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मंगलवार, 16 मई 2023

समलैंगिक 14 -22- 67

 14 -22- 67

प्रयोज्य 01 / 09 / 2022 सम्पर्क किया . 

कार्यभार - सैनिक 

आयु - 28 वर्ष  --

शादी -  शादीशुदा, 1 संतान डेढ़ वर्ष 

समस्या - समलैंगिक [ उभयलिंगी ] 

पहली बार गुदा मैथुन - कक्षा 6 में पढ़ता 12-13 वर्ष की आयु में. बहला फुसलाकर गुदा मैथुन किया . 

प्रयोज्य की उस समय 12-13 वर्ष लगभग .

यौन शोषणकारी -  चचेरा भाई  27-28 वर्ष का 

अब तक 3 व्यक्ति के संपर्क में आया . 

अपडेट - ठीक है . 13-05-23 .

सोमवार, 10 जनवरी 2022

क्यों आखिर सुधारना नहीं चाहता ?

प्रयोज्य के परामर्श की दिनांक - 19 / 01 / 21 

प्रयोज्य का नाम - गोपनीय रखने के कारण 37190121 

प्रयोज्य की आयु - 26 वर्ष 

प्रयोज्य की वैवाहिक स्थिति - शादीशुदा 

प्रयोज्य शिक्षा -  अँग्रेजी माध्यम ग्रेजुएट 

प्रयोज्य का व्यवसाय - प्रायवेत नौकरी 

प्रयोज्य की समस्या - समलैंगिक से छुटकारा नहीं चाहता । 

निदान - प्रयोज्य कक्षा 7 वी मे पढ़ता था । उस समय आयु 13 / 14 वर्ष का था, उस समय 22 / 23 साल का लड़के मे बहला फुसला कर गुदा मैथुन कर दिया, अब बाध्यकारी एक जुनून की तरह गुदा मैथुन करना अच्छा लगता है, समलैंगिक अच्छे लगते परंतु सभी नहीं अपनी पसंद का समलैंगिक जो अच्छा लगता उसके साथ गुदा मैथुन करने की ईच्छा होती है । 2013 मे अपने आप फेसबुक से समलैंगिकता की जानकारी मिली, इन्टरनेट से समलैंगिक की विस्तृत जानकारी मिली थी, बचपन मे बड़ी बहिन के कपड़े मम्मी पहनाती थी । पूर्व मे दो मनोवैज्ञानिकों से परामर्श लिया था ।  शादी किए 14 महिना हुआ, पत्नी के साथ पहली बार मैथुन करने की कोशिश मे असफल हुआ, फिर डर बैठ गया । लोगो के बीच मे नहीं रहना चाहता, जल्दी निकालना चाहता हुआ, आत्म हत्या के विचार आते है । मम्मी पापा के लिए जीना चाहता हूँ । मम्मी पापा एक अलग कमरे मे सोते थे, एक दिन प्रयोज्य और उसकी बहिन, के साथ हमेशा सोते थे, एक रात्री मे पिता ने आरोप लगा दिया की भाई बहिन आपस मे मैथुन कर रहे हो, उसी दिन से पिता जी से नफरत हो गई । पिता शक की नजर से हमेशा देखते थे, 2004-2005 भाई बहिन के साथ का आरोप पिता जी ने लगा दिया था । प्रयोज्य ने मान लिया मुझे ठीक नहीं होना, उसका कहना था मुझे नहीं सुधरना, पत्नी के साथ एक बिस्तर पर सोता पर पत्नी से बात नहीं करता, ऑनलाईन उभयलिंग लड़को से बात करता था, घरेलू आवश्यकता के सामान खरीद लाता, पत्नी को बोला तुम जा सकती हो, साथ रहना चाहती तो मुझे आपत्ति नहीं है। उसका हमेशा एक ही वाक्य रहा मुझे समलैंगिक बने नहीं रहूँगा,  समलैंगिक संबंध नहीं रखूँगा और पत्नी चाहे साथ रहे पर किसी भी प्रकार का मैथुन नहीं करूंगा । 

पारिवारिक निदान - प्रयोज्य के पिता अपनी जवानी मे राज्य मे पुलिस की नौकरी लगाने के बाद अपनी पत्नी को शहर लेकर आ गए, पत्नी सरकारी अध्यापिका की नौकरी लग गई, एक लड़की दो लड़के हो गए, फिर कभी अपने पैतृक गाँव नहीं गए, भाई चारा किसी से नहीं था, अपनी पुलिस की नौकरी होने के कारण समय नहीं मिलता, नौकरी और घर के अलावा कही भी आना जाना नहीं था, बच्चे जैसे बड़े होते गए अँग्रेजी स्कूल मे पढ़ते अपनी शिक्षा ली, बड़ी बहिन की शादी हो चुकी थी, प्रयोज्य ने भी शादी की, शादी के बाद ससुराल गया, पत्नी अपने वैचारिक आधार पर मन पसंद नहीं थी । बहन, बहनोई बड़े सुलझे दिमाग के थे, छोटा भाई भी संतुलित था, प्रयोज्य को पढ़ाई के लिए बाहर भेजा वहा किसी ने बहला फुसलाकर गुदा मैथुन किया उसकी लत लगी साथ, पिता के द्वारा हमेशा प्रताड़ित होना एक स्त्री संबंध मे अरुचि हो गई थी, पिता पुत्र मे आपस मे नहीं बनती थी, छोटा भाई बाहर नौकरी करता, घर मे चार लोग प्रयोज्य के पिता, माता, पत्नी और खुद, पर आपस मे किसी के तालमेल नहीं था, पिता पुलिस की नौकरी से रीडयार्ड हो गए थे, माता अध्यापिका जरूर थी परंतु सुबह का अभिवादन एक दूसरे को कोई नहीं करता था, पिता नौकरी से निवृत जरूर हुए परंतु स्वभाव से आज भी कडक पुलिस वाल हो जैसे रहते है, पदौसी घर पर आता तो प्रयोज्य पर गुदा मैथुन का शक करते है, प्रयोज्य की माता ने बताया की मेरे पति मुझे किसी दूसरे आदमी से साथ समान्य बात करते देखते तो शंका करते किससे बात करती क्यों बात करती । प्रयोज्य के पिता अपनी कमाई से घर चलाते, प्रयोज्य भी रसोई घर का समान ले आता । प्रयोज्य के पिता से पूछा की आप की पत्नी और बेटे की कमाई किसके पास रहती तो बोले अपने अपने पास, पत्नी रुपयो का क्या करती तो बोले मुझे नहीं मालूम। प्रयोज्य सब्जी पकाने मे कुशलता हासिल थी, कभी अपनी पसंद का खाना बना भी लेता, पत्नी के हाथ का खाना भी खाता, पत्नी प्रयोज्य के कपड़े भी धोती थी, पत्नी साथ रहे कोई आप्ति नहीं है। प्रयोज्य के पिता पुत्र वधू को उसके पीहर जाने देना नहीं चाहते, क्योकि दहेज का मुकदमा होने का डर रहता था। पिता बो बताया गया की आपका लड़का शारीरिक से घर पर है पर मानसिक तौर से ये खो गया है, जैसे मेले मे बालक अपने अभीभावक का हाथ छुडाकर अपने आंखो से देखि वस्तु के लिए भटक जाता और अभिभावक भी अपनी चेतना दूसरी जगह लगाई घूमते है, जब याद आता तो पता चलता मेरा पुत्र किधर खो गया, इस बात पर पिता ने बताया की मेरा पुत्र इसी प्रकार उसके बचपन मे हम किसी शादी मे नदी पार किसी गाँव मे जा रहे थे तो बारिश आ गई जल्दबाज़ी मे हम अपना बेटा भूल गए पति पत्नी एक दूसरे पर भरोषे रहे, जब चेतन अवस्था मे आए तो पता चला की पुत्र कहा है, नाव मे, बस मे या स्थानीय बाजार मे फिर ढूंढा तो किसी दुकानदार के पास बैठा बिस्कुट खा रहा था, पुत्र रो भी नहीं रहा था, अर्थात पिता पुत्र आज भी अचेतन अवस्था मे जी रहे है । 

निष्कर्ष - संयुक्त परिवार का अभाव  था, पारिवारिक और सामाजिक रिश्तो मे आने जाने का अभाव था, प्रयोज्य को एक बाध्यात्मक जुनून हो चुका था, अब पिता का शक बहुत दुख देता था, पिता भी हठीला और जिद्दी हो चुका एक ही बात मेरे बेटे ने मेरी बेटी के साथ मैथुन किया, जब की बहिन भाई दोनों साथ मैथुन करने का साफ साफ इंकार करते ऐसे कुछ भी नहीं हुआ, ये बात प्रयोज्य को बड़ी दर्द भरी लगती है । एक मकान मे चार लोग रहते है, चारो किसी से भोजन के मतलब के अलाव कोई किसी से बात नहीं करता है। प्रयोज्य के इच्छा अनुसार मकान नहीं बना बताया, उसके ईच्छा के अनुसार डाईनिंग लगाने की बात मे सुधार करवाया, फिर बोला गमले मे कोई पनि नहीं पिलाता, तो उसकी भी निगरानी बताई, चारो लोग एक दुसरे को आपस मे सुबह का अभिवादन करना नहीं आता उसको बताया, प्रयोज्य के बहन बहनोई को बुलाकर सभी साथ साथ भौजन करना बताया, देव स्थान और पर्यटन स्थान घूमने के सुझाव मे स्वीकार किया, पर्यटन स्थान घूमने से पूरे परिवार मे रोचकता रही, नया अहसास हुआ । पर पिता पुत्र का अहंकार आपस मे मेल नहीं खाता, पिता पूर्व की बाते भूलने मे असमर्थ और पुत्र भी पूर्व की बाते भूलने मे असमर्थ, ये आपस मे बाध्यकारी दोनों का अहंकार प्रयोज्य को सुधरने नहीं दे रहा है, प्रयोज्य के पिता ने सामाजिक और सांस्कृतिक जवाबदारी नहीं निभाई । परिवार एक घर नहीं होकर होटल बन चुका है । 

अगर पति पत्नी को साथ रहना तो धेर्य की आवश्यकता है, पिता को पूर्व की बातों को भूलना होगा, पुत्र को खोया प्यार देना होगा, घर परिवार मे मेहमानो की ईज्ज्त करनी होगी, आने जाने वाले और घर के सदयों पर शंका करना बंद करना होगा, पारिवारिक परामर्श से परिवार मे धीमी गति से संचार हो रहा उसको बढ़ाने और गति देने की आवश्यकता है । प्रयोज्य को सांसारिक और सामाजिक नैतिक ज़िम्मेदारी सीखने की आवश्यकता है, ये सीखते ठीक हो सकता है, ईंटरनेट से भी दूर रखने की आवश्यकता है, घर मे समय पर सोए, हास्य विनोद की भी आवशयता है, परिवार मे घुल मिल कर वोल चाल के साथ सामाजिक आना जाना रहना जरूरी है । 

परामर्श दाता 

What's app 091 98290 85951  

शनिवार, 4 दिसंबर 2021

समलैंगिकता का ईलाज होता है।

 फेसबुक मित्रो को हार्दिक बधाई, धन्यवाद आप लोगो ने धैर्य रख कर मुझे चाहे अनचाए, रुचि अरुचि से मित्रता रखी और कुछ भगोड़े साबित हुए और नए मित्रो को लाने में सहायता की सभी का आभार धन्यवाद । समलैंगिक अनुसंधान लगभग पूरा हुआ जिसमे छोटे बड़े परिवार के पीड़ित सदस्य को जो एक गंदी लत लग गई थी जिसके कारण बल पूर्वक या बहला फुसलाकर गुदा मैथुन कराने की समस्या हल हुई, ये शौध पत्र लिखने में अभी समय लगेगा, जब भी लिखा जाएगा सार्वजनिक किया जाएगा ।।



शुक्रवार, 17 जुलाई 2020

समलैंगिकता यौन आवेग

यौन आवेग / प्रेरणा

समलैंगिकता

संसार में जहाँ अभिभावको के दुवारा अपने बच्चो को नैतिक व् जैविक समस्या जो यौन शिक्षा ब्रह्मचर्य का पालन करना नहीं सिखाया जाता है। तब उनके बच्चे अपने विकसित होते कौमार्य का दुरपयोग करते पाए गए है, दूसरे वो बच्चे बाल्यकाल में गुदा मैथुन का शिकार होने के बाद में एक प्रकार के गुदा मैथुन की एक लत लग जाती है। संसार से सभी धार्मिक समुदाय ने समलैंगिकता को कोई मान्यता प्रदान नहीं की, पर अपवाद आजकल के कानून व् नेताओ के लाभ वोटबैँक और बजट आवंटन में भूमिका संदेह पूर्ण लगती है। आजकल बेहद निर्लज, बेशर्म, और अनुशान, मान मर्यादा के को फर्क नहीं समझना आता है । माता पिता और दादा,नाना के गौरव को बताया भी नही जाता है । आजकल की पढ़ाई लिखाई मे गुरुकुल की शिक्षा प्रणाली मिटा दिया गया है। आधुनिक शिक्षा मे व्यवहारिक, सामाजिक और नैतिक शिक्षा को पूर्णतया बंद कर दिया गया है । फिर बढ़ते भौतिक वाद मे आर्थिक उपार्जन मे व्यवस्था की स्पर्धा के कारण अपनी औलाद को आधुनिक शिक्षा के अलावा पुश्तैनी परिचय को भुला दिया जिसके कारण माता-पिता व बच्चो के अपने अपने अहमभाव विकसित हो गए और जब ये पता चला की उनका लड़का- लड्की समलैंगिकता का दीवाना हो चुका हो एक आदतन अभ्यासी हो चुका है। फिर किसी जानकर, मनोवैज्ञानिक या गूगल ढूँढने पर पता चलता की समलैंगिकता प्राकृतिक है, क्योकि आजकल इंटरनेट पर जो लिखा गया काफी लेख केवल कॉपी पेस्ट नकल होती है । स्वयं का कोई अनुसंधान नहीं होता है। फिर उनके पास केवल अनुसंधान कोई शब्दावली नहीं होती है, क्योकि इन भूले भटके या भ्रम मे जीते लोगों के लिए बिना समझाए सीधे उनका समर्थन करके सरलता से दो बोल दिया गया और बोल दिया जाता हे, क्योकि वो लड़के-लड़की उनकी औलाद नहीं थी।   

