माना इन सभी बीमारियों की बजाय खुल कर अपने माता पिता, दोस्त, भाई को बताने में शर्म नही करनी चाहिए. सामान्य बीमारी होती बस वैसी ही तो बात है .वीर्य ही तो समाज का दाता है, वीर्य ही नारी का श्रंगार है, वीर्य ही पिता है. वीर्य हीनता तो विषाद है, वीर्य के अनेक प्रकार है.  इसके लिए जिसमें आप को अतिरिक्त और पूरक भोजन की आवश्यकता हो सकतीं हैं, जो आपके दैनिकों आहारो का मानक आहार विशेषज्ञों से परामर्शदाता के संपर्कों से मिल सकतीं हैं. जल्दी ही हम आप को ईमेलों से निदानात्मक परामर्श सहायतार्थ उपलब्ध होंगें.