समलैंगिक का ईलाज लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
समलैंगिक का ईलाज लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

गुरुवार, 22 जून 2023

समलैंगिक समस्या 11 - 23 - 85

 

11 - 23 - 85

प्रयोज्य 05 / 05 / 2023  सम्पर्क किया . 

कार्यभार - B A 

आयु - 25 वर्ष  --

शादी - 

समस्या - समलैंगिक 

पहली बार गुदा मैथुन - कक्षा 9 में पढ़ता था . 

प्रयोज्य की उस समय 15 वर्ष लगभग .

यौन शोषणकारी - 18 वर्ष लडकें - 4 लडको के सम्पर्क में आया . 

आवाज दी अच्छा हुआ. 01/ 06 / 23 

बुधवार, 21 जून 2023

समलैंगिक समस्या 10 - 23 - 84

10-23-84

प्रयोज्य 05 /04 / 2023  सम्पर्क किया . 

कार्यभार - खेती और कैटर्स 

आयु - 32 वर्ष  --

शादी - 

समस्या - समलैंगिक - शादी करने में रूचि नहीं . लड़की से डर लगता है . 

पहली बार गुदा मैथुन - 10 वी कक्षा में पढ़ता था. 

प्रयोज्य की उस समय 15-16 वर्ष की आयु 

यौन शोषणकारी - 20-25  लडकें 

नोट- अपनी भावी पत्नी से मिलने गया, भावी पत्नी की बड़ी बहन के घर गया, मैने गिफ्ट देने का बोला था, बल्कि 5000 रूपये की गिफ्ट में ड्रेस [ पेंट शर्ट ]  लेकर आया .  


सोमवार, 5 जून 2023

समलैंगिक समस्या 05-23-79

05-23-79

प्रयोज्य 02 /03 / 2023  सम्पर्क किया . 

कार्यभार - पावर प्लांट में 

आयु - 28 वर्ष  --

शादी - 

समस्या - समलैंगिक 

पहली बार गुदा मैथुन - 15-16 वर्ष 

प्रयोज्य की उस समय 

यौन शोषणकारी - समान आयु 

two year 

spenzo .5 tab

ooltime tab 

आवाज दी थी 

बुधवार, 24 मई 2023

समलैंगिक समस्या 20 - 22 -73

20 - 22 -73 

प्रयोज्य 15  /11 / 2022 सम्पर्क किया . 

कार्यभार - सरकारी बैंक में 

आयु - 26 वर्ष  --

शादी -   

समस्या - समलैंगिक 

पहली बार गुदा मैथुन - कक्षा 6 - 7 में पढ़ता था . 

प्रयोज्य की उस समय 13 वर्ष लगभग .

यौन शोषणकारी - ताई का लड़का सम्बन्धी 18-20  वर्ष का 

अब तक 18-20  व्यक्ति के संपर्क में आया . पेमेंट दे कर गुदा मैथुन करवाया . 


बुधवार, 17 मई 2023

समलैंगिक समस्या 1L

प्रयोज्य 011 / 09 / 2022 सम्पर्क किया . 

कार्यभार - विधार्थी BA 3 

आयु -17

शादी -   नहीं हुई 

समस्या - समलैंगिक 

पहली बार गुदा मैथुन - 

प्रयोज्य की उस समय - बचपन में डर चिंता सच सामने नहीं आ जाये. जब 14-15 साल की थी. 

कारण  - बचपन में माता लडको के कपडे पहनाती थी. मम्मी की इच्छा थी लडका हो, मेरे भाई नहीं था, दो बहनें मुझ से बड़ी थी. चिंता होती, पिताजी माता से रोज मारपीट करते थे. इस लिए पिताजी से डर लगता था. कक्षा 12 में पढ़ती थी, लड़की से दोस्ती हुई, दो साल दोस्ती रही, लडको के कपडे पहनती, लड़की से स्नेह मिलता था. लड़की के साथ रहने से प्यार मिलता, पिताजी पर गुस्सा होने से दूसरें आदमियों पर गुस्सा आता और व्यक्ति से नफ़रत होती थी. एकांत में ज्यादा विचार आते थे. हस्त मैथुन के भाव मन में आते पर हस्त मैथुन नहीं किया. लड़का लड़की जैसे हाथ पकड़ते वैसे पकड़ने का मन करता है. 

प्रयाप्त परिचय गलत होने के कारण से परामर्श में रूकावट करना पड़ा. 

मंगलवार, 16 मई 2023

समलैंगिक 14 -22- 67

 14 -22- 67

प्रयोज्य 01 / 09 / 2022 सम्पर्क किया . 

कार्यभार - सैनिक 

आयु - 28 वर्ष  --

शादी -  शादीशुदा, 1 संतान डेढ़ वर्ष 

समस्या - समलैंगिक [ उभयलिंगी ] 

पहली बार गुदा मैथुन - कक्षा 6 में पढ़ता 12-13 वर्ष की आयु में. बहला फुसलाकर गुदा मैथुन किया . 

प्रयोज्य की उस समय 12-13 वर्ष लगभग .