शुक्रवार, 10 जुलाई 2020

गुदामैथुन समलैंगिकता की समस्या का ईलाज हुआ ।

समलैंगिकता >>> बाल्य काल मे रिश्तेदार ने बलात्कार करने के बाद एक ही मनोवृति हो चुकी ।

1.  मैथुन अभिप्रेरणा ओर निष्पादन [ Sex Motivation and Performance ]
           शोधकर्ता  डाक्टर रघुनाथ सिंह राणावत
           Dietitian & psychologist
          माता आयुर्वेदिक दवाखाना, सापोल, राजसमंद, राजस्थान ।
2. प्रयोज्य परिचय –
प्रयोज्य का नाम - 162 
यौन – पुरुष
आयु – 20  
व्यवसाय - बेरोजगार 
शिक्षा -  BA दूसरा वर्ष विधार्थी  [ प्रयोज्य का नाम गोपनीय रखा गया है । ]
3॰ समस्या परिचय
प्रयोज्य समलैंगिकता से पीड़िता हो चुका अब इस गलत आदत को कैसे छोड़े किस से उपचार कराये, इलाज के लिए रुपया कहा से लाये । इसलिए उसने गूगल ऑनलाइन ढूंढा तो ज्ञात हुआ की अगर आप इस प्रकार कम आयु से पीड़ित है, तो अपने माता पिता को बताओ, प्रयोज्य ने अपनी दादी को बताया तो दादी रुपए दे के मदद की । https://www.youtube.com/c/DrRaghunathSinghRanawat/videos   
6 वर्ष तब 16 वर्ष का एक रिश्तेदार ने बलपूर्वक गुदा मैथुन कर दिया था, और मुख मैथुन भी करवाया था, फिर लगभग 11 वर्ष का हुआ तो कक्षा 6 मे पढ़ता उस समय लगभग 20 - 21 वर्ष के एक रिश्तेदार ने तीन बार गुदा मैथुन किया लिंग पर चुंबन देना, लिंग को मुह मे देना, ये आदत सिखा दिया गया था, दो लड़को से गुदा मैथुन किया और गुदा मैथुन करवाया था। इसी तरह लगातार तीन अन्य व्यक्तियों से संबद्ध हो गए । 
तनाव होने पर नींद नहीं आती, नींद मे बेकार सपने आते, सपनों मे लड़को के साथ समलैंगिक मैथुन होना ही देखता था। 
  ( 1 ) समस्या / कठिनाईया - लड़को के देख कर समलैंगिकता मैथुन की इच्छा होती फिर चिंता, भय, डर सताने लगा, आत्मविश्वास कमजोर होने लगा, लड़कियो मे कोई रुचि नहीं होती थी । 
  ( 2 ) जीवन यापन के लिए लक्ष्य है की विदेश जाने की बड़ी चाहत होती है । 
  ( 3 ) व्यक्तित्व - प्रयोज्य का साधारण व्यक्तित्व था, स्वभाव अशांति प्रिय था, घर मे लड़ाई झगड़ा करना जानता था। परिवार मे धमकी देना आता, रूठता या नाराज होना जानता था । 
बाल्य जीवन से संज्ञानात्मक प्रेरणा और प्रोत्साहन का प्रभाव मैथुन शिक्षण और निष्पादन मे कई रूपो मे पड़ता है। मैथुन सफलता, असफलता, पुरुस्कार, परिणाम के ज्ञान आदि प्रोत्साहन के अनेक रूप है। सहयोग, स्पर्धा, प्रतियोगिता इत्यादि भी प्रोत्साहन के ही रूप है। इनका निश्चित प्रभाव व्यक्ति के मैथुन शिक्षा तथा निष्पादन पर पड़ता है ।
( 1 ) तत्परता से लाभ -- विषम लैंगिक होने के लिए परामर्श के समय जब सही तत्परता रही तब विषम लैंगिक निर्माण के विचार होता जाता था, तब प्रयोज्य सही प्रतिक्रिया विचार करने और समलैंगिक विचारो से अपने आप को बचाने लाभ करता था ।
( 2 ) तत्परता की हानि -- गलत तत्परता उत्पन्न विचार होने से प्रयोज्य गलत दिशा मे प्रयास के विचार आते थे, जिससे समस्या समाधान कठिन लगता था और समस्या के विचार बदल नही जाते तब तक तत्परता को छोडकर सही दिशा मे सक्रिय नही होता था ।

4॰ उद्देश्य –
प्रस्तुत अनुसंधान का उद्देश्य शिक्षण के अभ्यास से प्रयोज्य के वैवाहिक दांपत्य जीवन मे महिला के प्रति आकर्षण निष्पादन पर परिणाम के ज्ञान [ अभिप्रेरणा ] के प्रभाव को सीखना है । उदेश्य व्यक्ति के ज्ञानात्मक सीखने मे धनात्मक स्थानातरण की घटनात्मक प्रदर्शन का अनुसंधान किया । ओनलाइन परामर्श मोखिक मे धनात्मक स्थानांतरण वास्तव मे उद्दीपक तथा प्रतिक्रिया की समानता पर आधारित हुआ ।

5॰ परिकल्पना – मेरे संगत अध्ययनो के आलोक मे परिकल्पना बनायी की परिणाम के ज्ञान [ अभिप्रेरणा ] के प्रभाव को दिखाना है । जो दो क्रिया के उद्दीपक एकांश भिन्न तथा प्रतिक्रिया एकांश अभिन्न होते है, तो उनके बीच धनात्मक स्थानांतरण होता है । [ समलैंगिकता व्यवहार तथा विचारो का प्रभाव वाला व्यक्तित्व आसानी से बदले जा सकते है । ]
6॰ अनुसंधान की कार्य प्रणाली –
मौखिक अभ्यास के साथ अनुसन्धानात्मक अभिकल्प
योजना – प्रयोज्य के पास एक स्मार्ट फोन, बिना रुकावट बेजिझक स्थान का चयन कर के एक निश्चित समयावधि तय किया गया था । महीने मे 10 ऑनलाइन परामर्श नियंत्रित अवस्था मे प्रयोज्य समझा दिया गया था । फिर प्रयोज्य से अंतनिरीक्षण प्रतिवेदन  लिया गया तथा दोनों अवस्थाओ के परिणामो का तुलनात्मक अध्यन किया फिर देखा की धनात्मक स्थानांतरण धटित हुआ या नही

7॰ परीक्षण सामग्री – मेरे दुवारा निर्मित शाब्दिक श्रवण प्रश्नोत्री आवश्यकता अनुसार स्पष्टीकरण पुछ लिया जाता था । प्रतिक्रियाओ को लिख दिया जाता था ।
( 1 ) व्यक्तित्व के लक्षण  चिंता से ग्रस्त, संदेह की प्रवृति, संवेगात्मक नियंत्रण की कमी देखी, भ्रम  पाया, स्थिरता की मध्यम चिंता, विचारो मे अस्थिरता एवं असंगति, संवेगात्मक अनियंत्रण, कल्पना की अधिकता, एकाग्रता की कमी, कमजोर याददास्त, और तनाव से पीड़ित पाया गया ।

8॰ अंतनिररिक्षण रिपोर्ट – परिणाम एवं व्याख्या
(1) अधिगम स्थानातरण मौखिक सीखने मे धनात्मक स्थानांतरण की घटनाओ को श्रवण शक्ति से कौशल सहायता करता रहा ।
(2) निर्देश निर्देशन की पालना के प्रयोज्य हमेशा तत्पर रहा था ।
“शुरू में ये काम प्रयोज्य को कठिन लगा की ये काम मुझ से होगा की नही लेकिन कुछ समय बाद ये कठिनाई दूर हो गई । पहले कठिन सवाल समस्याओ के समाधान के बाद उसको वैवाहिक ज़िंदगी सुनहरी दिखने लगी ।

9॰ विवेचना एवं निष्कर्ष – परिणाम पूछताछ से ज्ञात हुआ कि मेरी परिकल्पना सही प्रमाणित हुई कि परिणाम के ज्ञान [ अभिप्रेरणा ] के मिलने से निष्पादन बेहतर बन जाता है नियंत्रित अवस्था मे प्रयोज्य को उसके दुवारा किए गए निष्पादन के संबंधन मे जानकारी देता रहा था । इस प्रकार से परिणाम ज्ञान हो जाने से अशुद्धि बहुत घट गई और निष्पादन के गुण मे काफी प्रगति या उन्नति हो गई थी ।

प्रयोज्य ने नियंत्रित अवस्था कि अपेक्षा प्रयोगात्मक अवस्था मे बहुत कम त्रुटि की और उसका निष्पादन काफी उन्न्त बन गया । अनुसंधान से ज्ञात हुआ की शिक्षा के अंतनिरीक्षण प्रतिवेदन से भी निष्पादन पर परिणाम के ज्ञान [ अभिप्रेरणा ] का अनुकूल प्रभाव प्रमाणित होता है ।

10॰ निष्कर्ष - प्रस्तुत अनुसंधान के आधार पर निष्कर्ष निकलता है कि परिणाम के ज्ञान [ अभिप्रेरणा ] के कारण निष्पादन उन्न्त बन जाता है । परिणाम के ज्ञान होते रहने पर व्यक्ति को अपनी त्रुटि सुधारने तथा अपने निष्पादन को और भी अच्छा करने का अवसर मिलता है । कुलमिलाकर लड़के की समलैंगिक मानसिकता समाप्त हो चुकी और विषम लिंग मै अभिरुचि आ गई । अब लिंग बदलवाने की इच्छा नहीं  होती है । वह अपना खोया आत्म विश्वास अब आ गया,  मर्द होने का अहसास हो गया । प्रयोज्य की चिंता समाप्त हो चुकी थी। अब खुशी से जी रहा है । 
नोट - सामान्य भाषा मे कहा जा सकता है की मनोवैज्ञानिक परामर्श लेने से प्रयोज्य अब परिवार मे प्रेम से रहने लगा, लड़ाई, झगड़े बंद हो गए, उग्र स्वभाव मे परिवर्तन हो चुका और ठीक हो चुका और समलैंगिकता से विषमलिंग मे आसानी से विचारो की आदत को बदला जा चुका है । अब लड़कियो से मित्रता होने लगी और दो लड़कियो से दोस्ती होने के समाचार भी मुझे सुना दिया ।   
11॰ संदर्भ VMOUKOTA MAPSY 101, MAPSY 10



 वाट्स एप 91 98290 85951

बुधवार, 8 जुलाई 2020

मुख मैथुन समलैंगिता की आदत कैसे छूटी ?

समलैंगिक का उपचार होता है ।
समलैंगिकता अनुसंधान पत्र [ शौध पत्र ]
एक नई खोज, समलैंगिक कैसे बना ?

