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रविवार, 4 जून 2023

समलैंगिक समस्या 04-23-78

04-23-77 

प्रयोज्य 28 /02 / 2023  सम्पर्क किया . 

कार्यभार - पुलिसकर्मी 

आयु - 30 वर्ष  --

शादी - एक महीना पहले ।

समस्या - समलैंगिक 

पहली बार गुदा मैथुन - 23 

प्रयोज्य की उस समय 4 वर्ष लगभग .

यौन शोषणकारी - 

आत्महत्या के 

शुक्रवार, 5 नवंबर 2021

समलैंगिक से विषमलैंगिक आसानी से हो सकते है ।

बचपन में बाल यौन शौषण के कारण लड़के गुदा मैथुन के आदि हो जाते है, उन पीड़ित लडको को गुदा मैथुन कराने की आदत लग जाती है । ये आदत आसानी से छुड़ाई जा सकती है ।

 

शुक्रवार, 17 जुलाई 2020

समलैंगिकता यौन आवेग

यौन आवेग / प्रेरणा

समलैंगिकता

संसार में जहाँ अभिभावको के दुवारा अपने बच्चो को नैतिक व् जैविक समस्या जो यौन शिक्षा ब्रह्मचर्य का पालन करना नहीं सिखाया जाता है। तब उनके बच्चे अपने विकसित होते कौमार्य का दुरपयोग करते पाए गए है, दूसरे वो बच्चे बाल्यकाल में गुदा मैथुन का शिकार होने के बाद में एक प्रकार के गुदा मैथुन की एक लत लग जाती है। संसार से सभी धार्मिक समुदाय ने समलैंगिकता को कोई मान्यता प्रदान नहीं की, पर अपवाद आजकल के कानून व् नेताओ के लाभ वोटबैँक और बजट आवंटन में भूमिका संदेह पूर्ण लगती है। आजकल बेहद निर्लज, बेशर्म, और अनुशान, मान मर्यादा के को फर्क नहीं समझना आता है । माता पिता और दादा,नाना के गौरव को बताया भी नही जाता है । आजकल की पढ़ाई लिखाई मे गुरुकुल की शिक्षा प्रणाली मिटा दिया गया है। आधुनिक शिक्षा मे व्यवहारिक, सामाजिक और नैतिक शिक्षा को पूर्णतया बंद कर दिया गया है । फिर बढ़ते भौतिक वाद मे आर्थिक उपार्जन मे व्यवस्था की स्पर्धा के कारण अपनी औलाद को आधुनिक शिक्षा के अलावा पुश्तैनी परिचय को भुला दिया जिसके कारण माता-पिता व बच्चो के अपने अपने अहमभाव विकसित हो गए और जब ये पता चला की उनका लड़का- लड्की समलैंगिकता का दीवाना हो चुका हो एक आदतन अभ्यासी हो चुका है। फिर किसी जानकर, मनोवैज्ञानिक या गूगल ढूँढने पर पता चलता की समलैंगिकता प्राकृतिक है, क्योकि आजकल इंटरनेट पर जो लिखा गया काफी लेख केवल कॉपी पेस्ट नकल होती है । स्वयं का कोई अनुसंधान नहीं होता है। फिर उनके पास केवल अनुसंधान कोई शब्दावली नहीं होती है, क्योकि इन भूले भटके या भ्रम मे जीते लोगों के लिए बिना समझाए सीधे उनका समर्थन करके सरलता से दो बोल दिया गया और बोल दिया जाता हे, क्योकि वो लड़के-लड़की उनकी औलाद नहीं थी।   

बुधवार, 8 जुलाई 2020

मुख मैथुन समलैंगिता की आदत कैसे छूटी ?

समलैंगिक का उपचार होता है ।
समलैंगिकता अनुसंधान पत्र [ शौध पत्र ]
एक नई खोज, समलैंगिक कैसे बना ?

कैसे समलैंगिकता का ईलाज / उपचार हुआ  ।
समलैंगिकता >>> अभिभावक ने नैतिक आचरण नही सिखाया आचरण ।

1.  मैथुन अभिप्रेरणा ओर निष्पादन [ Sex Motivation and Performance ]
           शोधकर्ता  डाक्टर रघुनाथ सिंह राणावत
           Dietitian & psychologist
          माता आयुर्वेदिक दवाखाना, सापोल, राजसमंद, राजस्थान ।
2. प्रयोज्य परिचय –
प्रयोज्य का नाम - 159
यौन – पुरुष
आयु – 20  
व्यवसाय - बेरोजगार 
शिक्षा -  विधार्थी  [ प्रयोज्य का नाम गोपनीय रखा गया है । ]
3॰ समस्या परिचय
घर वाले शादी की बात करते उसकी चिंता बहुत होती थी, दादा दादी के प्यार का अभाव रहा था । क्योकि प्रयोज्य की समस्या जब वो 6 -7 साल उम्र का था, उस समय ताऊ का का बेटा किसी बहाने साथ मे सुला लेता था, पॉर्न वीडियो दिखाता, उस की तरह से प्रेम आलाप भी करता था। किस देना, लिंग को मुह मे देना, ये क्रम चार साल चला, लगातार नहीं पर कभी कभार समय मिलने पर ये समलैंगिकता संबंध होता था, दूसरा ताऊ का लड़का भी इसी प्रकार से वो अपना लिंग मुह से मैथुन करवाता था। फिर कक्षा 6 मे भर्ती हुआ तब हॉस्टल मे रहता था। हॉस्टल मे आपसी सेक्स क्रिया करते थे, ये क्रम होने से लगा की मै स्त्रीत्व का व्यक्तित्व वाला हूँ, कक्षा 8 - 9 मे लगभग उस समय प्रयोज्य की आयु 14-15 वर्ष हो सकती तब आदतन समलैंगिकता का अभ्यास हो गया था । मुखमैथुन का अभ्यास आधा घंटा होता था। ये बुरी आदत हो चुकी थी । फिर कक्षा 10 मे आया तो हॉस्टल छोडकर कमरा किराए ले लिया । 
प्रयोज्य अब आदतन समलैंगिक हो चुका था । शाम को दोस्त आते उनके साथ समलैंगिक मैथुन क्रिया होती थी । कक्षा 11 मे आने पर, मुखमैथुन समलैंगिक क्रिया को नियंत्रण मे कर लिया था । कक्षा 12 मे आने पर सामाजिक संघठन मे उनके अच्छे विचारो से प्रभावित होकर उस सामाजिक संघठन से प्रशिक्षण के लिए आता जाता रहता था तो उस समय सामाजिक संघ के विचारो से प्रभावित होकर समलैंगिक मुखमैथुन बिलकुल बंद कर दिया था। हस्त मैथुन करना जारी था, हस्त मैथुन करते समय दिमाग मे लड़के का चित्रण करके करता था ।  कक्षा छ मे पाढ़ता था तब हॉस्टल के लड़कों मे रहने वाले सहपाठी की प्रेरणा से पहली बार हस्तमैथुन किया था । लिंग बदलवाने की इच्छा होती थी ।
 ( 1 ) समस्या / कठिनाईया - जो आपस मे दोस्त बने थे, जब वो दोस्त आपस मे नही मिलते तब तक बेचेनी होती थी। जब अपनी आप बीती चिंता को अपने दोस्त को बताई तो वो बात नहीं करता था, तो शंका उत्तपन्न होती की वो बात क्यो नहीं करता था । 
साथ ही साथ मे नाच,गान मे बहुत रुचि होने लगी और स्त्रीत्व के रूप मे बहुत रुचि हो गई, अच्छे कपड़े पहनना, संवारना नारियो की भाति की इच्छा होने लगती थी। दोस्तो से ताना मिलता की लड़कियो जैसे क्यो चलता है। अग्रणी की कमी भी पाई गई । 
( 2 ) जीवन यापन के लिए लक्ष्य है की सेना मे भर्ती होने की कड़ी चाहत होती है । 
( 3 ) व्यक्तित्व - प्रयोज्य का साधारण व्यक्तित्व था, स्वभाव शांति प्रिय था, लड़ाई झगड़ा करना नही जानता था। परिवार मे धमकी देना नहीं आता, रूठता या नाराज होना नही जानता  था । 
बाल्य जीवन से संज्ञानात्मक प्रेरणा और प्रोत्साहन का प्रभाव मैथुन शिक्षण और निष्पादन मे कई रूपो मे पड़ता है। मैथुन सफलता, असफलता, पुरुस्कार, परिणाम के ज्ञान आदि प्रोत्साहन के अनेक रूप है। सहयोग, स्पर्धा, प्रतियोगिता इत्यादि भी प्रोत्साहन के ही रूप है। इनका निश्चित प्रभाव व्यक्ति के मैथुन शिक्षा तथा निष्पादन पर पड़ता है ।
( 1 ) तत्परता से लाभ -- विषम लैंगिक होने के लिए परामर्श के समय जब सही तत्परता रही तब विषम लैंगिक निर्माण के विचार होता जाता था, तब प्रयोज्य सही प्रतिक्रिया विचार करने और समलैंगिक विचारो से अपने आप को बचाने लाभ करता था ।
( 2 ) तत्परता की हानि -- गलत तत्परता उत्पन्न विचार होने से प्रयोज्य गलत दिशा मे प्रयास के विचार आते थे, जिससे समस्या समाधान कठिन लगता था और समस्या के विचार बदल नही जाते तब तक तत्परता को छोडकर सही दिशा मे सक्रिय नही होता था ।

4॰ उद्देश्य –
प्रस्तुत अनुसंधान का उद्देश्य शिक्षण के अभ्यास से प्रयोज्य के वैवाहिक दांपत्य जीवन मे महिला के प्रति आकर्षण निष्पादन पर परिणाम के ज्ञान [ अभिप्रेरणा ] के प्रभाव को सीखना है । उदेश्य व्यक्ति के ज्ञानात्मक सीखने मे धनात्मक स्थानातरण की घटनात्मक प्रदर्शन का अनुसंधान किया । ओनलाइन परामर्श मोखिक मे धनात्मक स्थानांतरण वास्तव मे उद्दीपक तथा प्रतिक्रिया की समानता पर आधारित हुआ ।

