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शुक्रवार, 10 जुलाई 2020

गुदामैथुन समलैंगिकता की समस्या का ईलाज हुआ ।

समलैंगिकता >>> बाल्य काल मे रिश्तेदार ने बलात्कार करने के बाद एक ही मनोवृति हो चुकी ।

1.  मैथुन अभिप्रेरणा ओर निष्पादन [ Sex Motivation and Performance ]
           शोधकर्ता  डाक्टर रघुनाथ सिंह राणावत
           Dietitian & psychologist
          माता आयुर्वेदिक दवाखाना, सापोल, राजसमंद, राजस्थान ।
2. प्रयोज्य परिचय –
प्रयोज्य का नाम - 162 
यौन – पुरुष
आयु – 20  
व्यवसाय - बेरोजगार 
शिक्षा -  BA दूसरा वर्ष विधार्थी  [ प्रयोज्य का नाम गोपनीय रखा गया है । ]
3॰ समस्या परिचय
प्रयोज्य समलैंगिकता से पीड़िता हो चुका अब इस गलत आदत को कैसे छोड़े किस से उपचार कराये, इलाज के लिए रुपया कहा से लाये । इसलिए उसने गूगल ऑनलाइन ढूंढा तो ज्ञात हुआ की अगर आप इस प्रकार कम आयु से पीड़ित है, तो अपने माता पिता को बताओ, प्रयोज्य ने अपनी दादी को बताया तो दादी रुपए दे के मदद की । https://www.youtube.com/c/DrRaghunathSinghRanawat/videos   
6 वर्ष तब 16 वर्ष का एक रिश्तेदार ने बलपूर्वक गुदा मैथुन कर दिया था, और मुख मैथुन भी करवाया था, फिर लगभग 11 वर्ष का हुआ तो कक्षा 6 मे पढ़ता उस समय लगभग 20 - 21 वर्ष के एक रिश्तेदार ने तीन बार गुदा मैथुन किया लिंग पर चुंबन देना, लिंग को मुह मे देना, ये आदत सिखा दिया गया था, दो लड़को से गुदा मैथुन किया और गुदा मैथुन करवाया था। इसी तरह लगातार तीन अन्य व्यक्तियों से संबद्ध हो गए । 
तनाव होने पर नींद नहीं आती, नींद मे बेकार सपने आते, सपनों मे लड़को के साथ समलैंगिक मैथुन होना ही देखता था। 
  ( 1 ) समस्या / कठिनाईया - लड़को के देख कर समलैंगिकता मैथुन की इच्छा होती फिर चिंता, भय, डर सताने लगा, आत्मविश्वास कमजोर होने लगा, लड़कियो मे कोई रुचि नहीं होती थी । 
  ( 2 ) जीवन यापन के लिए लक्ष्य है की विदेश जाने की बड़ी चाहत होती है । 
  ( 3 ) व्यक्तित्व - प्रयोज्य का साधारण व्यक्तित्व था, स्वभाव अशांति प्रिय था, घर मे लड़ाई झगड़ा करना जानता था। परिवार मे धमकी देना आता, रूठता या नाराज होना जानता था । 
बाल्य जीवन से संज्ञानात्मक प्रेरणा और प्रोत्साहन का प्रभाव मैथुन शिक्षण और निष्पादन मे कई रूपो मे पड़ता है। मैथुन सफलता, असफलता, पुरुस्कार, परिणाम के ज्ञान आदि प्रोत्साहन के अनेक रूप है। सहयोग, स्पर्धा, प्रतियोगिता इत्यादि भी प्रोत्साहन के ही रूप है। इनका निश्चित प्रभाव व्यक्ति के मैथुन शिक्षा तथा निष्पादन पर पड़ता है ।
( 1 ) तत्परता से लाभ -- विषम लैंगिक होने के लिए परामर्श के समय जब सही तत्परता रही तब विषम लैंगिक निर्माण के विचार होता जाता था, तब प्रयोज्य सही प्रतिक्रिया विचार करने और समलैंगिक विचारो से अपने आप को बचाने लाभ करता था ।
( 2 ) तत्परता की हानि -- गलत तत्परता उत्पन्न विचार होने से प्रयोज्य गलत दिशा मे प्रयास के विचार आते थे, जिससे समस्या समाधान कठिन लगता था और समस्या के विचार बदल नही जाते तब तक तत्परता को छोडकर सही दिशा मे सक्रिय नही होता था ।

4॰ उद्देश्य –
प्रस्तुत अनुसंधान का उद्देश्य शिक्षण के अभ्यास से प्रयोज्य के वैवाहिक दांपत्य जीवन मे महिला के प्रति आकर्षण निष्पादन पर परिणाम के ज्ञान [ अभिप्रेरणा ] के प्रभाव को सीखना है । उदेश्य व्यक्ति के ज्ञानात्मक सीखने मे धनात्मक स्थानातरण की घटनात्मक प्रदर्शन का अनुसंधान किया । ओनलाइन परामर्श मोखिक मे धनात्मक स्थानांतरण वास्तव मे उद्दीपक तथा प्रतिक्रिया की समानता पर आधारित हुआ ।

5॰ परिकल्पना – मेरे संगत अध्ययनो के आलोक मे परिकल्पना बनायी की परिणाम के ज्ञान [ अभिप्रेरणा ] के प्रभाव को दिखाना है । जो दो क्रिया के उद्दीपक एकांश भिन्न तथा प्रतिक्रिया एकांश अभिन्न होते है, तो उनके बीच धनात्मक स्थानांतरण होता है । [ समलैंगिकता व्यवहार तथा विचारो का प्रभाव वाला व्यक्तित्व आसानी से बदले जा सकते है । ]
6॰ अनुसंधान की कार्य प्रणाली –
मौखिक अभ्यास के साथ अनुसन्धानात्मक अभिकल्प
योजना – प्रयोज्य के पास एक स्मार्ट फोन, बिना रुकावट बेजिझक स्थान का चयन कर के एक निश्चित समयावधि तय किया गया था । महीने मे 10 ऑनलाइन परामर्श नियंत्रित अवस्था मे प्रयोज्य समझा दिया गया था । फिर प्रयोज्य से अंतनिरीक्षण प्रतिवेदन  लिया गया तथा दोनों अवस्थाओ के परिणामो का तुलनात्मक अध्यन किया फिर देखा की धनात्मक स्थानांतरण धटित हुआ या नही