कैसे समलैंगिकता का ईलाज / उपचार हुआ  ।
समलैंगिकता >>> अभिभावक ने नैतिक आचरण नही सिखाया आचरण ।

1.  मैथुन अभिप्रेरणा ओर निष्पादन [ Sex Motivation and Performance ]
           शोधकर्ता  डाक्टर रघुनाथ सिंह राणावत
           Dietitian & psychologist
          माता आयुर्वेदिक दवाखाना, सापोल, राजसमंद, राजस्थान ।
2. प्रयोज्य परिचय –
प्रयोज्य का नाम - 159
यौन – पुरुष
आयु – 20  
व्यवसाय - बेरोजगार 
शिक्षा -  विधार्थी  [ प्रयोज्य का नाम गोपनीय रखा गया है । ]
3॰ समस्या परिचय
घर वाले शादी की बात करते उसकी चिंता बहुत होती थी, दादा दादी के प्यार का अभाव रहा था । क्योकि प्रयोज्य की समस्या जब वो 6 -7 साल उम्र का था, उस समय ताऊ का का बेटा किसी बहाने साथ मे सुला लेता था, पॉर्न वीडियो दिखाता, उस की तरह से प्रेम आलाप भी करता था। किस देना, लिंग को मुह मे देना, ये क्रम चार साल चला, लगातार नहीं पर कभी कभार समय मिलने पर ये समलैंगिकता संबंध होता था, दूसरा ताऊ का लड़का भी इसी प्रकार से वो अपना लिंग मुह से मैथुन करवाता था। फिर कक्षा 6 मे भर्ती हुआ तब हॉस्टल मे रहता था। हॉस्टल मे आपसी सेक्स क्रिया करते थे, ये क्रम होने से लगा की मै स्त्रीत्व का व्यक्तित्व वाला हूँ, कक्षा 8 - 9 मे लगभग उस समय प्रयोज्य की आयु 14-15 वर्ष हो सकती तब आदतन समलैंगिकता का अभ्यास हो गया था । मुखमैथुन का अभ्यास आधा घंटा होता था। ये बुरी आदत हो चुकी थी । फिर कक्षा 10 मे आया तो हॉस्टल छोडकर कमरा किराए ले लिया । 
प्रयोज्य अब आदतन समलैंगिक हो चुका था । शाम को दोस्त आते उनके साथ समलैंगिक मैथुन क्रिया होती थी । कक्षा 11 मे आने पर, मुखमैथुन समलैंगिक क्रिया को नियंत्रण मे कर लिया था । कक्षा 12 मे आने पर सामाजिक संघठन मे उनके अच्छे विचारो से प्रभावित होकर उस सामाजिक संघठन से प्रशिक्षण के लिए आता जाता रहता था तो उस समय सामाजिक संघ के विचारो से प्रभावित होकर समलैंगिक मुखमैथुन बिलकुल बंद कर दिया था। हस्त मैथुन करना जारी था, हस्त मैथुन करते समय दिमाग मे लड़के का चित्रण करके करता था ।  कक्षा छ मे पाढ़ता था तब हॉस्टल के लड़कों मे रहने वाले सहपाठी की प्रेरणा से पहली बार हस्तमैथुन किया था । लिंग बदलवाने की इच्छा होती थी ।
 ( 1 ) समस्या / कठिनाईया - जो आपस मे दोस्त बने थे, जब वो दोस्त आपस मे नही मिलते तब तक बेचेनी होती थी। जब अपनी आप बीती चिंता को अपने दोस्त को बताई तो वो बात नहीं करता था, तो शंका उत्तपन्न होती की वो बात क्यो नहीं करता था । 
साथ ही साथ मे नाच,गान मे बहुत रुचि होने लगी और स्त्रीत्व के रूप मे बहुत रुचि हो गई, अच्छे कपड़े पहनना, संवारना नारियो की भाति की इच्छा होने लगती थी। दोस्तो से ताना मिलता की लड़कियो जैसे क्यो चलता है। अग्रणी की कमी भी पाई गई । 
( 2 ) जीवन यापन के लिए लक्ष्य है की सेना मे भर्ती होने की कड़ी चाहत होती है । 
( 3 ) व्यक्तित्व - प्रयोज्य का साधारण व्यक्तित्व था, स्वभाव शांति प्रिय था, लड़ाई झगड़ा करना नही जानता था। परिवार मे धमकी देना नहीं आता, रूठता या नाराज होना नही जानता  था । 
बाल्य जीवन से संज्ञानात्मक प्रेरणा और प्रोत्साहन का प्रभाव मैथुन शिक्षण और निष्पादन मे कई रूपो मे पड़ता है। मैथुन सफलता, असफलता, पुरुस्कार, परिणाम के ज्ञान आदि प्रोत्साहन के अनेक रूप है। सहयोग, स्पर्धा, प्रतियोगिता इत्यादि भी प्रोत्साहन के ही रूप है। इनका निश्चित प्रभाव व्यक्ति के मैथुन शिक्षा तथा निष्पादन पर पड़ता है ।
( 1 ) तत्परता से लाभ -- विषम लैंगिक होने के लिए परामर्श के समय जब सही तत्परता रही तब विषम लैंगिक निर्माण के विचार होता जाता था, तब प्रयोज्य सही प्रतिक्रिया विचार करने और समलैंगिक विचारो से अपने आप को बचाने लाभ करता था ।
( 2 ) तत्परता की हानि -- गलत तत्परता उत्पन्न विचार होने से प्रयोज्य गलत दिशा मे प्रयास के विचार आते थे, जिससे समस्या समाधान कठिन लगता था और समस्या के विचार बदल नही जाते तब तक तत्परता को छोडकर सही दिशा मे सक्रिय नही होता था ।

4॰ उद्देश्य –
प्रस्तुत अनुसंधान का उद्देश्य शिक्षण के अभ्यास से प्रयोज्य के वैवाहिक दांपत्य जीवन मे महिला के प्रति आकर्षण निष्पादन पर परिणाम के ज्ञान [ अभिप्रेरणा ] के प्रभाव को सीखना है । उदेश्य व्यक्ति के ज्ञानात्मक सीखने मे धनात्मक स्थानातरण की घटनात्मक प्रदर्शन का अनुसंधान किया । ओनलाइन परामर्श मोखिक मे धनात्मक स्थानांतरण वास्तव मे उद्दीपक तथा प्रतिक्रिया की समानता पर आधारित हुआ ।

5॰ परिकल्पना – मेरे संगत अध्ययनो के आलोक मे परिकल्पना बनायी की परिणाम के ज्ञान [ अभिप्रेरणा ] के प्रभाव को दिखाना है । जो दो क्रिया के उद्दीपक एकांश भिन्न तथा प्रतिक्रिया एकांश अभिन्न होते है, तो उनके बीच धनात्मक स्थानांतरण होता है । [ समलैंगिकता व्यवहार तथा विचारो का प्रभाव वाला व्यक्तित्व आसानी से बदले जा सकते है । ]
6॰ अनुसंधान की कार्य प्रणाली –
मौखिक अभ्यास के साथ अनुसन्धानात्मक अभिकल्प
योजना – प्रयोज्य के पास एक स्मार्ट फोन, बिना रुकावट बेजिझक स्थान का चयन कर के एक निश्चित समयावधि तय किया गया था । महीने मे 10 ऑनलाइन परामर्श नियंत्रित अवस्था मे प्रयोज्य समझा दिया गया था । फिर प्रयोज्य से अंतनिरीक्षण प्रतिवेदन  लिया गया तथा दोनों अवस्थाओ के परिणामो का तुलनात्मक अध्यन किया फिर देखा की धनात्मक स्थानांतरण धटित हुआ या नही

7॰ परीक्षण सामग्री – मेरे दुवारा निर्मित शाब्दिक श्रवण प्रश्नोत्री आवश्यकता अनुसार स्पष्टीकरण पुछ लिया जाता था । प्रतिक्रियाओ को लिख दिया जाता था ।
( 1 ) व्यक्तित्व के लक्षण  चिंता से ग्रस्त, संदेह की प्रवृति, संवेगात्मक नियंत्रण की कमी देखी, भ्रम  पाया, स्थिरता की मध्यम चिंता, विचारो मे अस्थिरता एवं असंगति, संवेगात्मक अनियंत्रण, कल्पना की अधिकता, एकाग्रता की कमी, कमजोर याददास्त, और तनाव से पीड़ित पाया गया ।

8॰ अंतनिररिक्षण रिपोर्ट – परिणाम एवं व्याख्या
(1) अधिगम स्थानातरण मौखिक सीखने मे धनात्मक स्थानांतरण की घटनाओ को श्रवण शक्ति से कौशल सहायता करता रहा ।
(2) निर्देश निर्देशन की पालना के प्रयोज्य हमेशा तत्पर रहा था ।
“शुरू में ये काम प्रयोज्य को कठिन लगा की ये काम मुझ से होगा की नही लेकिन कुछ समय बाद ये कठिनाई दूर हो गई । पहले कठिन सवाल समस्याओ के समाधान के बाद उसको वैवाहिक ज़िंदगी सुनहरी दिखने लगी ।

9॰ विवेचना एवं निष्कर्ष – परिणाम पूछताछ से ज्ञात हुआ कि मेरी परिकल्पना सही प्रमाणित हुई कि परिणाम के ज्ञान [ अभिप्रेरणा ] के मिलने से निष्पादन बेहतर बन जाता है नियंत्रित अवस्था मे प्रयोज्य को उसके दुवारा किए गए निष्पादन के संबंधन मे जानकारी देता रहा था । इस प्रकार से परिणाम ज्ञान हो जाने से अशुद्धि बहुत घट गई और निष्पादन के गुण मे काफी प्रगति या उन्नति हो गई थी ।

प्रयोज्य ने नियंत्रित अवस्था कि अपेक्षा प्रयोगात्मक अवस्था मे बहुत कम त्रुटि की और उसका निष्पादन काफी उन्न्त बन गया । अनुसंधान से ज्ञात हुआ की शिक्षा के अंतनिरीक्षण प्रतिवेदन से भी निष्पादन पर परिणाम के ज्ञान [ अभिप्रेरणा ] का अनुकूल प्रभाव प्रमाणित होता है ।

10॰ निष्कर्ष - प्रस्तुत अनुसंधान के आधार पर निष्कर्ष निकलता है कि परिणाम के ज्ञान [ अभिप्रेरणा ] के कारण निष्पादन उन्न्त बन जाता है । परिणाम के ज्ञान होते रहने पर व्यक्ति को अपनी त्रुटि सुधारने तथा अपने निष्पादन को और भी अच्छा करने का अवसर मिलता है । कुलमिलाकर लड़के की समलैंगिक मानसिकता समाप्त हो चुकी और विषम लिंग मै अभूरुचि आ गई । अब लिंग बदलवाने की इच्छा नहीं  होती है । वह अपना खोया आत्म विश्वास अब आ गया,  मर्द होने का अहसास हो गया । प्रयोज्य की चिंता समाप्त हो चुकी थी। अब खुशी से जी रहा है । 
नोट - सामान्य भाषा मे कहा जा सकता है की मनोवैज्ञानिक परामर्श लेने से प्रयोज्य ठीक हो चुका और समलैंगिकता से विषमलिंग मे आसानी से विचारो की आदत को बदला जा सकता है । 

11॰ संदर्भ VMOUKOTA MAPSY 101, MAPSY 10



 वाट्स एप 91 98290 85951

सोमवार, 6 जुलाई 2020

समलैंगिक का उपचार होता है ।

समलैंगिकता अनुसंधान पत्र [ शौध पत्र ]
एक नई खोज, समलैंगिक कैसे बना ?

कैसे समलैंगिकता का ईलाज / उपचार हुआ  ।
समलैंगिकता >>> अभिभावक ने नैतिक आचरण नही सिखाया आचरण ।

1.  मैथुन अभिप्रेरणा ओर निष्पादन [ Sex Motivation and Performance ]
           शोधकर्ता  डाक्टर रघुनाथ सिंह राणावत
           Dietitian & psychologist
          माता आयुर्वेदिक दवाखाना, सापोल, राजसमंद, राजस्थान ।
2. प्रयोज्य परिचय –
प्रयोज्य का नाम - 158
यौन – पुरुष
आयु – 24 
व्यवसाय - स्थानीय मजदूर
शिक्षा -  12   [ प्रयोज्य का नाम गोपनीय रखा गया है । ]
3॰ समस्या परिचय
प्रयोज्य 5 वर्ष की आयु का था, अभिभावक ने लड़कियो वाले घरेलू काम काज कराते थे । लड़कियो जैसे आचरण व्यक्तित्व होतो [ परिवार वाले कभी विरोध नहीं किया, जो जरूरी था ] । 10 वर्ष की उम्र तक घरेलू काम बर्तन माँजना, पोशा लगाना, करता था । लड़कियो के साथ खेलता था, चाचा के लड़को के साथ व अड़ोस पड़ोस लड़को के साथ यौन क्रिया करना शुरू किया [ माता पिता की निगरानी की अवेहलना मानता हूँ ] एक दूसरे का लिंग पकड़ना [ जब की ये उम्र सार्वजनिक खेल खेलने की होती ]  हस्तमैथुन करना सीख गए । 15 - 16 वर्ष की उम्र मे लड़को को चुंबन देना शुरुआत की, लिंग पकड़ना, गुदा मैथुन किया व करवाया था । ज़्यादातर गुदा मैथुन किया, एक दो दिन, समय मिलते आपस मे कपड़ा उतार कर न्ंगे हो जाते फिर गुदा मैथुन किया करते थे, लड़के की फिलिंग लेकर हस्त मैथुन किया करते थे। चाचा के लड़के से अधिक लगाव रहता था, जब 12 मे पढ़ते थे, शारीरिक गुदा मैथुन करते थे। आज भी लड़के पसंद, प्रयोज्य का शांत स्वभाव था, कम बोलता, कभी कोई खेल नहीं खेलता, पढ़ाई मे तेज था। लड़के अच्छे लगते थे। लड़कियो को बहन समझ कर बात करता था। फेसबुक पर बहन समझ कर बात करता । अगर कोई लड़की सामने रोती तो उसके लिए कोई अनुभूति नहीं होती । शर्म और डर लगातार बना रहता था ।
माता को बताया की मुझे लड़किया अच्छी नहीं लगती और लड़के अच्छे लगते है । मुझे इलाज कराना है, फिर माता ने हा कर दी । 
बाल्य जीवन से संज्ञानात्मक प्रेरणा और प्रोत्साहन का प्रभाव मैथुन शिक्षण और निष्पादन मे कई रूपो मे पड़ता है। मैथुन सफलता, असफलता, पुरुस्कार, परिणाम के ज्ञान आदि प्रोत्साहन के अनेक रूप है। सहयोग, स्पर्धा, प्रतियोगिता इत्यादि भी प्रोत्साहन के ही रूप है। इनका निश्चित प्रभाव व्यक्ति के मैथुन शिक्षा तथा निष्पादन पर पड़ता है ।
( 1 ) तत्परता से लाभ -- विषम लैंगिक होने के लिए परामर्श के समय जब सही तत्परता रही तब विषम लैंगिक निर्माण के विचार होता जाता था, तब प्रयोज्य सही प्रतिक्रिया विचार करने और समलैंगिक विचारो से अपने आप को बचाने लाभ करता था ।
( 2 ) तत्परता की हानि -- गलत तत्परता उत्पन्न विचार होने से प्रयोज्य गलत दिशा मे प्रयास के विचार आते थे, जिससे समस्या समाधान कठिन लगता था और समस्या के विचार बदल नही जाते तब तक तत्परता को छोडकर सही दिशा मे सक्रिय नही होता था ।