5॰ परिकल्पना – मेरे संगत अध्ययनो के आलोक मे परिकल्पना बनायी की परिणाम के ज्ञान [ अभिप्रेरणा ] के प्रभाव को दिखाना है । जो दो क्रिया के उद्दीपक एकांश भिन्न तथा प्रतिक्रिया एकांश अभिन्न होते है, तो उनके बीच धनात्मक स्थानांतरण होता है । [ समलैंगिकता व्यवहार तथा विचारो का प्रभाव वाला व्यक्तित्व आसानी से बदले जा सकते है । ]
6॰ अनुसंधान की कार्य प्रणाली –
मौखिक अभ्यास के साथ अनुसन्धानात्मक अभिकल्प
योजना – प्रयोज्य के पास एक स्मार्ट फोन, बिना रुकावट बेजिझक स्थान का चयन कर के एक निश्चित समयावधि तय किया गया था । महीने मे 10 ऑनलाइन परामर्श नियंत्रित अवस्था मे प्रयोज्य समझा दिया गया था । फिर प्रयोज्य से अंतनिरीक्षण प्रतिवेदन  लिया गया तथा दोनों अवस्थाओ के परिणामो का तुलनात्मक अध्यन किया फिर देखा की धनात्मक स्थानांतरण धटित हुआ या नही

7॰ परीक्षण सामग्री – मेरे दुवारा निर्मित शाब्दिक श्रवण प्रश्नोत्री आवश्यकता अनुसार स्पष्टीकरण पुछ लिया जाता था । प्रतिक्रियाओ को लिख दिया जाता था ।
( 1 ) व्यक्तित्व के लक्षण  चिंता से ग्रस्त, संदेह की प्रवृति, संवेगात्मक नियंत्रण की कमी देखी, भ्रम  पाया, स्थिरता की मध्यम चिंता, विचारो मे अस्थिरता एवं असंगति, संवेगात्मक अनियंत्रण, कल्पना की अधिकता, एकाग्रता की कमी, कमजोर याददास्त, और तनाव से पीड़ित पाया गया ।

8॰ अंतनिररिक्षण रिपोर्ट – परिणाम एवं व्याख्या
(1) अधिगम स्थानातरण मौखिक सीखने मे धनात्मक स्थानांतरण की घटनाओ को श्रवण शक्ति से कौशल सहायता करता रहा ।
(2) निर्देश निर्देशन की पालना के प्रयोज्य हमेशा तत्पर रहा था ।
“शुरू में ये काम प्रयोज्य को कठिन लगा की ये काम मुझ से होगा की नही लेकिन कुछ समय बाद ये कठिनाई दूर हो गई । पहले कठिन सवाल समस्याओ के समाधान के बाद उसको वैवाहिक ज़िंदगी सुनहरी दिखने लगी ।

9॰ विवेचना एवं निष्कर्ष – परिणाम पूछताछ से ज्ञात हुआ कि मेरी परिकल्पना सही प्रमाणित हुई कि परिणाम के ज्ञान [ अभिप्रेरणा ] के मिलने से निष्पादन बेहतर बन जाता है नियंत्रित अवस्था मे प्रयोज्य को उसके दुवारा किए गए निष्पादन के संबंधन मे जानकारी देता रहा था । इस प्रकार से परिणाम ज्ञान हो जाने से अशुद्धि बहुत घट गई और निष्पादन के गुण मे काफी प्रगति या उन्नति हो गई थी ।

प्रयोज्य ने नियंत्रित अवस्था कि अपेक्षा प्रयोगात्मक अवस्था मे बहुत कम त्रुटि की और उसका निष्पादन काफी उन्न्त बन गया । अनुसंधान से ज्ञात हुआ की शिक्षा के अंतनिरीक्षण प्रतिवेदन से भी निष्पादन पर परिणाम के ज्ञान [ अभिप्रेरणा ] का अनुकूल प्रभाव प्रमाणित होता है ।

10॰ निष्कर्ष - प्रस्तुत अनुसंधान के आधार पर निष्कर्ष निकलता है कि परिणाम के ज्ञान [ अभिप्रेरणा ] के कारण निष्पादन उन्न्त बन जाता है । परिणाम के ज्ञान होते रहने पर व्यक्ति को अपनी त्रुटि सुधारने तथा अपने निष्पादन को और भी अच्छा करने का अवसर मिलता है । कुलमिलाकर लड़के की समलैंगिक मानसिकता समाप्त हो चुकी और विषम लिंग मै अभूरुचि आ गई । अब लिंग बदलवाने की इच्छा नहीं  होती है । वह अपना खोया आत्म विश्वास अब आ गया,  मर्द होने का अहसास हो गया । प्रयोज्य की चिंता समाप्त हो चुकी थी। अब खुशी से जी रहा है । 
नोट - सामान्य भाषा मे कहा जा सकता है की मनोवैज्ञानिक परामर्श लेने से प्रयोज्य ठीक हो चुका और समलैंगिकता से विषमलिंग मे आसानी से विचारो की आदत को बदला जा सकता है । 

11॰ संदर्भ VMOUKOTA MAPSY 101, MAPSY 10



 वाट्स एप 91 98290 85951

सोमवार, 6 जुलाई 2020

समलैंगिक का उपचार होता है ।

समलैंगिकता अनुसंधान पत्र [ शौध पत्र ]
एक नई खोज, समलैंगिक कैसे बना ?

कैसे समलैंगिकता का ईलाज / उपचार हुआ  ।
समलैंगिकता >>> अभिभावक ने नैतिक आचरण नही सिखाया आचरण ।

1.  मैथुन अभिप्रेरणा ओर निष्पादन [ Sex Motivation and Performance ]
           शोधकर्ता  डाक्टर रघुनाथ सिंह राणावत
           Dietitian & psychologist
          माता आयुर्वेदिक दवाखाना, सापोल, राजसमंद, राजस्थान ।
2. प्रयोज्य परिचय –
प्रयोज्य का नाम - 158
यौन – पुरुष
आयु – 24 
व्यवसाय - स्थानीय मजदूर
शिक्षा -  12   [ प्रयोज्य का नाम गोपनीय रखा गया है । ]
3॰ समस्या परिचय
प्रयोज्य 5 वर्ष की आयु का था, अभिभावक ने लड़कियो वाले घरेलू काम काज कराते थे । लड़कियो जैसे आचरण व्यक्तित्व होतो [ परिवार वाले कभी विरोध नहीं किया, जो जरूरी था ] । 10 वर्ष की उम्र तक घरेलू काम बर्तन माँजना, पोशा लगाना, करता था । लड़कियो के साथ खेलता था, चाचा के लड़को के साथ व अड़ोस पड़ोस लड़को के साथ यौन क्रिया करना शुरू किया [ माता पिता की निगरानी की अवेहलना मानता हूँ ] एक दूसरे का लिंग पकड़ना [ जब की ये उम्र सार्वजनिक खेल खेलने की होती ]  हस्तमैथुन करना सीख गए । 15 - 16 वर्ष की उम्र मे लड़को को चुंबन देना शुरुआत की, लिंग पकड़ना, गुदा मैथुन किया व करवाया था । ज़्यादातर गुदा मैथुन किया, एक दो दिन, समय मिलते आपस मे कपड़ा उतार कर न्ंगे हो जाते फिर गुदा मैथुन किया करते थे, लड़के की फिलिंग लेकर हस्त मैथुन किया करते थे। चाचा के लड़के से अधिक लगाव रहता था, जब 12 मे पढ़ते थे, शारीरिक गुदा मैथुन करते थे। आज भी लड़के पसंद, प्रयोज्य का शांत स्वभाव था, कम बोलता, कभी कोई खेल नहीं खेलता, पढ़ाई मे तेज था। लड़के अच्छे लगते थे। लड़कियो को बहन समझ कर बात करता था। फेसबुक पर बहन समझ कर बात करता । अगर कोई लड़की सामने रोती तो उसके लिए कोई अनुभूति नहीं होती । शर्म और डर लगातार बना रहता था ।
माता को बताया की मुझे लड़किया अच्छी नहीं लगती और लड़के अच्छे लगते है । मुझे इलाज कराना है, फिर माता ने हा कर दी । 
बाल्य जीवन से संज्ञानात्मक प्रेरणा और प्रोत्साहन का प्रभाव मैथुन शिक्षण और निष्पादन मे कई रूपो मे पड़ता है। मैथुन सफलता, असफलता, पुरुस्कार, परिणाम के ज्ञान आदि प्रोत्साहन के अनेक रूप है। सहयोग, स्पर्धा, प्रतियोगिता इत्यादि भी प्रोत्साहन के ही रूप है। इनका निश्चित प्रभाव व्यक्ति के मैथुन शिक्षा तथा निष्पादन पर पड़ता है ।
( 1 ) तत्परता से लाभ -- विषम लैंगिक होने के लिए परामर्श के समय जब सही तत्परता रही तब विषम लैंगिक निर्माण के विचार होता जाता था, तब प्रयोज्य सही प्रतिक्रिया विचार करने और समलैंगिक विचारो से अपने आप को बचाने लाभ करता था ।
( 2 ) तत्परता की हानि -- गलत तत्परता उत्पन्न विचार होने से प्रयोज्य गलत दिशा मे प्रयास के विचार आते थे, जिससे समस्या समाधान कठिन लगता था और समस्या के विचार बदल नही जाते तब तक तत्परता को छोडकर सही दिशा मे सक्रिय नही होता था ।

4॰ उद्देश्य –
प्रस्तुत अनुसंधान का उद्देश्य शिक्षण के अभ्यास से प्रयोज्य के वैवाहिक दांपत्य जीवन मे महिला के प्रति आकर्षण निष्पादन पर परिणाम के ज्ञान [ अभिप्रेरणा ] के प्रभाव को सीखना है । उदेश्य व्यक्ति के ज्ञानात्मक सीखने मे धनात्मक स्थानातरण की घटनात्मक प्रदर्शन का अनुसंधान किया । ओनलाइन परामर्श मोखिक मे धनात्मक स्थानांतरण वास्तव मे उद्दीपक तथा प्रतिक्रिया की समानता पर आधारित हुआ ।

5॰ परिकल्पना – मेरे संगत अध्ययनो के आलोक मे परिकल्पना बनायी की परिणाम के ज्ञान [ अभिप्रेरणा ] के प्रभाव को दिखाना है । जो दो क्रिया के उद्दीपक एकांश भिन्न तथा प्रतिक्रिया एकांश अभिन्न होते है, तो उनके बीच धनात्मक स्थानांतरण होता है । [ समलैंगिकता व्यवहार तथा विचारो का प्रभाव वाला व्यक्तित्व आसानी से बदले जा सकते है । ]

