शुक्रवार, 10 अगस्त 2018

दाम्पत्य जीवन में गुस्से व नशा के प्रभाव

गुस्सा या नशा के प्रभाव से दाम्पत्य जीवन में अपनी ख़ुशी का अभाव पाया जाता है, गुस्सा और नशा दोनों विवेक खो देते है. हर्ष उल्लास जीवन से दूर हो जाते है, अपने जीवन साथी से नित्य क्लेश उत्पन्न होता है. जीवन साथी से मैथुन में असफलता रहती है, जिससे दैनिक रोज़मर्रा के कार्यो में कठिनाइयाँ आती है, हर वक्त बदले की भावना रहती है, जिस कारण से परिवार में तनाव रहता है.

युगल मैथुन में क्रोध व  नशा एक बाधा होती ये करीब-करीब पुरुष वर्ग में प्राय: अधिक देखने को मिलता, महिलाओं में नाम मात्र .भारतीय दर्शन शास्त्र प्रति एक जोड़े को लक्ष्मी-नारायण में नजर आते उन में कभी शिव-पार्वती, के साथ ब्रह्मा-सरस्वती का जोड़ा भी देखा जाता, बीमारी के तौर पर अंदर की घुटन जो जीवन साथी के गुस्से या नशा के कारण  मानसिक संताप को भुगतना या पथभृष्ट होना पाया जाता.

बचाव, उपाय
प्राणायाम सबसे बेहतर उपाय चिकित्सा होती है, गुस्सा, क्रोध और नशा दोनों नियंत्रण में आते है.
                  निम्नलिखित फलो में कुछ योगिक यौन स्वास्थ्य में सुधारने उनके उपयोग के साथ प्रेम से आपस में उनका खाने में एक दूसरे को टुकड़ो-टुकड़ो में खिलाने से आप को पोषण के साथ पारिवारिक प्रेम भी बढ़ता है.
अंगूर, अमरुद, सेव, पपीता, अनार, चीकू, चेरी, और कीवी जैसे फलो का सेवन ज़रूर करना चाहिए ।

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गुरुवार, 9 अगस्त 2018

बदन दर्द

मांसपेशिया में दर्द के साथ साथ सूजन
आजकल की जीवन शैली में कम्प्यूटर पर बैठने से व्यक्ति के गर्दन व कंधे का दर्द, बदन दर्द, मांसपेशीय दर्द और हाथों के अंगुलियो में दर्द बढ़ता दिखाई दे रहा है. मांसपेशीय और जोड़ों का दर्द के साथ हाथों की अंगुलियों में सूजन होने पर कुछ लोग चिकित्सक के बिना परामर्श से दर्द निवारक गोली ले लेते जो हानि कारक हो सकता है. क्योंकि सभी व्यक्तियों के शारीरिक व् मानसिक बनावट में भिन्नता हो सकती है. किसी का हृदय कमजोर हो सकता है, तो किसी का गुर्दा या यकृत कमजोर होने से उस दर्द निवारक दवा खाने से शरीर में अधिक नुकसान होने की संभावना हो सकती है. मधुमेह, रक्तचाप भी जीवनशैली के रोग होते है तो चिकित्सक की सलाह से ही दर्द निवारक गोली का उपयोग लेना चाहिए।

मांसपेशीय दर्द, गठिया की बीमारी में तब्दील हो जाता है.
जोड़ों में दर्द, जोड़ों में सूजन, सूजन स्थानों पर लालिमा दिखाई देती है, सुबह सुबह उठने के समय में शरीर में अकड़न, ऐठन, एड़ी में दर्द बढ़ता जाता है, चलने-फिरने में, उठाने-बैठने में तकलीफ़ महसूस होती है,
भारतीय भाषा मे गठिया वात विक़ार दोष मे गिना जाता है, वात विक़ार करीब 84 प्रकार के बताए गए है॰ 

