बुधवार, 10 जुलाई 2013

शीघ्रपतन का उपाय

शीघ्रपतन = शीघ्र पतन  नैदानिक चिकित्सा में रति क्रिया [ संभोग, समागम, अन्योन्य संसर्ग, मेल-जोल ] के मामले में यह शब्द वीर्य पात या वीर्य स्खलन के प्रयोग के लिए किया जाता हैं. पुरुष की इच्छा के विरुद्ध स्त्री सह वास करते समय उसका वीर्य अचानक स्खलित [ वीर्य पात ] हो जाते जिसको पुरुष चाह कर भी नही रोक [ स्तम्भ ] पाता. .स्त्री-पुरुष के समागम,की शुरुआत में ही वीर्य पात से स्त्री को संतुष्टि और तृप्तिदायक अवस्था की प्राप्त नही होती उस अवस्था को वीर्य स्खलित हो जाना या निकल जाना, इसे शीघ्र पतन होना कहते हैं. इस व्याधि का संबंध स्त्री से नहीं होता, पुरुष से ही होता है और यह व्याधि सिर्फ पुरुष को ही होता हैं .शीघ्र पतन की सबसे खराब स्थिति यह होती है कि सम्भोग क्रिया शुरू होते ही या होने से पहले ही वीर्य पात हो जाता है. काल से पहले वीर्य का स्खलित हो जाना शीघ्र पतन है. यह “अवधि ” कोई निश्चित समय नहीं है पर जब “शुरुआत ” के साथ ही “अंत” होने लगे या स्त्री-पुरुष अभी चरम पर न हो और स्खलन हो जाए तो यह शीघ्र पतन (Premature Ejaculation) है। ऐसे में संतुष्टि, ग्लानी, हीन-भावना, नकारात्मक विचारों का आना एवं अपने पत्नी के साथ संबंधों में तनाव आना वाजिब है. स्त्री-पुरुष दोनों की यह अवस्था ख़राब होती और इस वेदना को किसी को बताया नही जाता इस समय, रहा भी नही जाता और सहा भी नही जाता. सम्भोग की समयावधि कितनी होनी चाहिए यानी कितनी देर तक वीर्य पात नहीं होना चाहिए, इसका कोई निश्चित मापदंड नहीं है. यह प्रत्येक व्यक्ति की मानसिक एवं शारीरिक स्थिति पर निर्भर होता है.सम्भोग के शुरू होने से 1 मिनट के भीतर ही अगर किसी पुरूष का वीर्य-स्खलन हो जाता है तो इसे शीघ्र-पतन ( premature ejaculation) कहा जायेगा. रति क्रिया कितनी देर तक होनी चाहिए यह बात हर व्यक्ति के शारीरिक व् मानसिक क्षमता पर निर्भर करती हैं . 
कारण = भय , डर , चिंता ,छुप कर संभोग जैसे हस्त-मैथुन के साथ शारीरिक व् मानसिक परेशानियों का भी कारणों का पाया जाता हैं
चिकित्सा = इस समय आपसी बात-चित आप को स्थाईत्व दे सकता हैं.इस समय सहज रूप से पेश आये . एक बार मैथुन से जो उर्जा की खपत होती उस की भरपाई लगभग 500 किलो-कैलोरी दूध ,जूस या पोष्टिक आहार ज़रुर लें. सहवाग के समय लम्बे लम्बे सास ज़रुर ले जिस से आप को अतिरिक्त उर्जा मिलेगी .