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रविवार, 14 जनवरी 2024

समलैंगिक समस्या 15 - 23 - 89

समलैंगिक समस्या 15 - 23 - 89 

15 - 23 - 89 

प्रयोज्य 02 / 12  / 2023  सम्पर्क किया . 

कार्यभार - मेडिकल स्टोर 

आयु - 24 वर्ष  --

शादी - *****

समस्या - समलैंगिक 

पहली बार गुदा मैथुन - 7 वर्ष की आयु में 2007 अब तक लगातार 

प्रयोज्य की उस समय 07 वर्ष लगभग .

यौन शोषणकारी - 24 वर्ष का लड़का, अब तक दो लड़के के सम्पर्क में आया.

ठीक होने की असली आवाज दी .  

सोमवार, 24 अप्रैल 2023

बाल यौन शौषण समलैंगिक चिकित्सा

मनोवैज्ञानिक परामर्श चिकित्सा 
19-21,53 
प्रयोज्य 18 / 12 / 2021 सम्पर्क किया . 
कार्यभार - प्रायवेट शिक्षक 
आयु - 38 
भार - 92 किलो 
शादी - दो साल पूर्व शादी की परन्तु झगड़ालू और आलसी पत्नी मिली.
समस्या - समलैंगिक 
पहलीबार बार गुदा मैथुन - कक्षा 5 में पढता था तब .
प्रयोज्य की उस समय आय 9 से 10 वर्ष 
उसके रिश्तेदार के भाई ने जिसकी आयु 12 से 13 वर्ष . 
हस्त मैथुन कक्षा 9 से शुरू किया . 13-14 वर्ष की आयु में 3 से 4 बार दिन में . 
अब तक 15 व्यक्ति से गुदा मैथुन करवाया .  चार साल पहले तक समान आयु  के पसंद, परिस्थिति जन्य वेबसाइट से कम्पुटर से लोगों के सम्पर्क हुआ. उन लोगों से साथ सलग्न हुआ.passive प्रयोज्य का व्यक्तित्व चाकलेटी तरह का था .   
रिश्तेदारों से कुछ समय के लिए दूर रहा, इंटरनेट से दुरी . 

उपचार के दौरान 
आहार परिवर्तन से 
एक महीने में 12 किलो वजन कम हुआ .   

शुक्रवार, 9 दिसंबर 2022

बहला फुसलाकर कर समलैंगिक बाध्य जुनून कैसे बनाते और क्यों ?

 मानों या नहीं मानो ?

बच्चा या व्यक्ति अपने हाथ के नाखून दांतो से कुतरते है ।

बच्चा या व्यक्ति अपना अंगूठा चूसने लगे तो ।

तंबाकू सेवन करे, शराब सेवन करें, लिंग विपरित कपड़े पहने अन्य लत हो तो मनोवैज्ञानिक समस्या माना जाता है ।

लेकिन बाल यौन शौषण पीड़ित को दूसरे समलैंगिक व्यक्ति का लिंग चूचने का आदि बनाया जाए तो ये अच्छी बात मानते है आधुनिक काल के डाक्टर और उनके स्वास्थ मंत्री इसको बड़े चाव से कहते ये मैथुन अभिविन्यास है । 

क्यों ऐसा कहते ?

समलैंगिक व्यक्ति बहला फुसला कर बालक / किशोर को मुख मैथुन करवा, गुदा मैथुन करना इसकी आदत लग जाती तो बस बोल दिया ये कोई बीमारी नहीं ये तो मैथुन अभिविन्यास है ।

मैं कहता हूं जो लोग इस प्रकार से प्राकृतिक मानते है, कृपया अपने पुत्रों जो किशोर है उन बच्चों पर प्रयोग सिद्ध कीजिए तो आपकी बात फिर हम सुनेगे और सच दुनियां भी जान जाएगी की मैथुन अभिविन्यास प्राकृतिक होता है ? 

वापस प्रयोग करना चाहिए, तो ही पता चलेगा ।

बहला फुसलाकर कर समलैंगिक बाध्य जुनून कैसे बनाते और क्यों ?

इसका अध्ययन अनुसंधान होना चाहिए ।।

गुरुवार, 8 दिसंबर 2022

100 % में से 60 % बहुमत के कारण 40 % लोगों को मरने छोड़ दिया जाए ?

 समलैंगिकता व्यवहारवाद है ।

जब ये व्यवहार से सिखा का सकता तो व्यवहार वाद से भुलाया भी का सकता है ।। 

व्यवहारवादियों को भी सुनना चाहिए ।।

किसी बालक किशोर 12 से 14 साल के लड़के के साथ बाल यौन शौषण पीड़ित समलैंगिक बनाया जाए तो क्या उसका शौषण होना चाहिए ?

बाल यौन शौषण पीड़ित समलैंगिक बनता तो उसको क्या उसको वापस उस सदमे से बाहर नहीं आना चाहिए ? 

समलैंगिक बनने के कारणों को नहीं मानना और नही जानना चाहिए ? 

1. S D M 5 में समलैंगिकता को हटाने की प्रक्रिया क्या थी ?

2. कब कैसे निश्चित किया की DSM 5 से समलैंगिकता नैदानिक हटाया जाए, कैसे हुआ ?

3. माना की 100 डॉक्टर साहब समित सदस्य है तो उस में से कितने डॉक्टर ने भाग लिया था ?

4. माना की 100 मेरे 60 % वोटिंग समलैंगिकता उपचार हटाने में 40 % समलैंगिकता नहीं हटाने में तो क्या 40 % रोगी को मार दिया जाए ? 

5. 60 % संख्या बल की भलाई, आनंद के दूसरो की बलि दी जाए ?

6. कोई या कुछ व्यक्ति विवादित हो सकता है या मानसिक बीमारी से पीड़ित हो सकता है क्योंकि उनकी कामुकता, और उस स्थिति का इलाज नहीं किया जा सकता ?

7. बाल यौन शौषण से समलैंगिक बनते की नहीं ये प्रयोग अपने पुत्र या परिवार के सदस्य के साथ करके देख लेना चाहिए, सच सामने आ जाएगा ।

https://en-m-wikipedia-org.translate.goog/wiki/Classification_of_mental_disorders?_x_tr_sl=en&_x_tr_tl=hi&_x_tr_hl=hi&_x_tr_pto=tc,sc

मंगलवार, 18 जनवरी 2022

कैसे 13 वर्ष की आयु मे बाल यौन शौषण हुआ ?

प्रयोज्य के परामर्श लेने की दिनांक - 02 / 06 / 21 

प्रयोज्य का नाम - गोपनियता के कारण 44092621

प्रयोज्य की आयु - 27 वर्ष 

प्रयोज्य का व्यवसाय - खेती 

प्रयोज्य की समस्या - समलैंगिक समस्या 

निदान - प्रयोज्य को समलैंगिक समस्या थी, समान लड़को को देख आकर्षण होता था । महिलाओ मे कोई रुचि नहीं थी और कोई आकर्षण नहीं होता था । 13 वर्ष की आयु मे कक्षा 7 मे पढ़ता था, उस समय उससे पाँच वर्ष बड़ा दोस्त बलपूर्वक गुदा मैथुन किया, उसके बाद लड़को को देख कर गुदा मैथुन कराने का विचार आता है। एक ही लड़के के संपर्क मे आया । समलैंगिकता का ज्ञान इंटर नेट से पता चला । मैने हस्त मैथुन दोस्त से देख कर शुरू किया था । मन मे लगातार चिंता होती थी, की लोग मेरे बारे मे बाते करते होंगे,  लोग मेरे बारे मे ही विचार करते होंगे । मेरे माता पिता का क्या होगा, बीबी कैसे रहेगी । 

