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शुक्रवार, 9 दिसंबर 2022

बहला फुसलाकर कर समलैंगिक बाध्य जुनून कैसे बनाते और क्यों ?

 मानों या नहीं मानो ?

बच्चा या व्यक्ति अपने हाथ के नाखून दांतो से कुतरते है ।

बच्चा या व्यक्ति अपना अंगूठा चूसने लगे तो ।

तंबाकू सेवन करे, शराब सेवन करें, लिंग विपरित कपड़े पहने अन्य लत हो तो मनोवैज्ञानिक समस्या माना जाता है ।

लेकिन बाल यौन शौषण पीड़ित को दूसरे समलैंगिक व्यक्ति का लिंग चूचने का आदि बनाया जाए तो ये अच्छी बात मानते है आधुनिक काल के डाक्टर और उनके स्वास्थ मंत्री इसको बड़े चाव से कहते ये मैथुन अभिविन्यास है । 

क्यों ऐसा कहते ?

समलैंगिक व्यक्ति बहला फुसला कर बालक / किशोर को मुख मैथुन करवा, गुदा मैथुन करना इसकी आदत लग जाती तो बस बोल दिया ये कोई बीमारी नहीं ये तो मैथुन अभिविन्यास है ।

मैं कहता हूं जो लोग इस प्रकार से प्राकृतिक मानते है, कृपया अपने पुत्रों जो किशोर है उन बच्चों पर प्रयोग सिद्ध कीजिए तो आपकी बात फिर हम सुनेगे और सच दुनियां भी जान जाएगी की मैथुन अभिविन्यास प्राकृतिक होता है ? 

वापस प्रयोग करना चाहिए, तो ही पता चलेगा ।

बहला फुसलाकर कर समलैंगिक बाध्य जुनून कैसे बनाते और क्यों ?

इसका अध्ययन अनुसंधान होना चाहिए ।।

बुधवार, 7 दिसंबर 2022

बाल यौन शौषण समलैंगिक समस्या .

गुदा मैथुन मुख मैथुन - मूर्त और अमूर्त में संघर्ष

बाल यौन शोषण पीड़ित समलैंगिक

मनुष्य एक सामुदायिक प्राणी हैं, संसार में 200 देश हैं, हर देश में राज्यों का समावेश हैं . हर प्रान्त में समाज और उसकी मुलभुत अवधारण हैं. सामाजिक सम्बन्ध निराकार या अमूर्त होते हैं, जो केवल अनुभव से ज्ञात होता है. एक समाज से दुसरे समाज में आश्रिता के साथ जागरूकता होती हैं. समानता और असमानता का सहयोग या असहयोग भी होता हैं.

संसार की सर्वश्रेष्ट सभ्यताओं में भारतीय सभ्यता में जीवन जीने के लिए चार आश्रम व्यवस्थाओं का विकास किया गया हैं. जिसमे जिसमें प्रथम आश्रम ब्रहमचर्य आश्रम में भूमिका पालन के साथ भूमिका वचन होता की कोई भी किशोर अवस्था में बालक बुद्दी निकाल कर ब्रहमचर्य पालन करतें शिक्षा प्राप्त करने में ध्यान लगाएगा और मैथुन प्रवृति से दूर रहेगा और वीर्य रक्षा और करेगा.

25 साल की आयु के बाद वैवाहिक जीवन में अमूर्त मैथुन करेगा जो वंश वृदि में सहायक होगा, नहीं की लैंगिक आनन्द के लिए मैथुन किया जाएगा .

विवाह धार्मिक और वर्तमान क़ानूनी वैधानिक भी है, जो सभी धर्मो में प्रचलित है.