आहार - विहार
जीवनशैली के पर्यावरण से गहरा संबंध होता है॰ आजकल के अल्प आहार जो बिनोला और पाम तैल से निर्मित होते है, इन तेलीय भोजन से वजन भी बढ़ जाता है॰ जिससे मोटापा भी हो जाता है ॰ जिससे रक्त प्रवाह मे बाधा उत्पन्न होता है, जब रक्त प्रवाह धीमा होगा तो शरीर मे ऑक्सीजन की पूर्ति रुक जाती है॰ ऑक्सीजन के पर्याप्त के अभाव से आलस आना, उबासियों / जंभाई आना शुरू हो जाता है॰


बुधवार, 18 जुलाई 2018

वृद्धावस्था में तनाव

मानव जीवन मे करीब 65 वर्ष बाद होने की शुरुआत तनाव से होती है, इस आयु में सामाजिक निर्भरता, पारिवारिक निर्भरता बढ़ जाती है । क्यो की शारीरिक परिवर्तन के कारण समायोजन समस्याएं पैदा होती है,
 
1. शारीरिक परिवर्तनों से सम्बन्ध समायोजन समस्याएँ- 
65 वर्ष में बुढ़ापा होता है, इस बुढ़ापे में कई तरह के परिवर्तन होना शुरू हो जाता है, इस उम्र में शारीरिक व मानसिक शक्ति कमजोर हो जाती है, पाचन शक्ति कमजोर हो जाती है, मुँह में दाँत, दाढ़ गिर जाते इस कारण भोजन चबाने में परेशानी आती है, भोजन स्वाद में भी समस्या आती है । साथ ही साथ आँखों में रोशनी कमजोर होने से दिखने में समस्या आती है । कानों में सुनने की क्षमता भी कमजोर हो जाती है, गंध सुगंध, सूंघने में समस्याओं का सामना करना पड़ता है, इस प्रकार प्रत्यक्ष परिवर्तन देखे जा सकते है । इन शारीरिक परिवर्तनों के कारण इनका जीवन समायोजन में कठिनाइयों से गुजरना पड़ता है, इस समय कोई नई मांग को पूरा करना कठिन होता है । स्वयं को असहाय होने के विचारों में जीवन जीना पड़ता है ।

2. आर्थिक सुरक्षा से से सम्बन्ध समायोजन
इस आयु से मासिक आय मिलना बंद हो जाता है, नौकरी-पेशा हाथ से निकल जाता है, संतुलित जीवन जीने के लिए शारीरिक व मानसिक स्वस्थ रखने के लिए पौष्टिक संतुलित भोजन खरीदने के लिए पर्याप्त रुपया भी नही होता है । शारीरिक बीमारी के लिए रुपये की आवश्यकता भी होती है, इन आवश्यकताओं के लिए धन खर्च करने की आवश्यकता भी पड़ती है । धन की कमी असहाय होने को मजबूर करता है ।

3. जीवन साथी के समायोजन की समस्या
पारिवारिक जीवन मे अब नई नई समस्याएँ आने लगती है, अवकाश प्राप्ति होने के कारण अधिकतर समय घर मे ही गुजरना पड़ता है, जीवन साथी से अगर मधुर सम्बन्ध हो तो ठीक नही तो संघर्ष शुरू हो जाता है, सतत अप्रिय वाणी के बोल से दिन बिताने कठिन हो जाता है । किसी किसी के अपने जीवन साथी के बिछड़ जाने से दिन रात अलगाववादी एवं अकेलापन के भाव विकसित हो जाते है, आजकल पुत्रवधुओं की सेवा का अभाव होता जा रहा है ।

4. सन्तान के साथ कि समायोजन की समस्याएं
इस वृद्धावस्था में अपने औलादों से समायोजन करने में काफी समस्या आती है, आधुनिक संस्कृति के कारण सन्तानों की सामाजिक मनोवृति रास नही आती, वृद्ध व्यक्ति के पुराने विचारों और सन्तानों के आधुनिक विचारों के कारण सामाजिक मान्यताओं,, सामाजिक मूल्यों में टकराव आते है , जिसके कारण इन वृद्ध नागरिकों में अंसतोष ज्यादा उत्पन्न होता है, की संतान उनके ऊपर आश्रित होते और आज ये सन्तानों पर अब आश्रित रहना पड़ता है ।अब इन्हें सन्तानों पर आर्थिक व शारीरिक निर्भरता रहनी पड़ती है । इस बातों के कारण असन्तोष ज्यादा उत्पन्न होता है।