निष्कर्ष - प्रयोज्य की बाते संदेह व्यक्त करती थी क्योकि प्रयोज्य ऑनलाइन परामर्श लेने से पहले मुझे से जिस प्रकार बात की तभी संदेह हो गया था, क्योकि प्रयोज्य मे सॉफ्ट वेयर की सहायता से आवाज बदल कर वार्तालाप की तो मैने पूछा आपकी आवाज बदली हुई क्यो है तो वो बोला मेरी आवाज पतली है। फिर ऑनलाइन परामर्श लेने के लिए आधा शुल्क जमा कराया और बोला मै गूंगा हु इसलिए आप मुझे फोन के एसएमएस जरिये चेटिंग करते ऑनलाइन परामर्श दीजिए, मैने साफ साफ मना कर दिया था आप आपका रुपया वापस लीजिए इस प्रकार की ऑनलाइन परमर्श मेरे वश का नहीं । उसके बार बार आग्रह के कारण मैने वाट्स एप पर sms कराने को बोला और उसमे एक शपथ देने को बोला था,  ये शपथ भर के भेजो तो ही आपको sms किया जाएगा । उसको बार बार लिखता रहा आप मेरे साथ छल कपट कर रहे है, आपके एकाउंट नंबर दो और रुपया वापस लो । नहीं माने जाने पर एक शपथ निम्न लिखवाई - 

मै vanktesh .........................इस बात की शपथ लेता हूँ की मेरे मोबाईल फोन नंबर 7570@@@@@0 ................के वाट्स एप नंबर एप पर ऑनलाइन परामर्श फोन की बजाय वाट्स एप चेटिंग की मांग मैने स्वयं  [ खुद ] ने की, वाट्स एप चेटिंग से जो लाभ हानी होगी उसका मै स्वयं ज़िम्मेवार होऊंगा, भविष्य मे किसी प्रकार से धोखाधड़ी या भारतीय कानून, या संघीय / प्रांतीय कानून करवाही नहीं करूंगा, इस मामले मे समलैंगिक से विषमलैंगिक होने / बनाने के ऑनलाइन परामर्श दाता श्री रघुनाथ सिंह राणावत निर्दोष रहेंगे । 

वाट्स एप पर sms का सुझाव मेरा खुद का है, मै इस बात की शपथ लेता हूँ की मै जन्म से गूंगा हूँ । गूंगा होने के कारण मेरे स्वयं के प्रस्ताव से वाट्स एप नंबर पर SMS से ऑनलाइन काउन्सलिन्ग परामर्श ले रहा हूँ, इसमे कोई भी जोखिम का मै स्वयं भागीदार रहूँगा । 

निष्कर्ष  - मुझे संदेह हो चुका था, क्योकि इसी नंबर से पूर्व मे बदली पतली आवाज मे मुझ से बात हुई थी, ये बात मैने उसको बताई की आप पहले बोलना जानते थे, अचानक गूंगे कैसे हुए, फिर भी बोला जन्म से गूंगा हूँ, और पूर्व फोन वार्तालाप जो की गई, उसकी काल रिकार्डिंग उसको भेजी तो प्रयोज्य ने बताया की मेरे फोन से मेरे दोस्त ने बात की थी । फोन सिम का लोकेशन उत्तर प्रदेश ऑनलाइन दिख रहा था, उसको पुछने पर बताया की वो नागपुर से बोल रहा है । इस प्रकार धोखा से परामर्श लेना चाहा जो उसका तरीका गलत था, दूसरे नंबर पर फोन करने पर रात्री मे फोन लगता पर फोन प्राप्ति उठा नहीं रहा था, इस प्रकार से तीन ऑनलाइन SMS परामर्श लिया, फिर उसको बार बार बोला आपके रुपए वापस लेलों परंतु रुपए वापस नहीं लिया । शायद अब उसने मुझे ब्लॉक कर दिया । 

सामाजिक संदेश - व्यक्ति को चेतना अवस्था मे रहना चाहिए, चतुर और चालक घोखेबाज अपने नाटकीय तरीको से छल कपट से ठग सकते है । 

ऑनलाइन परामर्श दाता 

वाट्स एप - 091 98290 85951 

रविवार, 16 जनवरी 2022

कैसे बाल यौन शौषण के कारण समलैंगिक सा/ उभयलिंगी बना ?

प्रयोज्य के परामर्श की दिनांक - 22 / 05 / 21  [ अपडेट 15 / 01 /22 ]

प्रयोज्य का नाम -  गोपनियता के कारण 42521 

प्रयोज्य की आयु - 23 वर्ष 

प्रयोज्य की शिक्षा - BA  तृतीय वर्ष 

प्रयोज्य की वैवाहिक स्थिति - कुवारा [ फिर 07 / 06 / 21 को शादी शुदा होना बताया, एक दो वर्ष का लड़का ] 

प्रयोज्य की समस्या - समलैंगिक दिक्कत 

निदान - प्रयोज्य को समलैंगिक आकर्षण होता और विषम लैंगिक मे आकर्षण नहीं होता ।  14 वर्ष की आयु मे 20 साल के एक व्यक्ति ने प्रयोज्य के साथ गुदा मैथुन किया, तब से गुदा मैथुन करने की आदत हो गई थी। प्रयोज्य के मामा के लड़के ने 14 की आयु मे हस्त मैथुन करना सिखाया, हस्त मैथुन की आदत के कारण दिन मे दो तीन बार हस्त मैथुन कर लेता है, जब भी हस्त मैथुन करता है तो समलैंगिक को याद करके करता है।  हर दम हमेशा समलैंगिक संबंध बनाने के विचार आते है। अपने अध्यापक से भी आकर्षण होता है । महिला की बाते अच्छी नहीं लगती, हर समय लड़का पटाने का मन करता है । हमेशा एक ही विचार आता है,  शादी कर भी लिया ये बात दूसरे परामर्श के दिन बताई । शादी किए 3 साल हो गए। अपनी पत्नी को अपने समलैंगिकता की आदत के बारे मे नहीं बताया । आत्म ह्त्या के विचार आते है । समलैंगिक का आकर्षण हमेशा रहता है । परामर्श के 18 दिन बाद 07/06/21 को बताया की एक लड़के से प्यार हुआ, वो लड़का पानी लेने गया वहा प्रयोज्य भी पानी लेने जाने का बहाना करके उसके पीछे गया और उसको गुदा मैथुन करने का आग्रह किया तो उसने दो-तीन थप्पड़ प्रयोज्य को मारा जिसके कारण बदले की भावना पैदा हुई, उसको भूलना नहीं चाहता, कभी ये विचार भी आते ये दूसरों को क्या बोलेगा, प्रयोज्य ने बताया की 2 साल का एक लड़का भी है । पर गुदा मैथुन और हस्त मैथुन का लगाव अत्यधिक होता है । जिस लड़के से लगाव था उसके बड़े भाई ने प्रयोज्य की माता से भी लड़ाई की बात बताई, उससे समझोता चाहता था, पर समलैंगिक आग्रह का कोई जिक्र नहीं किया । परामर्श के 27 वे दिन उसको बताया था की उसका  निर्णय क्षमता कमजोर पाई गई थी । जिस लड़के से समलैंगिक आकर्षण था उसके बड़े भाई से मित्रता थी । प्रयोज्य झूठी एक फेसबुक भी चलाता था । कुल मिलाकर पाँच व्यक्तियों से समलैंगिक संबंध बने, जिसमे 40-45 वर्ष के आयु के साथ गुदा मैथुन कराने का मन करता है । 

