मंगलवार, 30 अक्तूबर 2018

गुड़ - मीठा गुड़

शनिवार, 27 अक्तूबर 2018

बच्चो का आहार

बच्चा एक कच्ची मिट्टी के घड़े के समान होती है उसको जैसी मिट्टी और सांचे में ढालोगे वैसे उसका निर्माण हो जाएगा, बचपन में खाने पानी की डाली गया आदत जिंदगी भर बनी रहती है. बच्चे के जीवन में खाने पीने की अच्छी आदत डालने पर उसके स्वस्थ जीवन की आधार शिला रखते है, निरंतर बच्चों के शरीर व् बुद्धि का वृद्धि व् विकास होता रहता है. दिन प्रतिदिन शारीरिक विकास-वृद्धि से साथ पर्यावरण में गतिविधियों के लिए पर्याप्त संतुलित ऊर्जा का मिलना जरूरी है. जिसमे बहुत पोषक तत्व की आवश्यकता होती है,

जन्म से छ माह के बच्चों को माता का दूध जरूरी होता है, छ माह बाद पूरक आहार देना शुरू कर देना चाहिए, जिसमे माइक्रो, व् मेक्रो [ शुक्ष्म और दीर्घ पोषक तत्व ] नुट्रिशन इन दोनों की आवश्यकता होती है.

माइक्रोन्यूट्रीएन्ट्स विटामिन
बच्चों के शरीर में किसी विटामिन की कमी से स्वास्थ की समस्या हो सकती है, विकास प्रभावित हो सकता है.
विटामिन A -
आँखो की रोशनी के लिए आवश्यक है,
मिलने के स्रोत
गाजर, मेथी, शरकन्द, हरी पत्तेदार सब्ज़ियाँ, टमाटर, पत्तागोभी और मछली का तेल.

विटामिन B कॉम्प्लेक्स -
चयापचय क्रिया दुरुस्त रखता है, शरीर की प्रक्रिया के लिए जरूरी होता है।
मिलने के स्रोत--
साबुत अनाज, अंडा, दूध, दही, मछली, हरी पत्तेदार सब्जी, फलिया,

विटामिन C
शरीर को सुरक्षा प्रदान करना बीमारियों से बचना, बाल व् दांतो के जड़ों को मजबूत बनाना।
मिलने के स्रोत - संतरा, मौसम्बी, आवला, टमाटर, स्ट्रॉबरी, खरबूजा, निम्बू ।

विटामिन D
हड्डियों को मजबूत करता है,तंत्रिका तंत्र को मजबूत करता है.
मिलने का स्रोत - दूध, अंडे, छाछ, दही, चिकन, मछली, और सूर्य की धुप से।

विटामिन E
एलर्जी, हृदय रोग व् कैंसर की रोकथाम करता है.
मिलने का स्रोत - पपीता, कद्दू, अखरोट और बादाम।

विटामिन  K
रक्त का थक्का बनने में उपयोगी, हड्डियों को मजबूत बनता है.
पालक, मेथी, पत्तागोभी, फूलगोबी हरी पत्तेदार सब्जी से।

खनिज लौह तत्व -
लौह तत्व शरीर में स्वस्थ रक्त बनाने में सहायता करता है. जो रक्त कोशिका तक ऑक्सीजन ले जाने में सहायता करता है
मिलने का स्रोत -
फलिया, साबुत अनाज, सूखे मेंवे .

कैल्सियम
बच्चों के लम्बाई बढ़ाने में सहायक होता है, कैल्सियम की कमी से बच्चों में शारीरिक वृद्धि रुक जाती है, मासपेशियों के विकास में सहायक होता है।
मिलने का स्रोत-
दूध, दही, छाछ, पालक, मेथी,बथुआ।

पोटैशियम
शरीर अंग में व् कोशिकाओं कार्य प्रणाली करने में आवश्यक होता है.रक्तदाब  हृदय के सुचारु रूप से  करने में सहायक होता है.
मिलने के स्रोत-
आलू, केला, शकरकंद एवं वसा रहित दूध दही और छाछ में।

मैग्नीशियम
हृदय व् स्नायु तंत्र में मज़बूती बना ये रखने में,
 मिलने का स्रोत -
ब्राउन राइस, अनाज, बादाम, फलियों में

