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रविवार, 21 मई 2023

समलैंगिक समस्या 18 - 22 - 71

18-22-71

 प्रयोज्य 12  / 10 / 2022 सम्पर्क किया . 

कार्यभार - होटल 

आयु - 30 वर्ष  --

शादी -   ..........

समस्या - समलैंगिक 

पहली बार गुदा मैथुन - 

प्रयोज्य की उस समय 10-12 वर्ष की आयु में लडको से निकटता, लडकियों से नफ़रत होती, कभी कभी रोना आता . 

यौन शोषणकारी - 

मनोचिकित्सक से उपचार लिया 5 महिना दवाई खाई, कोई आराम नही . 

नोट- मेरे लिए एक नया प्रकार का रोगी था, घर वालो का शादी का दवाब होने के कारण, पहले उपचार लिया था, होटेल मालिक से अपने आधुनिक चिकित्सक के माध्यम से मुझ से सम्पर्क किया था . 

 6 साल की आयु में होटल नौकरी शुरू की कभी बहार नहीं गया, हमेशा बंधुआ मजदुर की जिन्दगी जिया, कभी लडको के साथ आना जाना नहीं हुआ. MBBS डॉक्टर की सलाह से उपचार लिया / दिया . 

अपडेट - आज भी व्यस्त जीवनशैली हैं. अब आराम है . 


बुधवार, 28 दिसंबर 2022

जब आदमी अपना लिंग परिवर्तन करा सकता तो गलत अभिविन्यास को क्यों नहीं सुधार सकता है ।

 जब आदमी अपना लिंग परिवर्तन करा सकता, तो गलत अभिविन्यास को क्यों नहीं सुधार सकता है ।

गतल शिक्षा संज्ञान का अभिविन्यास को सही अभिविन्यास क्यों नहीं सुधारा जा सकता है, लोग समलैंगिकता को सिमित शब्दों में बोल भ्रम जाल फैलाया जाता है, अगर किसी किशोर के साथ बाल यौन शौषण हुआ वो भी बहला फुसलाकर फिर वह किशोर किसी को अपना यौन शोषण से पीड़ित हो निरंतर अभ्यास में रहता तो युवा होने पर शादी करना चाहता तो उसको क्यों भ्रमित किया जाता है, समलैंगिक से सम्बन्ध बनने को आदि हो चूका जो एक लत या आदत हो चुकी उसको अब इस आदत से छुटकारा चाहता है तो उसे भी वैवाहिक सुख लेने का अधिकार है, और उसके अधिकारों को क्यों रोका जाए. 

संज्ञान किसी प्रकार से कोई भी औषधि से बदला नहीं जाता बल्कि व्यवहारिक वापस संज्ञान से नई सूझ उत्त्पन की जाती है. मैथुन एक खेल जैसा है, एक मैदान में अच्छी तरह खेलता हो सकता दूसरा मैदान थोडा कठिनाई भरा हो सकता मगर उस कठिनाई को दूर करके दुसरे मैदान में भी आसानी से खेल सकता है .

चार वर्ष से बहुत युवाओं को ठीक किया जा चूका हैं, बहुत लोग आधुनिक दवाई [ मनोचिकित्सक की एलोपैथी दवाई ] छोड़ चुकें, शादी हो गई बच्चें हो गए हैं. 

समलैंगिक कब, कैसे, किसके साथ बना का अध्ययन जरुरी होता, समलैंगिक के कारणों का अध्ययन भी जरुरी हैं. 

रविवार, 11 दिसंबर 2022

क्या आपके बच्चों को भ्रामक शब्दों से गुमराह किया जाए तो ?