यौन शोषणकारी -  चचेरा भाई  27-28 वर्ष का 

अब तक 3 व्यक्ति के संपर्क में आया . 

अपडेट - ठीक है . 13-05-23 .

सोमवार, 15 मई 2023

समलैंगिक समस्या 13-22- 66

 

13-22- 66

प्रयोज्य 04 / 08 / 2022 सम्पर्क किया . 

कार्यभार - शादी पूर्व शूटिंग जॉब एवम् रसोया 

आयु -30 वर्ष  -

शादी -  कुवारा 

समस्या - समलैंगिक [ उभयलिंगी ] 

पहली बार गुदा मैथुन -12-14 वर्ष की आयु में. बहला फुसलाकर गुदा मैथुन किया . 

प्रयोज्य की उस समय12-14 वर्ष लगभग .

यौन शोषणकारी - पडौसी 18 वर्ष का 

अपडेट - ठीक है . 11-05-23 .

रविवार, 14 मई 2023

समलैंगिक समस्या 11-22- 65.

 11-22- 65

प्रयोज्य 18 / 07 / 2022 सम्पर्क किया . 

कार्यभार - गाड़ी ड्राइवर 

आयु -20 वर्ष  --

शादी -  नहीं की .

समस्या - समलैंगिक 

पहली बार गुदा मैथुन - 6 वर्ष की आयु में.

प्रयोज्य की उस समय 6 वर्ष लगभग .

यौन शोषणकारी - 4-5 बड़ा यानि 12 वर्ष का लड़का 

अपडेट - ठीक है . 11-05-23 .

शुक्रवार, 12 मई 2023

समलैंगिक समस्या 10-22- 63.

 10-22- 63

प्रयोज्य 06 / 07 / 2022 सम्पर्क किया . 

कार्यभार - कपड़ो का व्यापारी 

आयु -38  वर्ष  -- [ दो लड़के 10 - 7 वर्ष के ]

शादी -  शादी शुदा  [ दो लड़के 10 - 7 वर्ष के ]

समस्या - समलैंगिक [ उभयलिंगी ]. 

पहली बार गुदा मैथुन - 13- 14 वर्ष की आयु में.

प्रयोज्य की उस समय 13-14 वर्ष लगभग .

यौन शोषणकारी - 20 वर्ष का रिश्तेदार ने प्रयोज्य के बाल यौन शौषण किया. जिसके कारण समलैंगिक सबंध बनने का बाध्यकारी जूनून की आदत हो गई. बाहर जाने पर चिंता और डर लगता है. लगातार समलैंगिकता के विचार आना, अकेले में ठीक नहीं, घर में अच्छा लगता है. शादीशुदा होने के बावजूद हस्तमैथुन करता है. 


मंगलवार, 9 मई 2023

दो साल बड़ा लड़का समलैंगिक सम्बन्ध बनाया .

 मनोवैज्ञानिक परामर्श चिकित्सा 

07-22- 60

प्रयोज्य 19 / 04 / 2022 सम्पर्क किया . 

कार्यभार -BA पास 

आयु -36 वर्ष  -- 

भार - असरकारी अध्यापक 

शादी - 03 - 05 - 22 

समस्या - समलैंगिक 

पहलीबार बार गुदा मैथुन -14 वर्ष की आयु में, [ मुख मैथुन बलपूर्वक करवाया ]

प्रयोज्य की उस समय 14 वर्ष लगभग 

उसके दोस्त ने जिसकी आयु 16 वर्ष . 

हस्त मैथुन शुरू किया . 15 वर्ष की आयु में 

गुदा मैथुन करना और कराने की आदत - 

नोट बाईक चलाने में डर, बाजार में डर 

रविवार, 7 मई 2023

मुख मैथुन बलपूर्वक करवाया .

 मनोवैज्ञानिक परामर्श चिकित्सा 

05-22- 58

प्रयोज्य 19 / 04 / 2022 सम्पर्क किया . 

कार्यभार - B.COM  पास 

आयु - 25

भार - सरकारी नौकरी 

शादी - नहीं

समस्या - समलैंगिक 

पहलीबार बार गुदा मैथुन -10 - 12 वर्ष की आयु में, [ मुख मैथुन बलपूर्वक करवाया ]

प्रयोज्य की उस समय 12 वर्ष लगभग 

उसके दोस्त ने जिसकी आयु 25-30 वर्ष . 

हस्त मैथुन शुरू किया . 9वी कक्षा में पढ़ता था, एक बार दिन में . बाद सप्ताह में एक बार . 

10 लोगों के सम्पर्क में आया सभी आयु में बड़े थे . 

मोटर साईकिल चलाने में डर लगता था, शहर में मोटर सायकल नहीं चलाता था, उपचार के समय डर निकल गया . 

शनिवार, 6 मई 2023

समलैंगिक समस्या 04-22- 57

 मनोवैज्ञानिक परामर्श चिकित्सा 

04-22- 57

प्रयोज्य 09 / 04 / 2022 सम्पर्क किया . 