4॰ उद्देश्य –
प्रस्तुत अनुसंधान का उद्देश्य शिक्षण के अभ्यास से प्रयोज्य के वैवाहिक दांपत्य जीवन मे महिला के प्रति आकर्षण निष्पादन पर परिणाम के ज्ञान [ अभिप्रेरणा ] के प्रभाव को सीखना है । उदेश्य व्यक्ति के ज्ञानात्मक सीखने मे धनात्मक स्थानातरण की घटनात्मक प्रदर्शन का अनुसंधान किया । ओनलाइन परामर्श मोखिक मे धनात्मक स्थानांतरण वास्तव मे उद्दीपक तथा प्रतिक्रिया की समानता पर आधारित हुआ ।

5॰ परिकल्पना – मेरे संगत अध्ययनो के आलोक मे परिकल्पना बनायी की परिणाम के ज्ञान [ अभिप्रेरणा ] के प्रभाव को दिखाना है । जो दो क्रिया के उद्दीपक एकांश भिन्न तथा प्रतिक्रिया एकांश अभिन्न होते है, तो उनके बीच धनात्मक स्थानांतरण होता है । [ समलैंगिकता व्यवहार तथा विचारो का प्रभाव वाला व्यक्तित्व आसानी से बदले जा सकते है । ]

6॰ अनुसंधान की कार्य प्रणाली –
मौखिक अभ्यास के साथ अनुसन्धानात्मक अभिकल्प
योजना – प्रयोज्य के पास एक स्मार्ट फोन, बिना रुकावट बेजिझक स्थान का चयन कर के एक निश्चित समयावधि तय किया गया था । महीने मे 10 ऑनलाइन परामर्श नियंत्रित अवस्था मे प्रयोज्य समझा दिया गया था । फिर प्रयोज्य से अंतनिरीक्षण प्रतिवेदन  लिया गया तथा दोनों अवस्थाओ के परिणामो का तुलनात्मक अध्यन किया फिर देखा की धनात्मक स्थानांतरण धटित हुआ या नही

7॰ परीक्षण सामग्री – मेरे दुवारा निर्मित शाब्दिक श्रवण प्रश्नोत्री आवश्यकता अनुसार स्पष्टीकरण पुछ लिया जाता था । प्रतिक्रियाओ को लिख दिया जाता था ।
( 1 ) व्यक्तित्व के लक्षण  चिंता से ग्रस्त, संदेह की प्रवृति, संवेगात्मक नियंत्रण की कमी देखी, भ्रम  पाया, स्थिरता की मध्यम चिंता, विचारो मे अस्थिरता एवं असंगति, संवेगात्मक अनियंत्रण, कल्पना की अधिकता, एकाग्रता की कमी, कमजोर याददास्त, और तनाव से पीड़ित पाया गया ।

8॰ अंतनिररिक्षण रिपोर्ट – परिणाम एवं व्याख्या
(1) अधिगम स्थानातरण मौखिक सीखने मे धनात्मक स्थानांतरण की घटनाओ को श्रवण शक्ति से कौशल सहायता करता रहा ।
(2) निर्देश निर्देशन की पालना के प्रयोज्य हमेशा तत्पर रहा था ।
“शुरू में ये काम प्रयोज्य को कठिन लगा की ये काम मुझ से होगा की नही लेकिन कुछ समय बाद ये कठिनाई दूर हो गई । पहले कठिन सवाल समस्याओ के समाधान के बाद उसको वैवाहिक ज़िंदगी सुनहरी दिखने लगी ।

9॰ विवेचना एवं निष्कर्ष – परिणाम पूछताछ से ज्ञात हुआ कि मेरी परिकल्पना सही प्रमाणित हुई कि परिणाम के ज्ञान [ अभिप्रेरणा ] के मिलने से निष्पादन बेहतर बन जाता है नियंत्रित अवस्था मे प्रयोज्य को उसके दुवारा किए गए निष्पादन के संबंधन मे जानकारी देता रहा था । इस प्रकार से परिणाम ज्ञान हो जाने से अशुद्धि बहुत घट गई और निष्पादन के गुण मे काफी प्रगति या उन्नति हो गई थी ।

प्रयोज्य ने नियंत्रित अवस्था कि अपेक्षा प्रयोगात्मक अवस्था मे बहुत कम त्रुटि की और उसका निष्पादन काफी उन्न्त बन गया । अनुसंधान से ज्ञात हुआ की शिक्षा के अंतनिरीक्षण प्रतिवेदन से भी निष्पादन पर परिणाम के ज्ञान [ अभिप्रेरणा ] का अनुकूल प्रभाव प्रमाणित होता है ।

10॰ निष्कर्ष - प्रस्तुत अनुसंधान के आधार पर निष्कर्ष निकलता है कि परिणाम के ज्ञान [ अभिप्रेरणा ] के कारण निष्पादन उन्न्त बन जाता है । परिणाम के ज्ञान होते रहने पर व्यक्ति को अपनी त्रुटि सुधारने तथा अपने निष्पादन को और भी अच्छा करने का अवसर मिलता है । कुलमिलाकर लड़के की समलैंगिक मानसिकता समाप्त हो चुकी और विषम लिंग मै अभूरुचि आ गई
[ प्रत्येक माता पिता दायत्व होना चाहिए की अपनी औलाद को सुविधा के साथ साथ अच्छे संस्कार भी देना चाहिए । आज की भागदौड़ में दिखावे के लिए रुपया कामने के चक्कर गलत प्रतिस्पर्धा को नहीं करना चाहिए, अभिभावक धन दौलत अपनी औलाद के लिए कमाते है जब कमाने के लगाव मे बच्चो की संस्कार देना भूल जाये फिर औलाद बिगड़ जाये तो ये सम्पदा किस काम की ]

11॰ संदर्भ VMOUKOTA MAPSY 101, MAPSY 10

 वाट्स एप 9829085951



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शनिवार, 4 जुलाई 2020

समलैंगिक के सवाल, मेरे जवाब ।

1. Mujhe aisa lagta hai ki main gay hun. Lekin mera mann isko manne ke liya taiyaar nahi hai aur main v isko manne ke liye taiyaar nahi hun.
1. मन हमेशा दो मार्गी होता है, सकारात्मक व नकारात्मक भी । पहले सवाल में जवाब भी छिपा है । कुलमिलाकर बात पकडने के आदि हो गए हो ।

2. Aajkal main kisi v ladka ko dekhta hun toh wah mujhe sundar hi lagne lagta hai. Yahan tak ki jo muje pehle Sundar nahi lagta tha wah v mujhe sundar lagne laga hai. Jisko leke main bahut hi jyada chintit hun ki aakhir Aisa kyun hai?
2. एक बात दिमाग मे घर कर गई, इस बात को छोड़ने का मन नहीं करता, क्योंकि सीखा हुआ आचरण आसानी से जल्दी नहीं छूटता है, इसलिए जिंदगी के लक्ष्यों विहीन जी रहे हो .।

3. aajkal main koi v gana sunta hun toh mujhe ladke k baare mein dhiyan chala jata hai. Aisa kyun?
3 दिमाद मे याददस्त एक स्टाक रूम होता हो स्टाक भरा होगा वो ही बाहर आएगा ।  कहना नहीं मानते हैं, अपनी जिद्द के कारणों पर अड़े होने की वजह से भी होता है ।

4. Aapne jaisa ki pichle counseling mein kaha tha ki sawalon ke jawab dundhne se kya hoga? Aur aap ek udahran diye the ki agar koi kapra ganada hai toh use saaf karne se kaam hoga yeh nahi jaruri hoga ki iss kapra mein ganda kahan se laga. Lekin mujhe mere sawalon ke jawab milne se hi santusti hogi Aisa kyun? Jab ki aapka udharan ekdam sahi hai.
4. अपने विचारों के ब्लॉकेज आ गए, इसमे सुधार नहीं चाहते। पहला काम होता की जो मैला कपड़ा उसको साफ किया जाए, फिर ध्यान दिया जाये की दुबारा ये वापस खराब नही हो, खराब होने के कारणो ध्यान रखना दूसरा काम होता है ।

5. Mujhe aisa v kabhi kabhi lagta hai ki main sawalaon ke jawab sirf apne mann ko santwana dene k liye cahta hun. Jaisa ki mine aapko baatya tha ki maine ek online psychological consult kiya tha pehle jisme ki maine apne bare mein sab kuch likh diya tha lekin mujhe udhar se reply aata hai ki agar aap gay ho toh v ye normal hai. Jisse main santust nahi hua Aisa kyun?
5. आपने पहले जिस से ऑनलाइन परामर्श लिया उनका समलैंगिक समस्या समाधान पर कितना कार्य किया अथवा केवल रटा रटाया उतर दे दिया हो, मेरे परामर्श से लगता लगता आप अडियल टट्टू जैसे बन गए हो, केवल अपनी बातें पर पांव जमा दिए हो ।

6. Mujhe lagta hai ki muje ladkion mein utna jyada intrest nahi hai aisa kyun? Kya main shaadi nahi kar paunga? Kyun hain mere mein ye sabhi lakshan?
6. क्योंकि दिमाग एक विचारों का स्टॉक रूम है इसमें जो भरा हुआ है वो ही बाहर आएगा, इसलिए हमेशा यही कहता हूं दिशा बदलो दशा बदल जाएगी, नजर बदलो नजारे बदल जायेगा । शादी कर सकेंगे जो एक आचरण छोड़ने का बोला उसका पालन करना, सब ठीक होगा ।

7. Main harek Baar apne aap ko straight shabit karne ke liye ye imagine karne lagta hun ki kisi ladke ka ling mere traf aa raha hai. Aur phir main yah sochta hun ki mere ling mein koi sensation toh nahi hai. Uske baad main ise aur paka karne ke liye apne ling oe aungli se ya kisi lambi vastu se baar baar touch karta hun taaki mujhe koi sensation toh isse mehsush nahi ho rahi hai.phir jab sensation mehsush hoti hai toh main chintit ho jata hun. Bata dun ki apne Hip (pichuare) ke saath v Aisa hi sochta hun ki kahi koi sensation toh nahi. Kyinki ek website pe main ye pata karne gaya tha ki kahin main gay toh nahi? Usme ye ek sawal tha ki aapke hip mein jab koi kapda fasta hai toh aapko kaisa feel hota hai? Toh meine answer diya ki normal lagta hai. Jiske baadh mujhe result mila ki aap (66-67%) heterosexual ho aur kuch % homosexual aur bisexual v tha. Jiske baadh maine apne Hip mein kapda fasha k dekha ki kya hota hai toh mujhe normal hilaga. Lekin main yah sochne laga ki muje achaa laga kyunki ek din noch raha tha aur maine nocha toh mujhe achaa laga tha.
7.सत्यधिक पालन पोषण के संस्कार कम और सुविधाओ के अधिक मिलने से ऐसी कल्पना होने से मन माना करते गए, अच्छा दोस्त नहीं होना से भी होता है, जिसको याद करोंगे तो वो ही याद आएगा । फालतु विचार करोंगे, फालतु विचार आयेगा क्यों जब हस्थमैथुन करते समय हमेशा लड़के की इमेज दिमाग मे रक्खी तो लड़की आएगी कहा से । क्रोध व सेक्स दोनो दमन में रहते है,  इनको निकलना पड़ता है । जैसे दूध से घी निकाला जाता है ।