5. अर्थोपार्जन की समस्या 
कुछ वृद्ध लोग अपने अर्थोपार्जन के लिए कोशिश करते पर सन्तान इस विषय का विरोध करते है, इन को रोका और टोका जाता है, कुछ सामाजिक व्यक्ति भी अर्थोपार्जन में इनकार करते है, तो ग्लानि भी उत्पन्न होती है ।

6. शारीरिक मानसिक असंतुलन
इस उम्र में शारीरिक दोष उत्पन्न होने से मानसिक विचारों में कुंठाएँ पैदा होती है, मानसिक स्वास्थ्य में गिरावट होने पर शारीरिक क्रिया करने में परेशानियों का सामना करना पड़ता है ।

बुधवार, 11 जुलाई 2018

Psycho Diet

Make changes in lifestyle and stay healthy with your body.

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शीघ्रपतन का तनाव

धरती पर सभी प्रकार के जीवों में चार गुण समांतर चलते है, आहार, निंद्रा, मैथुन और भय, इन चार का मानव जीवन तो क्या सभी प्राणियों को संतुलित समांतर आवश्यकता पड़ती है,

मानव जीवन में दाम्पत्य जीवनशैली में नर नारी के मिलने से ही आगे संसार की वृद्धि होती है, इस शिव-शक्ति के मिलन का माना जाता है,
शीघ्र पतन 
शीघ्र शब्द का अर्थ होता है, जल्दी होता है, और पतन का अर्थ नाश, समाप्त होना, अर्थात जल्दी समाप्त होना, जल्दी, खत्म होना, जल्दी पूर्ण हो जाना, शीघ्र पतन को चिकित्सा शब्द कोष में दाम्पत्य जीवन में मैथुन करते वक्त पुरुष का वीर्य पात [ वीर्य के स्खलन ] जल्दी हो जाना,  मैथुन के दौरान स्त्री सहवास में पुरुष की इच्छा के विरुद्ध उसका वीर्य अचानक स्खलित हो जाता है, पुरुष रोकना चाहे तो भी रोक नहीं पाते,  जिसके कारण महिला जीवन साथी को मैथुनरत में संतुष्ट नहीं होती जिसकी उसको आवश्यकता होती है. संतुष्टि और तृप्ति नही होने से स्त्री व् पुरुष दोनों में स्वभाविक एक तनाव उत्पन्न हो जाता है, फिर तनाव से मानसिक बीमारी भी हो जाती है,  ये तनाव पुरुष के असफल मैथुन की वजह से होता है, इस में स्त्री, नारी या महिला के कारण नहीं होता है.
मैथुन क्रिया का कोई नाप दंड नहीं होता, सभी व्यक्तियों के मानसिक, शारीरिक बल समांतर नहीं होते, सबसे भयंकर स्थिति तब होती की जब सम्भोग शुरू करते ही टाय टाय फिस्स, वैसे मैथुन कितनी देर होना चाहिए इसका कोई पैमाने नहीं होते है,
तनाव की उत्पति 
सम्भोग क्रिया शुरू करते ही वीर्य पात होना, वीर्य स्खलन होने पर एक मानसिक तनाव होना शुरू हो जाता है, की मैथुन, सम्भोग कितनी देर होना चाहिए, इस बात का तनाव हमेशा सताता है, समय से पहले सम्भोग में वीर्य पात होना इसलिए इस सम्भोग का समय कम ज्यादा का का तनावपूर्ण जीवन हो जाता है, की शीघ्र पतन से आत्म हीनभावना, असंतुष्टि, डर, नरात्मक भाव, अपने महिला जीवन साथी के साथ दोनों के सम्बन्धो में तनाव घिरे जीना रहना जीना पड़ता है,

उपचार परामर्श 
शारीरिक समस्या के लिए उपयुक्त निकटतम चिकित्सक को दिखाना चाहिए, मानसिक परेशानी के लिए मनोवैज्ञानिक से परामर्श की आवश्यकता होती है, निकटतम मनोवैज्ञानिक से परामर्श ले, आहार विशेषज्ञ से भी वीर्य के पतलापन हेतु परामर्श लेना चाहिए,