कार्बोहाड्रेड
प्रोटीन व् वसा का उपयोग करने में सहायता करता है, ऊर्जा देता है.
मिलने के स्रोत
चावल, अनाज, आलू, शकरकंद, सेव फल , चीकू

प्रोटीन
शरीर की कोशिकाओं के निर्माण में सहायता करता है, मासपेशीय मजबूत करता है. शरीर को संतुलित तंदुरुस्त बनाये रखता है.
मिलने के स्रोत-
दूध, दही, दाल, फलिया, मॉस मछली, सूखे मेवे इत्यादि।

वसा
शारीरिक क्रिया में पोषक तत्वों के उपयोग में सहायक
मिलने के स्रोत-
दूध, दही, घी, सूखे मेवे, और मॉस मछली में

जिंक
याददास्त सुधरने में, इम्युनि सिस्टम को मजबूत करने में, बीमारियों से बचाने में
मिलने के स्रोत -
साबुत अनाज, फलिया, दाल और सूखे मेवे में 

शुक्रवार, 26 अक्तूबर 2018

दुर्बलता

ऊर्जा की कमी
बचपन में प्रोटीन ऊर्जा की कमी से बच्चों का कमजोर होना सामान्य बात है, जिससे शारीरिक क्रिया शक्ति कमजोर हो जाती है, साथ ही पाचन शक्ति भी कमजोर हो जाती है, जिससे बच्चा कुपोषित हो जाता है, फिर खाना हजम भी नहीं होता, जुखाम बढ़ने की प्रवृत्ति हो जाती है. बच्चा मीठा खाना ज्यादातर पसंद करता है, मीठा भोजन शरीर में खमीरा उत्त्पन करता है, बच्चों में फिर चिड़चिड़ापन होना शुरू होता है. फिर कार्बोहाड्रेड खाने की ज़िद भी करता है, बच्चों को रोता देख उसको चुप करने की मांग पूरा करते है. बदलते मौसम में बीमार हो जाते है. सर्दी में गर्म जल पिने की चाहत होती है, ठंडा पानी अच्छा नहीं लगता है,

दिमाग से तेज हो सकते पर शारीरिक गठन से कमजोर और वाचाल प्रवर्ती के हो जाते है, पढ़ाई में मन नहीं लगता, पढ़ा हुआ याद नहीं रहता, रूठना, शिकायत करना का स्वभाव हो जाता है. स्नायुतंत्र कमजोर हो जाता है, अकेले रहने में डर लगता है, जरा जरा सी बात पर चिढ़ता है, मासपेशिया दुर्बल हो जाती है, बुद्धि तीक्ष्ण होती पर अवसर लाभ पर डर भय के कारण पलायन होने की प्रवृत्ति हो जाती है, आत्म विश्वास कमजोर हो जाता है, जिसके कारण हर कार्य जल्दबाजी से करता है, भोजन जल्दी जल्दी करता फिर भोजन पचता नहीं है, मीठा अत्यधिक खाने से पेट में जंतु-कीड़े पड़ जाते जिसके कारण खाया पीया अंग नहीं लगता, अतिसंवेदनशील हो जाता है, दुर्बल स्मरण शक्ति होने पर भ्रामक जीवन हो जाता जिससे निर्णय लेने में चूक भी करता है.

बच्चा हो या बड़ा सभी ऊर्जा की कमी वालो को गहरी नींद का अभाव पाया जाता है, मूत्र त्याग में देरी होती है, मल त्याग में अनिश्चितता कभी कब्ज, कभी दस्त भी हो सकते, भोजन खाने में अरुचि, प्रोटीन आहार लेते ही नहीं, प्रोटीन की कमी से कारण शरीर में लचीलापन, आलस, खेल में अरुचि, वाचालता में आगे, तनावपूर्ण जीवन जीना, फिर जीवन भर वो कमजोर और उपरोक्त लक्षणों से ग्रसित अपना विकास करता हुआ हमेशा एक निर्बल, कमजोर व्यक्तित्व जीवन जीता है.