7॰ परीक्षण सामग्री – मेरे दुवारा निर्मित शाब्दिक श्रवण प्रश्नोत्री आवश्यकता अनुसार स्पष्टीकरण पुछ लिया जाता था । प्रतिक्रियाओ को लिख दिया जाता था ।
( 1 ) व्यक्तित्व के लक्षण  चिंता से ग्रस्त, संदेह की प्रवृति, संवेगात्मक नियंत्रण की कमी देखी, भ्रम  पाया, स्थिरता की मध्यम चिंता, विचारो मे अस्थिरता एवं असंगति, संवेगात्मक अनियंत्रण, कल्पना की अधिकता, एकाग्रता की कमी, कमजोर याददास्त, और तनाव से पीड़ित पाया गया ।

8॰ अंतनिररिक्षण रिपोर्ट – परिणाम एवं व्याख्या
(1) अधिगम स्थानातरण मौखिक सीखने मे धनात्मक स्थानांतरण की घटनाओ को श्रवण शक्ति से कौशल सहायता करता रहा ।
(2) निर्देश निर्देशन की पालना के प्रयोज्य हमेशा तत्पर रहा था ।
“शुरू में ये काम प्रयोज्य को कठिन लगा की ये काम मुझ से होगा की नही लेकिन कुछ समय बाद ये कठिनाई दूर हो गई । पहले कठिन सवाल समस्याओ के समाधान के बाद उसको वैवाहिक ज़िंदगी सुनहरी दिखने लगी ।

9॰ विवेचना एवं निष्कर्ष – परिणाम पूछताछ से ज्ञात हुआ कि मेरी परिकल्पना सही प्रमाणित हुई कि परिणाम के ज्ञान [ अभिप्रेरणा ] के मिलने से निष्पादन बेहतर बन जाता है नियंत्रित अवस्था मे प्रयोज्य को उसके दुवारा किए गए निष्पादन के संबंधन मे जानकारी देता रहा था । इस प्रकार से परिणाम ज्ञान हो जाने से अशुद्धि बहुत घट गई और निष्पादन के गुण मे काफी प्रगति या उन्नति हो गई थी ।

प्रयोज्य ने नियंत्रित अवस्था कि अपेक्षा प्रयोगात्मक अवस्था मे बहुत कम त्रुटि की और उसका निष्पादन काफी उन्न्त बन गया । अनुसंधान से ज्ञात हुआ की शिक्षा के अंतनिरीक्षण प्रतिवेदन से भी निष्पादन पर परिणाम के ज्ञान [ अभिप्रेरणा ] का अनुकूल प्रभाव प्रमाणित होता है ।

10॰ निष्कर्ष - प्रस्तुत अनुसंधान के आधार पर निष्कर्ष निकलता है कि परिणाम के ज्ञान [ अभिप्रेरणा ] के कारण निष्पादन उन्न्त बन जाता है । परिणाम के ज्ञान होते रहने पर व्यक्ति को अपनी त्रुटि सुधारने तथा अपने निष्पादन को और भी अच्छा करने का अवसर मिलता है । कुलमिलाकर लड़के की समलैंगिक मानसिकता समाप्त हो चुकी और विषम लिंग मै अभिरुचि आ गई । अब लिंग बदलवाने की इच्छा नहीं  होती है । वह अपना खोया आत्म विश्वास अब आ गया,  मर्द होने का अहसास हो गया । प्रयोज्य की चिंता समाप्त हो चुकी थी। अब खुशी से जी रहा है । 
नोट - सामान्य भाषा मे कहा जा सकता है की मनोवैज्ञानिक परामर्श लेने से प्रयोज्य अब परिवार मे प्रेम से रहने लगा, लड़ाई, झगड़े बंद हो गए, उग्र स्वभाव मे परिवर्तन हो चुका और ठीक हो चुका और समलैंगिकता से विषमलिंग मे आसानी से विचारो की आदत को बदला जा चुका है । अब लड़कियो से मित्रता होने लगी और दो लड़कियो से दोस्ती होने के समाचार भी मुझे सुना दिया ।   
11॰ संदर्भ VMOUKOTA MAPSY 101, MAPSY 10



 वाट्स एप 91 98290 85951

बुधवार, 8 जुलाई 2020

मुख मैथुन समलैंगिता की आदत कैसे छूटी ?

समलैंगिक का उपचार होता है ।
समलैंगिकता अनुसंधान पत्र [ शौध पत्र ]
एक नई खोज, समलैंगिक कैसे बना ?

कैसे समलैंगिकता का ईलाज / उपचार हुआ  ।
समलैंगिकता >>> अभिभावक ने नैतिक आचरण नही सिखाया आचरण ।

