शुक्रवार, 21 सितंबर 2012

दिल का धड़कना

ह्रदय धडकना = palpitation पालपिटेसन ,दिल का धडकना असामान्य रूप से रोगी अपनी इच्छा के विरुद स्वय की धडकन तीव्र गति से सुनाई देती है जिस को ह्रदय तेज गति से धडकना कहते है कोई रोगी इस को साँस फूलना कहते है .कोई फडफडाना ,छाती उड़ना ,चपत लगाना ,धोड़े दौड़ने जैसा दिल के धडकनों को तेज होना इस प्रकार प्राय एकेले विचार करते समय ज्यादा होता है .कभी कभी कानो में आवाज आना , काम काज में मन नही लगना रोगी स्वय ही सुनता है ,यहा तक तो ठीक है .जिसका मतलब यही माना जाता की मन पर दवाब लाने वाली स्थति होती है जो निरंतर किसी बात को लेकर चिंता सताये रहती है .वीर्य हीनता या लैंगिक उत्थान की चिंता ,किसी चोरी या अपराध के पकड़े जाने की चिंता और अपने इस आत्मा को लेकर चिंता का कारण होता है और धडकन तेज होने से रोगी के मन पर दवाब अधिक आता है जिसमें मानसिक या विचारिक अस्थिरता से स्नायु तन्त्र पर प्रभाव पड़ता है. जिसको मनो विज्ञानं के परामर्श से ठीक किया जा सकता है .परन्तु इस लक्षणों के अलावा बाए कंधे में धडकन के साथ दर्द होतो डाक्टरी, वैधकीय उपचार ले जिसमे  e.c.g., X-rey,खून जांच की आवश्यकता हो सकती है . 09829085951