कार्यभार - प्रायवेट नौकरी 

आयु - 23 वर्ष 

भार - 

शादी - नहीं 

समस्या - समलैंगिक 

पहलीबार बार गुदा मैथुन - 11-12 वर्ष की आयु में, 

प्रयोज्य की उस समय 12 वर्ष लगभग 

उसके दोस्त ने जिसकी आयु 18 वर्ष . गाँव का पडोसी 

हस्त मैथुन शुरू किया .13 -14 वर्ष की आयु में 3 से 4 बार दिन में 

चार पांच लोगो से गुदा मैथुन कराया था . 

मार्केट जाने में डर लगता, अकेले में डर लगता है . . 

गुरुवार, 22 दिसंबर 2022

तनाव धटाने भारत में डॉक्टर कर रहे योग और अपने रोगियों को तनाव की दवा खिलाते हैं. क्यों ? पढ़िए .

पाली भास्कर 19 -12 - 2022 
मंडे पोजिटिव एमबीबीएस की पढाई के दौरान स्टूडेंट को डिप्रेशन से बचाने और स्वस्थ रखने के लिए है यह नवाचार 
एन एम् सी ने तनाव घटाने फिजियोलोजी के नए पाठ्यक्रम में जोड़ा योग-प्राणायाम, हफ्ते में एक दिन ऐसी मुद्रा में दिखेंगे स्टूडेंट. -- दिलीप द्विवेदी . पाली राजस्थान . 
कोरोना काल में दवा के साथ कारगर साबित हुए योग-प्राणायाम को देखते हुए नेशनल मेडिकल कमीशन ने M. B. B. S. के छात्रो को पढाई के साथ योगा प्राणायाम करवाने का निर्णय लिया है, एन एम सी ने अबिबिएस M. B. B. S. फिजिओलाजी विभाग के नए पाठ्यक्रम में योग से शरीर पर क्या असर होगा, इसकी जानकारी उपलब्ध करवाने के लिए मेडिकल कालेज में योगा लैब भी बनवाने के लिए निर्देश दिए है. पाली मेडिकल कालेज में प्रिंसिपल डॉ. दीपक वर्मा व एडिशनल प्रिंसिपल डॉ. केसी अग्रवाल निर्देशन में योगा लैब शुरू कर दी है. यहाँ प्रशिक्षको द्वारा छात्रो को योग प्राणायाम करवाने के साथ इसका शरीर पर होने वाले लाभ के बारे में जानकारी दी जाएगी.               उल्लेखनीय है कि कोरोना की तीनों लहर में 32 हजार 922 संक्रमित सामने आये थे, इसमें से करीब 500 मरीजो की किसी न वजह से मौत हो गई और 6743 मरीज कोरोना के घातक संक्रमण का शिकार होने कारण ऑक्सीजन व दवाओ पर निर्भर रहे, लेकिन दवाओ का असर होने के बाद इन्होने भी दवा योगा प्राणायाम शुरू किया था, आयुष चिकित्सको का कहना है कि 78% संक्रमित दवा के साथ योग पर निर्भर रहे, इसे देखते हुए M. B. B. S. के छात्रो का तनाव कम करने के लिए N. M. C. ने इसके पाठ्यक्रम में जोड़ दिया है. 
नवाचार का उद्देश्य ; भावी डाक्टरों में रोज एक घंटा योग करने की आदत पड़ जाएगी. 
 डाक्टर बनने का सपना संजोए छात्र M. B. B. S.  में प्रवेश लेने के बाद चार साल के लम्बे कोर्स को पूरा करते वक्त डिप्रेशन का शिकार हो जाता है. कई बार तो छात्र आत्महत्या तक करने पर मजबूर हो जाते है, पाली मेडिकल कालेज में भी छात्रो का तनाव दूर करने के लिए सप्ताह में एक दिन योग प्राणायाम करवाया जाएगा, इसका शरीर पर होने वाले प्रभावों के बारे में भी जानकारी दी जायेगी, विशेषज्ञो ने बताया कि योग प्राणायाम के माध्यम से अपने शरीर पर शारीरिक तनाव डालने से मानसिक तनाव दूर होता है. छात्र के जीवन में आने वाले तनाव से डिप्रेशन के शिकार हो रहे है, वे प्रतिदिन 1 घंटा प्राणायाम करे. इसकी मदद से याददाश्त और एकाग्रता बढती है.. 
> एनएमसी के द्वारा नए करिकुलम में मेडिकल विधार्थियों के लिए योग शामिल किया गया है. योग एक जीवन पद्धति है, जो विधार्थियों के समग्र विकास की दृष्टी से उनके लिए उपयोगी साबित होगी > डाक्टर दीपक, प्रिंसिपल मेडिकल कालेज पाली राजस्थान भारत .  