1.  मैथुन अभिप्रेरणा ओर निष्पादन [ Sex Motivation and Performance ]
           शोधकर्ता  डाक्टर रघुनाथ सिंह राणावत
           Dietitian & psychologist
          माता आयुर्वेदिक दवाखाना, सापोल, राजसमंद, राजस्थान ।
2. प्रयोज्य परिचय –
प्रयोज्य का नाम - 159
यौन – पुरुष
आयु – 20  
व्यवसाय - बेरोजगार 
शिक्षा -  विधार्थी  [ प्रयोज्य का नाम गोपनीय रखा गया है । ]
3॰ समस्या परिचय
घर वाले शादी की बात करते उसकी चिंता बहुत होती थी, दादा दादी के प्यार का अभाव रहा था । क्योकि प्रयोज्य की समस्या जब वो 6 -7 साल उम्र का था, उस समय ताऊ का का बेटा किसी बहाने साथ मे सुला लेता था, पॉर्न वीडियो दिखाता, उस की तरह से प्रेम आलाप भी करता था। किस देना, लिंग को मुह मे देना, ये क्रम चार साल चला, लगातार नहीं पर कभी कभार समय मिलने पर ये समलैंगिकता संबंध होता था, दूसरा ताऊ का लड़का भी इसी प्रकार से वो अपना लिंग मुह से मैथुन करवाता था। फिर कक्षा 6 मे भर्ती हुआ तब हॉस्टल मे रहता था। हॉस्टल मे आपसी सेक्स क्रिया करते थे, ये क्रम होने से लगा की मै स्त्रीत्व का व्यक्तित्व वाला हूँ, कक्षा 8 - 9 मे लगभग उस समय प्रयोज्य की आयु 14-15 वर्ष हो सकती तब आदतन समलैंगिकता का अभ्यास हो गया था । मुखमैथुन का अभ्यास आधा घंटा होता था। ये बुरी आदत हो चुकी थी । फिर कक्षा 10 मे आया तो हॉस्टल छोडकर कमरा किराए ले लिया । 
प्रयोज्य अब आदतन समलैंगिक हो चुका था । शाम को दोस्त आते उनके साथ समलैंगिक मैथुन क्रिया होती थी । कक्षा 11 मे आने पर, मुखमैथुन समलैंगिक क्रिया को नियंत्रण मे कर लिया था । कक्षा 12 मे आने पर सामाजिक संघठन मे उनके अच्छे विचारो से प्रभावित होकर उस सामाजिक संघठन से प्रशिक्षण के लिए आता जाता रहता था तो उस समय सामाजिक संघ के विचारो से प्रभावित होकर समलैंगिक मुखमैथुन बिलकुल बंद कर दिया था। हस्त मैथुन करना जारी था, हस्त मैथुन करते समय दिमाग मे लड़के का चित्रण करके करता था ।  कक्षा छ मे पाढ़ता था तब हॉस्टल के लड़कों मे रहने वाले सहपाठी की प्रेरणा से पहली बार हस्तमैथुन किया था । लिंग बदलवाने की इच्छा होती थी ।
 ( 1 ) समस्या / कठिनाईया - जो आपस मे दोस्त बने थे, जब वो दोस्त आपस मे नही मिलते तब तक बेचेनी होती थी। जब अपनी आप बीती चिंता को अपने दोस्त को बताई तो वो बात नहीं करता था, तो शंका उत्तपन्न होती की वो बात क्यो नहीं करता था । 
साथ ही साथ मे नाच,गान मे बहुत रुचि होने लगी और स्त्रीत्व के रूप मे बहुत रुचि हो गई, अच्छे कपड़े पहनना, संवारना नारियो की भाति की इच्छा होने लगती थी। दोस्तो से ताना मिलता की लड़कियो जैसे क्यो चलता है। अग्रणी की कमी भी पाई गई । 
( 2 ) जीवन यापन के लिए लक्ष्य है की सेना मे भर्ती होने की कड़ी चाहत होती है । 
( 3 ) व्यक्तित्व - प्रयोज्य का साधारण व्यक्तित्व था, स्वभाव शांति प्रिय था, लड़ाई झगड़ा करना नही जानता था। परिवार मे धमकी देना नहीं आता, रूठता या नाराज होना नही जानता  था । 
बाल्य जीवन से संज्ञानात्मक प्रेरणा और प्रोत्साहन का प्रभाव मैथुन शिक्षण और निष्पादन मे कई रूपो मे पड़ता है। मैथुन सफलता, असफलता, पुरुस्कार, परिणाम के ज्ञान आदि प्रोत्साहन के अनेक रूप है। सहयोग, स्पर्धा, प्रतियोगिता इत्यादि भी प्रोत्साहन के ही रूप है। इनका निश्चित प्रभाव व्यक्ति के मैथुन शिक्षा तथा निष्पादन पर पड़ता है ।
( 1 ) तत्परता से लाभ -- विषम लैंगिक होने के लिए परामर्श के समय जब सही तत्परता रही तब विषम लैंगिक निर्माण के विचार होता जाता था, तब प्रयोज्य सही प्रतिक्रिया विचार करने और समलैंगिक विचारो से अपने आप को बचाने लाभ करता था ।
( 2 ) तत्परता की हानि -- गलत तत्परता उत्पन्न विचार होने से प्रयोज्य गलत दिशा मे प्रयास के विचार आते थे, जिससे समस्या समाधान कठिन लगता था और समस्या के विचार बदल नही जाते तब तक तत्परता को छोडकर सही दिशा मे सक्रिय नही होता था ।

4॰ उद्देश्य –
प्रस्तुत अनुसंधान का उद्देश्य शिक्षण के अभ्यास से प्रयोज्य के वैवाहिक दांपत्य जीवन मे महिला के प्रति आकर्षण निष्पादन पर परिणाम के ज्ञान [ अभिप्रेरणा ] के प्रभाव को सीखना है । उदेश्य व्यक्ति के ज्ञानात्मक सीखने मे धनात्मक स्थानातरण की घटनात्मक प्रदर्शन का अनुसंधान किया । ओनलाइन परामर्श मोखिक मे धनात्मक स्थानांतरण वास्तव मे उद्दीपक तथा प्रतिक्रिया की समानता पर आधारित हुआ ।

5॰ परिकल्पना – मेरे संगत अध्ययनो के आलोक मे परिकल्पना बनायी की परिणाम के ज्ञान [ अभिप्रेरणा ] के प्रभाव को दिखाना है । जो दो क्रिया के उद्दीपक एकांश भिन्न तथा प्रतिक्रिया एकांश अभिन्न होते है, तो उनके बीच धनात्मक स्थानांतरण होता है । [ समलैंगिकता व्यवहार तथा विचारो का प्रभाव वाला व्यक्तित्व आसानी से बदले जा सकते है । ]
6॰ अनुसंधान की कार्य प्रणाली –
मौखिक अभ्यास के साथ अनुसन्धानात्मक अभिकल्प
योजना – प्रयोज्य के पास एक स्मार्ट फोन, बिना रुकावट बेजिझक स्थान का चयन कर के एक निश्चित समयावधि तय किया गया था । महीने मे 10 ऑनलाइन परामर्श नियंत्रित अवस्था मे प्रयोज्य समझा दिया गया था । फिर प्रयोज्य से अंतनिरीक्षण प्रतिवेदन  लिया गया तथा दोनों अवस्थाओ के परिणामो का तुलनात्मक अध्यन किया फिर देखा की धनात्मक स्थानांतरण धटित हुआ या नही