सहायतार्थ 
सशुल्क सेवा लाभ उपलब्ध है,

  Dietician, psychologist in Rajsamand district, Rajsthan

09829085951



मंगलवार, 10 जुलाई 2018

सन्तान प्राप्ति के लिए

सन्तान प्राप्ति के लिए शिवलिंगी 

शादी होने के बाद कई वर्षो तक सन्तान नहीं होने पर पारम्परिक देशी जड़ी-बूटी उपचार से उपचार किया जाता था, भारत में समाज पुरुष प्रधान होने से पहली एक पुत्र वारिस होने की आशा की जाती है, कन्या को एक पूजनीय मानी गयी है, यह कन्या पराया धन माना गया है. 
जडी-बूटी ज्यादातर पहाड़ी, देहाती और आदिवासी लोग ही इसके जानकार होते थे, अब इसमें भी कमी आई है. सन्तान नहीं होने पर "शिवलिंगी" बीज़ को व् उसके पत्तों को उपयोग में लिया जाता है, अब इन शिवलिंगी के जानकारी कुछेक आदिवासी जानते है, इसका वर्णन आयुर्वेदिक ग्रंथो में भी मिलता है. 
शिवलिंगी पहाड़ी भागों के खेतो के किनारे किनारे झाड़ियों पर वर्षायु लता के रूप में उगती है. इस के बीजो को देखने पर एक शिवलिंग बीज के दोनों तरफ देखते है. इस बीज के उपर शिवलिंग के समान दृश्य होने से इस बीज और पौधे को शिवलिंग ही कहते है. 

सन्तान हेतु उपयोग 
आदिवासी लोग इस पौधे के उपयोग के लिए निम्नप्रकार से सन्तान पाने के लिए अभ्यास करते है.
सन्तान हेतु उपयोग के लिए इस पौधे को एक दिन पूर्व इसकी पूजा करते है, और आने का निमंत्रण भी देते है, 
फिर दूसरे दिन इस जडी-बूटी को लाते है, फिर सन्तान हिन महिला को मासिक धर्म के चार दिन बाद शिवलिंगी के बीजो को, 5 बीज प्रतिदिन से, 5 से 25 दिन खिलाते है. जिससे गर्भ धारण की सम्भावना बढ़ जाती है, दंपति को जल्दी ही सन्तान प्राप्ति का सुख मिल जाता है, सन्तान विहीन दंपतियों के लिए वरदान साबित होती ये शिवलिंगी जडी-बूटी, कुछ आदिवासियों ने बताया की पीपल झटा, तुलसी, जियापोता, गुड, नागकेसर, के अनुपात में शिरपाक  करके भी इस शिवलिंगी का उपयोग करते है, 
शिवलिंगी को जादू-टोना, नजर लगना, ताबीज में भी जानकार लोग इसका उपयोग करते है. 





शनिवार, 7 जुलाई 2018

गठिया दर्द से बचाब

गठिया दर्द होने के अनेक कारण हो सकते है, 84 प्रकार की बादी में ये गठिया रोग भी शामिल है, गठिया रोग होने से बचाव किया जाए तो बुढ़ापे में राहत की जिंदगी हो सकती है. जिसमे मूल कारण पाचन दोष होता है, हमारा शरीर तीन प्रकार के तत्वों से बना होता है, कफ, पित और वायु, हमारे शरीर के दुर्बलता की अवस्था में वायु दोष के कारण ये रोग शरीर में प्रभावी होता है,  इसके निम्लिखित कारणों से आप बच सके तो उत्तम रहेगा.
1. आम दोष
हमारे भोजन से पेट में आम दोष उत्पन्न होता है, जिसके कारण ज्यादातर गुठनो दर्द, गठिया दर्द [ शरीर की हड्डियों में जोड़ों को गठिया भी कहा जाता है, ] होता है, जोड़ों में सभी के समांतर दर्द नहीं होता किसी के हाथों की अंगुलिया, किसी के कोहनियों के जोड़ों में दर्द, किसी के पैरों में गुटनो के दर्द से परेशानी होती है,


2. अधिक शारीरिक वजन होने से
अपना अतिरिक्त वजन को नियंत्रित करे, ज्यादा वजन हो तो उस वजन को कम किया जा सकता है.'वन नियंत्रण आते ही गठिया दर्द में आराम आ जायेगा.