मैथुन एक स्त्री और पुरुष को शारीरिक आवश्यकता भी और सामाजिक आवश्यकता भी है. भारतीय समाज में मैथुन पति पत्नी के रिश्तो से पारदर्शी और आदर्श में माता पिता से प्राप्त होता है. जो सामाजिक स्वीकृत व्यवहार है. वैवाहिक पति पत्नी सम्बन्ध पारिवारिक सामाजिक अलिखित मूल्यों पर निर्धारण है. पति पत्नी मैथुन अमूर्त होते है, जबकि पश्चिमी देश में पशुवत मूर्त रूप से आजकल सार्वजानिक देखने में आते है, पुरुष वेश्या का नाम अभी सुनने में नहीं आया पर आजकल कुछ समिति द्वारा संचालित दिल्ली जैसे शहरों में सुनने को आ रहा है, अश्लील साहित्य और इंटरनेट के माध्यम से नकारात्मक लैंगिक आंनद के साहित्य और वीडियो बहुत उपलब्ध है.

आधुनिक मनोविश्लेषण सिद्धात देने वाले वैज्ञानिक फ्रायड ने मन की तीन अवस्था बताई गई है. जो वर्तमान स्कुल, कालेज में पढाया जाता है, जब की 5500 पूर्व लिखित श्री मद्धभागवत गीता जैसे अनमोल शास्त्र को अनदेखा किया गया है, जिसमे पश्चिमी मनोविज्ञान खत्मः होता वहा से भारतीय मनोविज्ञान शुरू होता है.

1.       ईड – अच्छे बुरे का भेद नहीं होता, इस मन की एक ही इच्छा पूर्ति करना होता है. परिणाम के बारे में अज्ञान.

[ बाल यौन शौषण पीड़ित को भी बताया जाता जब की कारणों को कोई जानना नहीं चाहता. ये विकार समलैंगिक व्यक्ति में ब्रेनवाश करके भर दिया गया है. केवल लैंगिक आनंद को मैथुन अभिविन्यास नाम दे दिया गया जो भारतीय समाज संस्कृति के लिए घातक है. ] जो समलैंगिक किसी भी कारण से बना बस आन्नद छोड़ना नहीं चाहता, वैसे सिखा हुआ आचरण मुश्किल से छुटता है.

2.       ईगो – नैतिक अनैतिक ज्ञात लाभ हानि में भी सत्ताधारी बनने की चाहत. ज्ञात लापरवाह माना जा सकता है.

3.       सुपर इगो – प्रकास वान नैतिक मन धर्म सभ्यता, संस्कृति का ध्यान और उसको निभाना होता है.

समिति एक ऐसा संगठन है जो स्वार्थ पूर्ति के लिए बनाया जाता है. जो केवल अपने हितो को पूरा करता है, इनका उद्देश्य अपने सदस्यों सामान्य या विशेष इच्छाओं की संतुष्टि के अलावा कुछ नहीं, अगर कोई समिति के सदस्य बाल यौन शौषण पीड़ित समलैंगिकता उपचार का विरोध करते तो, अपने पुत्र भाई और परिवार के लगभग 12 वर्ष की आयु लडकें का किसी व्यस्क से बाल यौन शौषण करवा कर मुझे गलत साबित कर दे, की बाल यौन शौषण से समलैंगिक नहीं बनते.

रविवार, 28 जून 2020

मुखमैथुन समलैंगिकता का ईलाज होता है ।

कैसे समलैंगिकता का ईलाज हुआ है ।

समलैंगिकता >>> किस प्रकार मुखमैथुन से समलैंगिक ने मुक्ति पाई ? 
 
1.  मैथुन अभिप्रेरणा ओर निष्पादन [ Sex Motivation and Performance ]

          शोधकर्ता  डाक्टर रघुनाथ सिंह राणावत

                        Dietitian & psychologist

          माता आयुर्वेदिक दवाखाना, सापोल, राजसमंद, राजस्थान ।

2. प्रयोज्य परिचय –

प्रयोज्य का नाम - 149 

यौन – पुरुष

आयु – 20 

भार / वजन  - 100 किलो  

शिक्षा - BA प्रथम वर्ष खुला विश्वविधालय से  [ प्रयोज्य का नाम गोपनीय रखा गया है । ]