6॰ अनुसंधान की कार्य प्रणाली –
मौखिक अभ्यास के साथ अनुसन्धानात्मक अभिकल्प
योजना – प्रयोज्य के पास एक स्मार्ट फोन, बिना रुकावट बेजिझक स्थान का चयन कर के एक निश्चित समयावधि तय किया गया था । महीने मे 10 ऑनलाइन परामर्श नियंत्रित अवस्था मे प्रयोज्य समझा दिया गया था । फिर प्रयोज्य से अंतनिरीक्षण प्रतिवेदन  लिया गया तथा दोनों अवस्थाओ के परिणामो का तुलनात्मक अध्यन किया फिर देखा की धनात्मक स्थानांतरण धटित हुआ या नही

7॰ परीक्षण सामग्री – मेरे दुवारा निर्मित शाब्दिक श्रवण प्रश्नोत्री आवश्यकता अनुसार स्पष्टीकरण पुछ लिया जाता था । प्रतिक्रियाओ को लिख दिया जाता था ।
( 1 ) व्यक्तित्व के लक्षण  चिंता से ग्रस्त, संदेह की प्रवृति, संवेगात्मक नियंत्रण की कमी देखी, भ्रम  पाया, स्थिरता की मध्यम चिंता, विचारो मे अस्थिरता एवं असंगति, संवेगात्मक अनियंत्रण, कल्पना की अधिकता, एकाग्रता की कमी, कमजोर याददास्त, और तनाव से पीड़ित पाया गया ।

8॰ अंतनिररिक्षण रिपोर्ट – परिणाम एवं व्याख्या
(1) अधिगम स्थानातरण मौखिक सीखने मे धनात्मक स्थानांतरण की घटनाओ को श्रवण शक्ति से कौशल सहायता करता रहा ।
(2) निर्देश निर्देशन की पालना के प्रयोज्य हमेशा तत्पर रहा था ।
“शुरू में ये काम प्रयोज्य को कठिन लगा की ये काम मुझ से होगा की नही लेकिन कुछ समय बाद ये कठिनाई दूर हो गई । पहले कठिन सवाल समस्याओ के समाधान के बाद उसको वैवाहिक ज़िंदगी सुनहरी दिखने लगी ।

9॰ विवेचना एवं निष्कर्ष – परिणाम पूछताछ से ज्ञात हुआ कि मेरी परिकल्पना सही प्रमाणित हुई कि परिणाम के ज्ञान [ अभिप्रेरणा ] के मिलने से निष्पादन बेहतर बन जाता है नियंत्रित अवस्था मे प्रयोज्य को उसके दुवारा किए गए निष्पादन के संबंधन मे जानकारी देता रहा था । इस प्रकार से परिणाम ज्ञान हो जाने से अशुद्धि बहुत घट गई और निष्पादन के गुण मे काफी प्रगति या उन्नति हो गई थी ।

प्रयोज्य ने नियंत्रित अवस्था कि अपेक्षा प्रयोगात्मक अवस्था मे बहुत कम त्रुटि की और उसका निष्पादन काफी उन्न्त बन गया । अनुसंधान से ज्ञात हुआ की शिक्षा के अंतनिरीक्षण प्रतिवेदन से भी निष्पादन पर परिणाम के ज्ञान [ अभिप्रेरणा ] का अनुकूल प्रभाव प्रमाणित होता है ।

10॰ निष्कर्ष - प्रस्तुत अनुसंधान के आधार पर निष्कर्ष निकलता है कि परिणाम के ज्ञान [ अभिप्रेरणा ] के कारण निष्पादन उन्न्त बन जाता है । परिणाम के ज्ञान होते रहने पर व्यक्ति को अपनी त्रुटि सुधारने तथा अपने निष्पादन को और भी अच्छा करने का अवसर मिलता है । कुलमिलाकर लड़के की समलैंगिक मानसिकता समाप्त हो चुकी और विषम लिंग मै अभूरुचि आ गई
[ प्रत्येक माता पिता दायत्व होना चाहिए की अपनी औलाद को सुविधा के साथ साथ अच्छे संस्कार भी देना चाहिए । आज की भागदौड़ में दिखावे के लिए रुपया कामने के चक्कर गलत प्रतिस्पर्धा को नहीं करना चाहिए, अभिभावक धन दौलत अपनी औलाद के लिए कमाते है जब कमाने के लगाव मे बच्चो की संस्कार देना भूल जाये फिर औलाद बिगड़ जाये तो ये सम्पदा किस काम की ]

11॰ संदर्भ VMOUKOTA MAPSY 101, MAPSY 10

 वाट्स एप 9829085951



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रविवार, 5 जुलाई 2020

समलैंगिकता अनुसंधान पत्र [ शौध पत्र ]

एक नई खोज, समलैंगिक कैसे बना।

कैसे समलैंगिकता का आदि हुआ था ।

समलैंगिकता >>> रेलयात्रा मे यात्री ने सिखाया आचरण हें । 

1.  मैथुन अभिप्रेरणा ओर निष्पादन [ Sex Motivation and Performance ]

         शोधकर्ता  डाक्टर रघुनाथ सिंह राणावत

          Dietitian & psychologist

          माता आयुर्वेदिक दवाखाना, सापोल, राजसमंद, राजस्थान ।

2. प्रयोज्य परिचय

प्रयोज्य का नाम - 154 

यौन पुरुष

आयु – 25  

शिक्षा -  BA   [ प्रयोज्य का नाम गोपनीय रखा गया है । ]

3॰ समस्या परिचय 

सात वर्ष पूर्व यात्रा से समय 30 वर्ष का संग अंजान यात्री मिला जिसने बहला फुसला आग्रह कर उसने प्रयोज्य का लिंग को पकड़ कर सहलाकर मुख मैथुन भी किया, फिर गुदा मैथुन को प्रेरित करके गुदा मैथुन भी करवाया, सब उसी दिन से ये समलैंगिकता की दिशा से समलैंगिक होने की दशा हो गई। प्रयोज्य ने बताया, फिर दूसरा 40 वर्ष के व्यक्ति के संपर्क मे आया डेढ़ वर्ष से इस व्यक्ति से तीसरे-चौथे दिन समलैंगिक के गुदा मैथुन कर लेता था, फिर उससे वार्तालाप मे बताया की ये समलैंगिता कहा सीखा तो उसने बताया की जवान यात्री ने सिखाया तब प्रयोज्य की आयु लगभग 15 वर्ष थी, तब से लत लग गई, ये आदतन समलैंगिकता का अब अभ्यास हो चुका था। तीसरा 50 वर्ष का व्यक्ति के साथ दो वर्ष गुदा मैथुन किया। फिर शादी हो गई दो बच्चे है, अर्थात व्यक्ति उभय लिंगी हो चुका था। पर अब ये दिक्कत हो गई की घर अपनी औरत पसंद नही आती सारा दिन मन भ्रमित रहता था। पुरुष प्रेम के कारण घर मे दिक्कत होती चिड़चिड़ापन, गुस्सा, पत्नी से कोई लगाव नही रहता था। घर मे निर्जीव जैसा हालत हो गए, बाहर पुरुष के कोई अंग छुने से रोमांचित होतापर स्त्री अंग स्पर्श से कोई अनुभूति नही होता था। बाहर किसी भी व्यक्ति को देखता तो उत्तेजना आ जाती पर घर आने के बाद अपनी स्त्री से कोई रुचि नहीं रहती। प्रयोज्य खुला विश्वविधालय दूरस्थ प्रणाली शिक्षा के साथ अच्छी सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहा पर पढ़ाई मेँ मन नहीं लगता था। इसलिए ऑनलाइन समस्या समाधान ढूंढा गया। प्रयोज्य पार्ट टाइम अपना व्यवसाय भी करता था।

बाल्य जीवन से संज्ञानात्मक प्रेरणा और प्रोत्साहन का प्रभाव मैथुन शिक्षण और निष्पादन मे कई रूपो मे पड़ता है। मैथुन सफलता, असफलता, पुरुस्कार, परिणाम के ज्ञान आदि प्रोत्साहन के अनेक रूप है। सहयोग, स्पर्धा, प्रतियोगिता इत्यादि भी प्रोत्साहन के ही रूप है। इनका निश्चित प्रभाव व्यक्ति के मैथुन शिक्षा तथा निष्पादन पर पड़ता है ।

 ( 1 ) तत्परता से लाभ -- विषम लैंगिक होने के लिए परामर्श के समय जब सही तत्परता रही तब विषम लैंगिक निर्माण के विचार होता जाता था, तब प्रयोज्य सही प्रतिक्रिया विचार करने और समलैंगिक विचारो से अपने आप को बचाने लाभ करता था ।

 ( 2 ) तत्परता की हानि -- गलत तत्परता उत्पन्न विचार होने से प्रयोज्य गलत दिशा मे प्रयास के विचार आते थे, जिससे समस्या समाधान कठिन लगता था और समस्या के विचार बदल नही जाते तब तक तत्परता को छोडकर सही दिशा मे सक्रिय नही होता था ।

4॰ उद्देश्य

प्रस्तुत अनुसंधान का उद्देश्य शिक्षण के अभ्यास से प्रयोज्य के वैवाहिक दांपत्य जीवन मे महिला के प्रति आकर्षण निष्पादन पर परिणाम के ज्ञान [ अभिप्रेरणा ] के प्रभाव को सीखना है । उदेश्य व्यक्ति के ज्ञानात्मक सीखने मे धनात्मक स्थानातरण की घटनात्मक प्रदर्शन का अनुसंधान किया । ओनलाइन परामर्श मोखिक मे धनात्मक स्थानांतरण वास्तव मे उद्दीपक तथा प्रतिक्रिया की समानता पर आधारित हुआ ।

5॰ परिकल्पना मेरे संगत अध्ययनो के आलोक मे परिकल्पना बनायी की परिणाम के ज्ञान [ अभिप्रेरणा ] के प्रभाव को दिखाना है । जो दो क्रिया के उद्दीपक एकांश भिन्न तथा प्रतिक्रिया एकांश अभिन्न होते है, तो उनके बीच धनात्मक स्थानांतरण होता है । [ समलैंगिकता व्यवहार तथा विचारो का प्रभाव वाला व्यक्तित्व आसानी से बदले जा सकते है । ]

6॰ अनुसंधान की कार्य प्रणाली

मौखिक अभ्यास के साथ अनुसन्धानात्मक अभिकल्प

योजना प्रयोज्य के पास एक स्मार्ट फोन, बिना रुकावट बेजिझक स्थान का चयन कर के एक निश्चित समयावधि तय किया गया था । महीने मे 10 ऑनलाइन परामर्श नियंत्रित अवस्था मे प्रयोज्य समझा दिया गया था । फिर प्रयोज्य से अंतनिरीक्षण प्रतिवेदन  लिया गया तथा दोनों अवस्थाओ के परिणामो का तुलनात्मक अध्यन किया फिर देखा की धनात्मक स्थानांतरण धटित हुआ या नही ।