  क्या आप सहमत होंगे कि आप आपके नादान किशोर भोले भाले लड़के को बहला फुसलाकर गुदा मैथुन और मुख मैथुन करवा कर, 

कुछ लोग चतुर होते है जो दूसरो के बच्चों को बिगाड़ने में निम्न सहायक, लुभावने बोल बोले जिसकी आयु 18 वर्ष से अधिक हो और "हां, किशोर अक्सर प्यार में पड़ जाते हैं। वे एक दोस्त या समान या विपरीत लिंग के किसी भी व्यक्ति के लिए आकर्षण महसूस कर सकते हैं। किसी के लिए विशेष भावनाएं होना सामान्य है। किशोरों के लिए यह समझना महत्वपूर्ण है कि ऐसे रिश्ते आपसी सहमति, विश्वास, पारदर्शिता और सम्मान पर आधारित हैं। ऐसी भावनाओं के बारे में उस व्यक्ति से बात करना ठीक है जिसके लिए आप उन्हें रखते हैं लेकिन हमेशा सम्मानजनक तरीके से।

दूसरा पहलू अगर आपकी किशोर लडकी को इस प्रकार से कोई प्रेरित करें जो 18 साल से अधिक लड़का या लड़की हो तो आप उसको सहमति देंगे ? 


गुरुवार, 30 दिसंबर 2021

किशोर आयु मे समलैंगिक कैसे बनते है ?

 कैसे हम आयु के किशोर अवस्था मे लैंगिक भटकाव होता है ? 

परामर्श दिनांक - 03 / 10 / 2020  [ अपडेट 29 / 12 / 2021 ]

प्रयोज्य का नाम - गोपनीयता के कारण 26185 -- । 

प्रयोज्य की आयु - 20 वर्ष । 

कार्यभार -  विधार्थी कक्षा द्वितीय वर्ष BA । 

वैवाहिक स्थिति - कुवारा । 

समस्या - समलैंगिकता से छुटकारा पाना चाहता है । 

आवश्यकता - पढ़ाई मे मन लगे और डिप्टी कलेक्टर बनने के लक्ष्य मे समलैंगिक बाधा को दूर करना । 

निदान -परामर्श के समय बताया की समलैंगिक आकर्षण से परेशान होता है । लड़की और महिला मे कोई रुचि और आकर्षण नहीं होता । जब 15 साल का था तब उससे पहले लड़कियो मे आकर्षण होता था, परंतु सहपाठी समान आयु एक दूसरे को किस करते, हमेशा साथ साथ रात्री मे सोते थे, आपस मे किस करते थे, उसी समय हस्त मैथुन करना सीख गए । दोस्तो के तीन बार गुदा मैथुन किया था ।  कक्षा 10 तक पढ़ाई मे मन लगता था, जब से दोस्तो के संपर्क आया पढ़ाई मे मन नहीं लगता । आत्म विश्वास कमजोर हो गया, शंका होने लगी की डिप्टी कलेक्टर की मेडिकल मे अयोग्य नहीं हो जाऊ । एक बार चिकित्सक के पास गया तो चिकित्सक बोले दुबले बहुत हो, प्रोटीन बाहर जा रहा है, ये बताया तो डर गया। दोस्तो के साथ सोने की ईच्छा रहती, गे से प्यार करने की ईच्छा । उसका दोस्त लड्की से प्यार करता था । प्रयोज्य हस्त मैथुन करते समय समलैंगिक की कल्पना करके हस्त मैथुन करता । 

निष्कर्ष - ऑनलाईन परामर्श का परिणाम अच्छा रहा, समलैंगिकता की मानसिकता हट गई । समलैंगिकता की आदत छुट गई, पढ़ाई मे मन लगने लगा । अभिभावक के ध्यान नहीं देने के कारण हम उम्र के लड़को के साथ मैथुन करने के गलत तरीको को अपना लिया, जिसके कारण समलैंगिकता की आदत पड़ गई, अगर प्रयोज्य को मैथुन करने को लड़की मिलती तो समलैंगिकता की लग नहीं लगती और सामान्य विषमलिंग से संभोग करने की सकारात्मक लत लग जाती । किशोर आयु मे वीर्य बनना प्राररंभ हो जाता है, इस समय ब्रहमचार्य की शिक्षा देने की आवश्यकता होती है । 

परामर्श दाता - ऑनलाइन 091 98290 85951 

बुधवार, 29 दिसंबर 2021

कैसे समलैंगिक से उभयलिंग फिर विषमलिंगी बना ?