सपने - IPS, UPS, APS 

3॰ समस्या परिचय 
प्रयोज्य 8 वर्ष पूर्व मे 12 वर्ष की आयु का था तब मौसी के लड़के जिसकी आयु 15 वर्ष थी उसने अपने लिंग से मुखमैथुन करना सीखा दिया था । 8 वर्ष से इस मुखमैथुन की समस्या से पीड़ित था, स्कूल के साथियो से मानसिक लगाव हमेशा रहता था उनके शरीर पर हाथ घुमाना अच्छा लगता था । दो तीन बार उसके पिता का लिंग भी पकड़ लिया था, इतना बेशर्म हो चुका था, जिस पर मैने पूछा वाकई हरकत अच्छी नही थी, तब उसने बताया की फिर मुझे अपने आप पर घृणा आने लगी । मुखमैथुन के इस क्रम को लगातार करता रहा, अनगिनत कई बार मुखमैथुन के समय उनका पेशाब और वीर्य भी पीया । माता पिता की ये एकलौती संतान था, पिता व्यवसायी है, माता ग्रहणी बताई । मैने  उससे पूछा  के ये मुख मैथुन कब कहा करते तो उसने ये बताया की एक एप ..........{ एप गोपनीय रखता हूँ } से अपने निकटतम साथ समलैंगिक का पता लग जाता है, मैने पूछा ये प्रयोग कहा करते हो तब उसने कहा मम्मी जब भक्ति भाव से गुरुजी के पास जाती तब समलैंगिक को घर बुलाकर मुखमैथुन कर लेता था। कभी कभी ये भी अपनी माता के साथ प्रवचन सुनने जाता था, नित्य पुजा पाठ भी करता था पर मन अस्थिर हो जाता था । ये बिलकुल बेशर्म हो चुका था । स्कूल मे ये हरकत होती रहती थी । स्थायी कोई दोस्त नही था । घर मे माता से अक्सर लड़ाई होती थी । स्त्री स्मरण कभी चाहत नहीं होती थी, पुरुष से चाहत होने पर उत्तेजना आती थी । 
मेरा वीडियो देखने के बाद उसको असामान्य से सामान्य बनने की चाह के कारण परामर्श के लिए समपर्क किया । 


4॰ समस्या समाधान 
प्रयोज्य को परामर्श शुरू किया जिसमे संतुलित आहर का डाइट चार्ट दिया क्योकि इसका 100 किलो वजन था, अब 60 किलो वजन का लक्ष्य मैने बताया तो उसने 80 किलो वजन की चाहत रखी । 15 दिन मे वजन 7 किलो कर कर दिया था । पहले दिन के परामर्श से काफी सुधार हुआ, माता से झगड़ा करना बंद कर दिया, पहले घरेलू काम मे मन नहीं करता पर अब आसानी से माता के रसोई काम या घरेलू काम कर लेता, माता भी खुश होती, और अब माता खुश रहती, माता से लड़ाई नहीं होती । घर का वातावरण अच्छा हो गया, कोचिंग सेंटर मे लड़कियो से आसानी से बात कर लेता है, लड़कियो पहले आँख नहीं मिला सकता था पर अब हंसी मज़ाक भी कर लेता है। साथी लड़किया अच्छी लगती है। अब मन हल्का हो गया, मुख मैथुन से छुटकारा मिल गया अब कालेज वाली अच्छी ज़िंदगी की चाहत बढ़ गई । इस प्रकार से मुख मैथुन की समस्या हल हो गई, मानसिक तनाव मिट गया, पढ़ाई मे अब मन लगता है, पहले शादी करने का मन नहीं होता था, पर ऑनलाईन परामर्श के कारण माता के सपने शादी के प्रस्ताव अब स्वीकार कर लिया । अच्छे नए दोस्त भी बनाना शुरू कर दिया । 

5॰ निष्कर्ष - दिशा बदलने से प्रयोज्य की दशा बदल गई, नजर बदलने से नजारे बदल गए । 





मंगलवार, 16 जून 2020

मनोवैज्ञानिक शौध पत्र [ समलैंगिकता व मुख मैथुन से मुक्ति ]

उभयलिंग  की समस्या [ Bisexual Problem ] का सवाल 
26 वर्ष का युवा ने सवाल किया उसको मुख मैथुन की बुरी आदत से छूटकारा चहिए ? 