3. गठिया में लुब्रीकेंट्स की कमी की वजह से
संतुलित वजन के साथ, कब्ज निवारक आहार ले, फायबर युक्त आहार ले, पानी पर्याप्त पीजिये .

4. अत्यधिक कार्य होने से
युवा अवस्थाओं भारी कार्य जैसे अधिक वजन उठाना, खेल मैदान में शारीरिक बल से खेल कार्य करना, उछलना, कूदना, भागदौड़ करना, जिम में अतिरिक खेल मेहनत करना. युवाओं को प्रशिक्षित अध्यापक या कोच की देख रेख खेल कार्यक्रम करना चाहिए

बचाव 
आम दोष से बचाब का मूल तरीका है की वायु वर्धक आहार नहीं खाए, बासी भोजन का उपयोग नहीं करे, आलू, उलद दाल, चना व् चने से बने व्यंजन, बैंगन, हरी मिर्च, पेट में गैस उत्पन्न करने वाले भोजन को अपने खाने में रोके, कब्ज करनेवाले आहार पर भी प्रतिबन्ध लगा ये, मैदा, मैदा से बने व्यंजन, चावल, भिन्डी, खट्टे भोजन, दही, दूध, तेज मिर्च-मसाला, और ठन्डे भोजन, ठंडा पानी से स्नान, ठंडा पानी इत्यादि.

बुधवार, 4 जुलाई 2018

लहसुन

लहसुन भारत भर में सभी स्थानों में पाया जाता है, लहसुन की खेती की जाती है, लहसुन आहार के मसालों में खाया जाने वाला भोजन होता है.
लहसुन को सब्जी के मसालों में खाया जाता है, कच्चे लहसुन व लहसुन के पत्तियों की चटनी भी बनाई जाती है, वो ही ज्यातर उपयोगी होती है, आजकल डिब्बे बंद कैप्सूल और पावडर भी बाजार में मिलते है परन्तु उसमे लहसुन के गुण धर्म समाप्त हो जाते, बस इन डिब्बा बंद लहसुन के एक फायदा होता, की उसकी गंध जिसको अच्छी नहीं लगती, वो इस गंध से बचने के लिए, जो फायदा के लिए उपयोग लेते, वो फायदा नही मिलता, इसलिए हो सके तो क्षीरपाक बनाकर उपयोग करे, चटनी बना के उपयोग करे, अथवा सब्जी के मसालों में ही काम ले.
गुण धर्म
लहसुन कटु, मधुर, गुरु, स्निग्ध, उष्णवीर्य, तीक्ष्ण, पिच्छिल, बल्य, वृष्य, मेघा, सर, कफ, वात, कुष्ठ, ह्रदयरोग, उदरशूल, जीर्णज्वर, भग्न अस्थि संधान करने वाला, मेघा, स्वर, आखोँ की ज्योति बढाने वाला, विबंध, राज्यक्षमा, श्वास, अर्श को मिटाने वाला,
लहसुन में अम्ल छोड़कर पांच रस विद्यमान होता है, इसलिए इसको रसोन भी कहते है, लहसुन में उडनेवाला तेल भी होता है, लहसुन का तैल त्वचा, फिफ्फुस और मुत्रपिंड द्वारा उत्सृष्टं होता है.
लहसुन गर्म तासीर का होता है, वात का नाश करने वाला, कफ को मिटाने वाला, मूत्र को पैदा करने वाला जिससे गुर्दे को बल मिलता है, फेफड़ों के लिए अच्छा लाभ दायक, श्वासनलिका का कफ को पतला करके निकालने वाला, जिससे कफ की दुर्गंध दूर होती है, रक्त को पतला करनेवाला जिससे,  रक्त संचार अच्छा होने सर नाडीव्यूह इस की क्रिया उतेजक होती हैं, संधिवात, सायटिका, शरीर के अंदरूनी मार को ठीक करता है,  इसके लिए क्षीरपाक  करके देना चाहिए, कच्ची लहसुन का पेस्ट बनने शरीर पर लेप भी किया जाता है. पेस्ट में सावधान रखनी पडती है नहीं तो लेप वाले भाग पर फफोला होने की सम्भावना होती है. ह्रदयरोग में जब गैस बनती है तो लहसुन खाने से गैस कम बनती है हृदय को शक्ति मिलते ही पेशाब आ जाता है और हृदय रोगी को आराम मिलता है.
लहसुन ताज़ा निकाला हुआ में नमी के साथ गुण ज्यादा होता है, अच्छी उर्जा होती है, फास्फोरस की मात्र 100 ग्राम लहसुन में 310 मिली ग्राम पाया जाता जब की सुखी लहसुन में 60 मिलीग्राम ही पाया जाता है,  लौह की मात्रा  गीली में 6.5 मिलीग्राम ही होती है, जब की सूखे लहसुन में 1.2 मिलीग्राम होती है, सूखे लहसुन में मैग्नीशियम 71 मिगिग्राम होता है, सूखे लहसुन में विटामिन C की मात्रा 13 ग्राम होती है.