7॰ परीक्षण सामग्री मेरे दुवारा निर्मित शाब्दिक श्रवण प्रश्नोत्री आवश्यकता अनुसार स्पष्टीकरण पुछ लिया जाता था । प्रतिक्रियाओ को लिख दिया जाता था ।

( 1 ) व्यक्तित्व के लक्षण  चिंता से ग्रस्त, संदेह की प्रवृति, संवेगात्मक नियंत्रण की कमी देखी, भ्रम  पाया, स्थिरता की मध्यम चिंता, विचारो मे अस्थिरता एवं असंगति, संवेगात्मक अनियंत्रण, कल्पना की अधिकता, एकाग्रता की कमी, कमजोर याददास्त, और तनाव से पीड़ित पाया गया ।

8॰ अंतनिररिक्षण रिपोर्ट परिणाम एवं व्याख्या

(1) अधिगम स्थानातरण मौखिक सीखने मे धनात्मक स्थानांतरण की घटनाओ को श्रवण शक्ति से कौशल सहायता करता रहा ।

(2) निर्देश निर्देशन की पालना के प्रयोज्य हमेशा तत्पर रहा था ।

शुरू में ये काम प्रयोज्य को कठिन लगा की ये काम मुझ से होगा की नही लेकिन कुछ समय बाद ये कठिनाई दूर हो गई । पहले कठिन सवाल समस्याओ के समाधान के बाद उसको वैवाहिक ज़िंदगी सुनहरी दिखने लगी ।

9॰ विवेचना एवं निष्कर्ष परिणाम पूछताछ से ज्ञात हुआ कि मेरी परिकल्पना सही प्रमाणित हुई कि परिणाम के ज्ञान [ अभिप्रेरणा ] के मिलने से निष्पादन बेहतर बन जाता है नियंत्रित अवस्था मे प्रयोज्य को उसके दुवारा किए गए निष्पादन के संबंधन मे जानकारी देता रहा था । इस प्रकार से परिणाम ज्ञान हो जाने से अशुद्धि बहुत घट गई और निष्पादन के गुण मे काफी प्रगति या उन्नति हो गई थी ।

प्रयोज्य ने नियंत्रित अवस्था कि अपेक्षा प्रयोगात्मक अवस्था मे बहुत कम त्रुटि की और उसका निष्पादन काफी उन्न्त बन गया । अनुसंधान से ज्ञात हुआ की शिक्षा के अंतनिरीक्षण प्रतिवेदन से भी निष्पादन पर परिणाम के ज्ञान [ अभिप्रेरणा ] का अनुकूल प्रभाव प्रमाणित होता है ।

10॰ निष्कर्ष - प्रस्तुत अनुसंधान के आधार पर निष्कर्ष निकलता है कि परिणाम के ज्ञान [ अभिप्रेरणा ] के कारण निष्पादन उन्न्त बन जाता है । परिणाम के ज्ञान होते रहने पर व्यक्ति को अपनी त्रुटि सुधारने तथा अपने निष्पादन को और भी अच्छा करने का अवसर मिलता है ।

11॰ संदर्भ VMOUKOTA MAPSY 101, MAPSY 10

 वाट्स एप 9829085951


शनिवार, 4 जुलाई 2020

समलैंगिक के सवाल, मेरे जवाब ।

1. Mujhe aisa lagta hai ki main gay hun. Lekin mera mann isko manne ke liya taiyaar nahi hai aur main v isko manne ke liye taiyaar nahi hun.
1. मन हमेशा दो मार्गी होता है, सकारात्मक व नकारात्मक भी । पहले सवाल में जवाब भी छिपा है । कुलमिलाकर बात पकडने के आदि हो गए हो ।

2. Aajkal main kisi v ladka ko dekhta hun toh wah mujhe sundar hi lagne lagta hai. Yahan tak ki jo muje pehle Sundar nahi lagta tha wah v mujhe sundar lagne laga hai. Jisko leke main bahut hi jyada chintit hun ki aakhir Aisa kyun hai?
2. एक बात दिमाग मे घर कर गई, इस बात को छोड़ने का मन नहीं करता, क्योंकि सीखा हुआ आचरण आसानी से जल्दी नहीं छूटता है, इसलिए जिंदगी के लक्ष्यों विहीन जी रहे हो .।

3. aajkal main koi v gana sunta hun toh mujhe ladke k baare mein dhiyan chala jata hai. Aisa kyun?
3 दिमाद मे याददस्त एक स्टाक रूम होता हो स्टाक भरा होगा वो ही बाहर आएगा ।  कहना नहीं मानते हैं, अपनी जिद्द के कारणों पर अड़े होने की वजह से भी होता है ।

4. Aapne jaisa ki pichle counseling mein kaha tha ki sawalon ke jawab dundhne se kya hoga? Aur aap ek udahran diye the ki agar koi kapra ganada hai toh use saaf karne se kaam hoga yeh nahi jaruri hoga ki iss kapra mein ganda kahan se laga. Lekin mujhe mere sawalon ke jawab milne se hi santusti hogi Aisa kyun? Jab ki aapka udharan ekdam sahi hai.
4. अपने विचारों के ब्लॉकेज आ गए, इसमे सुधार नहीं चाहते। पहला काम होता की जो मैला कपड़ा उसको साफ किया जाए, फिर ध्यान दिया जाये की दुबारा ये वापस खराब नही हो, खराब होने के कारणो ध्यान रखना दूसरा काम होता है ।

5. Mujhe aisa v kabhi kabhi lagta hai ki main sawalaon ke jawab sirf apne mann ko santwana dene k liye cahta hun. Jaisa ki mine aapko baatya tha ki maine ek online psychological consult kiya tha pehle jisme ki maine apne bare mein sab kuch likh diya tha lekin mujhe udhar se reply aata hai ki agar aap gay ho toh v ye normal hai. Jisse main santust nahi hua Aisa kyun?
5. आपने पहले जिस से ऑनलाइन परामर्श लिया उनका समलैंगिक समस्या समाधान पर कितना कार्य किया अथवा केवल रटा रटाया उतर दे दिया हो, मेरे परामर्श से लगता लगता आप अडियल टट्टू जैसे बन गए हो, केवल अपनी बातें पर पांव जमा दिए हो ।

6. Mujhe lagta hai ki muje ladkion mein utna jyada intrest nahi hai aisa kyun? Kya main shaadi nahi kar paunga? Kyun hain mere mein ye sabhi lakshan?
6. क्योंकि दिमाग एक विचारों का स्टॉक रूम है इसमें जो भरा हुआ है वो ही बाहर आएगा, इसलिए हमेशा यही कहता हूं दिशा बदलो दशा बदल जाएगी, नजर बदलो नजारे बदल जायेगा । शादी कर सकेंगे जो एक आचरण छोड़ने का बोला उसका पालन करना, सब ठीक होगा ।

7. Main harek Baar apne aap ko straight shabit karne ke liye ye imagine karne lagta hun ki kisi ladke ka ling mere traf aa raha hai. Aur phir main yah sochta hun ki mere ling mein koi sensation toh nahi hai. Uske baad main ise aur paka karne ke liye apne ling oe aungli se ya kisi lambi vastu se baar baar touch karta hun taaki mujhe koi sensation toh isse mehsush nahi ho rahi hai.phir jab sensation mehsush hoti hai toh main chintit ho jata hun. Bata dun ki apne Hip (pichuare) ke saath v Aisa hi sochta hun ki kahi koi sensation toh nahi. Kyinki ek website pe main ye pata karne gaya tha ki kahin main gay toh nahi? Usme ye ek sawal tha ki aapke hip mein jab koi kapda fasta hai toh aapko kaisa feel hota hai? Toh meine answer diya ki normal lagta hai. Jiske baadh mujhe result mila ki aap (66-67%) heterosexual ho aur kuch % homosexual aur bisexual v tha. Jiske baadh maine apne Hip mein kapda fasha k dekha ki kya hota hai toh mujhe normal hilaga. Lekin main yah sochne laga ki muje achaa laga kyunki ek din noch raha tha aur maine nocha toh mujhe achaa laga tha.
7.सत्यधिक पालन पोषण के संस्कार कम और सुविधाओ के अधिक मिलने से ऐसी कल्पना होने से मन माना करते गए, अच्छा दोस्त नहीं होना से भी होता है, जिसको याद करोंगे तो वो ही याद आएगा । फालतु विचार करोंगे, फालतु विचार आयेगा क्यों जब हस्थमैथुन करते समय हमेशा लड़के की इमेज दिमाग मे रक्खी तो लड़की आएगी कहा से । क्रोध व सेक्स दोनो दमन में रहते है,  इनको निकलना पड़ता है । जैसे दूध से घी निकाला जाता है ।

8. Aapko bata den sir ki YouTube per v homosexuality ko janchne ke liye hi test diye jisme ki 5 questions pucha aur harek question ke answer ke options ke aage point diya jo ki bola jor k rakhne jiske baadh last mein number ke anushar pata chal jayega ki aadmi homosexual, bisexual hai ya phir heterosexual hai. Toh usme ek question tha ki do you fantasize to sex with same sex? Jiska matlab hai ki kya aapne samlangik sex ke baare mein kalpana ki hai? Toh tabhi maine answer de diya no jisse ki mujhe result mil gaya ki main heterosexual hun. Lekin phir maine socha ki maine toh aisa socha hai jaisa ki maine aapko pahle bataya tha. Phir jab maine uska answer yes diya toh mera result aaya bisexual jo ki heterosexual se 10-20 point hi kam tha. Jiske baadh main kafi chintit ho gaya tha kyunki us video ke niche kafi positive comments the ki ye sahi batata hai. Lekin kuch log the Jo ki kah rahe the result kuch aaya lekin apne aapko wah straight hi kah rahe the. Lekin phir v mera vichaar chalu hi raha. Jiske baadh maine Google pe fantasize ka hindi arth khoja jo ki tha kalpana karna. Toh mujhe laga ki mai e toh kalpna hi kiya. Phir socha ki maine thinking kiya. Lekin main confuse hun kuch kijiye sir. iska kya jawaab hoga?
8. कुछ नहीं है ये सब अपनी अपनी मन मर्जी व सीमित ज्ञान के आधार पर होता किसने कितना अनुसंधान किया या जितना सीखा उतना ही जवाब देगा, बिना सोचे समझे कल्पना करते राहोंगे तो कल्पना की को दिशा व सीमा नही होती है, ज़िंदगी भर पागलो जैसे सोचते रहे, अगर चिंतन करेंगे तो समस्या की दिशा व सीमा समाप्त हो जाएगी । अपने सवाल की बाते फालतु बाते है, अपने सुनहरे भविष्य पर ध्यान रखें।
[ A ] fantasize- दिवास्वपन्न, दिन मे सपना देखना ।
[ B ] Fantasy -  कपोल कल्पित /  वासना /  मनोवैज्ञानिक अर्थों में कल्पना मन के दो अलग-अलग संभावित पहलुओं, चेतन और अचेतन को संदर्भित करती है।