8. Aapko bata den sir ki YouTube per v homosexuality ko janchne ke liye hi test diye jisme ki 5 questions pucha aur harek question ke answer ke options ke aage point diya jo ki bola jor k rakhne jiske baadh last mein number ke anushar pata chal jayega ki aadmi homosexual, bisexual hai ya phir heterosexual hai. Toh usme ek question tha ki do you fantasize to sex with same sex? Jiska matlab hai ki kya aapne samlangik sex ke baare mein kalpana ki hai? Toh tabhi maine answer de diya no jisse ki mujhe result mil gaya ki main heterosexual hun. Lekin phir maine socha ki maine toh aisa socha hai jaisa ki maine aapko pahle bataya tha. Phir jab maine uska answer yes diya toh mera result aaya bisexual jo ki heterosexual se 10-20 point hi kam tha. Jiske baadh main kafi chintit ho gaya tha kyunki us video ke niche kafi positive comments the ki ye sahi batata hai. Lekin kuch log the Jo ki kah rahe the result kuch aaya lekin apne aapko wah straight hi kah rahe the. Lekin phir v mera vichaar chalu hi raha. Jiske baadh maine Google pe fantasize ka hindi arth khoja jo ki tha kalpana karna. Toh mujhe laga ki mai e toh kalpna hi kiya. Phir socha ki maine thinking kiya. Lekin main confuse hun kuch kijiye sir. iska kya jawaab hoga?
8. कुछ नहीं है ये सब अपनी अपनी मन मर्जी व सीमित ज्ञान के आधार पर होता किसने कितना अनुसंधान किया या जितना सीखा उतना ही जवाब देगा, बिना सोचे समझे कल्पना करते राहोंगे तो कल्पना की को दिशा व सीमा नही होती है, ज़िंदगी भर पागलो जैसे सोचते रहे, अगर चिंतन करेंगे तो समस्या की दिशा व सीमा समाप्त हो जाएगी । अपने सवाल की बाते फालतु बाते है, अपने सुनहरे भविष्य पर ध्यान रखें।
[ A ] fantasize- दिवास्वपन्न, दिन मे सपना देखना ।
[ B ] Fantasy -  कपोल कल्पित /  वासना /  मनोवैज्ञानिक अर्थों में कल्पना मन के दो अलग-अलग संभावित पहलुओं, चेतन और अचेतन को संदर्भित करती है।

9. jaisa ki maine HOCD ke baare mein padga tha ki mind mein homosexuality ka unwanted image aane lagta hai. Lekin main adhiktar baar janbujh ke apne dimag mein wo sara image layajo ki wanted tha yaani ki mere dwara laya gaya tha. Toh kya main homosexua hun agar nahi toh phir ye HOCD kaise hui. Please sir batayen.
9. अनवांटेड इमेज का कारण पहले से जो सोचा था वो अब जा नहीं रहा, अच्छा मार्गदर्शन नहीं होने की वजह से होता है । फालतू होने से, दादा दादी का प्यार नही मिलना, माता, दादी या किसी से अत्यधिक प्यार मिलने से अपना मन माना करते आए हो, खेल कूद, दौड़ भाग व जवाबदारी नहीं होने से एक गलत विचार से बाधित हो गए हो, फालतू विचारो की बुनियाद खड़ी कर दी है। अब दिशा बदल दो दशा बदल जाएगी, नजर बदल दो नजारे बदल जाएँगे । 

10. Aapne jaisa ki apne HOCD wale video mein kaha ki isme sawaal tathya hin hote hain lekin mujhe agar tathya mil jata hai toh sawaal khatam ho jaate hain. Toh agar mujhe HOCD hai toh mere sawaal tathyahin hone chahiye lekin agar mere sawaalon ka thathya milne se nidaan hota hai toh phir thathyahin ka tathya toh nahi ho sakta na. So please sir iska v jawaab dijiye.


Thanks sir

10. सब समलैंगिक विचारों को केन्द्रित करने के कारणों से है । रास्ता भूल गए हो, सही रास्ते पर आ जाओ । गलत रास्ते चलते हुए भी गलत बहस करने के आदि हो गये हो, सुबह का भुला घर आता पर तुम उस भूल को ही अपनी जिद्द बना ली, अपनी मन मानी छोड़कर, नई इमेज दिमाग मे बैठाओ तो नई इमेज आ जायेगी ।


निष्कर्ष -- प्रयोज्य केवल अपनी हस्थमैथुन के समय दिमाग मे जो इमेज बना ली बस उसको छोड़ना नहीं चाहता और दूसरी इमेज भरना नहीं चाहता जैसे छोटे बच्चे रोते हुए हाथ मे रोटी को लेकर रोता रहता, शिकायत दर्ज करने में ही रहता है वैसे हालात हो गए है । सब बातें अचेतन मन मे गलत भर दिया है । जैसा फोन, कम्प्यूटर के मेमोरी में पुराने गीतों को डिलीट करके नए गीतों को भरते वैसे ही नए ख्याल, नई सूझ, नया आत्मविश्वास, नई उमंग, उल्हास भरने की आवश्यकता है । दिमाग मे जो कल्पना बैठा रखी उसको छोडना नहीं चाहता जैसे कोई बंदर किसी सँकरे मुह का घड़े मे डाली सेव फल निकालना चाहता पर जो सेव फल पकड़ने से घड़े का मुख से सेव युक्त  हाथ का आयतन बड़ा होने से, नहीं हाथ निकलता, नहीं सेव फल निकलता। पर सेव को छोड़ कर हाथ निकाल कर घड़े को युक्ति से उल्टा कर दे तो आसानी से सेव निकाल सकता है । इस लिए अपने सुनहरे भविष्य व माता पिता को यश, समाज मे किर्ति के लिए अच्छे होने का प्रयास करना चाहिए ॥

धन्यवाद,
जय श्री रामाकृष्ण







शनिवार, 27 जून 2020

समलैंगिकता का ईलाज होता है ।


समलैंगिकता 
 
1.  मैथुन अभिप्रेरणा ओर निष्पादन [ Sex Motivation and Performance ]

          शोधकर्ता  डाक्टर रघुनाथ सिंह राणावत

                        Dietitian & psychologist

          माता आयुर्वेदिक दवाखाना, सापोल, राजसमंद, राजस्थान ।

2. प्रयोज्य परिचय –

प्रयोज्य का नाम - 148 

यौन – पुरुष

आयु – 34 

शिक्षा - माध्यमिक  [ प्रयोज्य का नाम गोपनीय रखा गया है । ]

3. समस्या परिचय 
प्रयोज्य की शादी हुई पारिवारिक मैथुन संबंधो समस्या का होना से तलाक होना। मुखमैथुन की इच्छा होना, बार बार मुखमैथुन के विचार आना। महिलाओ मे आकर्षण नही होना। लडकीय पसंद नही आती। शादी से डर लगता है । शक्राणुओ की कमी पाया गया । 

4. समस्या समाधान 
प्रयोज्य के पास नेटवर्क कमजोर होना पाया गया, नेटवर्क मे सार्वजनिक परामर्श लेने मे शर्म व भय होने से बचा, फिर साथ कोरोना से लॉक डाउन से कारण संपर्क नही किया । इस प्रकार से परामर्श अधूरा रहा । 

शुक्रवार, 26 जून 2020

समलैंगिक जुनून

समलैंगिक OCD (HOCD)
 समलैंगिक OCD (HOCD)
 HOCD क्या है?
 समलैंगिक ओसीडी - जिसे यौन अभिविन्यास ओसीडी के रूप में भी जाना जाता है, व्यक्तियों (सीधे, समलैंगिक, या उभयलिंगी) में देखा जाता है जो जुनूनी विचारों को विकसित करते हैं, जो एक गहन (अनुचित) भय से ग्रस्त हैं और उनके लंबे समय तक यौन अभिविन्यास पर संदेह करते हैं।  इन व्यक्तियों को डर है कि वे एक ही सेक्स के लिए आकर्षित हो सकते हैं (यदि वे विषमलैंगिक हैं), या विपरीत लिंग के प्रति आकर्षित (यदि वे पहले से ही समलैंगिक हैं), भले ही उनकी यौन इच्छाएं और अंतर्निहित अभिविन्यास इंगित करें।  आमतौर पर, उनके जुनूनी समलैंगिक विचारों को अनिवार्य जाँच व्यवहारों के साथ पालन किया जाता है जो किसी भी सबूत को 'सबूत' के रूप में प्रस्तुत करते हैं कि उनके विचार और भय वास्तव में वास्तविक हैं।

 ओसीडी के अन्य रूपों के रूप में जहां व्यक्ति अवांछित और दखल देने वाले विचारों का अनुभव करते हैं, जिन्हें तर्कहीन माना जाता है, और आमतौर पर बाध्यकारी कृत्यों या आग्रह के साथ होते हैं - HOCD अनुभव वाले जुनूनी व्यक्ति भी अवांछित विचार हैं, हालांकि ये मुख्य रूप से अधिक यथार्थवादी भय पर केंद्रित हैं।  और उनकी कामुकता के बारे में अनिश्चितता।  HOCD में शामिल यौन जुनून आम तौर पर व्यक्ति के लिए शर्म और अपराध के उच्च स्तर से जुड़े होते हैं, और इस कारण से, अक्सर दूसरों से छिपा कर रखा जाता है।  आत्म-वंचना और भ्रम भी विशिष्ट है - बाद में उचित सहायता और उपचार की मांग न करने के लिए एक उपयुक्त मकसद बनाना।  महत्वपूर्ण रूप से, HOCD होमोफोबिया के बारे में नहीं है - HOCD वाले व्यक्ति आमतौर पर दूसरों में समलैंगिकता की अवधारणा से परेशान नहीं होते हैं, हालांकि खुद के समलैंगिक होने (या सीधे व्यक्ति के समलैंगिक होने) के बारे में सोचा जाना अत्यंत कष्टप्रद है।  इसका मुख्य कारण यह है कि उनके लिए इसका क्या मतलब हो सकता है।  उदाहरण के लिए, एक व्यक्ति जो प्यार करने वाले प्रतिबद्ध रिश्ते में है, वह विचार का अनुभव कर सकता है, "अगर ये विचार सच थे तो मुझे यह रिश्ता छोड़ना होगा"।  इसलिए, उनका डर सीधे या समलैंगिक होने के बारे में नहीं है - लेकिन इससे भी अधिक कि वे उस एक को खो देंगे जो वे वास्तव में प्यार करते हैं।  इस लेख में एचओसीडी के कुछ अलग-अलग रूपों और प्रत्येक से जुड़े सामान्य लक्षणों को समझाने में मदद मिलेगी, जिसमें विभिन्न उपचार दृष्टिकोण शामिल किए जा सकते हैं।



 HOCD के विभिन्न प्रकार क्या हैं?
 यह स्वीकार करना महत्वपूर्ण है कि HOCD में जुनून शामिल है, इसके बाद आग्रह (मजबूरियां) हैं जो संदेह और भय की ओर अग्रसर हैं जो उनके यौन अभिविन्यास के आसपास हैं।  भय अहंकार-द्वैत (स्वयं से अलग) है, न कि अहंकार-श्लेष (कामुकता के बारे में भ्रम)।  इसलिए नीचे सूचीबद्ध HOCD की श्रेणियां निर्णायक नहीं हैं, और HOCD वाले लोग इन श्रेणियों की संख्या और कई और अधिक के साथ अनुभव और पहचान कर सकते हैं।

 सभी या कुछ नहीं HOCD:
 एचओसीडी के इस रूप वाले व्यक्तियों में आमतौर पर उनके पूरे जीवन में एक ही यौन अभिविन्यास होने की रिपोर्ट होती है, या कभी भी समलैंगिक कल्पनाओं या विचारों का अनुभव नहीं किया है जो पहले उनके मन को पार करते हैं।  उनका डर आमतौर पर एक 'समलैंगिक' विचार या भावना उनके ऊपर से गुजरता है, जिसके लिए उन्होंने अत्यधिक ध्यान दिया और अर्थ की तलाश की।  सभी या कुछ नहीं के साथ व्यक्तियों, जो किसी भी समलैंगिक विचारों के होने का एक संकेत होना चाहिए कि वे वास्तव में समलैंगिक हैं, विकृत धारणा को धारण करते हैं।  खुद को ’साबित’ करने की कोशिश में कि वे सीधे हैं, वे विभिन्न बाध्यकारी व्यवहारों में संलग्न हो सकते हैं, जैसे कि सेक्स संबंधी कल्पनाओं के विपरीत हस्तमैथुन अनुष्ठान, या वस्तुओं या लोगों की अत्यधिक परिहार के उपाय जो कि व्यक्ति को समलैंगिकता से जोड़ते हैं।

 उपचार में सीबीटी में उन वस्तुओं या लोगों के लिए एक्सपोज़र थेरेपी शामिल है जो समलैंगिक विचारों को ट्रिगर करते हैं - ’सीधे-सिद्ध’ व्यवहार में संलग्न होने की मजबूरी के अलावा।
 रिश्ता HOCD:
 संबंध OCD, (अन्यथा ROCD के रूप में जाना जाता है) का वर्णन तब किया जाता है जब लोग अपने पिछले संबंध विफलताओं को दोष देते हैं, इस विश्वास पर कि उन्हें ‘समलैंगिक होना चाहिए’ क्योंकि वे पिछले रिश्ते सिर्फ काम नहीं कर रहे हैं।  आम उदाहरणों में अपने यौन साथी के प्रति यौन आकर्षण महसूस नहीं करना, या उनके पिछले रोमांटिक संबंधों में प्यार का अनुभव नहीं होना शामिल है।  यह अवधारणा आमतौर पर उन व्यक्तियों के साथ जुड़ी होती है जो यह महसूस करते हैं कि वे विपरीत लिंग से संबंधित नहीं हैं - इस बात का प्रमाण के रूप में कि वे समलैंगिक हैं।  इस मामले में, व्यक्ति आमतौर पर एक ही लिंग के साथ अपनी बातचीत में भाग लेंगे - उनका मूल्यांकन अधिक समय के साथ समय बिताने के लिए अधिक समझ और अधिक संतोषजनक होने के लिए।  नतीजतन, यह व्यक्ति को भयभीत करने के लिए उनकी कामुकता पर सवाल उठाता है।