अगर इस प्रकार से आप का बच्चा कमजोर / दुर्बल है तो आप उसे तंदुरुस्त बनाइये, हम से सम्पर्क कीजिये।
09829085951

सर्दी जुखाम


सर्दी जुखाम अक्सर छोटे बच्चों को अधिक होता है, साल भर में एक बार करीब करीब बड़े व्यक्तयो को भी हो जाता है, तो सामान्य बात होती है,
कमजोर या दुर्बल जीवन शक्ति की वजह से कुछ लोगो को बारे बार ये बीमारी होती है. मौसम के बदलाव के साथ साथ ये बीमारी प्रकोप के रुप में उभर कर सामने आती है, साधारण सी लगने वाली बीमारी मनुष्य को बहुत परेशान करती है, दुर्बल जीवन शक्ति वाले अक्सर जुखाम से जड़े नजर आते रहते है.

आमतौर ज़ुखाम को आधुनिक विज्ञान से नैसोफेरिंजाइटिस, राइनोफेरिंजाइटिस, अत्यधिक नज़ला या ज़ुकाम के नाम से भी जाना जाता है, यह ऊपरी श्वसन तंत्र का आसानी से फैलने वाला संक्रामक रोग है जो अधिकांशतः नासिका को प्रभावित करता है.  इसके लक्षणों में ख़ासी, गले की खराश, नाक से स्राव (राइनोरिया) और ज्वर होते है. आरम्भ में स्वस्थ व्यक्ति को सात से दस दिन के भीतर घरेलू उपचार से ठीक हो जाते है. किसी किसी मनुष्य को जुखाम के लक्षण तीन-चार सप्ताह तक भी रह सकते हैं. आधुनिक विज्ञान के अनुसार ऐसे दो सौ से अधिक वायरस होते हैं जो सामान्य ज़ुकाम का कारण बन सकते हैं, इसमें राइनोवायरस इसका सबसे आम कारण होता है.

आधुनिक विज्ञान में नाक, साइनस, गले या कंठ नली (ऊपरी श्वसन तंत्र का संक्रमण (URI या URTI) का तीव्र संक्रमण शरीर के उन अंगों द्वारा वर्गीकृत किया गया है जो इससे सबसे अधिक प्रभावित करते हैं, सामान्य ज़ुकाम मुख्य रूप से नासिका, फेरिंजाइटिस, श्वासनलिका को और साइनोसाइटिस, साइनस को प्रभावित करता है. यह लक्षण स्वयं वायरस द्वारा ऊतकों को नष्ट किए जाने से नहीं अपितु संक्रमण के प्रति हमारी जीवनी शक्ति की कमज़ोरी के कारण उत्पन्न होते हैं,

आयुर्वेदिक शास्त्रों के अनुसार मौसम बदलाव के साथ हमारे जीवन शैली का बहुत प्रभाव होता है. जिसमे खाने पीने की असावधानी के कारण बार बार जुखाम होना पाया जाता है, तला, खट्टा, ठंडा, बासी, वो भोजन पदार्थ जिसमे शीतलता बर्धन गुण होते, कफ को बढ़ाने वाले आहार, धूल धुआँ भी जुखाम को ज्यादा प्रभावित करता है.

गुरुवार, 25 अक्तूबर 2018

पाम आइल से नुकसान


वसा दो प्रकार की होती है जिसको पोषण की भाषा में सतृप्त और असतृप्त वसा के रूप में विश्लेषित किया जाता है, अर्थात जो वसा सरलता से हमारे शरीर में जमा / संचय हो जाती उसको सतृप्त वसा कहते और जो अपने शरीर में वो वसा जो संचय नहीं हो पाती उसको असतृप्त वसा के रूप में पोषण विज्ञानं में परिभाषित किया गया है.

