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मंगलवार, 9 मई 2023

दो साल बड़ा लड़का समलैंगिक सम्बन्ध बनाया .

 मनोवैज्ञानिक परामर्श चिकित्सा 

07-22- 60

प्रयोज्य 19 / 04 / 2022 सम्पर्क किया . 

कार्यभार -BA पास 

आयु -36 वर्ष  -- 

भार - असरकारी अध्यापक 

शादी - 03 - 05 - 22 

समस्या - समलैंगिक 

पहलीबार बार गुदा मैथुन -14 वर्ष की आयु में, [ मुख मैथुन बलपूर्वक करवाया ]

प्रयोज्य की उस समय 14 वर्ष लगभग 

उसके दोस्त ने जिसकी आयु 16 वर्ष . 

हस्त मैथुन शुरू किया . 15 वर्ष की आयु में 

गुदा मैथुन करना और कराने की आदत - 

नोट बाईक चलाने में डर, बाजार में डर 

मंगलवार, 11 जनवरी 2022

कैसे समलैंगिक की आदत सुधरी ?

प्रयोज्य के परामर्श की दिनांक - 22 / 02 / 21 [ अपडेट 08 / 09 / 21------- अपडेट 11 / 01 / 22  ] 

प्रयोज्य का नाम - गोपनीय रखने के कारण 3803 

प्रयोज्य की आयु - 20 वर्ष 

प्रयोज्य की शिक्षा - 10 वी 

प्रयोज्य का व्यवसाय - निजी नौकरी 

प्रयोज्य की समस्या - समलैंगिक समस्या से छुटकारा पाना । 

निदान - प्रयोज्य निजी नौकरी करता उसको समलैंगिक आकर्षण की समस्या होती है, डर, चिंता होती और गुस्सा बहुत आता है । भीड़ भाड़ वाला स्थान अच्छा नहीं लगता, लगातार एक ही विचार आते है की लड़को से लिपटा रहु । समलैंगिक की प्रेरणा यूट्यूब से मिली लगातार यू ट्यूब देखता रहा । फिर एक जगह ईलाज कराया 5000 रुपया खर्च किया पर कोई लाभ नहीं मिला । कक्षा 8 मे पढ़ता था, उस समय 13 वर्ष की आयु थी उस समय हस्त मैथुन शुरू किया था । मन मे ये विचार आते की कई कोई कड़वी बात, बोल नही दे, जब बाहर निकलता तो ऐसा लगता की लोग मेरे बारे मे बाते करते होंगे । वीर्य की रक्षा करना, समय से पहले वीर्य खर्च नहीं करने का कोई ज्ञान नहीं था, हस्त मैथुन की आदत हो चुकी थी । प्रयोज्य जहा काम करता को एक निजी कालेज था उसमे पानी सप्लाई मोटर का संचालन करता था । आफिस मे 5 महिला कर्मी थी, उसमे से एक महिला अधिकारी के लिए घर से छाछ लाता था, बाकी महिला अधियाकरी से कभी बात नहीं होती ।  ( छोटी आयु मे इन्टरनेट से गलत संदेश, गलत शिक्षा भी मिलती है, इसके लिए नियंत्र भी आवशयक होना चाहिए । )

निष्कर्ष - प्रयोज्य मे ऑनलाईन परामर्श लेने से बहुत आराम मिला, परिवार मे बोलने का तरीका अच्छा सुधार हुआ, गुस्सा नियंत्रण मे आया, ऑनलाईन परामर्श के समय ही स्टाफ की चार महिलाए ने मुझे अपने आफिस मे बुलाया, फिर बैठा कर चाय पिलाई, पूछा तेरे मे एकदम बदलाव कैसे आया, क्योकि पहले उदास रहता और चिंता मे डूबा रहता था । एक दिन पुजा मेम [ पुजा नाम काल्पनिक है ] को मैने गिफ्ट दी तो पुजा मेम ने मुझे भी गिफ्ट दी, मेरे उनकी आंखे मे देखने पर पुजा मेम बोली मै तुझ से पटने वाली नहीं, मेरी शादी मेरे समाज मे ही होंगी, फिर मेरे दिशा निर्देश को उसको बता दिया था, तो पुजा मेम खुश हुई, पुजा मेम की शादी हो गई मै [ प्रयोज्य ] शादी मे भी गया । अब प्रयोज्य मुसकुराते अपनी निजी नौकरी करता है । मैने उसको बोला था की ओपन स्कूल से 12 कक्षा का प्रायवेट फार्म भरना और पढ़ाई करना, उस बात को मान कर अब 12 कक्षा मे पढ़ाई कर रहा है। 