मंगलवार, 3 जुलाई 2018

घुटनों के दर्द

घुटनों का दर्द ज्यादातर 40 वर्ष के बाद प्रारम्भ हो जाती है, सामन्यतय घुटनों में दर्द का प्रारम्भ में हल्का फुल्का दर्द रहता है, फिर धीरे धीरे सृजन, जकडन आना शुरू हो जाती है, चोट, मोच से भी घुटनों में दर्द होना होता पाया गया है, जिसने घुटनों में लचीलापन समाप्त हो जाता है, आधुनिक मेडिकल की भाषाओं बहुत नामो से वर्गीकृत किया गया है, जिसके लिए आधुनिक जाँच से ही पता चलता है, परन्तु 90 % तो जल्दी ठीक होने ने देरी का कारण व्यक्ति की लापरवाही होती है. जब दर्द प्रारम्भ होता उस समय एक मानसिक भय शुरू हो जाता है, उस भय की वजह से व्यक्ति लडखडाते चलता है, जिससे पाँव को सीधा खड़ा करने में भयातुर से असमर्थ हो जाता है, जिससे अपने शरीर का वजन सहन नहीं, कर पाता है, 

बहुधा

 1. दुर्धटना से भी घुटनों में दर्द होता है, गहरी चोट होना उसमे लापरवाही अनुचित होता है, ( गहरी चोट की 2. अवस्था में सर्जन डाक्टर से परामर्श आवश्यक है.)
2. जोड़ों के बिगड़ने से भी घुटनों में दर्द हो सकता है,
3. सीढ़ियां चढ़ने में दर्द होना शरीर का भारीपन हो सकता अथवा दुर्बलता के कारण भी दर्द हो सकता.

घुटनों में दर्द के कारण - Knee Pain Causes in Hindi
4. ऑक्सीजन का रक्त संचरण में बाधा आना भी घुटनों में दर्द का कारण हो सकता है.
5. खून का जमाव के कारण मॉस-पेशी जकडन के कारण घुटनों में हो सकता है.
6 . अक्सर मासपेशीय उत्तक में टूट-फुट होने से भी घुटनों में दर्द हो सकता है.
7. सबसे ज्यादातर आमदोष के बढने से ही घुटनों में दर्द होता है, जिसमे आधुनिक जांच से पता चलता की यूरिक एसिड बढ़ा हुआ होता है.
8. मोटापा में ज्यादा वजन होने से भी दर्द होता है.
9. आधुनिक समय कुछ लोग घुटनों में इंजेक्शन लगाते जो अल्पकालिक आराम देता और इंजेक्शन के अत्यधिकता से पैरों में विकृति से लकवापन देखा गया है.>>सावधान<<
10. अधिक आयु में घुटनों के आपरेशन के बाद भी विकृति देखी गई है.