 कैसे समलैंगिक उभयलिंगी से विषम लैंगिक बना ?

परामर्श दिनांक - 30 / 09 / 2019 

प्रयोज्य का नाम - गोपनीय रखने के कारण 25184 _-

प्रयोज्य की आयु 31 वर्ष । 

कार्यभार -- बैंक मे नौकरी । 

वैवाहिक स्थती - शादी शुदा 

समस्या - समलैंगिकता से छुटकारा । 

आवश्यकता - वैवाहिक जीवन अच्छा बीते और औलाद समलैंगिक नहीं बने । 

पारिवारिक स्थती - बाल अवस्था मे पिता की मृत्यु हो गई थी, एक विधवा माता, पत्नी और 9 महीने की एक बेटी । 

निदान - गोरी लड़कियो और गोरी स्त्रियो मे आकर्षण । शादी दो वर्ष पहले हो चुकी थी, 9 महीने की एक लड़की थी । झूठ बोला गया की कभी समलैंगिक संबंध स्थापित नहीं हुआ,  गुदा मैथुन, मुख मैथुन नहीं किया । स्पर्श सुख, पैर छूना, अपने लिंग और गुदा छूना होता था । हस्त मैथुन 12 वर्ष की आयु मे .शुरू किया, वीडियो देखने से प्रेरणा मिली थी । चार-पाँच समलैंगिक व्यक्तियों के संपर्क मे आए । लगातार दो लड़को की याद आती थी । समलैंगिक शब्द ग्रेजुएशन के बाद सुना । गोरी स्त्री अच्छी लगती क्योकि उसकी पत्नी काली थी, ये बात परामर्श के अंत मे बताया था, परामर्श से ये फायदा हुआ की अब काली पत्नी सुंदर और अच्छी लगने लगी । 

ऑनलाईन परामर्श के अंत मे बताया की 8 से 10 लड़को से गुदा मैथुन करवाता था । मित्र मना करता तो भी मित्र को स्पर्श सुख के लिए स्पर्श करता था । शादी मे बाद समलैंगिकता संबंध नियंत्रण मे आया परंतु समलैंगिकता विचार निरंतर सताते थे । अपनी पत्नी से यौनि मैथुन करता तो भी समलैंगिक याद आते थे । अपनी स्त्री से संभोग के समय लिंग मे देरी से तनाव आने लगता था । सोने से पहले अपनी स्त्री से संभोग करता था और कभी कभी दिन मे भी संभोग करा लेता था । पत्नी संभोग के समय समलैंगिक की याद आती थी, सपने मे स्वप्नदोष लड़के के स्मरण के आते थे, स्वप्न दोष सप्ताह मे तीन बार हो जाता था । हस्त मैथुन करता तो भी लड़के के विचार करके करता था, लिंग मे ढीलापन लगता था ।  

निष्कर्ष - परिणाम - प्रयोज्य बाल यौन शोषण से पीड़ित था, इसलिए समलैंगिकता की लत लग गई थी। प्रयोज्य की शादी हो चुकी थी, 9 महीने की बेटी थी, पत्नी काले रंग की थी, बैंक स्टाफ मे गोरी महिला होने से उनकी तरफ आकर्षण था, इसलिए अपनी पत्नी अच्छी नहीं लगती जिसके कारण पत्नी से मनमुटाव भी रहता, पत्नी से मनमुटाव के कारण पत्नी अपनी सासु से भी झगड़ा करती, पारिवारिक परामर्श देने से पत्नी सुंदर दिखने लगी और पत्नी मे आकर्षण होने लगा, माता और पत्नी से कैसे व्यवहार रखना का परामर्श दिया तो पारिवारिक झगड़े समाप्त हुए, घर मे अब शांति, प्रेम से रहने लगे। प्रयोज्य के समलैंगिकता की आदत छुट गई, दैनिक तनाव और चिंता मिट गई । अंत मे उसने बताया समलैंगिकता प्राकृतिक नहीं होकर एक थोपा गया शब्द है । प्रयोज्य अब सामान्य वैवाहिक जीवन जी रहा है /। 