पाम तेल, पाम ऑयल जो खुले तौर से कम बिकता है, गरीबी रेखा के नीचे जीने वाले बड़े महानगरों में खरीदते देखे गए है, गौण रूप से आज भारत भर में सभी के घरों में अप्रत्यक्ष खाने में काम आ रहा है, आप चौकन्ने हो सकते जी हा, सभी के घरों में अन चाहा इस खतरनाक तेल का सेवन किया जाता है, यह हृदय रोग के साथ गुर्दो के रोगों को बढ़ाने वाला होता है,

पाम ऑयल में उच्च संतृप्त वसा की मात्रा दूसरे तेलों से कहीं ज्यादा होती है, इसकी मिलावट वाले तेल को रोज खाने से दिल की बीमारियों की आशंका कई गुना बढ़ जाती है, हृदय, यकृत और गुर्दा पर भी बुरा असर पड़ता है, साथ साथ धीमीगति से मोटापा भी बढ़ता है, कुलमिलाकर यह स्वास्थ के लिए भी हानिकारक है, कुछ साल पहले तक पाम ऑयल के इस्तेमाल पर सरकार ने प्रतिबंध लगा रखा था, लोगों को खाना पकाने के लिए शुद्ध सरसों, सोयाबीन, सूरजमुखी, कैनुला  के तेल का प्रयोग करना चाहिए, क्योंकि इसमें असंतृप्त वसा होती है, जो आपके दिल दिमाग के लिए ज्यादा बेहतर है..

गौण रूप या अज्ञात रूप के आप इस पाम ऑयल को कैसे सेवन करते है,
प्रथम तेलों में एक मिलावट के रूप में शहरों में बिकता है,
दूसरा सबसे बड़ा चौंकाने वाला ये है की जितने भी पाउच बंद जो नाश्ता, बिस्किट, नमकीन, वेफर्स और कुरकुरे आते उन सभी खाद्य उत्पादन में [ बीकाजी, पार्ले, पतंजलि, मिराज, ब्रिटियानिया जैसे सब उत्पादन में ] साफ साफ लिखा होता है वनस्पति तेल से निर्मित यहां तक बीकाजी नमकीन वाले ने तो पाम आयल के अलावा बिनोला [ कपासिया ] एक या दोनों मे से कोई भी उपयोग किया हो सकता है.

सावधान रहिए कोई खाद्य पदार्थ खरीदने से पहले जाचे, अगर आप बीमार रहते तो यह सावधानी आप की है अन्यथा ये धीमा जहर आप को कब कितना नुकसान पहुँचता ये जानने के बाद देर हो चुकी होगी।

शुक्रवार, 10 अगस्त 2018

दाम्पत्य जीवन में गुस्से व नशा के प्रभाव

गुस्सा या नशा के प्रभाव से दाम्पत्य जीवन में अपनी ख़ुशी का अभाव पाया जाता है, गुस्सा और नशा दोनों विवेक खो देते है. हर्ष उल्लास जीवन से दूर हो जाते है, अपने जीवन साथी से नित्य क्लेश उत्पन्न होता है. जीवन साथी से मैथुन में असफलता रहती है, जिससे दैनिक रोज़मर्रा के कार्यो में कठिनाइयाँ आती है, हर वक्त बदले की भावना रहती है, जिस कारण से परिवार में तनाव रहता है.

युगल मैथुन में क्रोध व  नशा एक बाधा होती ये करीब-करीब पुरुष वर्ग में प्राय: अधिक देखने को मिलता, महिलाओं में नाम मात्र .भारतीय दर्शन शास्त्र प्रति एक जोड़े को लक्ष्मी-नारायण में नजर आते उन में कभी शिव-पार्वती, के साथ ब्रह्मा-सरस्वती का जोड़ा भी देखा जाता, बीमारी के तौर पर अंदर की घुटन जो जीवन साथी के गुस्से या नशा के कारण  मानसिक संताप को भुगतना या पथभृष्ट होना पाया जाता.

बचाव, उपाय
प्राणायाम सबसे बेहतर उपाय चिकित्सा होती है, गुस्सा, क्रोध और नशा दोनों नियंत्रण में आते है.
                  निम्नलिखित फलो में कुछ योगिक यौन स्वास्थ्य में सुधारने उनके उपयोग के साथ प्रेम से आपस में उनका खाने में एक दूसरे को टुकड़ो-टुकड़ो में खिलाने से आप को पोषण के साथ पारिवारिक प्रेम भी बढ़ता है.
अंगूर, अमरुद, सेव, पपीता, अनार, चीकू, चेरी, और कीवी जैसे फलो का सेवन ज़रूर करना चाहिए ।