प्रयोज्य अब एक दम ठीक है, अब महिलाओ मे आकर्षण होता है, उसका कहना है की "मै अब होश हवास से कह सकता हूँ, अब ठीक हूँ"। अब भीड़ से भय नहीं लगता, अच्छा लगता है, कोई तखलिफ और परेशानी नहीं, अब शादी करने का मन करता है । उसके अंतिम कथन "ठीक हो सकते है, ये आदत बन जाती है, आदत सुधारी जा सकती है"  अब ये आराम से मैदान मे खेल सकता है, पहले नहीं खेलता था । ( अपडेट - 08 / 09 / 21 बहुत अच्छा है, ऑनलाइन परामर्श का अहसान मानता है । [ अपडेट 11 / 01 /22 ]

सामाजिक संदेश - अपने बच्चो को बिना शिक्षा के अलावा स्मार्ट मोबाईल पर इन्टरनेट का उपयोग लेने नहीं देना चाहिए अन्यथा बच्चो के बिगड़ने के अवसर जायदा होता है । 

ऑनलाईन परामर्श दाता 

What's app 091 98290 85951 

रविवार, 26 दिसंबर 2021

समलैंगिकता का सफल उपचार कैसे हुआ ?

 

समलैंगिकता कैसे विकसित हुई ?  

परामर्श दिनांक 22 / 07 / 20 [ अपडेट 26 / 12 /21 फोन लगाकर पता किया ]

नाम गोपनीय रखने के कारण 22-175

प्रयोज्य की आयु 29 वर्ष

वैवाहिक स्थती – एकल

समस्या – समलैंगिक रुझान केवल हस्त मैथुन करना । विपरीत लिंग मे रुचि नहीं ।

आवश्यकता – विपरीत लिंग मे रुचि और आकर्षण बढ़ाना ।

नैदानिक – शादी करने की इच्छा नहीं होती, समलैंगिकता मे रुचि, मित्र दूर हो तो अच्छा नहीं लगता । समलैंगिक साथी को भूल नहीं पाते, तनाव रहता है, हमेशा तनाव और चिंता सताती है ।

15 वर्ष से समस्या है, लड़को के प्रति रुझान [ आकर्षण ] रहता है । लड़की को देख कर कोई आकर्षण नहीं होता ।

समस्या कैसे विकसित हुईलगभग 14 वर्ष की आयु मे साथी समकक्ष के मिल कर एक दूसरे के लिंग पकड़ते थे फिर धीरे धीरे हस्त मैथुन करना सीख लिया । पेट के बल सोने मे दिक्कत होती थी एक बार गुदा मैथुन किया और एक बार गुदा मैथुन करवाया भी, फिर ज़्यादातर गुदा मैथुन की ईच्छा होती थी । वर्ष 2008-2012 तक बहुत बार हस्त मैथुन किया था ? आपस मे दोनों साथी समलैंगिक साथ होने मे रुचि रहती थी । दो तीन साथी भी थे सभी का एक ही समान रुचि थी, सभी का एक ही काम था । सभी आपस मे हस्त मैथुन करना होता था । वर्ष 2016 के बाद किसी से संपर्क मे नहीं आए । चिंता तनाव के साथ थकान होती थी, पेट के बल लिंग को रगड़ने से शीघ्रपतन होता था ।

ऑनलाइन परामर्श परिणाम अच्छा रहा, गलत सीखा मे सुधार हुआ, समलैंगिकता की आदत छुट गई  अभी सरकारी नौकरी की प्रतियोगिता परीक्षा दे रहा है

निष्कर्ष – सामाजिक परिवेश मे आदर्श नियम की पालना और अभिभावक का अपने औलाद के पालनपोषण मे सतर्कता नहीं होने की वजह से किशोर गलत प्रेरणा से नकारात्मक समलैंगिकता का गलत शिक्षण ले कर गलत मैथुन करना सीख लेते । फि ये एक नशे की तरह आदत पड़ जाती है।   

अभिभावकों को सुझाव किशोर बालको को बाल यौन शौषण होने से पहले ब्रहचर्य की शिक्षा अवश्य देनी चाहिए, अन्यथा वैवाहिक जीवन मे शीघ्रपतन से अशांति, कलह पैदा होते है ।

 

शुक्रवार, 5 नवंबर 2021

समलैंगिक से विषमलैंगिक आसानी से हो सकते है ।

बचपन में बाल यौन शौषण के कारण लड़के गुदा मैथुन के आदि हो जाते है, उन पीड़ित लडको को गुदा मैथुन कराने की आदत लग जाती है । ये आदत आसानी से छुड़ाई जा सकती है ।

 

गुरुवार, 25 जून 2020

How did gay get rid of homosexuality ?