सामाजिक संदेश - वे किशोर लड़के जिनके अभिभावक नहीं होते या जिनके अभिभावक हो कर भी अपनी संतान को नकारात्मक गतिविधियो पर नियंत्रण नहीं होने के कारण गलत आदते पड़ती है, अपने किशोर बालको की शारीरिक क्रियात्मक घुड़ सवारी, वालीबाल, फुटबाल, हाँकी, और क्रिकेट जैसे खेल अवश्य देना चाहिए । 

ऑनलाईन परामर्श दाता - 

वाट्स एप - 91 98290 85951 


मंगलवार, 28 दिसंबर 2021

कैसे समलैंगिक तनाव की दवाओ से छुटकारा मिला ?

 समलैंगिक और तनाव की दवाओ से छुटकारा मिला ।

परामर्श दिनांक - 20 / 09 / 20  [ अपडेट 27 / 12 / 21 फोन से वार्तालाप हुआ ] । 

प्रयोज्य का नाम - गोपनीय रखने के कारण 187 । 

पढ़ाई - 10 + 2 आईटीआई । 

वैवाहिक स्थती - सगाई हुई । 

समस्या - समलैंगिकता से छुटकारा । 

आवश्यकता - वैवाहिक जीवन मधुर रहे । 

निदान - महिलाओ से ज्यादा आकर्षण समलैंगिक मे होता है । शादी करने का मन करता है, सगाई हो गई । कक्षा 5 मे पढ़ता था, 10 से 12 वर्ष का था तब समान आयु के रिश्तेदार ने गुदा मैथुन किया । समान आयु के लोगो के साथ गुदा मैथुन करवाया और स्थानीय दो वर्ष बड़े लड़के भी थे और दोस्त के साथ सोते थे । कुछ साथियो की शादी हो गई कुछ कुंवारा है। स्कूल मे खेल कूद और बाहर के लोग अच्छे नहीं लगते थे । कक्षा 10+2 तक गाँव मे ही था, रात को नींद नहीं आती थी, दिन भर थकान लगती थी । 10 वर्ष गुदा मैथुन किया, एक दो बार मुख मैथुन किया । तनाव मे था, पढ़ाई नहीं कर पा रहा था, बार बार समलैंगिकता के विचार आते थे । दुखी रहने के कारण, माता के साथ डॉक्टर के पास गए, उनके काउन्सलर मे बताया ऐसे ही रहो,  ब्लेड से हाथ काटे  दो बार आत्म हत्या का प्रयास किया   । भुवनेश्वर से चिकित्सक से 5000 रुपए की दवाई लाई चार महिना ईलाज चला, 

1 - Cap - prodep  bd 

2 - Tab - nexito ls  [clonozepam ] 

3 - Tab - nexipride 50 mg -------------- चार महिना दवाई खाई था, तनाव दूर हुआ । लोक डाउन से तनाव कम हुआ । 

विचार कम आते पर विचार नहीं बदले । दवाईया छोड़ने पर नींद नहीं आती । चार समलैंगिक के संपर्क मे रहे । एक वर्ष पूर्व हैदरबाद नशे मे मुख मैथुन किया । घर वालो की मेरे समलैंगिक होने का पता नहीं था । 