अचेतन अवस्था के कारण

आज कल घुटनों के दर्द से परेशान महिला-पुरुष दोनों देखे जा सकते, ये बीमारी कही बाहर से नही आयी बल्कि ज्यातर व्यक्ति ने स्वयं निर्माण की होती है, आपने देखा होगा की, उदाहरण-पृथ्वी पर उगने वाली सभी प्रकार की वनस्पतियों के लिए वर्षा जी जवाबदारी नहीं होती, परन्तु वर्षा के बिना वनस्पति उग भी तो नहीं सकती, धरती की तरह हमारे शरीर को भी मिट्टी का बना ही तो मानते है, और इस मिट्टी में भी जो हम बोते वही उगता है, अर्थात जो भोजन हम करते उसके वायु विक़ार, वात विक़ार, के बढने से ही व्यक्ति के पेट में आम दोष उत्पन्न होता है, ये हमारा शरीर देहधारी जीवन का प्रश्न है, जिसमें आत्मा का स्वभाव सदैव सक्रिय रहना है, आत्मा की अनुपस्थिति में ये भौतिक शरीर हिल नहीं सकता, शरीर तो मृत समान है, इसका संचालन आत्मा व् बुद्धि से चलता है, आत्मा व् बुद्धि सदैव सक्रिय रहती है, एक क्षण भी रुक नहीं सकती, 

अगर आप को स्वस्थ होना है तो 

आप अपनी जीवनशैली को बदलना होगा, वो आहार खाने पीने में प्रतिबंध करना होगा, जिससे वायु विक़ार पैदा हो, यूरिक एसिड बनना रुके, आप के पेट में आमदोष बनना रोकना होगा, टूटे-फूटे प्रोटीन की मरमम्त करके,  रक्त संचालन हो कर ऑक्सीजन की आपूर्ति कर के, उत्सर्जन मार्गो को ऊर्जा वान बना कर उसको क्रियान्वयन बनाना होगा. जिससे आपके शरीर में जमा वायु दोष निकल सकें. मासपेशीय में लचीलापन आकर फिर से खोया विश्वास, खोया स्वास्थ प्राप्त किया जा सकें.

सम्पर्क 

 91 98290 85951






सोमवार, 2 जुलाई 2018

कमर दर्द

कमर दर्द आजकल आम बात हो गई, अनियमित आहार-विहार, उठाने बैठने के तौर तरीकों के कारण, संतुलित आहार की कमी, और मानसिक दवाब के कारण कमर दर्द लाइलाज होता जा रहा है, जहा देखो, कमर दर्द के कारणों को जाने बिना आजकल विज्ञापनों में मालिश के तेल, बाम, स्प्रे, और लोशन उपलब्ध प्रलोभन के साथ दिखाई देते हैं,
कमर दर्द हर व्यक्ति के व्यक्तिगत कारण भिन्नता के साथ जीवनशैली में अपनी मानसिक समस्या संलग्न दोगुनी हो जाती है, इस बीमारी को छोटी मान के दर्द लिए इन्सान घूमता रहता है, अक्सर रोज दर्द निवारक गोलियां खाता रहता है, बीमारी अपना विस्तार करती रहती, इस बीमारी से व्यक्ति को मरने का खतरा नहीं रहता, परन्तु अपनी जीवनशैली में कष्टदायक जीना पड़ता है, जब बीमारी निकलती या हटती नही देखता तो, अखबारों, पत्र-पत्रिकाओं, इलेक्ट्रिक विज्ञापनों में आकर्षण होकर देशी दवाई इस्तेमाल करने लगता है, इन बाजार विज्ञापनों, से दवाई मंगा कर खाने से बीमारी हटने की बजाय बढ़ जाती है, रक्त में श्वेत कण की वृद्धि होने से एक नई परेशानी हो जाती है, फिर गंभीर अवस्था होने से कमर दर्द, पीठ दर्द से व्यक्ति पुरुष हो या महिलाओं अपने दैनिक कार्यक्रम में खिन्नता होती है,
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कमर दर्द के कारण -
पुरुषों में,
पुरुषों में अपने कार्य दिवस में लगातार टेबुल-कुर्सी पर बैठने के कारण, ट्रक, ट्रेक्टर, मोटर गाडी, सिलाई मशीन, कम्पुटर कार्य, और लगातार 90 डिग्री के कोण में बैठने के कारण, कमर की रक्त संचरण अवस्था में ऑक्सीजन पहुँचाने में बाधा आती है,