निष्कर्ष - प्रयोज्य को छोटी आयु मे गलत आचरण के कारण गलत गुदा मैथुन करने की आदत लग गई थी । हस्त मैथुन करना एक बाध्यकारी जूजून हो चुका उसको छोड़ना नहीं चाहता था, बाल यौन शौषण के कारण एक गुदा मैथुन की लत लग गई थी, जवानी की उम्र होना और वीर्य का पर्याप्त उत्पादन होना ही दिक्कत थी, शादी शुदा भी था, एक 2 वर्ष का लड़का भी था फिर भी एक लड़के से बदले की भावना के कारण उससे ही गुदा मैथुन करवाना एक गलत नकारात्मक भी जूजून हो चुका था । प्रयोज्य की सब आदत ठीक थी पर हस्त मैथुन नहीं रोक पाना सबसे बड़ी कमजोरी पाई गई । मेरे कहे अनुसार झूठी फेसबुक चलाना बंद किया ।  

सामाजिक संदेश - समय से पहले मैथुन नहीं किया जाए और ये बात ब्रहम चार्य का आचरण की शिक्षा की आवशयकता है । हस्त मैथुन से होने वाले नकारात्मक प्रभावों को भी बताना चाहिए । 

ऑनलाइन परामर्श दाता 

091 98290 85951 

शनिवार, 15 जनवरी 2022

कैसे समान आयु के लड़के से समलैंगिक संबंध बने ?

प्रयोज्य के परामर्श लेने की दिनांक - 20 / 05 / 2021 [ अपडेट 14 / 01 / 2022 ] 

प्रयोज्य का नाम - गोपनियता के कारण 410621 

प्रयोज्य की आयु - 25 वर्ष 

प्रयोज्य का व्यवसाय - स्वयं का व्यवसाय की दुकान ।

प्रयोज्य का वजन - 82 kg 

प्रयोज्य की समस्या - समलैंगिक आदत से छुटकारा चाहता है । 

निदान - प्रयोज्य एक व्यवसाय परिवार से था, 25 साल की आयु मे शादी से डर लगता है, पर शादी करने का मन करता है, प्रयोज्य ने 16 साल की आयु मे अपने दोस्त के साथ गुदा मैथुन की आदत लग गई थी, इसलिए समलैंगिक मे आकर्षण होता है । भिड वाले स्थान पर जाने से आलस आता है । आलसी प्रवृति का होने के कारण काम मे रुचि नहीं होती । बचपन मे लड़की बन कर खेलने मे रुचि थी । कक्षा 10 मे पढ़ता था उस समय हस्त मैथुन करना सीखा, रोज रोज दिन मे तीन बार हस्त मैथुन की आदत हो गई, हस्त मैथुन करने के बाद नींद आ जाती है । मन मे लगातार विचार आते कई कोई बोल नहीं दे और लोग मेरे बारे मे क्या सोचते होंगे । वीर्य के बारे मे लाभ हानी जानता हु, पर हस्त मैथुन करने से रोक नहीं सकता । प्रयोज्य समय पर भी ऑनलाइन परामर्श अपने व्यस्त व्यवसाय के कारण समय नहीं निकाल पाता था । 

निष्कर्ष - ऑनलाईन परामर्श लेने से अब तबीयत ठीक है, परामर्श से फायदा हुआ, अब समलैंगिक आकर्षण नहीं होता, समलैंगिक को देखता ही नहीं, महिला की छाती अच्छी लगती है, आत्म विश्वास थोड़ा ठीक हुआ, गुदा मैथुन की अब ईच्छा नहीं होती । प्रयोज्य को अपने व्यवसाय से फुर्सत नहीं मिलती, हाल अभी जिम जाना शुरू किया था, परंतु सर्दी अधिक होने के कारण जिम जाना छोड़ दिया । प्रयोज्य का वजन ज्यादा होने से आलस आता है, शादी नहीं हुई इसलिए एक संदेह रहता शादी के बाद क्या होगा, आज 14 / 01 / 21 को अपडेट होने पर बताया की हस्त मैथुन की आदत नहीं छुट रही है । सुबह से रात्री तक अपने व्यवसाय से फुर्सत नही मिलती है । समय पर शादी होने से सारी दिक्कत भी ठीक हो जाएगी । 

सामाजिक संदेश - अभी भावक एक ही बात का ध्यान रहे अपने बाल-किशोर संतान को एकांत मे रहने नहीं दे । सार्वजनिक खेल खुद मे हिस्सेदारी अवश्य दे । ब्रहम चार्य की शिक्षा अवश्य दे । 

ऑनलाइन परामर्श दाता 

091 98290 85951 





शुक्रवार, 14 जनवरी 2022

कैसे समान आयु ले लड़को ने समलैंगिक बनाया ?

कैसे समान आयु ले लड़को ने समलैंगिक बनाया ? 

प्रयोज्य के परामर्श की दिनांक - 27 / 04 / 21 [ अपडेट 13 / 01 / 22 ] 

प्रयोज्य का नाम - गोपनीय रखने के कारण 40050421 

प्रयोज्य की आयु - 22 वर्ष 

प्रयोज्य की शिक्षा -  b tech हिन्दी माध्यम 

प्रयोज्य का व्यवसाय - बेरोजगार 

निदान - प्रयोज्य हिन्दी माध्यम से b tech किया । महिलाओ मे आकर्षण की कमी थी, समलैंगिक बूढ़े आदमियो मे आकर्षण होता है, इसलिए पढ़ाई के बाद प्रतियोगीय परीक्षा मे मन नहीं लगता, शादी करने का मन नहीं करता,  क्योकि 19 वर्ष की समान आयु के लड़को ने जबरदस्ती से गुदा मैथुन किया और मुख मैथुन करवाया, साहस नही था इसलिए विरोध नहीं किया, अब भीड़ भाड़ जगह से थोड़ी घबराहट होती है, समलैंगिक के विचार आते की कोई मेरे गुदा मैथुन कर दे, एक लड़के से लगातार संपर्क रहा। कक्षा 11 मे पढ़ता था तब अश्लील वीडियो देख कर हस्त मैथुन सीखा था, दिन मे तीन से चार बार हस्त मैथुन करता । समलैंगिक शब्द का ज्ञान पहले नहीं था, समलैंगिक संबंध बनाने के बाद ही दोस्त ने बताया था । शर्म बहुत आती है। घबराहट होने से मन मे विचार आते की कई कोई बोल तो नही देगा या मेरे बारे मे ये लोग सोचते होंगे । 

निष्कर्ष - प्रयोज्य मे रूठने की प्रवृति पाई थी, निर्णय लेने मे देरी देखि गई, थोड़ा अहंकार भी पाया गया, [ इस समय मुझे कोरोना हो गया था इसलिए ऑनलाईन परामर्श देने मे विलंब भी हुआ था प्रयोज्य को बता दिया था की मुझे बोलने मे दिक्कत हो रही थी ] ऑनलाईन परामर्श लेने के बाद अब तबीयत ठीक है, प्रयोज्य को शादी करने का मन होता है, महिलाओ मे आकर्षण होता है, समलैंगिक अब बुरे लगते है। अब आत्म विश्वास अच्छा हुआ, अब गुदा मैथुन मुख मैथुन करने की कोई ईच्छा नहीं होती, भीड़ मे जाने की थोड़ी झिझक होती है । दूसरों को संदेश देना चाहूँगा की समलैंगिकता गलत विचार है, इस प्रकार की मानसिकता का उपचार होता है । 

निष्कर्ष - बच्चो को हस्त मैथुन करने से रोकने का ज्ञान देना चाहिए, कोई लड़का अगर किसी लड़के के साथ बहला फुसला कर समलैंगिकता के संबंध बनाते है तो उसका विरोध करना सिखाना चाहिए । गुदा मैथुन, मुख मैथुन को कैसे रोके का ज्ञान समाज मे फैलना चाहिए । 

ऑनलाइन परामर्श दाता 

व्हाट्स एप 091 98290 85951 

बुधवार, 12 जनवरी 2022

कैसे हस्त मैथुन के कारण समलैंगिक बना ?