9. jaisa ki maine HOCD ke baare mein padga tha ki mind mein homosexuality ka unwanted image aane lagta hai. Lekin main adhiktar baar janbujh ke apne dimag mein wo sara image layajo ki wanted tha yaani ki mere dwara laya gaya tha. Toh kya main homosexua hun agar nahi toh phir ye HOCD kaise hui. Please sir batayen.
9. अनवांटेड इमेज का कारण पहले से जो सोचा था वो अब जा नहीं रहा, अच्छा मार्गदर्शन नहीं होने की वजह से होता है । फालतू होने से, दादा दादी का प्यार नही मिलना, माता, दादी या किसी से अत्यधिक प्यार मिलने से अपना मन माना करते आए हो, खेल कूद, दौड़ भाग व जवाबदारी नहीं होने से एक गलत विचार से बाधित हो गए हो, फालतू विचारो की बुनियाद खड़ी कर दी है। अब दिशा बदल दो दशा बदल जाएगी, नजर बदल दो नजारे बदल जाएँगे । 

10. Aapne jaisa ki apne HOCD wale video mein kaha ki isme sawaal tathya hin hote hain lekin mujhe agar tathya mil jata hai toh sawaal khatam ho jaate hain. Toh agar mujhe HOCD hai toh mere sawaal tathyahin hone chahiye lekin agar mere sawaalon ka thathya milne se nidaan hota hai toh phir thathyahin ka tathya toh nahi ho sakta na. So please sir iska v jawaab dijiye.


Thanks sir

10. सब समलैंगिक विचारों को केन्द्रित करने के कारणों से है । रास्ता भूल गए हो, सही रास्ते पर आ जाओ । गलत रास्ते चलते हुए भी गलत बहस करने के आदि हो गये हो, सुबह का भुला घर आता पर तुम उस भूल को ही अपनी जिद्द बना ली, अपनी मन मानी छोड़कर, नई इमेज दिमाग मे बैठाओ तो नई इमेज आ जायेगी ।


निष्कर्ष -- प्रयोज्य केवल अपनी हस्थमैथुन के समय दिमाग मे जो इमेज बना ली बस उसको छोड़ना नहीं चाहता और दूसरी इमेज भरना नहीं चाहता जैसे छोटे बच्चे रोते हुए हाथ मे रोटी को लेकर रोता रहता, शिकायत दर्ज करने में ही रहता है वैसे हालात हो गए है । सब बातें अचेतन मन मे गलत भर दिया है । जैसा फोन, कम्प्यूटर के मेमोरी में पुराने गीतों को डिलीट करके नए गीतों को भरते वैसे ही नए ख्याल, नई सूझ, नया आत्मविश्वास, नई उमंग, उल्हास भरने की आवश्यकता है । दिमाग मे जो कल्पना बैठा रखी उसको छोडना नहीं चाहता जैसे कोई बंदर किसी सँकरे मुह का घड़े मे डाली सेव फल निकालना चाहता पर जो सेव फल पकड़ने से घड़े का मुख से सेव युक्त  हाथ का आयतन बड़ा होने से, नहीं हाथ निकलता, नहीं सेव फल निकलता। पर सेव को छोड़ कर हाथ निकाल कर घड़े को युक्ति से उल्टा कर दे तो आसानी से सेव निकाल सकता है । इस लिए अपने सुनहरे भविष्य व माता पिता को यश, समाज मे किर्ति के लिए अच्छे होने का प्रयास करना चाहिए ॥

धन्यवाद,
जय श्री रामाकृष्ण







रविवार, 28 जून 2020

मुखमैथुन समलैंगिकता का ईलाज होता है ।

कैसे समलैंगिकता का ईलाज हुआ है ।

समलैंगिकता >>> किस प्रकार मुखमैथुन से समलैंगिक ने मुक्ति पाई ? 
 
1.  मैथुन अभिप्रेरणा ओर निष्पादन [ Sex Motivation and Performance ]

          शोधकर्ता  डाक्टर रघुनाथ सिंह राणावत

                        Dietitian & psychologist

          माता आयुर्वेदिक दवाखाना, सापोल, राजसमंद, राजस्थान ।

2. प्रयोज्य परिचय –

प्रयोज्य का नाम - 149 

यौन – पुरुष

आयु – 20 

भार / वजन  - 100 किलो  

शिक्षा - BA प्रथम वर्ष खुला विश्वविधालय से  [ प्रयोज्य का नाम गोपनीय रखा गया है । ]

सपने - IPS, UPS, APS 

3॰ समस्या परिचय 
प्रयोज्य 8 वर्ष पूर्व मे 12 वर्ष की आयु का था तब मौसी के लड़के जिसकी आयु 15 वर्ष थी उसने अपने लिंग से मुखमैथुन करना सीखा दिया था । 8 वर्ष से इस मुखमैथुन की समस्या से पीड़ित था, स्कूल के साथियो से मानसिक लगाव हमेशा रहता था उनके शरीर पर हाथ घुमाना अच्छा लगता था । दो तीन बार उसके पिता का लिंग भी पकड़ लिया था, इतना बेशर्म हो चुका था, जिस पर मैने पूछा वाकई हरकत अच्छी नही थी, तब उसने बताया की फिर मुझे अपने आप पर घृणा आने लगी । मुखमैथुन के इस क्रम को लगातार करता रहा, अनगिनत कई बार मुखमैथुन के समय उनका पेशाब और वीर्य भी पीया । माता पिता की ये एकलौती संतान था, पिता व्यवसायी है, माता ग्रहणी बताई । मैने  उससे पूछा  के ये मुख मैथुन कब कहा करते तो उसने ये बताया की एक एप ..........{ एप गोपनीय रखता हूँ } से अपने निकटतम साथ समलैंगिक का पता लग जाता है, मैने पूछा ये प्रयोग कहा करते हो तब उसने कहा मम्मी जब भक्ति भाव से गुरुजी के पास जाती तब समलैंगिक को घर बुलाकर मुखमैथुन कर लेता था। कभी कभी ये भी अपनी माता के साथ प्रवचन सुनने जाता था, नित्य पुजा पाठ भी करता था पर मन अस्थिर हो जाता था । ये बिलकुल बेशर्म हो चुका था । स्कूल मे ये हरकत होती रहती थी । स्थायी कोई दोस्त नही था । घर मे माता से अक्सर लड़ाई होती थी । स्त्री स्मरण कभी चाहत नहीं होती थी, पुरुष से चाहत होने पर उत्तेजना आती थी । 
मेरा वीडियो देखने के बाद उसको असामान्य से सामान्य बनने की चाह के कारण परामर्श के लिए समपर्क किया । 


4॰ समस्या समाधान 
प्रयोज्य को परामर्श शुरू किया जिसमे संतुलित आहर का डाइट चार्ट दिया क्योकि इसका 100 किलो वजन था, अब 60 किलो वजन का लक्ष्य मैने बताया तो उसने 80 किलो वजन की चाहत रखी । 15 दिन मे वजन 7 किलो कर कर दिया था । पहले दिन के परामर्श से काफी सुधार हुआ, माता से झगड़ा करना बंद कर दिया, पहले घरेलू काम मे मन नहीं करता पर अब आसानी से माता के रसोई काम या घरेलू काम कर लेता, माता भी खुश होती, और अब माता खुश रहती, माता से लड़ाई नहीं होती । घर का वातावरण अच्छा हो गया, कोचिंग सेंटर मे लड़कियो से आसानी से बात कर लेता है, लड़कियो पहले आँख नहीं मिला सकता था पर अब हंसी मज़ाक भी कर लेता है। साथी लड़किया अच्छी लगती है। अब मन हल्का हो गया, मुख मैथुन से छुटकारा मिल गया अब कालेज वाली अच्छी ज़िंदगी की चाहत बढ़ गई । इस प्रकार से मुख मैथुन की समस्या हल हो गई, मानसिक तनाव मिट गया, पढ़ाई मे अब मन लगता है, पहले शादी करने का मन नहीं होता था, पर ऑनलाईन परामर्श के कारण माता के सपने शादी के प्रस्ताव अब स्वीकार कर लिया । अच्छे नए दोस्त भी बनाना शुरू कर दिया । 

5॰ निष्कर्ष - दिशा बदलने से प्रयोज्य की दशा बदल गई, नजर बदलने से नजारे बदल गए । 





शनिवार, 27 जून 2020

समलैंगिकता का ईलाज होता है ।


समलैंगिकता 
 
1.  मैथुन अभिप्रेरणा ओर निष्पादन [ Sex Motivation and Performance ]

          शोधकर्ता  डाक्टर रघुनाथ सिंह राणावत

                        Dietitian & psychologist

          माता आयुर्वेदिक दवाखाना, सापोल, राजसमंद, राजस्थान ।

2. प्रयोज्य परिचय –

प्रयोज्य का नाम - 148 

यौन – पुरुष

आयु – 34 

शिक्षा - माध्यमिक  [ प्रयोज्य का नाम गोपनीय रखा गया है । ]

3. समस्या परिचय 
प्रयोज्य की शादी हुई पारिवारिक मैथुन संबंधो समस्या का होना से तलाक होना। मुखमैथुन की इच्छा होना, बार बार मुखमैथुन के विचार आना। महिलाओ मे आकर्षण नही होना। लडकीय पसंद नही आती। शादी से डर लगता है । शक्राणुओ की कमी पाया गया । 

4. समस्या समाधान 
प्रयोज्य के पास नेटवर्क कमजोर होना पाया गया, नेटवर्क मे सार्वजनिक परामर्श लेने मे शर्म व भय होने से बचा, फिर साथ कोरोना से लॉक डाउन से कारण संपर्क नही किया । इस प्रकार से परामर्श अधूरा रहा । 