विचारणीय विषय -  भारत में अब भारतीय संस्कृति और शिक्षा का प्रचार होगा, अभी तक कुछ भारत में अंग्रेजी पढ़े युवा केवल तनाव, अवसाद की दवाई M.B.B.S. डॉ की लिखी को मान्य चिकित्सा को ही मानते थे दूसरी पद्दति को नहीं .
मेरा सवाल केवल उनसे जो केवल बहस करना जानते थे . अब ये सवाल उनको भी पूछिये की मनोचिकित्सक इन विधार्थियों के लिए तनाव की दवाई 
Tab FLUXIT M 
Tab TRITIN 40 
क्यों नहीं लिख रहे है . 
भारत के अंग्रेजी शिक्षा में भटके युवा ध्यान रहे भारत में केवल एलोपैथी चिकित्सा पद्धति ही नहीं बल्कि बहुत पद्धतियों का प्रचलन है, आयुर्वैदिक, होम्योपैथी, प्राकृतिक चिकित्सा, योग चिकित्सा, मूत्र चिकित्सा, संगीत चिकित्सा, रंग चिकित्सा, मन्त्र चिकित्सा और यज्ञ चिकित्सा,  इस प्रकार से बहुत वैकल्पिक चिकित्सा भी है. 
विज्ञान किसी की बपौती नहीं है, विज्ञानं पर किसी एक का ही हक़ नहीं है. विज्ञानं के लिए बहुत मार्ग खुले है . 
समलैंगिकता का उपचार दवाई से नहीं होता है, इसलिए अमेरिका मनोचिकित्सक संघ ने उपचार से बाहर किया क्योकि वहा की सभ्यता संस्कृति के मध्य नजर और दवाई से संज्ञान सुधार नहीं होना पाया था, उन्होंने केवल लेबल लगाया था, उपचार, कब से कारण को नहीं देखा, विकल्प नहीं तलाशा. 

जब की संज्ञान सुधार दवाई से नहीं बल्कि बुद्धि जागरण से होता है, 
  बाल यौन शौषण व्यक्ति  समलैंगिक बनता है.
हमनें कारणों को जान उपचार किया और वे सभी ठीक हुए है . 
भविष्य में APA, भी DSM 6,  ICD 12 भारतीय योग-प्राणायाम भी अपनें पाठ्यक्रम में शामिल करेगा .

 

शनिवार, 17 दिसंबर 2022

कैसे आदत अभिविन्यास पैदा किया जाता है ।

 समलैंगिकता का कारण क्या हैं ? 

समलैंगिकता का ईलाज क्यों नहीं, जब की उन लडको के साथ बाल यौन शौषण पीड़ित होने से गुदा मैथुन और मुख मैथुन करवा कर आदि बनाया गया है, समलैंगिक उपचार विरोध करने वाले आप अपने पुत्र / भाई के साथ बाल यौन शौषण का प्रयोग सिद्ध करेंगे, प्रयोग करने से ही विश्वसनीय परिणाम आते वे ही मान्य होते है । जैसे तंबाकू सेवन, गांजा सेवन, अफीम सेवन, कोकीन सेवन और चोरी करना छोटे बच्चों को सिखाया जाता वैसे ही इन आदतों को छुड़ाया भी जाता है ।

एक सममलैंगिक अभिविन्यास के बारे में नाखुश व्यक्ति विषमलैंगिक बनने के लिए उपचार की तलाश कर सकता है । तो क्या उसको क्यों रोका जाएं, उस भुगत भोगी को ही वास्तविक रूप से ज्ञात होता है की उसको कैसे यातना दे के एक अभिविन्यास पैदा किया है ।

माना की अमेरिका में ड्राइवर जिसको बाएं रास्ते ड्राइव करता क्या, वो दूसरे देश में दाएं से बाएं गाड़ी चलाना सीखेगा तो अवश्य चला सकता है, बस धैर्य और संयम रखना होगा तो लगन से आसानी से सिख सकता है जैसे उभयलिंगी अपने आप सामाजिक पारिवारिक वातावरण में रहना चाहता है, जाति धर्म सामाजिक अर्थ संयुक्त परिवार के मान मर्यादा नियमों की परिभाषा और असामाजिक परिवार में मन माने ढंग से जीने की स्वतंत्रता का कोई जाति धर्म नहीं होता इनका अध्ययन भी होना जरूरी है ।।



सोमवार, 12 दिसंबर 2022

समलैंगिकता - आय, आनंद और अज्ञानी ।

 समलैंगिकता - आय, आनंद और अज्ञानी ।

किसी परिवार के सदस्य को बिगाड़ने में सबसे पहले लैंगिक आनंद लेने वाला, दूसरा समलैंगिकता बढ़ावा से कमाने वाला और तीसरा वो जो अज्ञानी अनुसरण करनेवाला ये तीन लोग  सभ्य समाज के भोले भाले किशोर को भ्रमित और गुमराह करने वाले होते है । 