प्रयोज्य के परामर्श की दिनांक - 27 / 02 / 21 [ अपडेट 11 / 01 / 22 ] 

प्रयोज्य का नाम - गोपनीय रखने के कारण 39270222 

प्रयोज्य की आयु - 20 वर्ष 

प्रयोज्य की शिक्षा - बी ए तृतीय वर्ष 

प्रयोज्य की समस्या - समलैंगिकता से छुटकारा 

निदान - प्रयोज्य ऑनलाइन परामर्श के समय कक्षा बी ए तृतीय वर्ष मे पढ़ता था, उसने बताया की समलैंगिकता मे आकर्षण होता है, विषमलिंग मे कम आकर्षण होता है। इसलिए चिंता, डर हमेशा सताता है, भीड़ वाला स्थान अच्छा नहीं लगता तीन साल पहले कक्षा 12 पास की उस समय समलैंगिकता का ज्ञान स्मार्ट फोन के इन्टरनेट से मिला । बचपन मे दीदी के कपड़े दीदी पहनाती थी । 9 वी कक्षा मे पढ़ता था उस समय अश्लील फिल्म देख कर हस्त मैथुन करना सीखा, दिन मे दो तीन बार हस्त मैथुन कभी एक बार हस्त मैथुन करता था । बचपन मे लड़कियो के साथ खेलता था । पहले सोचता था की लोग मेरे बारे क्या सोचते है, पर अब नहीं । जहा कही दो चार व्यक्तियों को देखता तो ऐसे लगता की ये मेरे बारे मे बाते करते होने । 

निष्कर्ष - प्रयोज्य को ऑनलाईन परामर्श लेने के बाद मे आज 11 / 01 / 22 फोन से अपडेट हो कर पूछ की तबीयत कैसे तो बताया, तबीयत ठीक है, पिताजी का देहांत हो जाने के कारण घर चलाने का सब ज़िम्मेदारी मेरी हो चुकी है। अब महिलाओ मे आकर्षण होता है, शादी करने का मन करता है पर थोडा सा निर्णय करने मे देरी हो रही है । आत्म विश्वास बढ़ गया है । समलैंगिकता मे अब कोई रुचि नहीं । पहले से अब अच्छा लगता है । 

निष्कर्ष - किशोर अवस्था मे किशोरों की हस्त मैथुन नहीं करने की सलाह देनी चाहिए, समय से पूर्व जब कच्चा वीर्य निकाल दिया जाएगा, तो मर्द होने के प्रमाण लुप्त होंगे फिर लड़के और लड़की मे क्या अंतर रह जाएगा, मर्द की पहचान ही वीर्य होता है । कच्छी आयु मे वीर्य नष्ट नहीं करना चाहिए । 

ऑनलाईन परामर्श दाता 

वाट्स एप 091 98290 85951 

मंगलवार, 11 जनवरी 2022

कैसे समलैंगिक की आदत सुधरी ?

प्रयोज्य के परामर्श की दिनांक - 22 / 02 / 21 [ अपडेट 08 / 09 / 21------- अपडेट 11 / 01 / 22  ] 

प्रयोज्य का नाम - गोपनीय रखने के कारण 3803 

प्रयोज्य की आयु - 20 वर्ष 

प्रयोज्य की शिक्षा - 10 वी 

प्रयोज्य का व्यवसाय - निजी नौकरी 

प्रयोज्य की समस्या - समलैंगिक समस्या से छुटकारा पाना । 

निदान - प्रयोज्य निजी नौकरी करता उसको समलैंगिक आकर्षण की समस्या होती है, डर, चिंता होती और गुस्सा बहुत आता है । भीड़ भाड़ वाला स्थान अच्छा नहीं लगता, लगातार एक ही विचार आते है की लड़को से लिपटा रहु । समलैंगिक की प्रेरणा यूट्यूब से मिली लगातार यू ट्यूब देखता रहा । फिर एक जगह ईलाज कराया 5000 रुपया खर्च किया पर कोई लाभ नहीं मिला । कक्षा 8 मे पढ़ता था, उस समय 13 वर्ष की आयु थी उस समय हस्त मैथुन शुरू किया था । मन मे ये विचार आते की कई कोई कड़वी बात, बोल नही दे, जब बाहर निकलता तो ऐसा लगता की लोग मेरे बारे मे बाते करते होंगे । वीर्य की रक्षा करना, समय से पहले वीर्य खर्च नहीं करने का कोई ज्ञान नहीं था, हस्त मैथुन की आदत हो चुकी थी । प्रयोज्य जहा काम करता को एक निजी कालेज था उसमे पानी सप्लाई मोटर का संचालन करता था । आफिस मे 5 महिला कर्मी थी, उसमे से एक महिला अधिकारी के लिए घर से छाछ लाता था, बाकी महिला अधियाकरी से कभी बात नहीं होती ।  ( छोटी आयु मे इन्टरनेट से गलत संदेश, गलत शिक्षा भी मिलती है, इसके लिए नियंत्र भी आवशयक होना चाहिए । )

निष्कर्ष - प्रयोज्य मे ऑनलाईन परामर्श लेने से बहुत आराम मिला, परिवार मे बोलने का तरीका अच्छा सुधार हुआ, गुस्सा नियंत्रण मे आया, ऑनलाईन परामर्श के समय ही स्टाफ की चार महिलाए ने मुझे अपने आफिस मे बुलाया, फिर बैठा कर चाय पिलाई, पूछा तेरे मे एकदम बदलाव कैसे आया, क्योकि पहले उदास रहता और चिंता मे डूबा रहता था । एक दिन पुजा मेम [ पुजा नाम काल्पनिक है ] को मैने गिफ्ट दी तो पुजा मेम ने मुझे भी गिफ्ट दी, मेरे उनकी आंखे मे देखने पर पुजा मेम बोली मै तुझ से पटने वाली नहीं, मेरी शादी मेरे समाज मे ही होंगी, फिर मेरे दिशा निर्देश को उसको बता दिया था, तो पुजा मेम खुश हुई, पुजा मेम की शादी हो गई मै [ प्रयोज्य ] शादी मे भी गया । अब प्रयोज्य मुसकुराते अपनी निजी नौकरी करता है । मैने उसको बोला था की ओपन स्कूल से 12 कक्षा का प्रायवेट फार्म भरना और पढ़ाई करना, उस बात को मान कर अब 12 कक्षा मे पढ़ाई कर रहा है। 

प्रयोज्य अब एक दम ठीक है, अब महिलाओ मे आकर्षण होता है, उसका कहना है की "मै अब होश हवास से कह सकता हूँ, अब ठीक हूँ"। अब भीड़ से भय नहीं लगता, अच्छा लगता है, कोई तखलिफ और परेशानी नहीं, अब शादी करने का मन करता है । उसके अंतिम कथन "ठीक हो सकते है, ये आदत बन जाती है, आदत सुधारी जा सकती है"  अब ये आराम से मैदान मे खेल सकता है, पहले नहीं खेलता था । ( अपडेट - 08 / 09 / 21 बहुत अच्छा है, ऑनलाइन परामर्श का अहसान मानता है । [ अपडेट 11 / 01 /22 ]

सामाजिक संदेश - अपने बच्चो को बिना शिक्षा के अलावा स्मार्ट मोबाईल पर इन्टरनेट का उपयोग लेने नहीं देना चाहिए अन्यथा बच्चो के बिगड़ने के अवसर जायदा होता है । 

ऑनलाईन परामर्श दाता 

What's app 091 98290 85951 

सोमवार, 10 जनवरी 2022

क्यों आखिर सुधारना नहीं चाहता ?

