सोमवार, 1 जुलाई 2013

गठिया ,जोड़ो का दर्द

गठिया ,जोड़ो का दर्द = चिकित्सा की भाष्यकार की विभिन्न चिकित्सा पद्दतियो में भिन्नताए मिल सकती जिससे परेशान होने की आवश्यकता नही इस लिए इस के कारणों के नैदानिक चिकित्सा पर केन्द्रित हो . जो अत्यधिक पीड़ादायक परेशानी भरा जीवन जीना पड़ता हैं जिसके लक्षण सभी जानते है .की शरीर वो दोनों हड्डियों के जोड़ भाग या जहाँ आपस में हड्डियों का मिलन होता उस भाग में दर्द या दर्द के साथ सूजन होती है .हाथ-पाँव के बड़े जोड़ो को गाउट, अर्थराइटिस कहते हैं. हाथों की अंगुलियों में दर्द या सूजन हो तो या रियुमेटीज्म के नाम से जाना जाता हैं .
संधिशोथ = प्रारंभिक अवस्था में लगभग पूरा शरीर प्रभावित हो जाता हैं ,किसी किसी को एक या दो जोड़ प्रभावित हो जाता हैं .यह शरीर के किसी भी जोड़ या जोडी या संधि में हो सकता हैं  .गठिया दो प्रकार का होता हैं आस्टियो आर्थइटीस और रर्ह्युमेतिक अर्थराइटिस  osteo arthritis यह एक जीर्ण रोग हैं जो 50 वर्ष के लोगो में पाया जाता हैं .मोटापा, बुढ़ापा और जोड़ो का क्षरण. जिसमें वजन बढने के साथ आराम की अधिकता पाई जाती हैं .
अस्थी संधिशोथ - यथा नाम तथा गुण - इसमें जोड़ो के अंदर कई जगह बदलाव आ जाते है ,जोड़ो में दर्द और कठोरपन इस रोग के प्रमुख लक्षण होते हैं .व्यायाम से प्राय दर्द बढने लगता हैं .
कारणों के प्रकार -खानदानी ,चोट लगने से , अधिक औषधियों के सेवन से जैसे फ्रुसेमाइड एवं थाइजाइड. यूरिक एसिड की टोफी बनने के कारण [ यूरिक एसिड के नही निकल पाने से .]     
आमवात Rheumatism  जो भोजन हम करते कमजोर चयापचय के कारण पाचन नही होने से भोजन का कच्चे रूप आम बनता व वात [  Aeolian ] ,वायु के प्रभाव से दोनों का संगम आमवात का निर्माण होता हैं .
 नैदानिक चिकित्सा = नैदानिक चिकित्सा सभी की भिन्न-भिन्न होती हैं. जिस में आहार और जीवन-शैली में बदलाव की आवश्यकता होती हैं .