जब किसी बच्चे का बाल यौन शौषण पीड़ित होता और वो अपने परिवार को नही बताता की उसको गुदा मैथुन और मुख मैथुन की लत / आदत लग चुकी उस दौर माता पिता की व्यस्तता और किशोर की जीवन शैली पढ़ने में असमर्थ होते है, बच्चा कक्षा 8 से 12 तक पढ़ाई में ठीक होता फिर पढ़ने में मन नहीं लगता परिवर्तन आने पर परिवार फिर भी ध्यान नहीं दे पाते, शादी का समय आता शादी के लिए बोला जाता तब तक बहुत देर हो चुकी होती है, अब लड़की शादी करने के लिए बहाना बनाता है, कैरियर बनाना है, शादी का मन नहीं, फिर बाद में करूंगा, तब तक विदेश संस्कृति सभ्यता में समलैंगिकता दवाई से ठीक नही किया जाता क्योंकि शराब, अफीम, गांजा, भांग, धतूरा या अन्य गलत लत / आदत को विचारो को नियंत्रण करने की दवाई दी जाती है, ऐसी कोई दवाई नही आती की विचार नियंत्रण की बजाय विचारो को बदल दे । 

मान लीजिए किसी को चोरी करने की आदत हो चुकी तो क्या उसको कोई औषधि / दवाई खिलाकर चोरी की आदत को छुड़ाया जा सकता हैं ? 

रविवार, 11 दिसंबर 2022

क्या आपके बच्चों को भ्रामक शब्दों से गुमराह किया जाए तो ?

  क्या आप सहमत होंगे कि आप आपके नादान किशोर भोले भाले लड़के को बहला फुसलाकर गुदा मैथुन और मुख मैथुन करवा कर, 

कुछ लोग चतुर होते है जो दूसरो के बच्चों को बिगाड़ने में निम्न सहायक, लुभावने बोल बोले जिसकी आयु 18 वर्ष से अधिक हो और "हां, किशोर अक्सर प्यार में पड़ जाते हैं। वे एक दोस्त या समान या विपरीत लिंग के किसी भी व्यक्ति के लिए आकर्षण महसूस कर सकते हैं। किसी के लिए विशेष भावनाएं होना सामान्य है। किशोरों के लिए यह समझना महत्वपूर्ण है कि ऐसे रिश्ते आपसी सहमति, विश्वास, पारदर्शिता और सम्मान पर आधारित हैं। ऐसी भावनाओं के बारे में उस व्यक्ति से बात करना ठीक है जिसके लिए आप उन्हें रखते हैं लेकिन हमेशा सम्मानजनक तरीके से।

दूसरा पहलू अगर आपकी किशोर लडकी को इस प्रकार से कोई प्रेरित करें जो 18 साल से अधिक लड़का या लड़की हो तो आप उसको सहमति देंगे ? 


शनिवार, 3 दिसंबर 2022

भारत में समलैंगिक अनुसंधान हेतु ।

 सेवामे,         

                                श्री मान सुप्रीम कोर्ट जज साहब 

                                भारतीय सुप्रीम कोर्ट दिल्ली ।

विषय - बाल यौन शौषण पीड़ित समलैंगिक संबंध बनाने की आदत हेतु, रोक थाम हेतु ।।

मान्यवर जी,

                सविनय नम्र निवेदन है कि बाल यौन शौषण होना आम बात है, जब किसी छोटे लड़के का बाल यौन शौषण होता तो जब उसके माता पिता या अभिभावक को पता चलता तो उसको उस सदमे से उभरने के अवसर मिल जाता, परंतु जब गुप्त रूप से किसी बालक के साथ उसके निकट रिश्तेदार, पड़ोसी या कोई जानकर गुदा मैथुन या मुख मैथुन क्रिया कलाप करता / कराता है, तो ये एक आदत बन जाती फिर ये आदत छूटती नही है । इस प्रकार से छोटे बच्चे समलैंगिकता के शिकार हो कर अपनी आदत छोड़ना नहीं चाहते । कुछ तो सामाजिक पारिवारिक जीवन शैली में होने से सुधरने का प्रयास करते, कुछ सुधारण नही चाहते । जो बच्चो का बाल यौन शौषण करता वो ये बात को बोलता की समलैंगिकता जन्मजात होती है अथवा भ्रम में रहने वाले। किसी भी एक बालक के साथ एक से अधिक बार गुदा मैथुन हो जाता उसकी आदत लग जाती, फिर छूटनी नही । ये अनुसंधान मैने तीन साल लगातार किया है ।

जन्म से कोई समलैंगिक होता होगा, पर इसका परीक्षण भी आवश्यक है 

अगर कोई जैविक शारीरिक कारण से समलैंगिक है तो जैविक अनुसंधान होना चाहिए की प्रमाण क्या है 

पर्यायवरण के कारण हो तो भी उसका अध्ययन होना चाहिए 

*बाल यौन शौषण पीड़ित समलैंगिक भी होते इसका प्रमाण भी होना चाहिए । अनुसंधान भी होना चाहिए

       श्री मान जी जब ये बाल यौन शौषण पीड़ित को समलैंगिकता की आदत लग जाती है तो ये बालक से बड़े व्यक्ति हो जाते तो इस आदत को छोड़ नही सकते इनको एक प्रकार का जुनून पैदा रहता है 