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गुरुवार, 9 अगस्त 2018

बदन दर्द

मांसपेशिया में दर्द के साथ साथ सूजन
आजकल की जीवन शैली में कम्प्यूटर पर बैठने से व्यक्ति के गर्दन व कंधे का दर्द, बदन दर्द, मांसपेशीय दर्द और हाथों के अंगुलियो में दर्द बढ़ता दिखाई दे रहा है. मांसपेशीय और जोड़ों का दर्द के साथ हाथों की अंगुलियों में सूजन होने पर कुछ लोग चिकित्सक के बिना परामर्श से दर्द निवारक गोली ले लेते जो हानि कारक हो सकता है. क्योंकि सभी व्यक्तियों के शारीरिक व् मानसिक बनावट में भिन्नता हो सकती है. किसी का हृदय कमजोर हो सकता है, तो किसी का गुर्दा या यकृत कमजोर होने से उस दर्द निवारक दवा खाने से शरीर में अधिक नुकसान होने की संभावना हो सकती है. मधुमेह, रक्तचाप भी जीवनशैली के रोग होते है तो चिकित्सक की सलाह से ही दर्द निवारक गोली का उपयोग लेना चाहिए।

मांसपेशीय दर्द, गठिया की बीमारी में तब्दील हो जाता है.
जोड़ों में दर्द, जोड़ों में सूजन, सूजन स्थानों पर लालिमा दिखाई देती है, सुबह सुबह उठने के समय में शरीर में अकड़न, ऐठन, एड़ी में दर्द बढ़ता जाता है, चलने-फिरने में, उठाने-बैठने में तकलीफ़ महसूस होती है,
भारतीय भाषा मे गठिया वात विक़ार दोष मे गिना जाता है, वात विक़ार करीब 84 प्रकार के बताए गए है॰ 

आहार - विहार
जीवनशैली के पर्यावरण से गहरा संबंध होता है॰ आजकल के अल्प आहार जो बिनोला और पाम तैल से निर्मित होते है, इन तेलीय भोजन से वजन भी बढ़ जाता है॰ जिससे मोटापा भी हो जाता है ॰ जिससे रक्त प्रवाह मे बाधा उत्पन्न होता है, जब रक्त प्रवाह धीमा होगा तो शरीर मे ऑक्सीजन की पूर्ति रुक जाती है॰ ऑक्सीजन के पर्याप्त के अभाव से आलस आना, उबासियों / जंभाई आना शुरू हो जाता है॰


बुधवार, 18 जुलाई 2018

वृद्धावस्था में तनाव

मानव जीवन मे करीब 65 वर्ष बाद होने की शुरुआत तनाव से होती है, इस आयु में सामाजिक निर्भरता, पारिवारिक निर्भरता बढ़ जाती है । क्यो की शारीरिक परिवर्तन के कारण समायोजन समस्याएं पैदा होती है,
 
1. शारीरिक परिवर्तनों से सम्बन्ध समायोजन समस्याएँ- 
65 वर्ष में बुढ़ापा होता है, इस बुढ़ापे में कई तरह के परिवर्तन होना शुरू हो जाता है, इस उम्र में शारीरिक व मानसिक शक्ति कमजोर हो जाती है, पाचन शक्ति कमजोर हो जाती है, मुँह में दाँत, दाढ़ गिर जाते इस कारण भोजन चबाने में परेशानी आती है, भोजन स्वाद में भी समस्या आती है । साथ ही साथ आँखों में रोशनी कमजोर होने से दिखने में समस्या आती है । कानों में सुनने की क्षमता भी कमजोर हो जाती है, गंध सुगंध, सूंघने में समस्याओं का सामना करना पड़ता है, इस प्रकार प्रत्यक्ष परिवर्तन देखे जा सकते है । इन शारीरिक परिवर्तनों के कारण इनका जीवन समायोजन में कठिनाइयों से गुजरना पड़ता है, इस समय कोई नई मांग को पूरा करना कठिन होता है । स्वयं को असहाय होने के विचारों में जीवन जीना पड़ता है ।