निष्कर्ष - सफलता - अच्छी आहार चिकित्सा परामर्श दिया । दवाईया छुट गई, सामाजिक लोग बोलने लगे पहले कम बोलता था, अब अधिक बोलने लगा, 12 वर्ष बाद अच्छे हालात हुए, पहले लड़कियो जैसे विचार आते [ समलैंगिकता के विचार ] अब डर दूर हुआ और जोश आने लगा । 10 बजे नींद की दवाई खा कर सोता सुबह 7 सात बजे उठता, दवाईया बंद कारवाई, आयुर्वेदिक चूर्ण दिया, आराम से नींद आने लगी। जीवन शैली मे बदलाव आया  । महिलाओ मे आकर्षण और रुचि बढ़ी, मार्च 2021 मे शादी हो गई, वैवाहिक संबंध अच्छे है, पत्नी से प्रेम करता है । आजीविका के लिए मेरे बताए आदर्श बच्चो को ट्यूशन कराता है । पारिवारिक और सामाजिक जीवन से अब संतुष्ट है । 


परामर्शदाता - 091 98290 85951 


सोमवार, 27 दिसंबर 2021

समलैंगिकता कैसे विकसित हुई ? 179

समलैंगिकता बाल यौन शौषण से विकसित होती है । 

परामर्श दिनांक - 22 / 08 / 20 [ अपडेट 26 / 12 / 21 फोन से ] 

नाम - गोपनीय रखने के कारण 23 / 129 

प्रयोज्य की आयु 24 वर्ष 

वैवाहिक स्थती - तलाक [ सामाजिक मे आम बात होती है ] 

समस्या - समलैंगिकता से छुटकारा चाहता है । 

आवश्यकता - वैवाहिक जीवन मधुर रहे । 

निदान - कक्षा 5 मे पढ़ता था, तत्कालीन एक गाँव का दूसरा व्यक्ति जो 24 वर्ष का था । वह एकांत मे उसका अपना लिंग प्रयोज्य के हाथ मे पकड़ता था, फिर लिंग हाथ मे हिलाने को बोलता था, युही कभी कभार ऊपर चढ़ता था। तीन वर्ष ये क्रिया चलती थी । कक्षा 8 पास करके कमाने एक राज्य से दूसरे राज्य चला गया, उस समय 14-15 वर्ष की आयु थी, कार्मिक स्थल पर एक 30 वर्ष का व्यक्ति था, वो मज़ाक मस्ती करता था, गुदा मस्ती भी करता था । एक दिन साथ साथ स्नान कर रहे थे तो उसने गुदा मस्ती करते करते, नहाते समय उसने गुदा मे अंगुली डाल दी, अपना लिंग हाथ मे दिया और फिर उसका लिंग प्रयोज्य के गुदा मे डाल दिया, और गुदा मैथुन का प्रारम्भ हो गया। फिर बहला फुसला कर लिंग हाथ मे देता और मुख मैथुन भी करावा दिया,  फिर समलैंगिकता की आदत पड़ गई ।  

बाद मे गुदा मैथुन छोड़े 5 वर्ष हो गए, शादी हो गई, साल भर पत्नी के साथ रहा, फिर कमाने जाना पड़ा चार महीने बाद वापस आता पत्नी के साथ रात्री मे एक बार आसानी से मैथुन कर लेता था, कभी एक दो दिन बाद सेक्स करता था । [ समाज मे तलाक होना आम बात होती है ] अंतिम बार सेक्स किया उस दिन असफलता मिली [ जो चिंता, तनाव से असफलता आम लोगो मे भी होता है ] तो हीनता महसूस की, लिंग मे तनाव क्यो नहीं आया, इस विचार से लगा नपुश्ङ्कता महसूस हुई । सुबह लिंग मे तनाव आता था । समलैंगिक व्यक्ति को देख लिंग मे तनाव आता था । ये समस्या किसी को नहीं बता सकता था । 

समाधान = ऑनलाइन परामर्श से समलैंगिकता के विचारो से छुटकारा मिला, एक प्रेमिका से मैथुन किया, गाँव मे लोक लाज करना किसी से सेक्स आग्रह नहीं कर सकता, अप्रेल मे वापस शादी करना है । 