प्रयोज्य के परामर्श की दिनांक - 19 / 01 / 21 

प्रयोज्य का नाम - गोपनीय रखने के कारण 37190121 

प्रयोज्य की आयु - 26 वर्ष 

प्रयोज्य की वैवाहिक स्थिति - शादीशुदा 

प्रयोज्य शिक्षा -  अँग्रेजी माध्यम ग्रेजुएट 

प्रयोज्य का व्यवसाय - प्रायवेत नौकरी 

प्रयोज्य की समस्या - समलैंगिक से छुटकारा नहीं चाहता । 

निदान - प्रयोज्य कक्षा 7 वी मे पढ़ता था । उस समय आयु 13 / 14 वर्ष का था, उस समय 22 / 23 साल का लड़के मे बहला फुसला कर गुदा मैथुन कर दिया, अब बाध्यकारी एक जुनून की तरह गुदा मैथुन करना अच्छा लगता है, समलैंगिक अच्छे लगते परंतु सभी नहीं अपनी पसंद का समलैंगिक जो अच्छा लगता उसके साथ गुदा मैथुन करने की ईच्छा होती है । 2013 मे अपने आप फेसबुक से समलैंगिकता की जानकारी मिली, इन्टरनेट से समलैंगिक की विस्तृत जानकारी मिली थी, बचपन मे बड़ी बहिन के कपड़े मम्मी पहनाती थी । पूर्व मे दो मनोवैज्ञानिकों से परामर्श लिया था ।  शादी किए 14 महिना हुआ, पत्नी के साथ पहली बार मैथुन करने की कोशिश मे असफल हुआ, फिर डर बैठ गया । लोगो के बीच मे नहीं रहना चाहता, जल्दी निकालना चाहता हुआ, आत्म हत्या के विचार आते है । मम्मी पापा के लिए जीना चाहता हूँ । मम्मी पापा एक अलग कमरे मे सोते थे, एक दिन प्रयोज्य और उसकी बहिन, के साथ हमेशा सोते थे, एक रात्री मे पिता ने आरोप लगा दिया की भाई बहिन आपस मे मैथुन कर रहे हो, उसी दिन से पिता जी से नफरत हो गई । पिता शक की नजर से हमेशा देखते थे, 2004-2005 भाई बहिन के साथ का आरोप पिता जी ने लगा दिया था । प्रयोज्य ने मान लिया मुझे ठीक नहीं होना, उसका कहना था मुझे नहीं सुधरना, पत्नी के साथ एक बिस्तर पर सोता पर पत्नी से बात नहीं करता, ऑनलाईन उभयलिंग लड़को से बात करता था, घरेलू आवश्यकता के सामान खरीद लाता, पत्नी को बोला तुम जा सकती हो, साथ रहना चाहती तो मुझे आपत्ति नहीं है। उसका हमेशा एक ही वाक्य रहा मुझे समलैंगिक बने नहीं रहूँगा,  समलैंगिक संबंध नहीं रखूँगा और पत्नी चाहे साथ रहे पर किसी भी प्रकार का मैथुन नहीं करूंगा । 

पारिवारिक निदान - प्रयोज्य के पिता अपनी जवानी मे राज्य मे पुलिस की नौकरी लगाने के बाद अपनी पत्नी को शहर लेकर आ गए, पत्नी सरकारी अध्यापिका की नौकरी लग गई, एक लड़की दो लड़के हो गए, फिर कभी अपने पैतृक गाँव नहीं गए, भाई चारा किसी से नहीं था, अपनी पुलिस की नौकरी होने के कारण समय नहीं मिलता, नौकरी और घर के अलावा कही भी आना जाना नहीं था, बच्चे जैसे बड़े होते गए अँग्रेजी स्कूल मे पढ़ते अपनी शिक्षा ली, बड़ी बहिन की शादी हो चुकी थी, प्रयोज्य ने भी शादी की, शादी के बाद ससुराल गया, पत्नी अपने वैचारिक आधार पर मन पसंद नहीं थी । बहन, बहनोई बड़े सुलझे दिमाग के थे, छोटा भाई भी संतुलित था, प्रयोज्य को पढ़ाई के लिए बाहर भेजा वहा किसी ने बहला फुसलाकर गुदा मैथुन किया उसकी लत लगी साथ, पिता के द्वारा हमेशा प्रताड़ित होना एक स्त्री संबंध मे अरुचि हो गई थी, पिता पुत्र मे आपस मे नहीं बनती थी, छोटा भाई बाहर नौकरी करता, घर मे चार लोग प्रयोज्य के पिता, माता, पत्नी और खुद, पर आपस मे किसी के तालमेल नहीं था, पिता पुलिस की नौकरी से रीडयार्ड हो गए थे, माता अध्यापिका जरूर थी परंतु सुबह का अभिवादन एक दूसरे को कोई नहीं करता था, पिता नौकरी से निवृत जरूर हुए परंतु स्वभाव से आज भी कडक पुलिस वाल हो जैसे रहते है, पदौसी घर पर आता तो प्रयोज्य पर गुदा मैथुन का शक करते है, प्रयोज्य की माता ने बताया की मेरे पति मुझे किसी दूसरे आदमी से साथ समान्य बात करते देखते तो शंका करते किससे बात करती क्यों बात करती । प्रयोज्य के पिता अपनी कमाई से घर चलाते, प्रयोज्य भी रसोई घर का समान ले आता । प्रयोज्य के पिता से पूछा की आप की पत्नी और बेटे की कमाई किसके पास रहती तो बोले अपने अपने पास, पत्नी रुपयो का क्या करती तो बोले मुझे नहीं मालूम। प्रयोज्य सब्जी पकाने मे कुशलता हासिल थी, कभी अपनी पसंद का खाना बना भी लेता, पत्नी के हाथ का खाना भी खाता, पत्नी प्रयोज्य के कपड़े भी धोती थी, पत्नी साथ रहे कोई आप्ति नहीं है। प्रयोज्य के पिता पुत्र वधू को उसके पीहर जाने देना नहीं चाहते, क्योकि दहेज का मुकदमा होने का डर रहता था। पिता बो बताया गया की आपका लड़का शारीरिक से घर पर है पर मानसिक तौर से ये खो गया है, जैसे मेले मे बालक अपने अभीभावक का हाथ छुडाकर अपने आंखो से देखि वस्तु के लिए भटक जाता और अभिभावक भी अपनी चेतना दूसरी जगह लगाई घूमते है, जब याद आता तो पता चलता मेरा पुत्र किधर खो गया, इस बात पर पिता ने बताया की मेरा पुत्र इसी प्रकार उसके बचपन मे हम किसी शादी मे नदी पार किसी गाँव मे जा रहे थे तो बारिश आ गई जल्दबाज़ी मे हम अपना बेटा भूल गए पति पत्नी एक दूसरे पर भरोषे रहे, जब चेतन अवस्था मे आए तो पता चला की पुत्र कहा है, नाव मे, बस मे या स्थानीय बाजार मे फिर ढूंढा तो किसी दुकानदार के पास बैठा बिस्कुट खा रहा था, पुत्र रो भी नहीं रहा था, अर्थात पिता पुत्र आज भी अचेतन अवस्था मे जी रहे है । 