शुक्रवार, 26 जून 2020

समलैंगिक जुनून

समलैंगिक OCD (HOCD)
 समलैंगिक OCD (HOCD)
 HOCD क्या है?
 समलैंगिक ओसीडी - जिसे यौन अभिविन्यास ओसीडी के रूप में भी जाना जाता है, व्यक्तियों (सीधे, समलैंगिक, या उभयलिंगी) में देखा जाता है जो जुनूनी विचारों को विकसित करते हैं, जो एक गहन (अनुचित) भय से ग्रस्त हैं और उनके लंबे समय तक यौन अभिविन्यास पर संदेह करते हैं।  इन व्यक्तियों को डर है कि वे एक ही सेक्स के लिए आकर्षित हो सकते हैं (यदि वे विषमलैंगिक हैं), या विपरीत लिंग के प्रति आकर्षित (यदि वे पहले से ही समलैंगिक हैं), भले ही उनकी यौन इच्छाएं और अंतर्निहित अभिविन्यास इंगित करें।  आमतौर पर, उनके जुनूनी समलैंगिक विचारों को अनिवार्य जाँच व्यवहारों के साथ पालन किया जाता है जो किसी भी सबूत को 'सबूत' के रूप में प्रस्तुत करते हैं कि उनके विचार और भय वास्तव में वास्तविक हैं।

 ओसीडी के अन्य रूपों के रूप में जहां व्यक्ति अवांछित और दखल देने वाले विचारों का अनुभव करते हैं, जिन्हें तर्कहीन माना जाता है, और आमतौर पर बाध्यकारी कृत्यों या आग्रह के साथ होते हैं - HOCD अनुभव वाले जुनूनी व्यक्ति भी अवांछित विचार हैं, हालांकि ये मुख्य रूप से अधिक यथार्थवादी भय पर केंद्रित हैं।  और उनकी कामुकता के बारे में अनिश्चितता।  HOCD में शामिल यौन जुनून आम तौर पर व्यक्ति के लिए शर्म और अपराध के उच्च स्तर से जुड़े होते हैं, और इस कारण से, अक्सर दूसरों से छिपा कर रखा जाता है।  आत्म-वंचना और भ्रम भी विशिष्ट है - बाद में उचित सहायता और उपचार की मांग न करने के लिए एक उपयुक्त मकसद बनाना।  महत्वपूर्ण रूप से, HOCD होमोफोबिया के बारे में नहीं है - HOCD वाले व्यक्ति आमतौर पर दूसरों में समलैंगिकता की अवधारणा से परेशान नहीं होते हैं, हालांकि खुद के समलैंगिक होने (या सीधे व्यक्ति के समलैंगिक होने) के बारे में सोचा जाना अत्यंत कष्टप्रद है।  इसका मुख्य कारण यह है कि उनके लिए इसका क्या मतलब हो सकता है।  उदाहरण के लिए, एक व्यक्ति जो प्यार करने वाले प्रतिबद्ध रिश्ते में है, वह विचार का अनुभव कर सकता है, "अगर ये विचार सच थे तो मुझे यह रिश्ता छोड़ना होगा"।  इसलिए, उनका डर सीधे या समलैंगिक होने के बारे में नहीं है - लेकिन इससे भी अधिक कि वे उस एक को खो देंगे जो वे वास्तव में प्यार करते हैं।  इस लेख में एचओसीडी के कुछ अलग-अलग रूपों और प्रत्येक से जुड़े सामान्य लक्षणों को समझाने में मदद मिलेगी, जिसमें विभिन्न उपचार दृष्टिकोण शामिल किए जा सकते हैं।



 HOCD के विभिन्न प्रकार क्या हैं?
 यह स्वीकार करना महत्वपूर्ण है कि HOCD में जुनून शामिल है, इसके बाद आग्रह (मजबूरियां) हैं जो संदेह और भय की ओर अग्रसर हैं जो उनके यौन अभिविन्यास के आसपास हैं।  भय अहंकार-द्वैत (स्वयं से अलग) है, न कि अहंकार-श्लेष (कामुकता के बारे में भ्रम)।  इसलिए नीचे सूचीबद्ध HOCD की श्रेणियां निर्णायक नहीं हैं, और HOCD वाले लोग इन श्रेणियों की संख्या और कई और अधिक के साथ अनुभव और पहचान कर सकते हैं।

 सभी या कुछ नहीं HOCD:
 एचओसीडी के इस रूप वाले व्यक्तियों में आमतौर पर उनके पूरे जीवन में एक ही यौन अभिविन्यास होने की रिपोर्ट होती है, या कभी भी समलैंगिक कल्पनाओं या विचारों का अनुभव नहीं किया है जो पहले उनके मन को पार करते हैं।  उनका डर आमतौर पर एक 'समलैंगिक' विचार या भावना उनके ऊपर से गुजरता है, जिसके लिए उन्होंने अत्यधिक ध्यान दिया और अर्थ की तलाश की।  सभी या कुछ नहीं के साथ व्यक्तियों, जो किसी भी समलैंगिक विचारों के होने का एक संकेत होना चाहिए कि वे वास्तव में समलैंगिक हैं, विकृत धारणा को धारण करते हैं।  खुद को ’साबित’ करने की कोशिश में कि वे सीधे हैं, वे विभिन्न बाध्यकारी व्यवहारों में संलग्न हो सकते हैं, जैसे कि सेक्स संबंधी कल्पनाओं के विपरीत हस्तमैथुन अनुष्ठान, या वस्तुओं या लोगों की अत्यधिक परिहार के उपाय जो कि व्यक्ति को समलैंगिकता से जोड़ते हैं।

 उपचार में सीबीटी में उन वस्तुओं या लोगों के लिए एक्सपोज़र थेरेपी शामिल है जो समलैंगिक विचारों को ट्रिगर करते हैं - ’सीधे-सिद्ध’ व्यवहार में संलग्न होने की मजबूरी के अलावा।
 रिश्ता HOCD:
 संबंध OCD, (अन्यथा ROCD के रूप में जाना जाता है) का वर्णन तब किया जाता है जब लोग अपने पिछले संबंध विफलताओं को दोष देते हैं, इस विश्वास पर कि उन्हें ‘समलैंगिक होना चाहिए’ क्योंकि वे पिछले रिश्ते सिर्फ काम नहीं कर रहे हैं।  आम उदाहरणों में अपने यौन साथी के प्रति यौन आकर्षण महसूस नहीं करना, या उनके पिछले रोमांटिक संबंधों में प्यार का अनुभव नहीं होना शामिल है।  यह अवधारणा आमतौर पर उन व्यक्तियों के साथ जुड़ी होती है जो यह महसूस करते हैं कि वे विपरीत लिंग से संबंधित नहीं हैं - इस बात का प्रमाण के रूप में कि वे समलैंगिक हैं।  इस मामले में, व्यक्ति आमतौर पर एक ही लिंग के साथ अपनी बातचीत में भाग लेंगे - उनका मूल्यांकन अधिक समय के साथ समय बिताने के लिए अधिक समझ और अधिक संतोषजनक होने के लिए।  नतीजतन, यह व्यक्ति को भयभीत करने के लिए उनकी कामुकता पर सवाल उठाता है।

 उपचार में सीबीटी में व्यक्ति की यौन आधारित आशंकाओं के साथ-साथ एक्सपोज़र थेरेपी शामिल है, साथ ही साथ उन व्यवहारों से अवगत कराया जाता है जो विषमलैंगिक संबंध दोषों की सामान्यता को प्रदर्शित करता है।
 स्व-घृणा HOCD:
 एचओसीडी के इस रूप को विकसित करने वाले व्यक्तियों में आमतौर पर थोड़ा आत्म-मूल्य होता है (जो पिछले अपमानजनक संबंधों, दर्दनाक अनुभवों या अतीत में गंभीर दुर्व्यवहार के परिणामस्वरूप हो सकता है), और आमतौर पर अवसाद के साथ सह-आग्रह करता है।  सेल्फ-हेटिंग होउड के साथ वे अपने कथित गलत व्यवहारों को उस अनुरूपता के अनुरूप बनाते हैं, जिसमें वे समलैंगिक होते हैं- जिसमें इस जुड़ाव को आत्म-अपमान के रूप में निर्देशित किया जाता है (न कि उनके विरोधी यौन अभिविन्यास बनने के वास्तविक डर के रूप में)।  इसलिए यह उनके विकृत विश्वास की पुष्टि करता है कि वे वास्तव में 'अप्राप्य' हैं और अपने वांछित अभिविन्यास के प्रति अनाकर्षक हैं।

 व्यक्ति के लक्षणों की गंभीरता के आधार पर, सेल्फ-हेटिंग HOCD के लिए, पहले किसी भी अंतर्निहित अवसाद को दूर करने के लिए उपचार के लिए यह अधिक प्रभावी हो सकता है।  इसके बाद, संज्ञानात्मक व्यवहार थेरेपी में संलग्न होने की सिफारिश की जाती है-व्यक्ति को अपनी पहचान के बारे में अपने नकारात्मक विचारों को पहचानने और चुनौती देने के लिए, और उन्हें उनकी कामुकता के लिए अप्रासंगिक के रूप में फिर से परिभाषित करने की दिशा में काम करना चाहिए।
 मस्क्युलिन / फेमिनिन HOCD
 HOCD का यह रूप आम तौर पर समाज में पुरुषत्व और स्त्रीत्व पर खड़ी रूढ़ियों की व्यक्तिगत धारणा से जुड़ा हुआ है।  आमतौर पर, व्यक्ति का मानना ​​है कि किसी भी असंगति (उनके विचारों या व्यवहारों के साथ) में उनकी अपेक्षित लिंग भूमिका, लिंग की कमजोरी का संकेत है और इसलिए उनके यौन अभिविन्यास का एक (अनुचित) संकेत है।  उदाहरण के लिए, एक पुरुष जो किसी अन्य पुरुष को आकर्षक पाता है, उसे यह डर हो सकता है कि ’असली पुरुष केवल महिलाओं को आकर्षक समझते हैं - इसलिए यह उनके विचार को आमंत्रित करता है: must मुझे समलैंगिक होना चाहिए’

 सीबीटी थेरेपी में वस्तुओं, लोगों, या गतिविधियों के क्रमिक जोखिम शामिल होते हैं जो वे अपने लिंग के आसपास विकृत धारणाओं के साथ जोड़ते हैं (जैसे: पहचान योग्य समलैंगिकों के साथ जुड़ी छवियों या फिल्म के संपर्क में, थिएटर या बैले में भाग लेने और महिलाओं के लिए मर्दाना माना जाने वाली गतिविधियों में संलग्न होना  या पुरुषों के लिए स्त्रीलिंग)