सुझाव निष्कर्ष - किशोर बच्चों को बाल यौन शौषण से बचाना चाहिए, दो दोस्तो को एकांत मे रहने बैठने का अवसर नहीं देना चाहिए । सार्वजनिक खेलकुद मे प्रतियोगिता अवसर देना चाहिए, वीर पुरुषो का आदर्श, ज्ञान-विज्ञान मे शिक्षा देनी चाहिए । 


शनिवार, 25 दिसंबर 2021

कैसे समलैंगिक आदत बन गई ।

कैसे समलैंगिकता की आदत विकसित हुई

परामर्श दिनांक 24 / 06 / 20

नाम गोपनीय रखने के कारण माना 170

प्रयोज्य की आयु – 26

शादी होनी हें ।

समस्या समलैंगिकता का आकर्षण

आवश्यकता विषमलैंगिक आकर्षण बढ़ाना है । लड़कियो मे आकर्षण बढ़ाना है ।

समस्या समस्या घटना का समय स्कूली जीवन मे सहपाठी से स्कूल से कोई एकांत मे, घर के एकांत मे लैंगिक का खेल करते । हाई स्कूल तक सामान्य थे, कुछ नहीं हुआ, उस समय पड़ोसी अंकल अपने पास ले गए, उन्होने लिंग को चूमा, गुदा मैथुन कराए, नया अनुभव हुआ, अच्छा लगा । फिर सप्ताह मे दो बार करता था । साल भर बचने लगे, बहुत गे लड़को को किया, एक दोस्त से किया, फिर सामान्य जीवन रहा था, अचानक लड़को को किस करने का मन करता था, मुखमैथुन की ईच्छा, फिर लड़को के साथ मुखमैथुन किया, 16 से 20 लड़को को जो अच्छा लगता तब ईच्छा होती थी और शादी की बात करता तो उदासी छा जाती थी । सिर्फ लड़को की तरफ ईच्छा होना, यानि अपने दोस्तो को खोना नहीं चाहता था । तीन महीने पहले किसी ने ताना मारा गुदा मैथुन करवाता है या करता है, फिर घर बैठ कर रोना शुरू किया, डरता हूँ, संदेश होता है।

आज जूस पीते एक दोस्त ने कहा की तू गुदा मैथुन करवाता है, या करता है, तब से चिंता, डर अधिक होता है, की अपनी स्त्री के साथ संभोग कर पाऊँगा की नहीं, [ स्वयं को किन्नर होना लगा ] शंकित मन होने के कारण अंकल को बुलाया तो गुदा मैथुन करने मे असफल हुआ, फिर डेढ़ महीने बाद एक दोस्त को बुलाया और उसका पेंट खोला तो लिंग मे तनाव आया, फिर डर और चिंता दूर हो गई ।

प्रयोज्य अतिरिक्त विश्वास के कारण पूर्ण ऑनलाइन परामर्श बीच मे ही छोड़ दिया उसे लगा की वो ठीक हो गया ।

निष्कर्ष – बाल्य काल मे बच्चे गलत प्रेरणा के कारण गुमराह हो जाते है, किशोरा अवस्था मे अच्छे प्रेरणा की आवश्यकता होती है, किशोर बालक को सार्वजनिक खेलने अवश्य देना चाहिए परंतु एकांत मे कभी खेलने, रहने नहीं देना चाहिए, अच्छी प्रेरणा अवश्य दे, ताकि सकारात्मक विकास हो सके ।

शुक्रवार, 24 दिसंबर 2021

कैसे समलैंगिकता का आकर्षण से छुटकारा मिला ?