निष्कर्ष - संयुक्त परिवार का अभाव  था, पारिवारिक और सामाजिक रिश्तो मे आने जाने का अभाव था, प्रयोज्य को एक बाध्यात्मक जुनून हो चुका था, अब पिता का शक बहुत दुख देता था, पिता भी हठीला और जिद्दी हो चुका एक ही बात मेरे बेटे ने मेरी बेटी के साथ मैथुन किया, जब की बहिन भाई दोनों साथ मैथुन करने का साफ साफ इंकार करते ऐसे कुछ भी नहीं हुआ, ये बात प्रयोज्य को बड़ी दर्द भरी लगती है । एक मकान मे चार लोग रहते है, चारो किसी से भोजन के मतलब के अलाव कोई किसी से बात नहीं करता है। प्रयोज्य के इच्छा अनुसार मकान नहीं बना बताया, उसके ईच्छा के अनुसार डाईनिंग लगाने की बात मे सुधार करवाया, फिर बोला गमले मे कोई पनि नहीं पिलाता, तो उसकी भी निगरानी बताई, चारो लोग एक दुसरे को आपस मे सुबह का अभिवादन करना नहीं आता उसको बताया, प्रयोज्य के बहन बहनोई को बुलाकर सभी साथ साथ भौजन करना बताया, देव स्थान और पर्यटन स्थान घूमने के सुझाव मे स्वीकार किया, पर्यटन स्थान घूमने से पूरे परिवार मे रोचकता रही, नया अहसास हुआ । पर पिता पुत्र का अहंकार आपस मे मेल नहीं खाता, पिता पूर्व की बाते भूलने मे असमर्थ और पुत्र भी पूर्व की बाते भूलने मे असमर्थ, ये आपस मे बाध्यकारी दोनों का अहंकार प्रयोज्य को सुधरने नहीं दे रहा है, प्रयोज्य के पिता ने सामाजिक और सांस्कृतिक जवाबदारी नहीं निभाई । परिवार एक घर नहीं होकर होटल बन चुका है । 

अगर पति पत्नी को साथ रहना तो धेर्य की आवश्यकता है, पिता को पूर्व की बातों को भूलना होगा, पुत्र को खोया प्यार देना होगा, घर परिवार मे मेहमानो की ईज्ज्त करनी होगी, आने जाने वाले और घर के सदयों पर शंका करना बंद करना होगा, पारिवारिक परामर्श से परिवार मे धीमी गति से संचार हो रहा उसको बढ़ाने और गति देने की आवश्यकता है । प्रयोज्य को सांसारिक और सामाजिक नैतिक ज़िम्मेदारी सीखने की आवश्यकता है, ये सीखते ठीक हो सकता है, ईंटरनेट से भी दूर रखने की आवश्यकता है, घर मे समय पर सोए, हास्य विनोद की भी आवशयता है, परिवार मे घुल मिल कर वोल चाल के साथ सामाजिक आना जाना रहना जरूरी है । 

परामर्श दाता 

What's app 091 98290 85951  

शनिवार, 8 जनवरी 2022

कैसे शराब के नशे मे समलैंगिक संबंध बने ?

प्रयोज्य को परामर्श की दिनांक - 28 / 12 / 20 [ वाट्स एप से अपडेट 07 / 01 / 2022 ]

प्रयोज्य का नाम - गोपनियता के कारण 35200 

प्रयोज्य की आयु - 28 वर्ष 

प्रयोज्य का काम - विदेश मे सफाई कर्मी 

प्रयोज्य की समस्या - समलैंगिक से छुटकारा पाना चाहता था । 

निदान - प्रयोज्य 14 वर्ष की आयु मे गलत प्रेरणा के कारण हस्त मैथुन सीख गया, ये भारतीय नागरिक नहीं था, दुबई मे नौकरी करता था, 26 वर्ष की आयु मे पाकिस्तानी सहकर्मी ने शराब पिलाकर गुदा मैथुन कर दिया, प्रयोज्य शराब के नशे मे था, दोनों अलग अलग देश ने नागरिक थे, दोनों के एक ही कंपनी मे नौकरी होने के कारण से साथ रहते थे जिसके कारण समलैंगिक संबंध बन गए, फिर एक आदत बन गई थी, उसके बाद चिंता होती थी महिलाओ मे आकर्षण नहीं होता था, समलैंगिक मे आकर्षण होता, इसलिए शादी करने का मन नहीं होता था । बोलने मे दिक्कत होती, डर लगता था, एकांत अच्छा लगता था, एकांत मे ज्यादा बैठने का दिल करता था, क्या करूंगा, कैसे करूंगा, दूसरी जगह जाऊंगा तो डर लगता था। इंटरव्यू से डर लगता था। लोगो की भीड़ से डर लगता था । 

निष्कर्ष - प्रयोज्य को ऑनलाईन परामर्श लेने से आराम आने लगा, व्यक्ति ठीक हो चुका, गुदा मैथुन कराना बंद कर दिया, हस्त मैथुन करना कम किया, अब अच्छा महसूस करता है, महिलाए अब अच्छी लगती है, अब सभी आँख मे आँख दल कर बात कर सकता है, पहले इधर उधर देख कर बात करता था । अब शादी करने का मन करता है, आज 07 / 01 / 2022 को दुबई वार्तालाप करके ज्ञात हुआ, अब ठीक है, दूसरी कंपनी मे सर्विस करता है, कोरोना की वजह से अपने देश नहीं जा पा रहा है। 

सामाजिक संदेश - विदेशो मे अगर कोई परिवार का सदस्य जाता है तो वासना से लिप्त व्यक्तियों के संपर्क मे नहीं आए अन्यथा एक गलत आदत मे लिप्त होने से व्यक्तित्व मे समलैंगिक समस्या से पीड़ित हो सकते है । 

ऑनलाइन परामर्श दाता 

091 98290 85951 

शुक्रवार, 7 जनवरी 2022

कैसे गलत प्रेरणा के कारण समलैंगिक बाल यौन संबंध हुए ?

प्रयोज्य के परामर्श दिनांक - 12 / 12 /20 [ अपडेट फोन से 05/ 01 / 2022 ] 

प्रयोज्य का नाम - गोपनीय रखने के कारण 34199 -

प्रयोज्य की आयु - 24.6 वर्ष 

प्रयोज्य की शिक्षा - 

प्रयोज्यका व्यवसाय  - स्कूल मे बाबू + शारीरिक शिक्षक 

प्रयोज्य की समस्या - समलैंगिक आदत से छुटकारा पाना चाहता था । 

निदान - प्रयोज्य की शादी की आयु थी घर वाले शादी का दबाव देते, शादी करने का मन नहीं करता, रिश्ते की बात चलती घबराहट होती थी । क्योकि समलैंगिकता की आदत हो चुकी थी, समलैंगिकता मे आकर्षण होता था । परीक्षण मे बताया की 12 साल की आयु मे कक्षा 5 मे पढ़ता था, उस समय समान आयु के लड़के के साथ आपस मे समलैंगिक संबंध बने, फिर एक आदत बन गई थी, तीन समलैंगिक से संबंध स्थापित हुए दो समान आयु के थे, एक छ साल बड़ा था, प्रयोज्य गुदा मैथुन करता था । औरतों मे आकर्षण होता था, लड़कियो से ईच्छा होती पर मन नहीं करत था । आत्मविश्वास मे कमी आई, खेलने का मन नहीं करता, अपनी बेइज्जती होने का डर होता था, अपनी चिंता होती थी, पिता मृत्यु हो चुकी थी माता बहनों के लिए सामाजिक दायत्व इसी पर था। गुदा मैथुन करने वाले से डर लगता था की कई कोई गलत बात तो बोल नहीं दे। गुदा मैथुन करने मे रुचि रहती थी । कोई बुराई करे तो डर लगता था, शादी से डर लगता था, अलग रहने का मन करता था । 