जब ये बड़े होते तो इनके माता पिता शादी के लिए बातचीत करते तो इनको गुस्सा आता और शादी नही करना चाहते, जब की इनके साथ बाल यौन शौषण हुआ होता जैसे की छोटे बच्चे को चोरी करना सिखाया जाता, चरस, गांजा, अफीम और भांग के नशे का आदि बना दिया जाता और ये आदत फिर छूटती नही है । इसी प्रकार से बाल यौन शौषण पीड़ित समलैंगिक बनते है । ये अनुसंधान किया जा चुका है साहब 

         श्री मान निम्न कारणों का अध्ययन करना भी जरूरी है 

समलैंगिकता बाल यौन शौषण पीड़ित व्यक्ति भारत में ज्यादातर है, क्योंकि ये वासना निकालने का सुरक्षित स्थान होता है, लड़की या महिला के साथ हो तो गर्भवती होने का खतरा होता है, इस कारण ये बालक सरलता और सुलभता से मिल जाते है । जो समाज की लिए एक खतरा है ।

पुरुष वैश्यावृति को बढ़ावा मिल रहा है, ये आजकल बहुत सुनने और पढ़ने को आ रहा है ।

समलैंगिक संबंध स्थापित करने वालों में आजकल एड्स अधिक होते का समाचार पत्र में पढ़ने को मिल रहा है 

जो लोग ये कहते समलैंगिक जन्म से होता उनका भी अनुसंधान होना चाहिए वे क्यों कहते, उनके पीछे क्या स्वार्थ पूर्ति हो रही ? जब की समलैंगिक बनने के कारणों को भी ढूंढा जाना चाहिए 

बच्चे किस आयु में हस्त मैथुन करना चाहिए, हस्त मैथुन की प्रेरणा दायक बात क्या समाज की लिए, कानून के लिए अच्छी है ?  ( लगभग सभी हस्त मैथुन करने लड़के 12 वे 14 आयु में गलत प्रेरणा की वजह से सिख लेते जो वैवाहिक जीवन खराब कर देते, इसके कारण काफी नपुंसकता आ जाती हैं । ) इसलिए समाज में ब्रह्मचर्य आश्रम का ज्ञान आवश्यक होता है 

Gay समलैंगिक में एक दूसरा प्रमुख कारण ये होता है की बाल अवस्था में गलत प्रेरणा के कारण हस्त मैथुन करना सीख जाते है जिसके कारण लडको में विपरित लिंग की चाहत नहीं होती, जब वीर्य को हाथ से निकाल दिया जाएगा तो कैसे व्यक्ति को स्त्री के प्रति आकर्षण और लगाव रहेगा 

समलैंगिक आदत होने के दो मूल कारण पाए गए है,

1.बाल यौन शौषण पीड़ित होना और उसके साथ

2.हस्तमैथुन का बाल अवस्था में गलत प्रेरणा से सीखना ।

ये दोनों आदत एक बाध्यकारी जुनून होता है इन दोनो आदत को चाह कर भी नहीं छोड़ सकते ।

उपरोक्त *चार *नंबर से पीड़ित काफी लोग मुझ से मिले जिनके साथ बाल यौन शौषण हुआ जिसके कारण उनमें समलैंगिकता की आदत / लत लगी । इस लोगो को सदमे से उभरने का अवसर मिलना चाहिए ये सभी इस आदत को आसानी से छोड़ सकते है ।

अतः समलैंगिक विवाह को मान्यता देने से पूर्व भारत में भारतीय जनता को भी विचार करने, विचार रखने का अधिकार दीजिए । कारण किसी अज्ञात परिवार के साथ गलत नहीं हो और किसकी का बेटा, किसी का वंश खराब नहीं हो । इन दो व्यक्तियों में से किसी के साथ बाल यौन शौषण पीड़ित हुआ की नहीं ।

समलैंगिकता की लत से कैसे आदि हुए और किस प्रकार से ये सभी समलैंगिकता की आदत से छुटकारा पाया । ये संपूर्ण प्रमाण आप देख सकते है ।

WWW. Raghunath_Singh.blogspot.com  जो अभी लिखा जाना बहुत बाकी है 

अब्बास खान लिखित "विरोध" पुस्तक का अध्ययन कीजिए, ® पर आपका कोई बच्चा यौन शौषण के कारण समलैंगिक बन जाए तो .......notionpress.com .। पढ़िए 

 पाकिस्तानी मौलवी  engineer Muhammad Ali Mirza,  https://youtu.be/hoFRGWACtjY ka अध्ययन किया जाए ।

मेरे अनुसंधान पढ़िए

समलैंगिक से विषम लैंगिक होने पर हार्दिक बधाई

प्रयोज्य जुलाई 2021 अंतिम सप्ताह मे पिता बना और एक वंश वृक्ष बन पितृ ऋण से मुक्त होकर शानदार गौरवशाली ज़िंदगी जी रहा है।  पुत्र होने की बधाई और शुभ कामनाए देता हूँ ।

https://raghunath-singh.blogspot.com/2020/06/blog-post.htm

शाब्दिक त्रुटि के लिए क्षमा चाहता हूं, आशा करता हूं, आप और भारत की जनता समलैंगिक विवाह कुरीतिया पर अमल किया जाएगा और भारतीय संस्कृति सभ्यता को बचाया जाएगा ।

निम्न संदर्भ को देखा जाना जरूरी समझता हूं 

पाकिस्तानी मौलवी साहब का वीडियो

#विरोध पुस्तक के लेखक

अब्बास इनकी बात से मैं भी सहमत हूं, और समलैंगिक उपचार का विरोध करने वालों को मैं भी अक्सर कहता हूं 

                                    निवेदक  भारतीय नागरिक

                                       रघुनाथ सिंह राणावत

                             सापोल, जिला राजसमंद राजस्थान

।  ।  ।।l , ।।।       ।।।।  ।।।।।?।  ।।,

गुरुवार, 27 जनवरी 2022

कैसे 8-10 वर्ष की आयु मे समान आयु वाले से समलैंगिक संबंध बने ?