 Groinal प्रतिक्रिया HOCD
 HOCD का यह रूप तब होता है जब व्यक्ति यौन उत्तेजनाओं / किराने की प्रतिक्रियाओं का अनुभव करते हैं, ऐसी परिस्थितियों में जो उनके यौन वरीयता के अनुरूप उपयुक्त परिस्थितियों के अनुरूप नहीं होती हैं।  जैसे-जैसे ये व्यक्ति अपने किराने के क्षेत्रों पर अधिक जागरूकता रखना शुरू करते हैं यह केवल उनकी संवेदनशीलता को बढ़ाता है, वास्तव में इस क्षेत्र में बढ़ी हुई उत्तेजना को भड़काने का काम करता है।  कमर की प्रतिक्रिया के साथ व्यक्तियों HOCD का मानना ​​है कि किसी भी स्त्री प्रतिक्रिया या यौन उत्तेजना की भावना, परिस्थितियों में उनके अभिविन्यास के साथ संघर्ष, सबूत होना चाहिए कि वे समलैंगिक हैं - इस तथ्य की परवाह किए बिना कि वे एक ही लिंग के साथ सेक्स की कोई इच्छा नहीं रखते हैं।

 सीबीटी उपचार में व्यक्तियों को शिक्षित करना शामिल है, जो कि किराने की प्रतिक्रियाओं के आसपास की विकृत धारणाओं का पता लगाने और उन्हें चुनौती देने में सक्षम होते हैं, जिसमें क्रमिक जोखिम चिकित्सा शामिल होती है, जिससे वे डर जाते हैं।


 HOCD के लक्षण क्या हैं?
 उनके भयभीत यौन अभिविन्यास के सच होने से घृणा महसूस करना
 कामोत्तेजना की भावना न होना और उनके भयभीत यौन अभिविन्यास की इच्छा
 (झूठे) that सबूत ’के रूप में किसी भी सबूत की तलाश और तलाश करना कि उनके घुसपैठ के विचार। वास्तविक’ होने चाहिए
 उनके संदिग्ध विचारों और उनके यौन अभिविन्यास के बारे में भय पर प्रकाश डालना
 खुद को सीधे या समलैंगिक साबित करने के लिए विभिन्न जाँच व्यवहारों में संलग्न होना
 अपने यौन अभिविन्यास को परिभाषित करने के रूप में समलैंगिक (या सीधे) विचारों के गलत विचारों की कल्पना करना
 यह तर्क देना कि उनके अतीत के असफल या असंतोषजनक रोमांटिक संबंध ऐसे सबूत हैं जो उनके यौन उन्मुख होने के डर को सच साबित करते हैं
 सभी लोगों, वस्तुओं, या स्थानों से बचना, जो संबद्ध हो सकते हैं या उनके विकृत विचारों और बाद के बाध्यकारी व्यवहारों को भड़काने के लिए एक ट्रिगर के रूप में कार्य कर सकते हैं।
 क्या कारण हैं?
 हालांकि कोई निश्चित कारण नहीं है कि व्यक्ति एचओसीडी का विकास क्यों करते हैं, ऐसे कई कारक हैं जो इसमें योगदान देने के लिए खेल में आ सकते हैं, या जिन्हें इसमें योगदान करने के लिए सोचा गया है, व्यक्तियों में कुछ सामान्य विषयों में वे शामिल हैं:

 गरीब आत्म सम्मान
 पिछले रोमांटिक संबंधों को बनाए रखने में सक्षम नहीं है
 दर्दनाक टूटने से पीड़ित
 एक अपमानजनक संबंध का अनुभव किया
 अनुभवी कई असंतोषजनक तिथियाँ
 असंतुष्ट सेक्स
 तिथियां प्राप्त करने में असमर्थ
 कौमार्य को एक विशेष यौन अभिविन्यास के साथ जोड़ना

 उपचार में क्या शामिल है?
 HOCD के लिए उपचार में संज्ञानात्मक व्यवहार थेरेपी (CBT) शामिल है, जिसमें व्यक्ति के तर्कहीन समलैंगिक विचारों और आशंकाओं के लिए क्रमिक जोखिम चिकित्सा शामिल है।  यह स्वीकार करना महत्वपूर्ण है कि उपचार में शामिल एक्सपोजर घटक में व्यक्ति को समलैंगिक गतिविधियों में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित करना शामिल नहीं है, बल्कि इसके उदाहरणों में उनके जुनूनी विचारों और मजबूरियों का आह्वान किया गया है।



 


  सन्दर्भ - डॉ एमिली 

गुरुवार, 25 जून 2020

How did gay get rid of homosexuality ?

समलैंगिकता का ईलाज होता है ।
समलैंगिकता >>> किस प्रकार समलैंगिकता से समलैंगिक ने मुक्ति पाई ? 
 
1.  मैथुन अभिप्रेरणा ओर निष्पादन [ Sex Motivation and Performance ]

          शोधकर्ता  डाक्टर रघुनाथ सिंह राणावत

                        Dietitian & psychologist

          माता आयुर्वेदिक दवाखाना, सापोल, राजसमंद, राजस्थान ।

2. प्रयोज्य परिचय –

प्रयोज्य का नाम - 136 

यौन – पुरुष

आयु – 35 

शिक्षा - उच्च माध्यमिक  [ प्रयोज्य का नाम गोपनीय रखा गया है । ]


3. समस्या परिचय - 
प्रयोज्य 7 से 8 वर्ष का था तब पारिवारिक ताऊ का लड़का जिसकी आयु 13 से 14 वर्ष के बीच थी उसने बलात्कार कर दिया था । तब से गुदा मैथुन कराने की लत लग गई थी, उस समय अज्ञान से मौज मस्ती अच्छा लगने लगी, पहले भी अब भी अच्छा लगता हें । समलैंगिकता मे गुदा मैथुन और मुख मैथुन से रोमांचित होता था, मुखमैथुन व गुदा मैथुन से आनंद आता था। जब शादी की तो एक साल पत्नी से दूर रहा, फिर एक साल बाद एक लड़की पैदा हुई, फिर कुछ समय पत्नी से सहवास से दूर रहा, [ समय सीमा बताया नही ] फिर दो जुड़वा लड़के हुए । प्रयोज्य पत्नी से दूर रहा क्योकि व्यवसाय के कारण साथ नहीं थे, चार साल से पत्नी से मैथुन नही किया, गुदा मैथुन व मुख मैथुन की आज भी लत पड़ी हुई इससे छुटकारा चाहता था क्योकि दिन मे व्यवसाय के समय भी लोग आ जाते जिससे व्यवसाय मे बाधा आती लड़के बड़े हो चुके थे, अब शर्म भी आने लगी, सामाजिक सम्मेलन मे भाग लेने की इच्छा नही होना चाहता था, पर अब लड़को के रिश्ते चाह से समाज मे जाना चाहता था । स्त्री के प्रति लगाव हो और ये बुरी आदत छोडना चाहता हे, सन्मान पूर्वक जीना चाहता था । 

4 समस्या समाधान परिणाम 
व्यक्ति का लक्ष्य बहुत मजबूत था, अच्छा इरादा था। सामाजिक गतिशीलता को बनाए रखना चाहता था, समाज में मान सन्मान, हर्ष, कीर्ति चाहता था । जिस के कारण मेरे से ओनलाइन परामर्श से वो दिये गए दिशा निर्देशों का पालन करता था, बड़ी लगन, उमंग से बाते करता, अपनी दुकान मे समलैंगिकता का काम बंद कर दिया जिसके कारण, वापस खोया विश्वास आने लगा, आत्मबल भरने लगा । एक बार दिये गए दृश्य प्रायोगिक करते समय दिक्कत का सामना करना पड़ा था। अब सामाजिक आना-जाना अच्छा लगता हे और  व्यवसाय मे मन लगता और पत्नी से रोमांटिक बाते भी आसानी से करने लगा। जहा चाह वहा राह होती है। तुलसी दास जी राम चरित्र मानस मे लिखते है -  
सकल पदार्थ है जग माही, कर्म हिन नर पावत नाही । 
अब उसको एक महीने की ऑनलाइन परामर्श से समलैंगिता के कोई इच्छा नही होती, विषम लिंग मे अब रुचि होने लगी है । आत्म विश्वास बढ़ गया । अब व्यक्ति चालक चतुर भी बन गया । 

शनिवार, 20 जून 2020

समलैंगिकता का ईलाज होता है, देखिये एक शौध पत्र । निम्न तीन प्रकार की आधुनिक दवाईयां 1. Megiplex10 Mg tab, 2. Halotil 10mg tab, 3. flunil 20mg cap उपरोक्त दवाईया से छुटकारा मिल गया, ये आधुनिक औषधि लगभग डेढ़ वर्ष खाई थी ।




1.  मैथुन अभिप्रेरणा ओर निष्पादन [ Sex Motivation and Performance ]

          शोधकर्ता  डाक्टर रघुनाथ सिंह राणावत

                        Dietitian & psychologist

          माता आयुर्वेदिक दवाखाना, सापोल, राजसमंद, राजस्थान ।

2॰ समस्या समलैंगिकता

पुरुष समलैंगिकता से विषम लैंगिकता मे परिवर्तन करना था 

3॰ परिचय जन्म से मनुष्य एक सामुदायक व्यक्ति होता हैजिसमे एक घर परिवार मे पारिवारिक जीवन शैली से वंश वृदी होना एक प्राकृतिक सुख की अनुभूति है भारतीय संस्कृति मे वैवाहिक जीवन मे पति पत्नी दोनों के लिए संतान उत्तप्ति के लिय कुशल मैथुन प्रेरणा शिक्षण या निष्पादन का कारक या निर्धारक होता है । मिल्टन ने कहा था कि “प्रेरणा सीखने कि एक आवशयक शर्त है” जब की मेरा मानना है कि पीड़ित व्यक्ति कुशल विषमलिंगी मैथुन शिक्षण के लिय उत्प्रेरित हो ।

बाल्य जीवन से संज्ञानात्मक प्रेरणा और प्रोत्साहन का प्रभाव मैथुन शिक्षण और निष्पादन मे कई रूपो मे पड़ता है । मैथुन सफलता, असफलता, पुरुस्कार, परिणाम के ज्ञान आदि प्रोत्साहन के अनेक रूप है । सहयोग, स्पर्धा, प्रतियोगिता इत्यादि भी प्रोत्साहन के ही रूप है । इनका निश्चित प्रभाव व्यक्ति के मैथुन शिक्षा तथा निष्पादन पर पड़ता है ।