निष्कर्ष - प्रयोज्य कक्षा 5 मे पढ़ता था तब गलत प्रेरणा के कारण छोटी आयु मे बाल बोध के कारण 12 वर्ष की आयु मे समलैंगिक संबंध स्थापित हो गए थे । फिए ये आदत बन गई थी, लगातार तीन व्यक्तियों से ये गुदा मैथुन करने की आदत जारी रही, शादी की आयु के समय एक सामाजिक ज़िम्मेदारी समझते अपना इलाज कराना चाहा, उपचार के समय एक बार वेश्या के पास गया असफल रहा, दुबारा कालेज की लड़की से संबंध स्थापित किए, प्रयोज्य मे 5 / 01 / 2022 को फोन से पुछने पर बताया की अप्रेल 2021 को शादी हो गई, शादी से जो डर और भ्रम था वो  दूर हो गया, अब अपने आपको पत्नी से संतुष्ट होना बताया । 

सामाजिक संदेश - जो भी व्यक्ति ये अनुसंधान पढ़ रहे सावधान हो जाए अपने बच्चो को एकांत मे जाने नही दे और सार्वजनिक खेलकुद मे भाग लेने दे । समाज मे अपने रिश्तेदार ये यहा माता पिता के साथ जाने दे । सामाजिक, संस्कृतिक वैभव की जानकारी अवश्य दे। 

परामर्श दाता 

091 98290 85951 

गुरुवार, 6 जनवरी 2022

कैसे 13 वर्ष की आयु मे समलैंगिक संबंध बने ?

प्रयोज्य के परामर्श की दिनांक - 08 / 12 / 20  

प्रयोज्य का नाम - गोपनीय रखने के कारण 33198 

प्रयोज्य की आयु -  21 वर्ष 

प्रयोज्य की शिक्षा - polytechnic 3 

प्रयोज्य की समस्या - समलैंगिक से छुटकारा पाना । 

निदान - प्रयोज्य 7-8 वर्ष का था उस समय उसके काका ने उसके साथ गुदा मैथुन कर लिया था ।  समझता नहीं था, विरोध नहीं कर सका, उस समय गुदा मैथुन करने की आदत हो गई, डेढ़ साल काका से गुदा मैथुन कराया, 30 वर्ष का एक अन्य गाँव का आदमी से डेढ वर्ष गुदा मैथुन कराया, समलैंगिकता की प्रेरणा अपने काका से मिली। समलैंगिकता मे रुचि रहती और विषम लिंग अच्छे नहीं लगते, विषम लिंग मे आकर्षण नहीं होता था । शादी करने का मन नहीं करता । आत्म विश्वास कमजोर हो गया, डर, चिंता सताती थी, एकांत मे रहने का मन करता । चिंता होती आगे क्या होगा । वीर्य रक्षा करने के बारे मे कोई जानकारी नहीं थी । बचपन मे काका का लड़का फ़्राक पहनता था तो उसको देख मेरी भी ईच्छा फ़्राक पहनने की होती थी । 12 वर्ष की आयु मे हस्त मैथुन करना सीख गया था । पेशाब करता तो दूसरे लड़को के लिंग से मेरे लिंग की तुलना करता तो मेरा लिंग छोटा लगता था, समान नहीं दिखने से हीनता आती थी की मेरा लिंग छोटा क्यो है। 

निष्कर्ष - प्रयोज्य की हालत दूबला और दो आषाढ़ जैसी हो गई थी । ऑनलाईन परामर्श लेने से तबीयत ठीक हुई, अब लड़किया अच्छी लगने लगी, लड़कियो मे आकर्षण होने लगा, शादी करने का मन करता परंतु अभी शादी नही करेगा, क्योकि पढ़ाई पूरी करके प्रतियोगिता परीक्षा देनी है । समलैंगिक अब अच्छे नहीं लगते, उनसे दूर रहने का मन करता है । 

सामाजिक संदेश - अपने बच्चो पर विशेष पालन पोषण का ध्यान रखे, काका जैसे पवित्र रिश्तेदार हो अगर गलत कर देंगे तो बहुत गलत होता है । सामाजिक लोकलाज की शिक्षा अवश्य देनी चाहिए, बच्चे के साथ कोई गलत हरकत करे तो विरोध करना सिखाए । 

ऑनलाईन परामर्श दाता 

091 98290 85951 

मंगलवार, 4 जनवरी 2022

कैसे बाल यौन शौषण से समलैंगिक बना ?

प्रयोज्य को ऑनलाइन परामर्श की दिनांक - 19 / 11 / 20  । [ अपडेट 03 / 01 / 22 ] 

प्रयोज्य का नाम - गोपनीय रखने के कारण 195 । 

प्रयोज्य की आयु - 26 वर्ष । 

प्रयोज्य का व्यवसाय - सरकारी नौकरी । 

प्रयोज्य की समस्या - समलैंगिकता से छुटकारा पाना चाहता । 

निदान - प्रयोज्य को समलैंगिक मे आकर्षण होता था, प्रयोज्य शादीशुदा सरकारी नौकरी मे था, तीन साथी समान आयु, एक ही जाती संप्रदाय के थे, एक दिन अपने साथी से गुदा मैथुन करने का आग्रह किया, तो साथी ने समझाया की ये कार्य अनुचित है । फिर साथी ने ऑनलाइन समलैंगिकता का ईलाज से मेरे नंबर प्राप्त कर प्रयोज्य को दिया । प्रयोज्य ने फिर मुझ से संपर्क करके मुझे बताया की > प्रयोज्य की पढ़ाई कक्षा 2 मे पढ़ता उस समय उसकी आयु 6 / 7 वर्ष थी तब चाचा का लड़का 30 वर्ष का उसके साथ बहला फुसलाकर गुदा मैथुन किया, फिर निरंतर गुदा मैथुन करने की आदत हो गई, अब तक 10 व्यक्ति जिसमे समान आयु और कुछ बड़े आयु के व्यक्तियों से गुदा मैथुन कराया । समलैंगिकता की प्रेरणा चाचा के लड़के से मिल चुकी थी, उसी समय मौसी के लड़के से हस्त मैथुन की प्रेरणा मिल गई, हस्त मैथुन से भी चरम सुख मिलता था, शादी हो चुकी थी, चिंता और डर हमेशा लगा रहता था, इसलिए मनोचिकित्सक से आधुनिक दवाओ का उपयोग किया, दवाई चार महिना खाई, दवाई से कोई आराम नहीं मिला, दवाई खाने से सिर दर्द होता, सिर भारी होता था, आधुनिक दवाई 50 हजार की खा चुका था, क्योकि सरकारी नौकरी थी, रुपयो का अभाव नहीं था, परंतु पूरा रुपया व्यर्थ गया । पत्नी से बात करना अच्छा नहीं लगता था, चिढ़ आती थी, शक्ल अच्छी नहीं लगती । [ जब की पत्नी खूब सूरत थी, उसका फोटो मुझे कई बार बताया था । ]। बचपन मे लड़कियो के कपड़े माता पहनाती थी, बचपन मे लड़कियो वाले खेल भी खेलता था । ऑनलाईन ईलाज लेने मे शंका हुई की ये दस हजार रुपए व्यर्थ तो नहीं जाएंगे, फिर विचार किया जब 50 हजार खर्च किया तो 10 हजार की और रिस्क लेलु, ये फोन से कैसे उपचार करेंगे, आखिर विश्वास किया, और सफल उपचार हुआ । 