2. आर्थिक सुरक्षा से से सम्बन्ध समायोजन
इस आयु से मासिक आय मिलना बंद हो जाता है, नौकरी-पेशा हाथ से निकल जाता है, संतुलित जीवन जीने के लिए शारीरिक व मानसिक स्वस्थ रखने के लिए पौष्टिक संतुलित भोजन खरीदने के लिए पर्याप्त रुपया भी नही होता है । शारीरिक बीमारी के लिए रुपये की आवश्यकता भी होती है, इन आवश्यकताओं के लिए धन खर्च करने की आवश्यकता भी पड़ती है । धन की कमी असहाय होने को मजबूर करता है ।

3. जीवन साथी के समायोजन की समस्या
पारिवारिक जीवन मे अब नई नई समस्याएँ आने लगती है, अवकाश प्राप्ति होने के कारण अधिकतर समय घर मे ही गुजरना पड़ता है, जीवन साथी से अगर मधुर सम्बन्ध हो तो ठीक नही तो संघर्ष शुरू हो जाता है, सतत अप्रिय वाणी के बोल से दिन बिताने कठिन हो जाता है । किसी किसी के अपने जीवन साथी के बिछड़ जाने से दिन रात अलगाववादी एवं अकेलापन के भाव विकसित हो जाते है, आजकल पुत्रवधुओं की सेवा का अभाव होता जा रहा है ।

4. सन्तान के साथ कि समायोजन की समस्याएं
इस वृद्धावस्था में अपने औलादों से समायोजन करने में काफी समस्या आती है, आधुनिक संस्कृति के कारण सन्तानों की सामाजिक मनोवृति रास नही आती, वृद्ध व्यक्ति के पुराने विचारों और सन्तानों के आधुनिक विचारों के कारण सामाजिक मान्यताओं,, सामाजिक मूल्यों में टकराव आते है , जिसके कारण इन वृद्ध नागरिकों में अंसतोष ज्यादा उत्पन्न होता है, की संतान उनके ऊपर आश्रित होते और आज ये सन्तानों पर अब आश्रित रहना पड़ता है ।अब इन्हें सन्तानों पर आर्थिक व शारीरिक निर्भरता रहनी पड़ती है । इस बातों के कारण असन्तोष ज्यादा उत्पन्न होता है।

5. अर्थोपार्जन की समस्या 
कुछ वृद्ध लोग अपने अर्थोपार्जन के लिए कोशिश करते पर सन्तान इस विषय का विरोध करते है, इन को रोका और टोका जाता है, कुछ सामाजिक व्यक्ति भी अर्थोपार्जन में इनकार करते है, तो ग्लानि भी उत्पन्न होती है ।

6. शारीरिक मानसिक असंतुलन
इस उम्र में शारीरिक दोष उत्पन्न होने से मानसिक विचारों में कुंठाएँ पैदा होती है, मानसिक स्वास्थ्य में गिरावट होने पर शारीरिक क्रिया करने में परेशानियों का सामना करना पड़ता है ।

बुधवार, 11 जुलाई 2018

Psycho Diet

Make changes in lifestyle and stay healthy with your body.

The following types of facilities are now available in your Rajsmand city.

Determine the appointment first.

Counselling Psychologists in Rajsamand 

Diet Planning in Rajsamand


जीवन शैली में बदलाव करें और अपने शरीर के साथ स्वस्थ रहें।
आपके राजसमंद शहर में निम्नलिखित प्रकार की सुविधाएँ उपलब्ध हैं।
पहले नियुक्ति का निर्धारण करें।
राजसमंद में परामर्श मनोवैज्ञानिक
राजसमंद में संतुलित आहार योजना

शीघ्रपतन का तनाव

धरती पर सभी प्रकार के जीवों में चार गुण समांतर चलते है, आहार, निंद्रा, मैथुन और भय, इन चार का मानव जीवन तो क्या सभी प्राणियों को संतुलित समांतर आवश्यकता पड़ती है,