 प्रयोज्य के परामर्श लेने की दिनांक - 13 / 12 / 21 

प्रयोज्य का नाम - गोपनीय रखने के कारण - 521821

प्रयोज्य की आयु -  25 वर्ष 

प्रयोज्य कार्यभार - किराना का व्यापारी 

प्रयोज्य की समस्या - समलैंगिकता की आदत से छुटकारा पाना 

निदान - प्रयोज्य समलैंगिकता की आदत से परेशान था । शादी करने का मन करता परंतु लड़की मे कोई आकर्षण नहीं होता । प्रयोज्य3-4 कक्षा मे पढ़ता था उस समय 8-10 वर्ष की आयु मे अपने काका के लड़के के साथ आपस मे दोनों ने एक दूसरे के साथ समलैंगिक संबंध बनाए थे । नकारात्मक विचार आते थे । डर, चिंता, तनाव हमेशा सताते थे । बाहर भीड़ वाले स्थान जाने मे डर लगता था । एकांत अच्छा लगता है, लगातार विचार आते की मै किसी काम का नहीं हूँ, घर से निकल जाना चाहिए । समलैंगिक संबंध दो तीन बार ही बनाए थे । लड़की जैसे सोचता था, लड़कियो जैसे जीवन शैली खेले थे । 14-15 साल की आयु मे हस्त मैथुन करना सीखा था । मन मे विचार आता कई कोई पूछ तो नहीं लेगा । एक स्वयं होम्योपैथी दवाई ली pulsatilla आराम नहीं मिला । दो साल पहले चिकित्सक  केलकर से तीन महिना का इलाज लिया, Qutam 25 mg, Estomin  sf tab । दवाई से अच्छा लगता था, परंतु डरता था । प्रयोज्य के एक बड़ा भाई था, दो बड़ी बहिने थी । 

इलाज पहले लेना चाहता था परंतु चिकित्सक कहा, ईलाज कहा होता मुझे मालूम नहीं था । 

निष्कर्ष - प्रयोज्य ऑनलाइन परामर्श लेने के बाद उसकी तबीयत ठीक है । अब लड़की और औरत अच्छी लगती है। अब समलैंगिक बुरे लगते है । अब आत्म विश्वास अच्छा, बहुत अच्छा हो गया है । अब कोई चिंता, डर, तनाव नहीं रहता । अगर कोई भी व्यक्ति संज्ञानात्मक गलत सीख लिया गया हो तो, वह एक आदत बन जाती और आदत को दवाई खाने से नहीं सुधारा जा सकता है । इसके लिए नए तरीके से वापस सीखना पड़ता है ।   

सामाजिक संदेश - अपने परिवार के बच्चो को समाज मे आना जाना रखना चाहिए, जिससे सामाजिक रीतिरिवाजों संस्कारो का ज्ञान हो सके । बच्चो को बाल यौन शोषण से पीड़ित लड़को को ये जो दिक्कते सामने आ रही है, इस अनुसंधान से ज्ञात ये ही होता की छोटे लड़को को अपने निजी अंगो को कोई दूसरा आदमी इसको नहीं छूए जैसे लिंग, यौनि, गुदा और होठ । जब कोई शरीर पर निजी अंगो को हाथ छूने की कोशिश इस प्रकार की चेष्टा करे तो उसका विरोध करना चाहिए और अपने माता पिता और अभिभावक को बताना चाहिए । 

ऑनलाईन परामर्श दाता 

वाट्स एप 091 98290 85951 

बुधवार, 26 जनवरी 2022

कैसे बचपन मे समलैंगिक की आदत लग गई ?