समस्या

प्रयोज्य मुखमैथुन व समलैंगिकता से पीड़ित था, सिर जकड़ना, सिर का भारीपन रहना, दो रास्ते, दो दिमाग महसूस होना होता था ।  
नाम - 115 
आयु - 26 
व्यवसाय - किसी कल कारख़ाना मे मजदूर । 
निवास - गोपनीय रखा गया है । 

समस्या परिचय 

ऑनलाइन परामर्श वार्तालाप से प्रयोज्य ने बताया की वह मुख मैथुन से पीड़ित था, साथ ही गुदा मैथुन से भी पीड़ित व परेशान भी था । जिसके कारण सिर मे जकड़न और भारीपन होता, काम काज मे मन नही लगता और गला खराब होने का सदा भ्रम रहता था । तनाव भी लगातार होता था । क्योकि भ्रम से पीड़ित भी हो चुका था, लोगो से सीमित मेलमिलाप था । इस प्रकार समलैंगिकता की समसाया थी । 

उपचार उद्देश्य 

शादी करनी थी, माता पिता का शादी करने का दबाव था, प्रयोज्य को शादी करने से डर, घबराहट होती थी। शादी करने से डरता था क्योकि समलैंगिकता से लगाव हो चुका था। इस मुख मैथुन और समलैंगिकता से मुक्ति चाहता था । 

परिकल्पना 

जो लोग पान, गुटका, सुपारी जो मुख से जुगाली करते आदि हो चुके होते उनको भी त्यागते देखा गया है। समलैंगिकता से पीड़ितो को पहले मै मुक्ति दिला चुका था । 

निष्कर्ष 

प्रयोज्य को दिये दिशा निर्देशों का पालन किया था, उसकी पहली ऑनलाइन परामर्श के बाद उसने फोन करके बताया की उसने 6 घण्टे अतिरिक्त कार्य किया, नींद बहुत बहुत अच्छी आई बड़ा खुश मिजाज मे रहा । इस प्रकार से निरंतर सभी बाकी 9 परामर्श पूर्ण हुए थे। गला खराब के विचार जो परेशान करते उसमे आराम आया, गुदा मैथुन का भ्रम दूर हुआ । आवश्यतानुसार संतुलित आहार के दिशा निर्देश व सामाजिक व्यवहार के दिशा निर्देशन दिये उसकी पालना करता रहा और वह प्रयोज्य ठीक हो गया । प्रति पुष्टि मे बताया की अब सामान्य जीवन जी रहा हें । निष्कर्ष ये निकलता है भटके युवाओ को भ्रम के जाल बुने गए की समलैंगिकता कोई इलाज नही होता ये तत्थ बिलकुल गलत है । ये गलत पर्यावरण के कारणो की उपज है, इन गलत आचरण और गलत संस्कारो को वापस आसनी से अच्छे संस्कार व अच्छे आचरण शिक्षा से बदली जा सकती है। समलैंगिक से विषमलैंगिक बनाया जा सकता है । 



[ प्रयोज्य के दिमाग मे एक गलत घारणा बैठी थी की समलैंगिकता बचपन घटना बताई की वो बाथरूम मे नल के ऊपर बैठता और गुदा खुजलाता था तो मैने उसको चार तर्क की बाते बताई जिसके कारण से वो संतुष्ट हुआ । पहला तर्क जब घुड़ सवार बिना काठी के सवारी करता फिर गुदा मे खुजली होना आम बात है, दूसरा तर्क साइकिल चलाने के बाद भी गुदा मे खुजली होना सामान्य बात होती है, तीसरा तर्क कई बार, बार बार दस्त लगने पर भी गुदा मे खुजली होना सामान्य बात है, तीसरा तर्क पेट मे कीड़े होने से भी गुदा मे खुजली होना सामान्य बात है। ]