7॰ परीक्षण सामग्री – मेरे दुवारा निर्मित शाब्दिक श्रवण प्रश्नोत्री आवश्यकता अनुसार स्पष्टीकरण पुछ लिया जाता था । प्रतिक्रियाओ को लिख दिया जाता था ।
( 1 ) व्यक्तित्व के लक्षण  चिंता से ग्रस्त, संदेह की प्रवृति, संवेगात्मक नियंत्रण की कमी देखी, भ्रम  पाया, स्थिरता की मध्यम चिंता, विचारो मे अस्थिरता एवं असंगति, संवेगात्मक अनियंत्रण, कल्पना की अधिकता, एकाग्रता की कमी, कमजोर याददास्त, और तनाव से पीड़ित पाया गया ।

8॰ अंतनिररिक्षण रिपोर्ट – परिणाम एवं व्याख्या
(1) अधिगम स्थानातरण मौखिक सीखने मे धनात्मक स्थानांतरण की घटनाओ को श्रवण शक्ति से कौशल सहायता करता रहा ।
(2) निर्देश निर्देशन की पालना के प्रयोज्य हमेशा तत्पर रहा था ।
“शुरू में ये काम प्रयोज्य को कठिन लगा की ये काम मुझ से होगा की नही लेकिन कुछ समय बाद ये कठिनाई दूर हो गई । पहले कठिन सवाल समस्याओ के समाधान के बाद उसको वैवाहिक ज़िंदगी सुनहरी दिखने लगी ।

9॰ विवेचना एवं निष्कर्ष – परिणाम पूछताछ से ज्ञात हुआ कि मेरी परिकल्पना सही प्रमाणित हुई कि परिणाम के ज्ञान [ अभिप्रेरणा ] के मिलने से निष्पादन बेहतर बन जाता है नियंत्रित अवस्था मे प्रयोज्य को उसके दुवारा किए गए निष्पादन के संबंधन मे जानकारी देता रहा था । इस प्रकार से परिणाम ज्ञान हो जाने से अशुद्धि बहुत घट गई और निष्पादन के गुण मे काफी प्रगति या उन्नति हो गई थी ।

प्रयोज्य ने नियंत्रित अवस्था कि अपेक्षा प्रयोगात्मक अवस्था मे बहुत कम त्रुटि की और उसका निष्पादन काफी उन्न्त बन गया । अनुसंधान से ज्ञात हुआ की शिक्षा के अंतनिरीक्षण प्रतिवेदन से भी निष्पादन पर परिणाम के ज्ञान [ अभिप्रेरणा ] का अनुकूल प्रभाव प्रमाणित होता है ।

10॰ निष्कर्ष - प्रस्तुत अनुसंधान के आधार पर निष्कर्ष निकलता है कि परिणाम के ज्ञान [ अभिप्रेरणा ] के कारण निष्पादन उन्न्त बन जाता है । परिणाम के ज्ञान होते रहने पर व्यक्ति को अपनी त्रुटि सुधारने तथा अपने निष्पादन को और भी अच्छा करने का अवसर मिलता है । कुलमिलाकर लड़के की समलैंगिक मानसिकता समाप्त हो चुकी और विषम लिंग मै अभूरुचि आ गई । अब लिंग बदलवाने की इच्छा नहीं  होती है । वह अपना खोया आत्म विश्वास अब आ गया,  मर्द होने का अहसास हो गया । प्रयोज्य की चिंता समाप्त हो चुकी थी। अब खुशी से जी रहा है । 
नोट - सामान्य भाषा मे कहा जा सकता है की मनोवैज्ञानिक परामर्श लेने से प्रयोज्य ठीक हो चुका और समलैंगिकता से विषमलिंग मे आसानी से विचारो की आदत को बदला जा सकता है । 

11॰ संदर्भ VMOUKOTA MAPSY 101, MAPSY 10



 वाट्स एप 91 98290 85951

सोमवार, 6 जुलाई 2020

समलैंगिक का उपचार होता है ।

समलैंगिकता अनुसंधान पत्र [ शौध पत्र ]
एक नई खोज, समलैंगिक कैसे बना ?

कैसे समलैंगिकता का ईलाज / उपचार हुआ  ।
समलैंगिकता >>> अभिभावक ने नैतिक आचरण नही सिखाया आचरण ।