मानव जीवन में दाम्पत्य जीवनशैली में नर नारी के मिलने से ही आगे संसार की वृद्धि होती है, इस शिव-शक्ति के मिलन का माना जाता है,
शीघ्र पतन 
शीघ्र शब्द का अर्थ होता है, जल्दी होता है, और पतन का अर्थ नाश, समाप्त होना, अर्थात जल्दी समाप्त होना, जल्दी, खत्म होना, जल्दी पूर्ण हो जाना, शीघ्र पतन को चिकित्सा शब्द कोष में दाम्पत्य जीवन में मैथुन करते वक्त पुरुष का वीर्य पात [ वीर्य के स्खलन ] जल्दी हो जाना,  मैथुन के दौरान स्त्री सहवास में पुरुष की इच्छा के विरुद्ध उसका वीर्य अचानक स्खलित हो जाता है, पुरुष रोकना चाहे तो भी रोक नहीं पाते,  जिसके कारण महिला जीवन साथी को मैथुनरत में संतुष्ट नहीं होती जिसकी उसको आवश्यकता होती है. संतुष्टि और तृप्ति नही होने से स्त्री व् पुरुष दोनों में स्वभाविक एक तनाव उत्पन्न हो जाता है, फिर तनाव से मानसिक बीमारी भी हो जाती है,  ये तनाव पुरुष के असफल मैथुन की वजह से होता है, इस में स्त्री, नारी या महिला के कारण नहीं होता है.
मैथुन क्रिया का कोई नाप दंड नहीं होता, सभी व्यक्तियों के मानसिक, शारीरिक बल समांतर नहीं होते, सबसे भयंकर स्थिति तब होती की जब सम्भोग शुरू करते ही टाय टाय फिस्स, वैसे मैथुन कितनी देर होना चाहिए इसका कोई पैमाने नहीं होते है,
तनाव की उत्पति 
सम्भोग क्रिया शुरू करते ही वीर्य पात होना, वीर्य स्खलन होने पर एक मानसिक तनाव होना शुरू हो जाता है, की मैथुन, सम्भोग कितनी देर होना चाहिए, इस बात का तनाव हमेशा सताता है, समय से पहले सम्भोग में वीर्य पात होना इसलिए इस सम्भोग का समय कम ज्यादा का का तनावपूर्ण जीवन हो जाता है, की शीघ्र पतन से आत्म हीनभावना, असंतुष्टि, डर, नरात्मक भाव, अपने महिला जीवन साथी के साथ दोनों के सम्बन्धो में तनाव घिरे जीना रहना जीना पड़ता है,

उपचार परामर्श 
शारीरिक समस्या के लिए उपयुक्त निकटतम चिकित्सक को दिखाना चाहिए, मानसिक परेशानी के लिए मनोवैज्ञानिक से परामर्श की आवश्यकता होती है, निकटतम मनोवैज्ञानिक से परामर्श ले, आहार विशेषज्ञ से भी वीर्य के पतलापन हेतु परामर्श लेना चाहिए,


सहायतार्थ 
सशुल्क सेवा लाभ उपलब्ध है,

  Dietician, psychologist in Rajsamand district, Rajsthan

09829085951



मंगलवार, 10 जुलाई 2018

सन्तान प्राप्ति के लिए

सन्तान प्राप्ति के लिए शिवलिंगी 

शादी होने के बाद कई वर्षो तक सन्तान नहीं होने पर पारम्परिक देशी जड़ी-बूटी उपचार से उपचार किया जाता था, भारत में समाज पुरुष प्रधान होने से पहली एक पुत्र वारिस होने की आशा की जाती है, कन्या को एक पूजनीय मानी गयी है, यह कन्या पराया धन माना गया है. 
जडी-बूटी ज्यादातर पहाड़ी, देहाती और आदिवासी लोग ही इसके जानकार होते थे, अब इसमें भी कमी आई है. सन्तान नहीं होने पर "शिवलिंगी" बीज़ को व् उसके पत्तों को उपयोग में लिया जाता है, अब इन शिवलिंगी के जानकारी कुछेक आदिवासी जानते है, इसका वर्णन आयुर्वेदिक ग्रंथो में भी मिलता है. 
शिवलिंगी पहाड़ी भागों के खेतो के किनारे किनारे झाड़ियों पर वर्षायु लता के रूप में उगती है. इस के बीजो को देखने पर एक शिवलिंग बीज के दोनों तरफ देखते है. इस बीज के उपर शिवलिंग के समान दृश्य होने से इस बीज और पौधे को शिवलिंग ही कहते है. 