निष्कर्ष - प्रयोज्य बचपन मे बाल यौन शौषण से पीड़ित था, अनुसंधान मे देखा गया की एक बार गुदा मैथुन होता तो गुदा मैथुन की आदत बन जाती है, प्रयोज्य बचपना से बड़े होने तक 10 व्यक्तियों से गुदा मैथुन करने का आदि हो चुका था, सरकारी नौकरी लग गई, उस समय शादी भी हो गई, परंतु अनेक प्रकार की दवाई खाने से अपनी स्त्री के साथ यौनि मैथुन करने मे असफल हुआ, अपने साथी कर्मचारी जो कमरे का साथी था, उसको गुदा मैथुन करने का आग्रह किया, उसने मना भी किया और ऑनलाइन परामर्श जो समलैंगिक का इलाज करने का ढूंढ कर मुझ तक पहुंचा जिसका फायदा इस प्रयोज्य को मिला और समलैंगिक दासता से छुटकारा मिला, उसको यथा योग्य आहार व्यवस्था बताई गई, एक महिना ऑनलाइन उपचार के समय एक बार गुदा मैथुन करने के लिए मुझ से क्षमा भी मांगी, फिर ये कभी भी गुदा मैथुन नहीं करवाया, अपनी पत्नी को अब अपनी सरकारी नौकरी पर साथ ले आया, अब अपनी पत्नी अच्छी लगती है, पत्नी से प्रेम करता है, एक वर्ष मे चार बार उसके फोन आए थे, आज संतुलित संतुष्टि पूर्वक अपनी पत्नी के साथ पारिवारिक जीवन बिता रहा है, आज मैने 03 / 01 /22 को फोन करके सम्पूर्ण स्थिति का वार्तालाप किया । 

सामाजिक संदेश - सावधान अपने बच्चो की परिवार मे भरण पोषण के साथ उनकी मनोदशा का भी अध्यन करते रहे, आजकल बाल यौन शौषण बहुत हो रहे है, बच्चो को एकांत मे नहीं रहने दे, सार्वजनिक खेलकुद मे भेजे। अन्यथा समलैंगिक प्राकृतिक होता कहने वाले रुपए कमा रहे है, आग मे घी डालने और आपके बच्चे को बिगड़ने मे सहायता करने वाले गिरोह के रूप मे कमा रहे है ।   

ऑनलाइन परामर्श दाता 

091 98290 85951 

अपडेट 04 / 11 / 2022

प्रयोज्य पिता बन चुका, खुशी की बात है ।

रविवार, 2 जनवरी 2022

कैसे हस्त मैथुन के कारण समलैंगिक बना ?

प्रयोज्य के परामर्श दिनांक - 29 / 10 / 20 

प्रयोज्य का नाम - गोपनीय रखने के कारण - 29190 

प्रयोज्य की आयु - 33 वर्ष 

प्रयोज्य की शिक्षा -  10 + 2 = 12 PBC 

प्रयोज्य की समस्या - समलैंगिक से छुटकारा पाना चाहता है । 

निदान - कक्षा 10 वी मे पढ़ता था, उस समय छोटे लड़को से हस्त मैथुन करने की आदत पड़ गई थी, पड़ोसी लड़को से हस्त मैथुन करवाने की आदत हो गई थी । प्रयोज्य की आयु से छोटे लड़को से हस्त मैथुन करने की आदत हो गई थी । लड़कियो मे जाने से हिचकिचाहट होती थी, लड़कियो और महिलाओ मे आकर्षण नहीं होता, 25-30 वर्ष के समलैंगिक लड़के अच्छे लगते है । 17 साल हस्त मैथुन पड़ोसी लड़को से करवाया क्योकि कोई लड़की नहीं मिलती थी । लगातार विचार आते की कोई लड़का आए और उसका लिंग पकड़ लू । 7-8 व्यक्तियों के प्रयोज्य ने भी हस्त मैथुन किया । दोस्त की प्रेरणा से हस्त मैथुन करना सीखा था । 40 दिन आयुर्वेदिक दवा खाने से स्वपन्नदोष शीघ्रपतन मे आराम मिला ।  महिला संभोग मे शीघ्रपतन का पहली बार अनुभव हुआ । 

निष्कर्ष - प्रयोज्य अपने से छोटे लड़को से हस्त मैथुन करने की आदत होने के कारण, इसलिए अपनी आयु से छोटे समलैंगिक लड़के ही आकर्षण का कारण हुआ । ऑनलाईन मनोवैज्ञानिक परामर्श लेने से अब तबीयत ठीक है, महिलाओ मे आकर्षण होने लगा, अब समलैंगिक अच्छे नहीं लगते । आत्मविश्वास बढ़ा, भीड़भाड़ मे अब जाने से कोई दिक्कत नहीं होती । प्रयोज्य ने बताया इस प्रकार कोई समलैंगिक हो तो मनोवैज्ञानिक परामर्श अवश्य लेना चाहिए । 

सामाजिक संदेश - अपने बच्चो को कभी एकांत मे नहीं रखना चाहिए, पारिवारिक, सामाजिक ज्ञान के साथ वीर्य रक्षा के बारे मे अवश्य शिक्षा देनी चाहिए । 

परामर्श दाता 

091 98290 85951 



गुरुवार, 30 दिसंबर 2021

किशोर आयु मे समलैंगिक कैसे बनते है ?

 कैसे हम आयु के किशोर अवस्था मे लैंगिक भटकाव होता है ? 

परामर्श दिनांक - 03 / 10 / 2020  [ अपडेट 29 / 12 / 2021 ]

प्रयोज्य का नाम - गोपनीयता के कारण 26185 -- । 

प्रयोज्य की आयु - 20 वर्ष । 

कार्यभार -  विधार्थी कक्षा द्वितीय वर्ष BA । 

वैवाहिक स्थिति - कुवारा । 

समस्या - समलैंगिकता से छुटकारा पाना चाहता है । 

आवश्यकता - पढ़ाई मे मन लगे और डिप्टी कलेक्टर बनने के लक्ष्य मे समलैंगिक बाधा को दूर करना । 

निदान -परामर्श के समय बताया की समलैंगिक आकर्षण से परेशान होता है । लड़की और महिला मे कोई रुचि और आकर्षण नहीं होता । जब 15 साल का था तब उससे पहले लड़कियो मे आकर्षण होता था, परंतु सहपाठी समान आयु एक दूसरे को किस करते, हमेशा साथ साथ रात्री मे सोते थे, आपस मे किस करते थे, उसी समय हस्त मैथुन करना सीख गए । दोस्तो के तीन बार गुदा मैथुन किया था ।  कक्षा 10 तक पढ़ाई मे मन लगता था, जब से दोस्तो के संपर्क आया पढ़ाई मे मन नहीं लगता । आत्म विश्वास कमजोर हो गया, शंका होने लगी की डिप्टी कलेक्टर की मेडिकल मे अयोग्य नहीं हो जाऊ । एक बार चिकित्सक के पास गया तो चिकित्सक बोले दुबले बहुत हो, प्रोटीन बाहर जा रहा है, ये बताया तो डर गया। दोस्तो के साथ सोने की ईच्छा रहती, गे से प्यार करने की ईच्छा । उसका दोस्त लड्की से प्यार करता था । प्रयोज्य हस्त मैथुन करते समय समलैंगिक की कल्पना करके हस्त मैथुन करता । 

निष्कर्ष - ऑनलाईन परामर्श का परिणाम अच्छा रहा, समलैंगिकता की मानसिकता हट गई । समलैंगिकता की आदत छुट गई, पढ़ाई मे मन लगने लगा । अभिभावक के ध्यान नहीं देने के कारण हम उम्र के लड़को के साथ मैथुन करने के गलत तरीको को अपना लिया, जिसके कारण समलैंगिकता की आदत पड़ गई, अगर प्रयोज्य को मैथुन करने को लड़की मिलती तो समलैंगिकता की लग नहीं लगती और सामान्य विषमलिंग से संभोग करने की सकारात्मक लत लग जाती । किशोर आयु मे वीर्य बनना प्राररंभ हो जाता है, इस समय ब्रहमचार्य की शिक्षा देने की आवश्यकता होती है । 

परामर्श दाता - ऑनलाइन 091 98290 85951