1.  मैथुन अभिप्रेरणा ओर निष्पादन [ Sex Motivation and Performance ]
           शोधकर्ता  डाक्टर रघुनाथ सिंह राणावत
           Dietitian & psychologist
          माता आयुर्वेदिक दवाखाना, सापोल, राजसमंद, राजस्थान ।
2. प्रयोज्य परिचय –
प्रयोज्य का नाम - 158
यौन – पुरुष
आयु – 24 
व्यवसाय - स्थानीय मजदूर
शिक्षा -  12   [ प्रयोज्य का नाम गोपनीय रखा गया है । ]
3॰ समस्या परिचय
प्रयोज्य 5 वर्ष की आयु का था, अभिभावक ने लड़कियो वाले घरेलू काम काज कराते थे । लड़कियो जैसे आचरण व्यक्तित्व होतो [ परिवार वाले कभी विरोध नहीं किया, जो जरूरी था ] । 10 वर्ष की उम्र तक घरेलू काम बर्तन माँजना, पोशा लगाना, करता था । लड़कियो के साथ खेलता था, चाचा के लड़को के साथ व अड़ोस पड़ोस लड़को के साथ यौन क्रिया करना शुरू किया [ माता पिता की निगरानी की अवेहलना मानता हूँ ] एक दूसरे का लिंग पकड़ना [ जब की ये उम्र सार्वजनिक खेल खेलने की होती ]  हस्तमैथुन करना सीख गए । 15 - 16 वर्ष की उम्र मे लड़को को चुंबन देना शुरुआत की, लिंग पकड़ना, गुदा मैथुन किया व करवाया था । ज़्यादातर गुदा मैथुन किया, एक दो दिन, समय मिलते आपस मे कपड़ा उतार कर न्ंगे हो जाते फिर गुदा मैथुन किया करते थे, लड़के की फिलिंग लेकर हस्त मैथुन किया करते थे। चाचा के लड़के से अधिक लगाव रहता था, जब 12 मे पढ़ते थे, शारीरिक गुदा मैथुन करते थे। आज भी लड़के पसंद, प्रयोज्य का शांत स्वभाव था, कम बोलता, कभी कोई खेल नहीं खेलता, पढ़ाई मे तेज था। लड़के अच्छे लगते थे। लड़कियो को बहन समझ कर बात करता था। फेसबुक पर बहन समझ कर बात करता । अगर कोई लड़की सामने रोती तो उसके लिए कोई अनुभूति नहीं होती । शर्म और डर लगातार बना रहता था ।
माता को बताया की मुझे लड़किया अच्छी नहीं लगती और लड़के अच्छे लगते है । मुझे इलाज कराना है, फिर माता ने हा कर दी । 
बाल्य जीवन से संज्ञानात्मक प्रेरणा और प्रोत्साहन का प्रभाव मैथुन शिक्षण और निष्पादन मे कई रूपो मे पड़ता है। मैथुन सफलता, असफलता, पुरुस्कार, परिणाम के ज्ञान आदि प्रोत्साहन के अनेक रूप है। सहयोग, स्पर्धा, प्रतियोगिता इत्यादि भी प्रोत्साहन के ही रूप है। इनका निश्चित प्रभाव व्यक्ति के मैथुन शिक्षा तथा निष्पादन पर पड़ता है ।
( 1 ) तत्परता से लाभ -- विषम लैंगिक होने के लिए परामर्श के समय जब सही तत्परता रही तब विषम लैंगिक निर्माण के विचार होता जाता था, तब प्रयोज्य सही प्रतिक्रिया विचार करने और समलैंगिक विचारो से अपने आप को बचाने लाभ करता था ।
( 2 ) तत्परता की हानि -- गलत तत्परता उत्पन्न विचार होने से प्रयोज्य गलत दिशा मे प्रयास के विचार आते थे, जिससे समस्या समाधान कठिन लगता था और समस्या के विचार बदल नही जाते तब तक तत्परता को छोडकर सही दिशा मे सक्रिय नही होता था ।

4॰ उद्देश्य –
प्रस्तुत अनुसंधान का उद्देश्य शिक्षण के अभ्यास से प्रयोज्य के वैवाहिक दांपत्य जीवन मे महिला के प्रति आकर्षण निष्पादन पर परिणाम के ज्ञान [ अभिप्रेरणा ] के प्रभाव को सीखना है । उदेश्य व्यक्ति के ज्ञानात्मक सीखने मे धनात्मक स्थानातरण की घटनात्मक प्रदर्शन का अनुसंधान किया । ओनलाइन परामर्श मोखिक मे धनात्मक स्थानांतरण वास्तव मे उद्दीपक तथा प्रतिक्रिया की समानता पर आधारित हुआ ।

5॰ परिकल्पना – मेरे संगत अध्ययनो के आलोक मे परिकल्पना बनायी की परिणाम के ज्ञान [ अभिप्रेरणा ] के प्रभाव को दिखाना है । जो दो क्रिया के उद्दीपक एकांश भिन्न तथा प्रतिक्रिया एकांश अभिन्न होते है, तो उनके बीच धनात्मक स्थानांतरण होता है । [ समलैंगिकता व्यवहार तथा विचारो का प्रभाव वाला व्यक्तित्व आसानी से बदले जा सकते है । ]

6॰ अनुसंधान की कार्य प्रणाली –
मौखिक अभ्यास के साथ अनुसन्धानात्मक अभिकल्प
योजना – प्रयोज्य के पास एक स्मार्ट फोन, बिना रुकावट बेजिझक स्थान का चयन कर के एक निश्चित समयावधि तय किया गया था । महीने मे 10 ऑनलाइन परामर्श नियंत्रित अवस्था मे प्रयोज्य समझा दिया गया था । फिर प्रयोज्य से अंतनिरीक्षण प्रतिवेदन  लिया गया तथा दोनों अवस्थाओ के परिणामो का तुलनात्मक अध्यन किया फिर देखा की धनात्मक स्थानांतरण धटित हुआ या नही

7॰ परीक्षण सामग्री – मेरे दुवारा निर्मित शाब्दिक श्रवण प्रश्नोत्री आवश्यकता अनुसार स्पष्टीकरण पुछ लिया जाता था । प्रतिक्रियाओ को लिख दिया जाता था ।
( 1 ) व्यक्तित्व के लक्षण  चिंता से ग्रस्त, संदेह की प्रवृति, संवेगात्मक नियंत्रण की कमी देखी, भ्रम  पाया, स्थिरता की मध्यम चिंता, विचारो मे अस्थिरता एवं असंगति, संवेगात्मक अनियंत्रण, कल्पना की अधिकता, एकाग्रता की कमी, कमजोर याददास्त, और तनाव से पीड़ित पाया गया ।

8॰ अंतनिररिक्षण रिपोर्ट – परिणाम एवं व्याख्या
(1) अधिगम स्थानातरण मौखिक सीखने मे धनात्मक स्थानांतरण की घटनाओ को श्रवण शक्ति से कौशल सहायता करता रहा ।
(2) निर्देश निर्देशन की पालना के प्रयोज्य हमेशा तत्पर रहा था ।
“शुरू में ये काम प्रयोज्य को कठिन लगा की ये काम मुझ से होगा की नही लेकिन कुछ समय बाद ये कठिनाई दूर हो गई । पहले कठिन सवाल समस्याओ के समाधान के बाद उसको वैवाहिक ज़िंदगी सुनहरी दिखने लगी ।

9॰ विवेचना एवं निष्कर्ष – परिणाम पूछताछ से ज्ञात हुआ कि मेरी परिकल्पना सही प्रमाणित हुई कि परिणाम के ज्ञान [ अभिप्रेरणा ] के मिलने से निष्पादन बेहतर बन जाता है नियंत्रित अवस्था मे प्रयोज्य को उसके दुवारा किए गए निष्पादन के संबंधन मे जानकारी देता रहा था । इस प्रकार से परिणाम ज्ञान हो जाने से अशुद्धि बहुत घट गई और निष्पादन के गुण मे काफी प्रगति या उन्नति हो गई थी ।