सन्तान हेतु उपयोग 
आदिवासी लोग इस पौधे के उपयोग के लिए निम्नप्रकार से सन्तान पाने के लिए अभ्यास करते है.
सन्तान हेतु उपयोग के लिए इस पौधे को एक दिन पूर्व इसकी पूजा करते है, और आने का निमंत्रण भी देते है, 
फिर दूसरे दिन इस जडी-बूटी को लाते है, फिर सन्तान हिन महिला को मासिक धर्म के चार दिन बाद शिवलिंगी के बीजो को, 5 बीज प्रतिदिन से, 5 से 25 दिन खिलाते है. जिससे गर्भ धारण की सम्भावना बढ़ जाती है, दंपति को जल्दी ही सन्तान प्राप्ति का सुख मिल जाता है, सन्तान विहीन दंपतियों के लिए वरदान साबित होती ये शिवलिंगी जडी-बूटी, कुछ आदिवासियों ने बताया की पीपल झटा, तुलसी, जियापोता, गुड, नागकेसर, के अनुपात में शिरपाक  करके भी इस शिवलिंगी का उपयोग करते है, 
शिवलिंगी को जादू-टोना, नजर लगना, ताबीज में भी जानकार लोग इसका उपयोग करते है. 





शनिवार, 7 जुलाई 2018

गठिया दर्द से बचाब

गठिया दर्द होने के अनेक कारण हो सकते है, 84 प्रकार की बादी में ये गठिया रोग भी शामिल है, गठिया रोग होने से बचाव किया जाए तो बुढ़ापे में राहत की जिंदगी हो सकती है. जिसमे मूल कारण पाचन दोष होता है, हमारा शरीर तीन प्रकार के तत्वों से बना होता है, कफ, पित और वायु, हमारे शरीर के दुर्बलता की अवस्था में वायु दोष के कारण ये रोग शरीर में प्रभावी होता है,  इसके निम्लिखित कारणों से आप बच सके तो उत्तम रहेगा.
1. आम दोष
हमारे भोजन से पेट में आम दोष उत्पन्न होता है, जिसके कारण ज्यादातर गुठनो दर्द, गठिया दर्द [ शरीर की हड्डियों में जोड़ों को गठिया भी कहा जाता है, ] होता है, जोड़ों में सभी के समांतर दर्द नहीं होता किसी के हाथों की अंगुलिया, किसी के कोहनियों के जोड़ों में दर्द, किसी के पैरों में गुटनो के दर्द से परेशानी होती है,


2. अधिक शारीरिक वजन होने से
अपना अतिरिक्त वजन को नियंत्रित करे, ज्यादा वजन हो तो उस वजन को कम किया जा सकता है.'वन नियंत्रण आते ही गठिया दर्द में आराम आ जायेगा.

3. गठिया में लुब्रीकेंट्स की कमी की वजह से
संतुलित वजन के साथ, कब्ज निवारक आहार ले, फायबर युक्त आहार ले, पानी पर्याप्त पीजिये .

4. अत्यधिक कार्य होने से
युवा अवस्थाओं भारी कार्य जैसे अधिक वजन उठाना, खेल मैदान में शारीरिक बल से खेल कार्य करना, उछलना, कूदना, भागदौड़ करना, जिम में अतिरिक खेल मेहनत करना. युवाओं को प्रशिक्षित अध्यापक या कोच की देख रेख खेल कार्यक्रम करना चाहिए

बचाव 
आम दोष से बचाब का मूल तरीका है की वायु वर्धक आहार नहीं खाए, बासी भोजन का उपयोग नहीं करे, आलू, उलद दाल, चना व् चने से बने व्यंजन, बैंगन, हरी मिर्च, पेट में गैस उत्पन्न करने वाले भोजन को अपने खाने में रोके, कब्ज करनेवाले आहार पर भी प्रतिबन्ध लगा ये, मैदा, मैदा से बने व्यंजन, चावल, भिन्डी, खट्टे भोजन, दही, दूध, तेज मिर्च-मसाला, और ठन्डे भोजन, ठंडा पानी से स्नान, ठंडा पानी इत्यादि.