 प्रयोज्य के परामर्श लेने की दिनांक - 03 / 12 / 21 

प्रयोज्य का नाम - गोपनीय रखने के कारण - 5217 

प्रयोज्य की आयु -  23 वर्ष 

प्रयोज्य कार्यभार - बेरोजगार 

प्रयोज्य की समस्या - समलैंगिकता की आदत से छुटकारा पाना 

निदान - डर, तनाव और चिंता से मन नहीं लगता । समलैंगिकता की आदत लग गई, कक्षा सात वी मे पढ़ता था, तब साथी सहपाठी मे गुदा मैथुन किया था। घर की छत पर दो दोस्त आपस मे सो रहे थे तो आपस मे समलैंगिकता के विचार आए और दोनों आपस मे गुदा मैथुन किया था । समझ नहीं थी की इस काम के आगे क्या परिणाम होंगे । भीड़ मे जाने का मन नहीं करता, तनाव ज्यादा होता है, दोस्तो के साथ अच्छा लगता है । मन मे विचार आता की मै ऐसा क्यो, ऐसा क्यो होता है, सब लड़को जैसा मै क्यो नही हूँ । अब तब दो लड़को के संपर्क मे आया । कक्षा 8 मे पढ़ता था तब से हस्त मैथुन करना सीख लिया था, कुछ लोगो को देख कर सीख लिया था, रात मे दो बार हस्त मैथुन करता हूँ। लोगो को देख घबरा जाता हूँ की कई कोई बोल नहीं दे, लोग मेरे बारे मे बात करते होंगे । आत्म हत्या के विचार आते है आगे कुछ दिखता नहीं ।  [ एक बार आत्म हत्या की कोशिश भी की ] ।  [ आत्म हत्या की कोशिश की बात अंतिम परामर्श के बाद बताई थी ]

निष्कर्ष - अब परामर्श लेने के बाद तबीयत ठीक है, अब लडकी और महिला अच्छी लगती है। अब शादी करने का मन करता है । समलैंगिक को नजर अंदाज कर लेता हु, अब समाज मे जाना और भीड़ मे जाना अच्छा लगता आहे । पहले घर मे झगड़ा होता था, अब घर मे झगड़ा नहीं होता, पहले गुस्सा आता था, अब गुस्सा नहीं आता । भाई और माता ने बोला अब तेरे मे परिवर्तन बहुत आया है । पहले तनाव मे रहता था, अब तनाव मुक्त हूँ । 

सामाजिक संदेश - अपने परिवार के बच्चो को समाज मे आना जाना रखना चाहिए, जिससे सामाजिक रीतिरिवाजों संस्कारो का ज्ञान हो सके । बच्चो को बाल यौन शोषण से पीड़ित लड़को को ये जो दिक्कते सामने आ रही है, इस अनुसंधान से ज्ञात ये ही होता की छोटे लड़को को अपने निजी अंगो को कोई दूसरा आदमी इसको नहीं छूए जैसे लिंग, यौनि, गुदा और होठ । जब कोई शरीर पर निजी अंगो को हाथ छूने की कोशिश इस प्रकार की चेष्टा करे तो उसका विरोध करना चाहिए और अपने माता पिता और अभिभावक को बताना चाहिए । 

ऑनलाईन परामर्श दाता 

वाट्स एप 091 98290 85951 

मंगलवार, 25 जनवरी 2022

कैसे 13-14 साल की आयु मे बाल यौन शोषण के समलैंगिक बना ?

 प्रयोज्य के परामर्श लेने की दिनांक - 23 / 10 / 21 

प्रयोज्य का नाम - गोपनीय रखने के कारण - 511621 

प्रयोज्य की आयु - 23 वर्ष 

प्रयोज्य कार्यभार - BA तृतीय वर्ष 

प्रयोज्य की समस्या - समलैंगिकता की आदत से छुटकारा पाना 

निदान - प्रयोज्य को समलैंगिकता की एक आदत लग चुकी थी, समलैंगिक लड़के अच्छे लगते थे । लड़कियो मे कोई रुचि और आकर्षण नहीं था । जब प्रयोज्य 13-14 वर्ष की आयु का था उस समय उससे 5 वर्ष बड़ा भाई [ मौसी का लड़का ] ने गुदा मैथुन कर दिया, उस समय कोई विरोध नहीं कर सका क्योकि इतनी समझ नहीं थी, फिर एक आदत हो गई थी । डर, चिंता हमेशा लगी रहती थी । भीड़ मे आने जाने से डर लगता था । लगातार विचार आए लोग मेरी बाते करते होंगे, लोग क्या सोचते होंगे, मेरे बारे मेरी ही बात करते होंगे । 

निष्कर्ष - अब शादी करने का मन करता है। अब तबीयत अच्छी और सामान्य ठीक है । लड़की अच्छी लगती है, इन मे आकर्षण होता है । डरना छोड़ दिया है । उसने बताया की निश्चिय कर लो तो 100 % समलैंगिकता की आदत छुट जाती है । अब आत्म विश्वास अच्छा और बढ़ गया है । 

सामाजिक संदेश - बच्चो के चेहरे के हावभाव को अवश्य देखना चाहिए और बच्चो को बाल यौन शोषण से पीड़ित लड़को को ये जो दिक्कते सामने आ रही है, इस अनुसंधान से ज्ञात ये ही होता की छोटे लड़को को अपने निजी अंगो को कोई दूसरा आदमी इसको नहीं छूए जैसे लिंग, यौनि, गुदा और होठ । जब कोई शरीर पर निजी अंगो को हाथ छूने की कोशिश इस प्रकार की चेष्टा करे तो उसका विरोध करना चाहिए और अपने माता पिता और अभिभावक को बताना चाहिए । 

ऑनलाइन परामर्श दाता 

वाट्स एप 091 98290 85951