प्रयोज्य ने नियंत्रित अवस्था कि अपेक्षा प्रयोगात्मक अवस्था मे बहुत कम त्रुटि की और उसका निष्पादन काफी उन्न्त बन गया । अनुसंधान से ज्ञात हुआ की शिक्षा के अंतनिरीक्षण प्रतिवेदन से भी निष्पादन पर परिणाम के ज्ञान [ अभिप्रेरणा ] का अनुकूल प्रभाव प्रमाणित होता है ।

10॰ निष्कर्ष - प्रस्तुत अनुसंधान के आधार पर निष्कर्ष निकलता है कि परिणाम के ज्ञान [ अभिप्रेरणा ] के कारण निष्पादन उन्न्त बन जाता है । परिणाम के ज्ञान होते रहने पर व्यक्ति को अपनी त्रुटि सुधारने तथा अपने निष्पादन को और भी अच्छा करने का अवसर मिलता है । कुलमिलाकर लड़के की समलैंगिक मानसिकता समाप्त हो चुकी और विषम लिंग मै अभूरुचि आ गई
[ प्रत्येक माता पिता दायत्व होना चाहिए की अपनी औलाद को सुविधा के साथ साथ अच्छे संस्कार भी देना चाहिए । आज की भागदौड़ में दिखावे के लिए रुपया कामने के चक्कर गलत प्रतिस्पर्धा को नहीं करना चाहिए, अभिभावक धन दौलत अपनी औलाद के लिए कमाते है जब कमाने के लगाव मे बच्चो की संस्कार देना भूल जाये फिर औलाद बिगड़ जाये तो ये सम्पदा किस काम की ]

11॰ संदर्भ VMOUKOTA MAPSY 101, MAPSY 10

 वाट्स एप 9829085951



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रविवार, 5 जुलाई 2020

समलैंगिकता अनुसंधान पत्र [ शौध पत्र ]

एक नई खोज, समलैंगिक कैसे बना।

कैसे समलैंगिकता का आदि हुआ था ।

समलैंगिकता >>> रेलयात्रा मे यात्री ने सिखाया आचरण हें । 

1.  मैथुन अभिप्रेरणा ओर निष्पादन [ Sex Motivation and Performance ]

         शोधकर्ता  डाक्टर रघुनाथ सिंह राणावत

          Dietitian & psychologist

          माता आयुर्वेदिक दवाखाना, सापोल, राजसमंद, राजस्थान ।

2. प्रयोज्य परिचय

प्रयोज्य का नाम - 154 

यौन पुरुष

आयु – 25  

शिक्षा -  BA   [ प्रयोज्य का नाम गोपनीय रखा गया है । ]

3॰ समस्या परिचय 

सात वर्ष पूर्व यात्रा से समय 30 वर्ष का संग अंजान यात्री मिला जिसने बहला फुसला आग्रह कर उसने प्रयोज्य का लिंग को पकड़ कर सहलाकर मुख मैथुन भी किया, फिर गुदा मैथुन को प्रेरित करके गुदा मैथुन भी करवाया, सब उसी दिन से ये समलैंगिकता की दिशा से समलैंगिक होने की दशा हो गई। प्रयोज्य ने बताया, फिर दूसरा 40 वर्ष के व्यक्ति के संपर्क मे आया डेढ़ वर्ष से इस व्यक्ति से तीसरे-चौथे दिन समलैंगिक के गुदा मैथुन कर लेता था, फिर उससे वार्तालाप मे बताया की ये समलैंगिता कहा सीखा तो उसने बताया की जवान यात्री ने सिखाया तब प्रयोज्य की आयु लगभग 15 वर्ष थी, तब से लत लग गई, ये आदतन समलैंगिकता का अब अभ्यास हो चुका था। तीसरा 50 वर्ष का व्यक्ति के साथ दो वर्ष गुदा मैथुन किया। फिर शादी हो गई दो बच्चे है, अर्थात व्यक्ति उभय लिंगी हो चुका था। पर अब ये दिक्कत हो गई की घर अपनी औरत पसंद नही आती सारा दिन मन भ्रमित रहता था। पुरुष प्रेम के कारण घर मे दिक्कत होती चिड़चिड़ापन, गुस्सा, पत्नी से कोई लगाव नही रहता था। घर मे निर्जीव जैसा हालत हो गए, बाहर पुरुष के कोई अंग छुने से रोमांचित होतापर स्त्री अंग स्पर्श से कोई अनुभूति नही होता था। बाहर किसी भी व्यक्ति को देखता तो उत्तेजना आ जाती पर घर आने के बाद अपनी स्त्री से कोई रुचि नहीं रहती। प्रयोज्य खुला विश्वविधालय दूरस्थ प्रणाली शिक्षा के साथ अच्छी सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहा पर पढ़ाई मेँ मन नहीं लगता था। इसलिए ऑनलाइन समस्या समाधान ढूंढा गया। प्रयोज्य पार्ट टाइम अपना व्यवसाय भी करता था।

बाल्य जीवन से संज्ञानात्मक प्रेरणा और प्रोत्साहन का प्रभाव मैथुन शिक्षण और निष्पादन मे कई रूपो मे पड़ता है। मैथुन सफलता, असफलता, पुरुस्कार, परिणाम के ज्ञान आदि प्रोत्साहन के अनेक रूप है। सहयोग, स्पर्धा, प्रतियोगिता इत्यादि भी प्रोत्साहन के ही रूप है। इनका निश्चित प्रभाव व्यक्ति के मैथुन शिक्षा तथा निष्पादन पर पड़ता है ।

 ( 1 ) तत्परता से लाभ -- विषम लैंगिक होने के लिए परामर्श के समय जब सही तत्परता रही तब विषम लैंगिक निर्माण के विचार होता जाता था, तब प्रयोज्य सही प्रतिक्रिया विचार करने और समलैंगिक विचारो से अपने आप को बचाने लाभ करता था ।