व्यक्तिव विकास के समय अज्ञान के कारण मौज मस्ती के परिणाम से अज्ञात होने के बाद जानकारी मिलना की उसका कार्य कितना अच्छा हुआ कितना बुरा हुआ, उसमे कितनी शुद्धि और कितना अशुद्धि हुई । भारतीय समाज मे प्रयोज्य को दोनों प्रकार का ज्ञान बताया जाता है की नकारात्मक से सकारात्मक तुलनात्मक किए गए कार्य या निष्पादन की शुद्धता और अशुद्धता की जानकारी दी जाती हें दोनो प्रकार की अवस्थाओ मे परिणाम के ज्ञान का अनुकूल प्रभाव निषपादन देखा जाता है । फिर भी प्रत्येक प्रयास के निष्पादन की जानकारी मिलते रहने से अधिक लाभ होता है । कारण प्रयोज्य निरंतर अपने कार्य सतर्क तथा उत्प्रेरित रहा करता है । आकर्षण परिणाम के ज्ञान का प्रभाव निष्पादन पर दो रूपो मे पड़ता है । एक तो पुरस्कार के रूप मे तथा दूसरा दंड के रूप मे होता है । जब ये बताया जाता है कि उसका कार्य अच्छा हो रहा है, तो वह पुरुस्कार के रूप मे पुरुस्कृत महसूस करने लगता है । अतः वह अपने कार्य के प्रति अधिक प्रेरित हो उठता है, फलत: उसका उसका कार्य या निष्पादन बेहतर बन जाता है । दूसरी तरफ प्रयोज्य को जब यह पता चलता है की उसका कार्य या निष्पादन घटिया हो रहा हो तो अशुद्धिया हो रही हो तो उसे दंड का अनुभव होता है । अतः वह अपने निष्पादन मे सुधार लाने का प्रयास के साथ सतर्क तथा प्रेरित हो उठता है । फलत: अगले प्रयास मे उसका निष्पादन अपेक्षाकृत बेहतर बन जाता है । स्पष्ट हुआ कि प्रयोज्य को अपने निष्पादन के संबद्ध मे चाहे शुद्धता का ज्ञान मिले या अशुद्धता का दोनों अवस्थाओं मे उसका निष्पादन बेहतर या उन्नत बन जाता है । निष्पादन की प्रगति पर शुद्धता के प्रभाव का प्रत्यक्ष रूप से तथा अशुद्धता से ज्ञान का प्रभाव अप्रत्यक्ष रूप से पड़ता है ।  

1 तत्परता से लाभ विषम लैंगिक होने के लिए परामर्श के समय जब सही तत्परता रही तब विषम लैंगिक निर्माण के विचार होता जाता था, तब प्रयोज्य सही प्रतिक्रिया विचार करने और समलैंगिक विचारो से अपने आप को बचाने लाभ करता था ।

2 तत्परता की हानि गलत तत्परता उत्पन्न विचार होने से प्रयोज्य गलत दिशा मे प्रयास के विचार आते थे, जिससे समस्या समाधान कठिन लगता था और समस्या के विचार बदल नही जाते तब तक तत्परता को छोडकर सही दिशा मे सक्रिय नही होता था

4॰ उद्देश्य

प्रस्तुत अनुसंधान का उद्देश्य शिक्षण के अभ्यास से प्रयोज्य के वैवाहिक दांपत्य जीवन मे महिला के प्रति आकर्षण निष्पादन पर परिणाम के ज्ञान [ अभिप्रेरणा ] के प्रभाव को सीखना है । उदेश्य व्यक्ति के ज्ञानात्मक सीखने मे धनात्मक स्थानातरण की घटनात्मक प्रदर्शन का अनुसंधान किया । ओनलाइन परामर्श मोखिक मे धनात्मक स्थानांतरण वास्तव मे उद्दीपक तथा प्रतिक्रिया की समानता पर आधारित हुआ ।

5॰ परिकल्पना  मेरे संगत अध्ययनो के आलोक मे परिकल्पना बनायी की परिणाम के ज्ञान [ अभिप्रेरणा ] के प्रभाव को दिखाना है । जो दो क्रिया के उद्दीपक एकांश भिन्न तथा प्रतिक्रिया एकांश अभिन्न होते है, तो उनके बीच धनात्मक स्थानांतरण होता है । [ समलैंगिकता व्यवहार तथा विचारो का प्रभाव वाला व्यक्तित्व आसानी से बदले जा सकते है । ]

6॰ प्रयोज्य परिचय –

प्रयोज्य का नाम - 127 

यौन – पुरुष

आयु – 22 

शिक्षा - उच्च माध्यमिक  [ प्रयोज्य का नाम गोपनीय रखा गया है । ]

7॰ सामग्री –

स्मार्ट फोन व वाट्स एप

[ ऑनलाइन काउन्सलिन्ग के लिए ] रजिस्टर लेखन के लिए

8॰ अनुसंधान की कार्य प्रणाली –

मौखिक अभ्यास के साथ अनुसन्धानात्मक अभिकल्प

योजना – प्रयोज्य के पास एक स्मार्ट फोन, बिना रुकावट बेजिझक स्थान का चयन कर के एक निश्चित समयावधि तय किया गया था । महीने मे 10 ऑनलाइन परामर्श नियंत्रित अवस्था मे प्रयोज्य समझा दिया गया था । फिर प्रयोज्य से अंतनिरीक्षण प्रतिवेदन  लिया गया तथा दोनों अवस्थाओ के परिणामो का तुलनात्मक अध्यन किया फिर देखा की धनात्मक स्थानांतरण धटित हुआ या नही । अग्रेजी आधुनिक दवाओ की लत से छुटकारा दिलाना था ।

1, Megiplex Tab व्यापारी नाम [ Propranolol (40mg) + Flunarizine (10mg) ]

2, Halotil 10 mg व्यापारी नाम [ Escitalopram Oxalate (10mg) ]

3, Flunil 20 mg  व्यापारी नाम [ Fluoxetine (20mg) 

9॰ परीक्षण सामग्री – मेरे दुवारा निर्मित शाब्दिक श्रवण प्रश्नोत्री आवश्यकता अनुसार स्पष्टीकरण पुछ लिया जाता था । प्रतिक्रियाओ को लिख दिया जाता था ।

1 व्यक्तित्व के लक्षण लज्जा, गंभीरता, संकोचशीलता, रूढ़िवाद, स्नायुविकृति - [ neuroticism ] स्नायु विकृति की पहचान अधिक देखी गई चिंता से ग्रस्त, संदेह की प्रवृति, संवेगात्मक नियंत्रण की कमी देखी, भ्रम के साथ विभ्रम भी पाया, स्थिरता की मध्यम चिंता, विचारो मे अस्थिरता एवं असंगति, संवेगात्मक अनियंत्रण, कल्पना की अधिकता, एकाग्रता की कमी, कमजोर याददास्त, और तनाव से पीड़ित पाया गया । बोलने की प्रवृति उपचार लेने के कारण सच धीरे धीरे झूठ से सच मे अग्रसर हुआ ।

 

10॰ अंतनिररिक्षण रिपोर्ट – परिणाम एवं व्याख्या

1 अधिगम स्थानातरण मौखिक सीखने मे धनात्मक स्थानांतरण की घटनाओ को श्रवण शक्ति से कौशल सहायता करता रहा ।

2 निर्देश निर्देशन की पालना के प्रयोज्य हमेशा तत्पर रहा था ।

शुरू में ये काम प्रयोज्य को कठिन लगा की ये काम मुझ से होगा की नही लेकिन कुछ समय बाद ये कठिनाई दूर हो गई । पहले कठिन सवाल समस्याओ के समाधान के बाद उसको वैवाहिक ज़िंदगी सुनहरी दिखने लगी ।

11॰ विवेचना एवं निष्कर्ष परिणाम पूछताछ से ज्ञात हुआ कि मेरी परिकल्पना सही प्रमाणित हुई कि परिणाम के ज्ञान [ अभिप्रेरणा ] के मिलने से निष्पादन बेहतर बन जाता है नियंत्रित अवस्था मे प्रयोज्य को उसके दुवारा किए गए निष्पादन के संबंधन मे जानकारी देता रहा था । इस प्रकार से परिणाम ज्ञान हो जाने से अशुद्धि बहुत घट गई और निष्पादन के गुण मे काफी प्रगति या उन्नति हो गई थी ।

प्रयोज्य ने नियंत्रित अवस्था कि अपेक्षा प्रयोगात्मक अवस्था मे बहुत कम त्रुटि की और उसका निष्पादन काफी उन्न्त बन गया । अनुसंधान से ज्ञात हुआ की शिक्षा के अंतनिरीक्षण प्रतिवेदन से भी निष्पादन पर परिणाम के ज्ञान [ अभिप्रेरणा ] का अनुकूल प्रभाव प्रमाणित होता है ।

निम्न तीन प्रकार की आधुनिक दवाईयां  

1. Megiplex10 Mg tab,  

2. Halotil 10mg tab, 

3. flunil 20mg cap 

उपरोक्त दवाईया से छुटकारा मिल गया, यो आधुनिक औषधि लगभग डेढ़ वर्ष खाई थी, द्वाईया छोडते वक्त थोड़ी कठिनाई आई पर पूरक पोषक तत्व देने से पूर्ण सफलता मिल गई । मानसिक तनाव चिंता से मुक्ति मिली वर्तमान वैवाहिक जीवन कुशलता पूर्वक हर्ष से बीते की योजना बना रहा हें । 

12॰ निष्कर्ष  प्रस्तुत अनुसंधान के आधार पर निष्कर्ष निकलता है कि परिणाम के ज्ञान [ अभिप्रेरणा ] के कारण निष्पादन उन्न्त बन जाता है । परिणाम के ज्ञान होते रहने पर व्यक्ति को अपनी त्रुटि सुधारने तथा अपने निष्पादन को और भी अच्छा करने का अवसर मिलता है ।

13॰ संदर्भ VMOUKOTA MAPSY 101, MAPSY 10

 

वाट्स एप 9829085951

 नोट ये लड़का अत्यधिक वाचाल, अत्यधिक अविश्वासी था, अपने आप पर भरोषा नही कर पाता जिसका एक मूल कारण था, उसने छ महीने बाद एक उसकी समलैंगिक मित्र के साथ की दोस्ती को छिपा दिया था । पर अब वर्तमान वो बिलकुल ठीक है। ।

अपडेट -- 25 / 05 / 2022 

इस लड़के की शादी 9 मई 2022 को हो गई, वैवाहिक जीवन से यह लड़का खुश है ।