फिल्मी हीरो को देख उसको किस करने का विचार आता था । 
प्रयोज्य का नाम गोपनीय रखने के कारण 168 माना । 
आयु - 17 वर्ष 
कक्षा - 12 
परामर्श दिनांक 19 / 06 / 20 
अपडेट - 24 / 12 /21 प्रयोज्य को समस्या हल हो चुकी और आगे निरंतर अपनी पढ़ाई कर रहा है । 

पारिवारिक पृष्ट भूमि - माता सरकारी अध्यापिका पिता किसान और ठेकेदार, एकलौती संतान परिवार मे पिता अपने गाँव रहते, माता अध्यापिका होने से अन्य गाँव मे रहती साथ नानी भी रहती थी, इकलौता होने के कारण प्यार से रहता था। 

समस्या - फिल्मी हीरो को किस करने का मन करता था । यूट्यूब पर समलैंगिकता का वीडियो ज्यादा देखता था । मम्मी और नानानी से झगड़ा बहुत होता था । 

नैदानिक - कक्षा 6 मे पढ़ता तब हस्त मैथुन करना शुरू कर दिया था, सप्ताह मे दो बार हस्त मैथुन करता था। कक्षा 9 मे पढ़ता तब  रंग रूप से गोरा था, सुंदर दिखने की वजह से दोस्त कहते की लड़की जैसा दिखता है । पढ़ाई के दौरान साथ लड़के स्तन दबा देते तब विरोध नहीं कर पाया था । 
जीवन शैली मे बदलाव आया की घर मे चिड़चिडापन होने लगा, माता और माता की माता [ नानी ] से छोटी छोटी बात पर गुस्सा होता था । गलतिया ढूँढने की आदत हो चुकी, समलैंगिकता के वीडियो बहुत देखता था । "शुभ मंगल सावधान'' फिल्म से प्रभावित होने लगा और विचार करने लगा की समलैंगिकता को सोसाईटी मे मान्य-अमान्य के विचार बहुत आते थे । कक्षा 8 मे पढ़ता तब तक सामान्य विचारा आते थे । समलैंगिक संबंध नहीं बनाए और मोटे ताजे व्यक्ति के भुजा मे लाल धागे बांधे स्थान पर नजर हमेशा ठहरती थी । 

निष्कर्ष - प्रयोज्य पढ़ाई अंग्रेजी माध्यम से करता था, पढ़ाई मे होशियार और जिज्ञासु था, आठ परामर्श दिवसों मे केवल अनेक विचारो के सवाल थे,  जिज्ञासु होना और पारिवारिक और सामाजिक समझ नहीं होना पाया गया, पिता से डर पर पिता हमेशा साथ नहीं होते थे, इसलिए मनमाना विचार पर कोई नियंत्रण और सुझाव नहीं था । 
ऑनलाइन परामर्श लेने से उसके सभी सवालो के जवाब मिल गए प्रयोज्य खुश हुआ । 

फीस की व्यवस्था - ये कमाता नहीं, इसको अपने आपने अच्छी प्रेरणा लेने की सूझी, नकारात्मक विचारो को छोड़ना चाहता था, इसलिए अपनी माता से आग्रह किया और पहले माता इंकार होती रही, पर इन दौरान शुशान्त सिंह राजपूत फिल्मी हीरो आत्म हत्या कर चुका था तो ये बात माता को पता था, फिर माता ने ऑनलाइन परामर्श शुल्क दिया, उसमे भी प्रयोज्य ने चतुराई दिखाई और मुझ से झूठ बोल छुट ले ली । 

संदेश - अपने बच्चो को स्मार्ट फोन और इन्टरनेट से अत्यधिक समय बिताने नहीं दे और अपने बच्चो को पारिवारिक और सामाजिक सांस्कृतिक  भौतिक ज्ञान अवश्य दे । नकारात्मक विचारो पर रोक टॉक अवश्य होनी चाहिए, एक गंदी मछली पूरे तालाब को गंदा कर देती वैसे ही एक गंदा विचार सभी अच्छे विचारो को गंदा कर देते है । 
वाट्स एप - 91 98290 85951