 उपचार में सीबीटी में व्यक्ति की यौन आधारित आशंकाओं के साथ-साथ एक्सपोज़र थेरेपी शामिल है, साथ ही साथ उन व्यवहारों से अवगत कराया जाता है जो विषमलैंगिक संबंध दोषों की सामान्यता को प्रदर्शित करता है।
 स्व-घृणा HOCD:
 एचओसीडी के इस रूप को विकसित करने वाले व्यक्तियों में आमतौर पर थोड़ा आत्म-मूल्य होता है (जो पिछले अपमानजनक संबंधों, दर्दनाक अनुभवों या अतीत में गंभीर दुर्व्यवहार के परिणामस्वरूप हो सकता है), और आमतौर पर अवसाद के साथ सह-आग्रह करता है।  सेल्फ-हेटिंग होउड के साथ वे अपने कथित गलत व्यवहारों को उस अनुरूपता के अनुरूप बनाते हैं, जिसमें वे समलैंगिक होते हैं- जिसमें इस जुड़ाव को आत्म-अपमान के रूप में निर्देशित किया जाता है (न कि उनके विरोधी यौन अभिविन्यास बनने के वास्तविक डर के रूप में)।  इसलिए यह उनके विकृत विश्वास की पुष्टि करता है कि वे वास्तव में 'अप्राप्य' हैं और अपने वांछित अभिविन्यास के प्रति अनाकर्षक हैं।

 व्यक्ति के लक्षणों की गंभीरता के आधार पर, सेल्फ-हेटिंग HOCD के लिए, पहले किसी भी अंतर्निहित अवसाद को दूर करने के लिए उपचार के लिए यह अधिक प्रभावी हो सकता है।  इसके बाद, संज्ञानात्मक व्यवहार थेरेपी में संलग्न होने की सिफारिश की जाती है-व्यक्ति को अपनी पहचान के बारे में अपने नकारात्मक विचारों को पहचानने और चुनौती देने के लिए, और उन्हें उनकी कामुकता के लिए अप्रासंगिक के रूप में फिर से परिभाषित करने की दिशा में काम करना चाहिए।
 मस्क्युलिन / फेमिनिन HOCD
 HOCD का यह रूप आम तौर पर समाज में पुरुषत्व और स्त्रीत्व पर खड़ी रूढ़ियों की व्यक्तिगत धारणा से जुड़ा हुआ है।  आमतौर पर, व्यक्ति का मानना ​​है कि किसी भी असंगति (उनके विचारों या व्यवहारों के साथ) में उनकी अपेक्षित लिंग भूमिका, लिंग की कमजोरी का संकेत है और इसलिए उनके यौन अभिविन्यास का एक (अनुचित) संकेत है।  उदाहरण के लिए, एक पुरुष जो किसी अन्य पुरुष को आकर्षक पाता है, उसे यह डर हो सकता है कि ’असली पुरुष केवल महिलाओं को आकर्षक समझते हैं - इसलिए यह उनके विचार को आमंत्रित करता है: must मुझे समलैंगिक होना चाहिए’

 सीबीटी थेरेपी में वस्तुओं, लोगों, या गतिविधियों के क्रमिक जोखिम शामिल होते हैं जो वे अपने लिंग के आसपास विकृत धारणाओं के साथ जोड़ते हैं (जैसे: पहचान योग्य समलैंगिकों के साथ जुड़ी छवियों या फिल्म के संपर्क में, थिएटर या बैले में भाग लेने और महिलाओं के लिए मर्दाना माना जाने वाली गतिविधियों में संलग्न होना  या पुरुषों के लिए स्त्रीलिंग)


 Groinal प्रतिक्रिया HOCD
 HOCD का यह रूप तब होता है जब व्यक्ति यौन उत्तेजनाओं / किराने की प्रतिक्रियाओं का अनुभव करते हैं, ऐसी परिस्थितियों में जो उनके यौन वरीयता के अनुरूप उपयुक्त परिस्थितियों के अनुरूप नहीं होती हैं।  जैसे-जैसे ये व्यक्ति अपने किराने के क्षेत्रों पर अधिक जागरूकता रखना शुरू करते हैं यह केवल उनकी संवेदनशीलता को बढ़ाता है, वास्तव में इस क्षेत्र में बढ़ी हुई उत्तेजना को भड़काने का काम करता है।  कमर की प्रतिक्रिया के साथ व्यक्तियों HOCD का मानना ​​है कि किसी भी स्त्री प्रतिक्रिया या यौन उत्तेजना की भावना, परिस्थितियों में उनके अभिविन्यास के साथ संघर्ष, सबूत होना चाहिए कि वे समलैंगिक हैं - इस तथ्य की परवाह किए बिना कि वे एक ही लिंग के साथ सेक्स की कोई इच्छा नहीं रखते हैं।

 सीबीटी उपचार में व्यक्तियों को शिक्षित करना शामिल है, जो कि किराने की प्रतिक्रियाओं के आसपास की विकृत धारणाओं का पता लगाने और उन्हें चुनौती देने में सक्षम होते हैं, जिसमें क्रमिक जोखिम चिकित्सा शामिल होती है, जिससे वे डर जाते हैं।


 HOCD के लक्षण क्या हैं?
 उनके भयभीत यौन अभिविन्यास के सच होने से घृणा महसूस करना
 कामोत्तेजना की भावना न होना और उनके भयभीत यौन अभिविन्यास की इच्छा
 (झूठे) that सबूत ’के रूप में किसी भी सबूत की तलाश और तलाश करना कि उनके घुसपैठ के विचार। वास्तविक’ होने चाहिए
 उनके संदिग्ध विचारों और उनके यौन अभिविन्यास के बारे में भय पर प्रकाश डालना
 खुद को सीधे या समलैंगिक साबित करने के लिए विभिन्न जाँच व्यवहारों में संलग्न होना
 अपने यौन अभिविन्यास को परिभाषित करने के रूप में समलैंगिक (या सीधे) विचारों के गलत विचारों की कल्पना करना
 यह तर्क देना कि उनके अतीत के असफल या असंतोषजनक रोमांटिक संबंध ऐसे सबूत हैं जो उनके यौन उन्मुख होने के डर को सच साबित करते हैं
 सभी लोगों, वस्तुओं, या स्थानों से बचना, जो संबद्ध हो सकते हैं या उनके विकृत विचारों और बाद के बाध्यकारी व्यवहारों को भड़काने के लिए एक ट्रिगर के रूप में कार्य कर सकते हैं।
 क्या कारण हैं?
 हालांकि कोई निश्चित कारण नहीं है कि व्यक्ति एचओसीडी का विकास क्यों करते हैं, ऐसे कई कारक हैं जो इसमें योगदान देने के लिए खेल में आ सकते हैं, या जिन्हें इसमें योगदान करने के लिए सोचा गया है, व्यक्तियों में कुछ सामान्य विषयों में वे शामिल हैं:

 गरीब आत्म सम्मान
 पिछले रोमांटिक संबंधों को बनाए रखने में सक्षम नहीं है
 दर्दनाक टूटने से पीड़ित
 एक अपमानजनक संबंध का अनुभव किया
 अनुभवी कई असंतोषजनक तिथियाँ
 असंतुष्ट सेक्स
 तिथियां प्राप्त करने में असमर्थ
 कौमार्य को एक विशेष यौन अभिविन्यास के साथ जोड़ना

 उपचार में क्या शामिल है?
 HOCD के लिए उपचार में संज्ञानात्मक व्यवहार थेरेपी (CBT) शामिल है, जिसमें व्यक्ति के तर्कहीन समलैंगिक विचारों और आशंकाओं के लिए क्रमिक जोखिम चिकित्सा शामिल है।  यह स्वीकार करना महत्वपूर्ण है कि उपचार में शामिल एक्सपोजर घटक में व्यक्ति को समलैंगिक गतिविधियों में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित करना शामिल नहीं है, बल्कि इसके उदाहरणों में उनके जुनूनी विचारों और मजबूरियों का आह्वान किया गया है।



 


  सन्दर्भ - डॉ एमिली 

गुरुवार, 25 जून 2020

How did gay get rid of homosexuality ?

समलैंगिकता का ईलाज होता है ।
समलैंगिकता >>> किस प्रकार समलैंगिकता से समलैंगिक ने मुक्ति पाई ? 
 
1.  मैथुन अभिप्रेरणा ओर निष्पादन [ Sex Motivation and Performance ]

          शोधकर्ता  डाक्टर रघुनाथ सिंह राणावत

                        Dietitian & psychologist

          माता आयुर्वेदिक दवाखाना, सापोल, राजसमंद, राजस्थान ।

2. प्रयोज्य परिचय –

प्रयोज्य का नाम - 136 

यौन – पुरुष

आयु – 35 

शिक्षा - उच्च माध्यमिक  [ प्रयोज्य का नाम गोपनीय रखा गया है । ]


3. समस्या परिचय - 
प्रयोज्य 7 से 8 वर्ष का था तब पारिवारिक ताऊ का लड़का जिसकी आयु 13 से 14 वर्ष के बीच थी उसने बलात्कार कर दिया था । तब से गुदा मैथुन कराने की लत लग गई थी, उस समय अज्ञान से मौज मस्ती अच्छा लगने लगी, पहले भी अब भी अच्छा लगता हें । समलैंगिकता मे गुदा मैथुन और मुख मैथुन से रोमांचित होता था, मुखमैथुन व गुदा मैथुन से आनंद आता था। जब शादी की तो एक साल पत्नी से दूर रहा, फिर एक साल बाद एक लड़की पैदा हुई, फिर कुछ समय पत्नी से सहवास से दूर रहा, [ समय सीमा बताया नही ] फिर दो जुड़वा लड़के हुए । प्रयोज्य पत्नी से दूर रहा क्योकि व्यवसाय के कारण साथ नहीं थे, चार साल से पत्नी से मैथुन नही किया, गुदा मैथुन व मुख मैथुन की आज भी लत पड़ी हुई इससे छुटकारा चाहता था क्योकि दिन मे व्यवसाय के समय भी लोग आ जाते जिससे व्यवसाय मे बाधा आती लड़के बड़े हो चुके थे, अब शर्म भी आने लगी, सामाजिक सम्मेलन मे भाग लेने की इच्छा नही होना चाहता था, पर अब लड़को के रिश्ते चाह से समाज मे जाना चाहता था । स्त्री के प्रति लगाव हो और ये बुरी आदत छोडना चाहता हे, सन्मान पूर्वक जीना चाहता था । 

4 समस्या समाधान परिणाम 
व्यक्ति का लक्ष्य बहुत मजबूत था, अच्छा इरादा था। सामाजिक गतिशीलता को बनाए रखना चाहता था, समाज में मान सन्मान, हर्ष, कीर्ति चाहता था । जिस के कारण मेरे से ओनलाइन परामर्श से वो दिये गए दिशा निर्देशों का पालन करता था, बड़ी लगन, उमंग से बाते करता, अपनी दुकान मे समलैंगिकता का काम बंद कर दिया जिसके कारण, वापस खोया विश्वास आने लगा, आत्मबल भरने लगा । एक बार दिये गए दृश्य प्रायोगिक करते समय दिक्कत का सामना करना पड़ा था। अब सामाजिक आना-जाना अच्छा लगता हे और  व्यवसाय मे मन लगता और पत्नी से रोमांटिक बाते भी आसानी से करने लगा। जहा चाह वहा राह होती है। तुलसी दास जी राम चरित्र मानस मे लिखते है -  
सकल पदार्थ है जग माही, कर्म हिन नर पावत नाही । 
अब उसको एक महीने की ऑनलाइन परामर्श से समलैंगिता के कोई इच्छा नही होती, विषम लिंग मे अब रुचि होने लगी है । आत्म विश्वास बढ़ गया । अब व्यक्ति चालक चतुर भी बन गया । 

मंगलवार, 23 जून 2020

समलैंगिकता का ईलाज होता है ।

समलैंगिकता >>> किस प्रकार खानदानी समलैंगिकता से समलैंगिक ने मुक्ति पाई ? 
 