 ( 2 ) तत्परता की हानि -- गलत तत्परता उत्पन्न विचार होने से प्रयोज्य गलत दिशा मे प्रयास के विचार आते थे, जिससे समस्या समाधान कठिन लगता था और समस्या के विचार बदल नही जाते तब तक तत्परता को छोडकर सही दिशा मे सक्रिय नही होता था ।

4॰ उद्देश्य

प्रस्तुत अनुसंधान का उद्देश्य शिक्षण के अभ्यास से प्रयोज्य के वैवाहिक दांपत्य जीवन मे महिला के प्रति आकर्षण निष्पादन पर परिणाम के ज्ञान [ अभिप्रेरणा ] के प्रभाव को सीखना है । उदेश्य व्यक्ति के ज्ञानात्मक सीखने मे धनात्मक स्थानातरण की घटनात्मक प्रदर्शन का अनुसंधान किया । ओनलाइन परामर्श मोखिक मे धनात्मक स्थानांतरण वास्तव मे उद्दीपक तथा प्रतिक्रिया की समानता पर आधारित हुआ ।

5॰ परिकल्पना मेरे संगत अध्ययनो के आलोक मे परिकल्पना बनायी की परिणाम के ज्ञान [ अभिप्रेरणा ] के प्रभाव को दिखाना है । जो दो क्रिया के उद्दीपक एकांश भिन्न तथा प्रतिक्रिया एकांश अभिन्न होते है, तो उनके बीच धनात्मक स्थानांतरण होता है । [ समलैंगिकता व्यवहार तथा विचारो का प्रभाव वाला व्यक्तित्व आसानी से बदले जा सकते है । ]

6॰ अनुसंधान की कार्य प्रणाली

मौखिक अभ्यास के साथ अनुसन्धानात्मक अभिकल्प

योजना प्रयोज्य के पास एक स्मार्ट फोन, बिना रुकावट बेजिझक स्थान का चयन कर के एक निश्चित समयावधि तय किया गया था । महीने मे 10 ऑनलाइन परामर्श नियंत्रित अवस्था मे प्रयोज्य समझा दिया गया था । फिर प्रयोज्य से अंतनिरीक्षण प्रतिवेदन  लिया गया तथा दोनों अवस्थाओ के परिणामो का तुलनात्मक अध्यन किया फिर देखा की धनात्मक स्थानांतरण धटित हुआ या नही ।

7॰ परीक्षण सामग्री मेरे दुवारा निर्मित शाब्दिक श्रवण प्रश्नोत्री आवश्यकता अनुसार स्पष्टीकरण पुछ लिया जाता था । प्रतिक्रियाओ को लिख दिया जाता था ।

( 1 ) व्यक्तित्व के लक्षण  चिंता से ग्रस्त, संदेह की प्रवृति, संवेगात्मक नियंत्रण की कमी देखी, भ्रम  पाया, स्थिरता की मध्यम चिंता, विचारो मे अस्थिरता एवं असंगति, संवेगात्मक अनियंत्रण, कल्पना की अधिकता, एकाग्रता की कमी, कमजोर याददास्त, और तनाव से पीड़ित पाया गया ।

8॰ अंतनिररिक्षण रिपोर्ट परिणाम एवं व्याख्या

(1) अधिगम स्थानातरण मौखिक सीखने मे धनात्मक स्थानांतरण की घटनाओ को श्रवण शक्ति से कौशल सहायता करता रहा ।

(2) निर्देश निर्देशन की पालना के प्रयोज्य हमेशा तत्पर रहा था ।

शुरू में ये काम प्रयोज्य को कठिन लगा की ये काम मुझ से होगा की नही लेकिन कुछ समय बाद ये कठिनाई दूर हो गई । पहले कठिन सवाल समस्याओ के समाधान के बाद उसको वैवाहिक ज़िंदगी सुनहरी दिखने लगी ।

9॰ विवेचना एवं निष्कर्ष परिणाम पूछताछ से ज्ञात हुआ कि मेरी परिकल्पना सही प्रमाणित हुई कि परिणाम के ज्ञान [ अभिप्रेरणा ] के मिलने से निष्पादन बेहतर बन जाता है नियंत्रित अवस्था मे प्रयोज्य को उसके दुवारा किए गए निष्पादन के संबंधन मे जानकारी देता रहा था । इस प्रकार से परिणाम ज्ञान हो जाने से अशुद्धि बहुत घट गई और निष्पादन के गुण मे काफी प्रगति या उन्नति हो गई थी ।

प्रयोज्य ने नियंत्रित अवस्था कि अपेक्षा प्रयोगात्मक अवस्था मे बहुत कम त्रुटि की और उसका निष्पादन काफी उन्न्त बन गया । अनुसंधान से ज्ञात हुआ की शिक्षा के अंतनिरीक्षण प्रतिवेदन से भी निष्पादन पर परिणाम के ज्ञान [ अभिप्रेरणा ] का अनुकूल प्रभाव प्रमाणित होता है ।

10॰ निष्कर्ष - प्रस्तुत अनुसंधान के आधार पर निष्कर्ष निकलता है कि परिणाम के ज्ञान [ अभिप्रेरणा ] के कारण निष्पादन उन्न्त बन जाता है । परिणाम के ज्ञान होते रहने पर व्यक्ति को अपनी त्रुटि सुधारने तथा अपने निष्पादन को और भी अच्छा करने का अवसर मिलता है ।

11॰ संदर्भ VMOUKOTA MAPSY 101, MAPSY 10

 वाट्स एप 9829085951


शुक्रवार, 19 जून 2020

समलैंगिकता का इलाज होता है ।

लघु मनोवैज्ञानिक शौध पत्र 

समस्या 
प्रयोज्य समलैंगिकता की समस्या से परेशान था, जिसके कारण मानसिक परेशानी होती थी । 
नाम- 125 [ गोपनीय रखा गया ]
आयु - 28 वर्ष 
शिक्षा - BA / DLA 
व्यवसाय - शिक्षक 
निवास स्थान - अज्ञात [ गोपनीय रखा गया ] 

