सोमवार, 23 नवंबर 2015

मेरी आदत

आदत या लत देखा जाए कैसी भी हो, सभी आदत समांतर होती है, आदत के अनुसार ही हमारी जीवनशैली का निर्माण स्थिर हो जाता है, आदत अपने आप को संतुष्टि देती है. सभी प्रकार की आदत पीड़ित होने का मान भुला देती है.  जैसे पीड़ित को चोरी करने की आदत, जुआ खेलने की आदत, अति मैथुन की आदत, हस्त मैथुन की आदत, मादक पदार्थ के सेवन की आदत, बीडी-सिगरेट पिने की आदत, गांजा-भाँग पिने की आदत, और अति खाने-पिने की आदत होती है, जो व्यक्ति को मशीनी कृत व्यवहारिक बना देती है. आदत अथवा लत बहुत अनियत्रित हमेशा रहती है. जो उस आदत के कारण उसको प्राप्त करने की हमेशा आनन्दित महसूस करता अग्रसर आकर्षित होता है, यदि इस प्रकार की आदतों के प्राप्ति में कोई बाधा आती है तो व्यक्ति आक्रामकता से उस को प्राप्त करने की कोशिश करता है. इस प्रकार सभी आदते एक प्रकार की होती है. अपने आनन्द के कारण व्यक्ति अपनी जवाबदारी के प्रति प्रति बल महसूस करता और ज़िम्मेदारी लेने से कतराते है, इस प्रकार की आदत किसी को अनुचित लगती तो वो अपने तर्क से जवाब देता है. जब की सभी इस प्रकार की आदत नकारात्मक होती है. जो व्यक्ति को सामाजिकता के विरोध में ले जाती हैं. और व्यक्ति अपना स्वास्थ खो देता है, इस प्रकार की आदतों को सुधारने के लिए अच्छे मनोविज्ञानिको  के परामर्शदाता की आवश्यकता होती है.