1.  मैथुन अभिप्रेरणा ओर निष्पादन [ Sex Motivation and Performance ]

          शोधकर्ता  डाक्टर रघुनाथ सिंह राणावत

                        Dietitian & psychologist

          माता आयुर्वेदिक दवाखाना, सापोल, राजसमंद, राजस्थान ।

2. प्रयोज्य परिचय –

प्रयोज्य का नाम - 132 

यौन – पुरुष

आयु – 23 

शिक्षा - उच्च माध्यमिक  [ प्रयोज्य का नाम गोपनीय रखा गया है । ]


3. समस्या परिचय - 

चिंता से दर्द होता था, तनाव होता था, लाइन मे लगाने से गुदा मे खुजली होती थी, घबराहट होती, डर लगता था, प्रयोज्य समलैंगिकता से पीड़ित था, सूखा भांग खाने से समलैंगिक संबंध के विचार प्रकट हुए, अफीम का नशा भी किया। गुदा मे उतेजना होने से लड़के अच्छे लगते, अधिकांश महिना होने की अनुभूति होती थी। लड़को को चुंबन चाहत होती थी। लड़को के लिंग देख कर मुह मे पानी आता था । इसके पिता, और दादा भी समलैंगिक थे, पर इस प्रयोज्य के मन मे एक ऊर्जा आई इस जीवनशैली से मुक्त होना चाहता था, क्योकि वह एक अच्छा खिलाड़ी था। गाँव वाले प्रोत्साहन मे घी दिया करते थे जिससे उत्साह उमंग रहता, हर्ष व मान सन्मान से अच्छा लगता था, इसलिए वह समलैंगिक जीवन शैली से बाहर आना चाहता था । उसकी चाहत थी की लड़कियो रुचि बढ़े, लड़किया अच्छी लगे। पूर्ण मर्द बनाना चाहता था और आर्मी मे भर्ती होना चाहता था । 

4. समस्या समाधान परिणाम 
 लड़के का लक्ष्य बहुत मजबूत था, नेक इरादा था। सामाजिक गतिशीलता को बनाए रखना चाहता था, समाज में मान सन्मान, हर्ष, कीर्ति चाहता था । जिस के कारण मेरे से ओनलाइन परामर्श से वो दिये गए दिशा निर्देशों का पालन करता था, बड़ी लगन, उमंग से बाते करता, जो खेल व आर्मी की तैयारी बंद कर दिया था, [ खेल भी गोपनीय रखा गया हें ] वापस शुरू कर दिया था, वापस खोया विश्वास आने लगा, आत्मबल भरने लगा । एक बार दिये गए दृश्य प्रायोगिक करते समय दिक्कत का सामना करना पड़ा क्योकि कार्य मे अत्यधिकता होने से हुआ । अब लड़को के लिंग पर ध्यान नही जाता, नहीं  मुह मे पानी आता । जहा चाह वहा राह होती है। तुलसी दास जी राम चरित्र मानस मे लिखते है -  
सकल पदार्थ है जग माही, कर्म हिन नर पावत नाही 
अब उसको एक महीने की ऑनलाइन परामर्श से समलैंगिता के कोई इच्छा नही होती, विषम लिंग मे अब रुचि होने लगी है । आत्म विश्वास बढ़ गया आगे आर्मी मे जानी की लग्न का अभ्यास करता है। वापस खेल के मैदान मे जाने लगा है । 

शनिवार, 20 जून 2020

समलैंगिकता का ईलाज होता है, देखिये एक शौध पत्र । निम्न तीन प्रकार की आधुनिक दवाईयां 1. Megiplex10 Mg tab, 2. Halotil 10mg tab, 3. flunil 20mg cap उपरोक्त दवाईया से छुटकारा मिल गया, ये आधुनिक औषधि लगभग डेढ़ वर्ष खाई थी ।




1.  मैथुन अभिप्रेरणा ओर निष्पादन [ Sex Motivation and Performance ]

          शोधकर्ता  डाक्टर रघुनाथ सिंह राणावत

                        Dietitian & psychologist

          माता आयुर्वेदिक दवाखाना, सापोल, राजसमंद, राजस्थान ।

2॰ समस्या समलैंगिकता

पुरुष समलैंगिकता से विषम लैंगिकता मे परिवर्तन करना था 

3॰ परिचय जन्म से मनुष्य एक सामुदायक व्यक्ति होता हैजिसमे एक घर परिवार मे पारिवारिक जीवन शैली से वंश वृदी होना एक प्राकृतिक सुख की अनुभूति है भारतीय संस्कृति मे वैवाहिक जीवन मे पति पत्नी दोनों के लिए संतान उत्तप्ति के लिय कुशल मैथुन प्रेरणा शिक्षण या निष्पादन का कारक या निर्धारक होता है । मिल्टन ने कहा था कि “प्रेरणा सीखने कि एक आवशयक शर्त है” जब की मेरा मानना है कि पीड़ित व्यक्ति कुशल विषमलिंगी मैथुन शिक्षण के लिय उत्प्रेरित हो ।

बाल्य जीवन से संज्ञानात्मक प्रेरणा और प्रोत्साहन का प्रभाव मैथुन शिक्षण और निष्पादन मे कई रूपो मे पड़ता है । मैथुन सफलता, असफलता, पुरुस्कार, परिणाम के ज्ञान आदि प्रोत्साहन के अनेक रूप है । सहयोग, स्पर्धा, प्रतियोगिता इत्यादि भी प्रोत्साहन के ही रूप है । इनका निश्चित प्रभाव व्यक्ति के मैथुन शिक्षा तथा निष्पादन पर पड़ता है ।

व्यक्तिव विकास के समय अज्ञान के कारण मौज मस्ती के परिणाम से अज्ञात होने के बाद जानकारी मिलना की उसका कार्य कितना अच्छा हुआ कितना बुरा हुआ, उसमे कितनी शुद्धि और कितना अशुद्धि हुई । भारतीय समाज मे प्रयोज्य को दोनों प्रकार का ज्ञान बताया जाता है की नकारात्मक से सकारात्मक तुलनात्मक किए गए कार्य या निष्पादन की शुद्धता और अशुद्धता की जानकारी दी जाती हें दोनो प्रकार की अवस्थाओ मे परिणाम के ज्ञान का अनुकूल प्रभाव निषपादन देखा जाता है । फिर भी प्रत्येक प्रयास के निष्पादन की जानकारी मिलते रहने से अधिक लाभ होता है । कारण प्रयोज्य निरंतर अपने कार्य सतर्क तथा उत्प्रेरित रहा करता है । आकर्षण परिणाम के ज्ञान का प्रभाव निष्पादन पर दो रूपो मे पड़ता है । एक तो पुरस्कार के रूप मे तथा दूसरा दंड के रूप मे होता है । जब ये बताया जाता है कि उसका कार्य अच्छा हो रहा है, तो वह पुरुस्कार के रूप मे पुरुस्कृत महसूस करने लगता है । अतः वह अपने कार्य के प्रति अधिक प्रेरित हो उठता है, फलत: उसका उसका कार्य या निष्पादन बेहतर बन जाता है । दूसरी तरफ प्रयोज्य को जब यह पता चलता है की उसका कार्य या निष्पादन घटिया हो रहा हो तो अशुद्धिया हो रही हो तो उसे दंड का अनुभव होता है । अतः वह अपने निष्पादन मे सुधार लाने का प्रयास के साथ सतर्क तथा प्रेरित हो उठता है । फलत: अगले प्रयास मे उसका निष्पादन अपेक्षाकृत बेहतर बन जाता है । स्पष्ट हुआ कि प्रयोज्य को अपने निष्पादन के संबद्ध मे चाहे शुद्धता का ज्ञान मिले या अशुद्धता का दोनों अवस्थाओं मे उसका निष्पादन बेहतर या उन्नत बन जाता है । निष्पादन की प्रगति पर शुद्धता के प्रभाव का प्रत्यक्ष रूप से तथा अशुद्धता से ज्ञान का प्रभाव अप्रत्यक्ष रूप से पड़ता है ।  

1 तत्परता से लाभ विषम लैंगिक होने के लिए परामर्श के समय जब सही तत्परता रही तब विषम लैंगिक निर्माण के विचार होता जाता था, तब प्रयोज्य सही प्रतिक्रिया विचार करने और समलैंगिक विचारो से अपने आप को बचाने लाभ करता था ।

2 तत्परता की हानि गलत तत्परता उत्पन्न विचार होने से प्रयोज्य गलत दिशा मे प्रयास के विचार आते थे, जिससे समस्या समाधान कठिन लगता था और समस्या के विचार बदल नही जाते तब तक तत्परता को छोडकर सही दिशा मे सक्रिय नही होता था

4॰ उद्देश्य

प्रस्तुत अनुसंधान का उद्देश्य शिक्षण के अभ्यास से प्रयोज्य के वैवाहिक दांपत्य जीवन मे महिला के प्रति आकर्षण निष्पादन पर परिणाम के ज्ञान [ अभिप्रेरणा ] के प्रभाव को सीखना है । उदेश्य व्यक्ति के ज्ञानात्मक सीखने मे धनात्मक स्थानातरण की घटनात्मक प्रदर्शन का अनुसंधान किया । ओनलाइन परामर्श मोखिक मे धनात्मक स्थानांतरण वास्तव मे उद्दीपक तथा प्रतिक्रिया की समानता पर आधारित हुआ ।

5॰ परिकल्पना  मेरे संगत अध्ययनो के आलोक मे परिकल्पना बनायी की परिणाम के ज्ञान [ अभिप्रेरणा ] के प्रभाव को दिखाना है । जो दो क्रिया के उद्दीपक एकांश भिन्न तथा प्रतिक्रिया एकांश अभिन्न होते है, तो उनके बीच धनात्मक स्थानांतरण होता है । [ समलैंगिकता व्यवहार तथा विचारो का प्रभाव वाला व्यक्तित्व आसानी से बदले जा सकते है । ]

6॰ प्रयोज्य परिचय –

प्रयोज्य का नाम - 127 

यौन – पुरुष

आयु – 22 

शिक्षा - उच्च माध्यमिक  [ प्रयोज्य का नाम गोपनीय रखा गया है । ]

7॰ सामग्री –

स्मार्ट फोन व वाट्स एप

[ ऑनलाइन काउन्सलिन्ग के लिए ] रजिस्टर लेखन के लिए

8॰ अनुसंधान की कार्य प्रणाली –

मौखिक अभ्यास के साथ अनुसन्धानात्मक अभिकल्प

योजना – प्रयोज्य के पास एक स्मार्ट फोन, बिना रुकावट बेजिझक स्थान का चयन कर के एक निश्चित समयावधि तय किया गया था । महीने मे 10 ऑनलाइन परामर्श नियंत्रित अवस्था मे प्रयोज्य समझा दिया गया था । फिर प्रयोज्य से अंतनिरीक्षण प्रतिवेदन  लिया गया तथा दोनों अवस्थाओ के परिणामो का तुलनात्मक अध्यन किया फिर देखा की धनात्मक स्थानांतरण धटित हुआ या नही । अग्रेजी आधुनिक दवाओ की लत से छुटकारा दिलाना था ।

1, Megiplex Tab व्यापारी नाम [ Propranolol (40mg) + Flunarizine (10mg) ]

2, Halotil 10 mg व्यापारी नाम [ Escitalopram Oxalate (10mg) ]

3, Flunil 20 mg  व्यापारी नाम [ Fluoxetine (20mg) 

9॰ परीक्षण सामग्री – मेरे दुवारा निर्मित शाब्दिक श्रवण प्रश्नोत्री आवश्यकता अनुसार स्पष्टीकरण पुछ लिया जाता था । प्रतिक्रियाओ को लिख दिया जाता था ।

1 व्यक्तित्व के लक्षण लज्जा, गंभीरता, संकोचशीलता, रूढ़िवाद, स्नायुविकृति - [ neuroticism ] स्नायु विकृति की पहचान अधिक देखी गई चिंता से ग्रस्त, संदेह की प्रवृति, संवेगात्मक नियंत्रण की कमी देखी, भ्रम के साथ विभ्रम भी पाया, स्थिरता की मध्यम चिंता, विचारो मे अस्थिरता एवं असंगति, संवेगात्मक अनियंत्रण, कल्पना की अधिकता, एकाग्रता की कमी, कमजोर याददास्त, और तनाव से पीड़ित पाया गया । बोलने की प्रवृति उपचार लेने के कारण सच धीरे धीरे झूठ से सच मे अग्रसर हुआ ।

 

10॰ अंतनिररिक्षण रिपोर्ट – परिणाम एवं व्याख्या

1 अधिगम स्थानातरण मौखिक सीखने मे धनात्मक स्थानांतरण की घटनाओ को श्रवण शक्ति से कौशल सहायता करता रहा ।

2 निर्देश निर्देशन की पालना के प्रयोज्य हमेशा तत्पर रहा था ।

शुरू में ये काम प्रयोज्य को कठिन लगा की ये काम मुझ से होगा की नही लेकिन कुछ समय बाद ये कठिनाई दूर हो गई । पहले कठिन सवाल समस्याओ के समाधान के बाद उसको वैवाहिक ज़िंदगी सुनहरी दिखने लगी ।

11॰ विवेचना एवं निष्कर्ष परिणाम पूछताछ से ज्ञात हुआ कि मेरी परिकल्पना सही प्रमाणित हुई कि परिणाम के ज्ञान [ अभिप्रेरणा ] के मिलने से निष्पादन बेहतर बन जाता है नियंत्रित अवस्था मे प्रयोज्य को उसके दुवारा किए गए निष्पादन के संबंधन मे जानकारी देता रहा था । इस प्रकार से परिणाम ज्ञान हो जाने से अशुद्धि बहुत घट गई और निष्पादन के गुण मे काफी प्रगति या उन्नति हो गई थी ।