महिलाओं में
महिलाओं में कमर दर्द के पुरुषों के मुकाबले दोगुने कारण होते है, एक अतिरिक्त कारण गर्भाशय होता है. महिलाएं भी अपने कार्य दिवस में लगातार टेबुल-कुर्सी पर बैठने के कारण, झाड़ू निकाल के कारण, क्यों की सुबह के वक्त रात भर सोए होना सुबह उठते ही 90 डिग्री में झुक कर घर का कचरा निकलना, मोटर गाडी, सिलाई मशीन, कम्पुटर कार्य, और लगातार 90 डिग्री के कोण में बैठने के कारण, कमर की रक्त संचरण अवस्था में ऑक्सीजन पहुँचाने में बाधा आती है,

सायटिका के कारण
महिला और पुरुषों में सायटिका के कारण भी कमर दर्द होता है,

चोट-मोच के कारण
बहुत लोगो में घटना-दुर्घटना के वजह से भी कमर दर्द होता है.

निवारणार्थ - उपचार
एक चिकित्सक को कमर दर्द कर गहन जाँच के बाद ही उपचार सही होता है, सही सही कारणों को बताना व् जानना जरूरी है, ऊपरी मालिश, गर्म सेक या सिकाई, लेप के साथ साथ पाचनक्रिया को उत्तम बनाकर ही उपचार करना चाहिएं, बीमारी पुरानी होने के कारण कमर में रक्त संचरण को सुचारु करके, आहार में धमनियों को, मासपेशीय में मृत प्रोटीन कोशिकाओं के मरम्मत करनेवाले पूरक आहार का लेना जरूरी होता है, इस प्रकार आप उपचार कराए तो आप को अवश्य कमर में लचीलापन लाकर चैन से जी सकते है.
09829085951 

रविवार, 1 जुलाई 2018

डायबिटीज में जामुन के फायदे

जामुन 

जामुन "आम के आम गुठलियों के दाम' चरितार्थ करता एक वर्षा ऋतू के आगमन काल का फल होता है, जामुन के फल को जामुन भी कहा जाता वैसे इसके वृक्ष को, पेड़ को भी जामुन के नाम से संबोधन किया जाता है, अर्थात पेड़ व् फल दोनों को एक ही नाम से जाना जाता है, और तीसरी मजेदार बात ये है की इसका रंग भी जामुनिया नाम से प्रचलित हैं, जो बैंगनी रंग के होते है,  जामुन वृक्ष पूरे भारत भर में होता हैं, इस कच्चे फल हरे रंग के होते है, पकने पर जामुनिया, बैंगनी रंग के होते हैं. 
औषधीय उपयोग में इसके फल, मग्ज, ( बीज ) और पत्र काम में लिए जाते है. 
जामुन पुर्रिषविर्ज्निय अर्थात मल निष्कासन सरलता से करता है, मूत्रसंग्रहणीय यानी बहुमूत्र में गुणकारी होता है, ग्राही, वातकार, तथा कफ-पितहर है, जामुन की कोपले वमन रोकने वाला होती है, 
फल खाने के उपरांत इसके मग्ज को संग्रह किया जाता है, जामुन फल पाचन व् थोडासा स्तम्भन कारक है. 
मधुमेह ( डायबिटीज़ ) में जब यकृत की क्रिया बिगड़ जाती है तो इस फल के चूर्ण के खाने से यकृत की क्रिया सुधरती है, ये शरीर में शर्करा को पचाने में सहायता करता है, जामुन फल का सिरप व् सिरका भी बाजार में मिलता हैं. पुराने अतिसार में जामुन फल मग्ज, आम की गुठली का मग्ज को व्  घी में सेकी हुई जौहरडे का चूर्ण देने से आराम आता हैं. 
बहुमूत्र व् मधुमेह ( डायबिटीज़ ) में इस फल के चूर्ण को सेवन करने से आरामदायक स्थिति में जिया जाता है.