समस्या परिचय 
प्रयोज्य ने ऑनलाइन परामर्श से बताया की लगभग 12 वर्ष की उम्र मे उसके साथ जाती समाज के शिक्षक मे बलात्कार कर दिया था जिसकी आयु लगभग 40 वर्ष थी । ये व्यक्ति निरंतर प्रयोज्य के साथ गुदा मैथुन करता था जिससे वो समलैंगिता से आदि हो गया था । इस समलैंगिकता के कारण निरंतर तनाव रहता था, चिंता होती थी । चिड़चिड़ा स्वभाव हो गया था, इस लिए दुखी रहता था । प्रयोज्य समलैंगिक निष्क्रिय व समलैंगिक सक्रिय भूमिका निभाता था । 

उपचार उद्देश्य 
समलैंगिकता से छुटकारा पाकर विषम लैंगिक होना चाहता था, अपना शारीरिक व मानसिक स्वस्थ को ठीक रख के विषमलिंगी बनना चाहता था । क्योकि समलैंगिकता की गलतिया निरंतर प्रयोज्य से रही थी, वह सुधार अपनी जीवन शैली सुधारना चाहता था । विषम लैंगिक बनना चाहता था ।  

परिकल्पना  
पूर्व प्रयोज्यों को ऑनलाइन परामर्श से ठीक किया जा चुका था का संदर्भ । 

निष्कर्ष 
प्रयोज्य को प्रथम दिन के ऑनलाईन परामर्श से काफी चिंता कम हुई, तनाव हल्का हो चुका था। प्रफुलित रहने लगा था। इस प्रकार से छ ऑनलाइन परामर्श चला, फिर ऑनलाइन परामर्श बंद कर दिया था क्योकि प्रयोज्य के परामर्श शुक्ल का भी अभाव था, शुल्क मांगे जाने पर परामर्श लेना बंद कर दिया था। तीन बार फोन करने पर जवाब ही दिया, फोन sms का जवाब नहीं दिया, वाट्स एप sms का जवाब नहीं दिया । 

मंगलवार, 16 जून 2020

मनोवैज्ञानिक शौध पत्र [ समलैंगिकता व मुख मैथुन से मुक्ति ]

उभयलिंग  की समस्या [ Bisexual Problem ] का सवाल 
26 वर्ष का युवा ने सवाल किया उसको मुख मैथुन की बुरी आदत से छूटकारा चहिए ? 

समस्या

प्रयोज्य मुखमैथुन व समलैंगिकता से पीड़ित था, सिर जकड़ना, सिर का भारीपन रहना, दो रास्ते, दो दिमाग महसूस होना होता था ।  
नाम - 115 
आयु - 26 
व्यवसाय - किसी कल कारख़ाना मे मजदूर । 
निवास - गोपनीय रखा गया है । 

समस्या परिचय 

ऑनलाइन परामर्श वार्तालाप से प्रयोज्य ने बताया की वह मुख मैथुन से पीड़ित था, साथ ही गुदा मैथुन से भी पीड़ित व परेशान भी था । जिसके कारण सिर मे जकड़न और भारीपन होता, काम काज मे मन नही लगता और गला खराब होने का सदा भ्रम रहता था । तनाव भी लगातार होता था । क्योकि भ्रम से पीड़ित भी हो चुका था, लोगो से सीमित मेलमिलाप था । इस प्रकार समलैंगिकता की समसाया थी । 

उपचार उद्देश्य 

शादी करनी थी, माता पिता का शादी करने का दबाव था, प्रयोज्य को शादी करने से डर, घबराहट होती थी। शादी करने से डरता था क्योकि समलैंगिकता से लगाव हो चुका था। इस मुख मैथुन और समलैंगिकता से मुक्ति चाहता था । 

परिकल्पना 

जो लोग पान, गुटका, सुपारी जो मुख से जुगाली करते आदि हो चुके होते उनको भी त्यागते देखा गया है। समलैंगिकता से पीड़ितो को पहले मै मुक्ति दिला चुका था । 

निष्कर्ष 

प्रयोज्य को दिये दिशा निर्देशों का पालन किया था, उसकी पहली ऑनलाइन परामर्श के बाद उसने फोन करके बताया की उसने 6 घण्टे अतिरिक्त कार्य किया, नींद बहुत बहुत अच्छी आई बड़ा खुश मिजाज मे रहा । इस प्रकार से निरंतर सभी बाकी 9 परामर्श पूर्ण हुए थे। गला खराब के विचार जो परेशान करते उसमे आराम आया, गुदा मैथुन का भ्रम दूर हुआ । आवश्यतानुसार संतुलित आहार के दिशा निर्देश व सामाजिक व्यवहार के दिशा निर्देशन दिये उसकी पालना करता रहा और वह प्रयोज्य ठीक हो गया । प्रति पुष्टि मे बताया की अब सामान्य जीवन जी रहा हें । निष्कर्ष ये निकलता है भटके युवाओ को भ्रम के जाल बुने गए की समलैंगिकता कोई इलाज नही होता ये तत्थ बिलकुल गलत है । ये गलत पर्यावरण के कारणो की उपज है, इन गलत आचरण और गलत संस्कारो को वापस आसनी से अच्छे संस्कार व अच्छे आचरण शिक्षा से बदली जा सकती है। समलैंगिक से विषमलैंगिक बनाया जा सकता है । 



[ प्रयोज्य के दिमाग मे एक गलत घारणा बैठी थी की समलैंगिकता बचपन घटना बताई की वो बाथरूम मे नल के ऊपर बैठता और गुदा खुजलाता था तो मैने उसको चार तर्क की बाते बताई जिसके कारण से वो संतुष्ट हुआ । पहला तर्क जब घुड़ सवार बिना काठी के सवारी करता फिर गुदा मे खुजली होना आम बात है, दूसरा तर्क साइकिल चलाने के बाद भी गुदा मे खुजली होना सामान्य बात होती है, तीसरा तर्क कई बार, बार बार दस्त लगने पर भी गुदा मे खुजली होना सामान्य बात है, तीसरा तर्क पेट मे कीड़े होने से भी गुदा मे खुजली होना सामान्य बात है। ]