प्रयोज्य ने नियंत्रित अवस्था कि अपेक्षा प्रयोगात्मक अवस्था मे बहुत कम त्रुटि की और उसका निष्पादन काफी उन्न्त बन गया । अनुसंधान से ज्ञात हुआ की शिक्षा के अंतनिरीक्षण प्रतिवेदन से भी निष्पादन पर परिणाम के ज्ञान [ अभिप्रेरणा ] का अनुकूल प्रभाव प्रमाणित होता है ।

निम्न तीन प्रकार की आधुनिक दवाईयां  

1. Megiplex10 Mg tab,  

2. Halotil 10mg tab, 

3. flunil 20mg cap 

उपरोक्त दवाईया से छुटकारा मिल गया, यो आधुनिक औषधि लगभग डेढ़ वर्ष खाई थी, द्वाईया छोडते वक्त थोड़ी कठिनाई आई पर पूरक पोषक तत्व देने से पूर्ण सफलता मिल गई । मानसिक तनाव चिंता से मुक्ति मिली वर्तमान वैवाहिक जीवन कुशलता पूर्वक हर्ष से बीते की योजना बना रहा हें । 

12॰ निष्कर्ष  प्रस्तुत अनुसंधान के आधार पर निष्कर्ष निकलता है कि परिणाम के ज्ञान [ अभिप्रेरणा ] के कारण निष्पादन उन्न्त बन जाता है । परिणाम के ज्ञान होते रहने पर व्यक्ति को अपनी त्रुटि सुधारने तथा अपने निष्पादन को और भी अच्छा करने का अवसर मिलता है ।

13॰ संदर्भ VMOUKOTA MAPSY 101, MAPSY 10

 

वाट्स एप 9829085951

 नोट ये लड़का अत्यधिक वाचाल, अत्यधिक अविश्वासी था, अपने आप पर भरोषा नही कर पाता जिसका एक मूल कारण था, उसने छ महीने बाद एक उसकी समलैंगिक मित्र के साथ की दोस्ती को छिपा दिया था । पर अब वर्तमान वो बिलकुल ठीक है। ।

अपडेट -- 25 / 05 / 2022 

इस लड़के की शादी 9 मई 2022 को हो गई, वैवाहिक जीवन से यह लड़का खुश है ।

 

सोमवार, 15 जून 2020

समलैंगिकता का उपचार

25 वर्ष का युवा का सवाल अपने साथी महिलाओ मे अरुचि कैसे दूर करे ?
समस्या 
प्रयोज्य समलैंगिकता से छुटकारा पाना चाहता था । साथी महिला कर्मचारी व स्त्रियो मे असरुचि होती जिसकी वजह से मन मे कुंठा, चिंता से मन भारी रहना इस समस्या से छुटकारा चाहता था । 
उपरोक्त सवाल 25 वर्ष का लड़का ने किया था, ये लड़का अँग्रेजी माध्यम पढ़ा लिखा था । 
नाम - 112 [ नाम गोपनीय रखा गया है ]
उम्र - 25 
व्यवसाय - असरकारी अध्यापक 

समस्या परिचय 
ऑनलाइन वार्तालाप से ज्ञात हुआ की प्रयोज्य समलैंगिकता से पीड़ित था । बचपन मे गुदा मैथुन से पीड़ित हो गया था । जिसके कारण एक लत लग गई थी । पड़ोसी युवा धनी आकर्षण से गुदा मैथुन करवाने की आदत पड़ चुकी थी । जिसके चिंता, तनाव से पीड़ित रहता था । पढ़ाते समय तनाव महसूस करना जिसके कारण उसके दुवारा पढ़ते छात्र अवेहलना करना से पीड़ित रहता । 

उपचार उद्देश्य 
माता पिता की इच्छा की बेटा शादी करे, पुत्र वधू आए पर प्रयोज्य की शादी करने की इच्छा नहीं होती थी क्योकि स्त्रियों के प्रति प्रेम का अभाव था, केवल समलैंगिता से ही लगाव था । 

परिकल्पना
एक भाषा सीखने के बाद दूसरी भाषा को आसानी से वापस नई पहल नई सूझ से जब सिखी जा सकती तो ये समलैंगिकता से विषमलैंगिकता आसानी बदली जा सकती है । 

निष्कर्ष 
प्रयोज्य को दिये गए दिशा निर्देशन का पालन किया और अपने आप को ऊर्जवान महसूस किया । समान आयु के उसके विधार्थी उसको हंसी मज़ाक करते उनको बाहे फडकाकर साहस से लड़ाई करने की चुनौती दी जिसकी वजह से वो सामने वाला छात्र डर गया । पाँच ऑनलाइन परामर्श हुई तब साथ दोस्तो ने तय किया की एक लड़की से संबंध बनाने की ईच्छा जाहीर की तो एक बार मेरा मन तो सहमत नहीं था। पर उस प्रयोज्य को आत्मविश्वास को बनाने मेरी असहमति को सहमति से उसे कहा जाओ अपने साथियो के साथ मैदान मार लो। इस प्रकार से पहली बार उसने अपने संबंध महिला से बनाए । क्रम से दो ऑनलाइन परामर्श हुआ फिर वापस 10 वा परामर्श रोक दिया और वो दो मार्गी रास्ता चुना कारण पूर्वाग्रह अपने दोस्तो से हो गया । चिंता, परेशानी, कठिनाईया, कुंठा से मुक्त हो चुका, उसे नई ऊर्जा मिली और साहस आ गया था। 

रविवार, 14 जून 2020

स्त्रियो मे प्रेम का अभाव

स्त्रियो मे प्रेम का अभाव होना मुझे बताया गया था । 

समस्या 
स्त्रियो मे प्रेम भरी बाते करने मे अभाव महसूस होता है, स्त्रियो के प्रति कोई रुचि नही होती है । गुदा मैथुन का आदि हो चुका । 
उपरोक्त सवाल 38 वर्ष व्यक्ति ने सवाल किया था । 
नाम - 109 [ नाम गोपनीय रखा गया ] 
आयु - 38 
व्यवसाय - हलवाई 

समस्या का परिचय 
ऑनलाइन फोन से वार्तालाप करके ज्ञात किया कि 20 वर्ष से गुदा मैथुन कराने कि आदत लग चुकी थी। सभी सामाजिक लोगो देखता कि सभी के घर बसे हुए है, मेरे भी घर परिवार हो स्त्री हो समाज में इज्जत हो और सामाजिक तानो से मुक्ति भी मिल जाये । शारीरिक दो समस्या भी होती थी पहली पेट में जलन दूसरी गर्म पानी पीने से आराम आना । 


उपचार उद्देश्य 
समलैंगिकता का इलाज हो और सामाजिक तानो से मुक्ति मिले और विषम लिंग से प्रेम बढ़े । 

परिकल्पना
धरती पर सभी व्यक्ति अपनी वंश बढ़ाने के स्त्री पुरुष के मिलन मैथुन करने से ही परंपरा है । 


निष्कर्ष 
प्रयोज्य ऑनलाइन परामर्श लेने मे असमर्थ था, हलवाई की नौकरी मे समय निकालना कठिन समझा, उसका आग्रह था की कोई दवाई दे दि जाये, जिससे उसके विचारो मे बदलाव जाये । पर विचारो को दवाई खाने से बदलाव नहीं आ सकता,  इसके लिए एक निश्चित सीमा मे शिक्षा लेना आवश्यक होता हें । 

गुरुवार, 11 जून 2020

समलैंगिकता से छुटकारा

समलैंगिकता से छुटकारा कैसे मिले एक 28 वर्ष के लड़के की समस्या का सवाल था, व्यवसाय -  केंद्रीय कर्मचारी,  लड़के की आयु 28 वर्ष का उसने बताया की वो एक समलैंगिक है और इस समस्या से छुटकारा पाना चाहता है । 
समस्या समाधान 
ऑनलाइन सभी समस्या को धीरज से सुना गया, लड़के को डर भय से मुक्त किया, आत्मविश्वास दिलाया गया । जिससे लड़के मे हिम्मत आई और धैर्य बढ़ा, संतुलित आहार का दिशा निर्देशन का चार्ट दिया गया था जिससे निरंतर खोया विश्वास वापस आने लगा और वो लड़का वापस अपने आप को सकारात्मक विचारो से स्वस्थ महसूस करने लगा और अब वह लड़का ठीक हो चुका है । 

नाम 92 B 1 
आयु 28 वर्ष 
निवास भारत 
 गोपनियता की नीति की वजह से पीड़ित व्यक्ति का गोपनीय रखा गया है । 

बुधवार, 10 जून 2020

गे समस्या से छुटकारा

एक 20 वर्ष का लड़का जिसकी समस्या दो निम्न लिखित है । 
1॰ बूढ़ी आंटी से सेक्स करना चाहता था । 
2॰ 50 साल के बूढ़े व्यक्ति के सेक्स [ गुतांग ] देखना चाहता है । 
लड्की के साथ सेक्स नही करना चाहता, अच्छी ज़िंदगी जीना चाहता था । समस्या 1॰ व समस्या नंबर दो से मुक्ति चाहता, इन अनैतिक संबंधो बाहर आना चाहता था । 

समस्या समाधान 
इस 20 वर्ष के लड़के के साथ बचपन मे दुर्घटना गुदा मैथुन होने से आदतन गुदा मैथुन का अभ्यासी हो चुका था, जो अपनी समस्या को किसी को बताने मे डर व चिंता होती थी पर ऑनलाइन ये समस्या मुझे बताई गई थी, मैने आश्वासन दिया, बात गोपनीय रखने की कही फिर एक महीना मनोवैज्ञानिक ऑनलाइन परामर्श दिया गया था, और संतुलित पोषण आहार का निर्देशन चार्ट दिया जिससे उस व्यक्ति मे संतोष व धैर्य आया और नकारात्मक विचारो से मुक्ति मिल गई । ऑनलाइन परामर्श के बाद से स्वस्थ सकारात्मक विचारो सहित जीवन जी रहा है । 

नोट - 
नाम - 91 A 1 
व्यक्ति का गोपनीय नाम रखना जरूरी समझा । 


गुरुवार, 7 मई 2020

समलैंगिकता का ईलाज होता है ।

समलैंगिकता एक लत होती है जो भ्रम या दुर्घटनाओं के घटने के कारण ये व्यक्ति शिकार हो जाते है । जिसका मूल कारण अनुसंधान से ज्ञात हुआ है कि बचपन में किसी रिश्तेदार, नौकर, पड़ोसियों, अध्यापक, या किसी साथियों दुवारा गुदा मैथुन के कारण से एक प्रकार की गुदा मैथुन कराने की लत पड़ चुकी होती है । ये लत गुप्त होती है, फिर व्यक्ति एक समलैंगिक संबंध बनाने में आतुर रहता है । फिर व्यक्ति अपने मर्द वाली पहचान खो देता हैं, और एक दूसरी समलैंगिक पहचान में विस्थापित हो जाता है । फिर उसके गुदा मैथुन में आनन्द आने की वजह से वो ये भूल जाता है कि वो एक मर्द है और उसको विवाह करना है और वैवाहिक जीवन से पारिवारिक जीवन बढ़ते क्रम को आगे बढ़ाना है, इस विकृत गुदा मैथुन की लत से उसके साथियों की तलाश में एक प्रकार से अफीम, चरस जैसे नशे की लत में पागलपन हो जाता है, परिवार वाले अगर शादी की बात करते तो वो इनकार करता है ।उसके बाद, चिंता भय, डर, तनावग्रस्त होकर आत्म हत्या जैसे विचारों में उलझ जाता है। समलैंगिक व्यक्ति अपनी आप बीती की कहानी किसी को बता नहीं सकता है । इन लोंगो ले लिए कोई मार्गदर्शन नहीं होता है, जो भी इंटरनेट पर ढूंढता उसमे ये समलैंगिकता को प्राकृतिक रूप ही बताते है फिर निराधार निराशा के बादल मंडराने लगते है। अब आप बीती लड़का बता नहीं सकने के कारण वो विमार्ग पर जा चुका होता है, कुछ समझदार होते है निदान ढूंढते है पर रास्ता नहीं मिलता, इंटरनेट पर उपलब्ध सामग्री सभी समलैंगिक प्राकृतिक व सामान्य बताया जाता है । पर मेरा मानना है ये सब गलत व भ्रामक बताया गया है, ये पीड़ित व्यक्ति ठीक होते है, मैं ठीक किये है । इसमें समय लगता है धैर्य व विश्वास रखना पड़ता है, मेरे यूट्यूब वीडियो पर मैंने बोला है कि पीड़ित व्यक्ति अपने माता पिता को अपने साथ हुई दुर्घटनाओं को बताओ । जो लड़के कमाते नहीं, जिनके पास कोई आय नहीं वो, सर्वप्रथम माता अपने पुत्र के खोए विश्वास में आगे आती है, उसने जन्म दिया वो उपचार भी करवाती है । जो अपनी कमाई पर है वो आसानी से अपना इलाज करा सकते है और वैवाहिक जीवन सुख से जी सकते है ।
समलैंगिकता का इलाज होता है ।