समलैंगिकता का ईलाज होता है ।
समलैंगिकता >>> किस प्रकार समलैंगिकता से समलैंगिक ने मुक्ति पाई ? 
 
1.  मैथुन अभिप्रेरणा ओर निष्पादन [ Sex Motivation and Performance ]

          शोधकर्ता  डाक्टर रघुनाथ सिंह राणावत

                        Dietitian & psychologist

          माता आयुर्वेदिक दवाखाना, सापोल, राजसमंद, राजस्थान ।

2. प्रयोज्य परिचय –

प्रयोज्य का नाम - 136 

यौन – पुरुष

आयु – 35 

शिक्षा - उच्च माध्यमिक  [ प्रयोज्य का नाम गोपनीय रखा गया है । ]


3. समस्या परिचय - 
प्रयोज्य 7 से 8 वर्ष का था तब पारिवारिक ताऊ का लड़का जिसकी आयु 13 से 14 वर्ष के बीच थी उसने बलात्कार कर दिया था । तब से गुदा मैथुन कराने की लत लग गई थी, उस समय अज्ञान से मौज मस्ती अच्छा लगने लगी, पहले भी अब भी अच्छा लगता हें । समलैंगिकता मे गुदा मैथुन और मुख मैथुन से रोमांचित होता था, मुखमैथुन व गुदा मैथुन से आनंद आता था। जब शादी की तो एक साल पत्नी से दूर रहा, फिर एक साल बाद एक लड़की पैदा हुई, फिर कुछ समय पत्नी से सहवास से दूर रहा, [ समय सीमा बताया नही ] फिर दो जुड़वा लड़के हुए । प्रयोज्य पत्नी से दूर रहा क्योकि व्यवसाय के कारण साथ नहीं थे, चार साल से पत्नी से मैथुन नही किया, गुदा मैथुन व मुख मैथुन की आज भी लत पड़ी हुई इससे छुटकारा चाहता था क्योकि दिन मे व्यवसाय के समय भी लोग आ जाते जिससे व्यवसाय मे बाधा आती लड़के बड़े हो चुके थे, अब शर्म भी आने लगी, सामाजिक सम्मेलन मे भाग लेने की इच्छा नही होना चाहता था, पर अब लड़को के रिश्ते चाह से समाज मे जाना चाहता था । स्त्री के प्रति लगाव हो और ये बुरी आदत छोडना चाहता हे, सन्मान पूर्वक जीना चाहता था । 

4 समस्या समाधान परिणाम 
व्यक्ति का लक्ष्य बहुत मजबूत था, अच्छा इरादा था। सामाजिक गतिशीलता को बनाए रखना चाहता था, समाज में मान सन्मान, हर्ष, कीर्ति चाहता था । जिस के कारण मेरे से ओनलाइन परामर्श से वो दिये गए दिशा निर्देशों का पालन करता था, बड़ी लगन, उमंग से बाते करता, अपनी दुकान मे समलैंगिकता का काम बंद कर दिया जिसके कारण, वापस खोया विश्वास आने लगा, आत्मबल भरने लगा । एक बार दिये गए दृश्य प्रायोगिक करते समय दिक्कत का सामना करना पड़ा था। अब सामाजिक आना-जाना अच्छा लगता हे और  व्यवसाय मे मन लगता और पत्नी से रोमांटिक बाते भी आसानी से करने लगा। जहा चाह वहा राह होती है। तुलसी दास जी राम चरित्र मानस मे लिखते है -  
सकल पदार्थ है जग माही, कर्म हिन नर पावत नाही । 
अब उसको एक महीने की ऑनलाइन परामर्श से समलैंगिता के कोई इच्छा नही होती, विषम लिंग मे अब रुचि होने लगी है । आत्म विश्वास बढ़ गया । अब व्यक्ति चालक चतुर भी बन गया । 

गुरुवार, 11 जून 2020

समलैंगिकता से छुटकारा

समलैंगिकता से छुटकारा कैसे मिले एक 28 वर्ष के लड़के की समस्या का सवाल था, व्यवसाय -  केंद्रीय कर्मचारी,  लड़के की आयु 28 वर्ष का उसने बताया की वो एक समलैंगिक है और इस समस्या से छुटकारा पाना चाहता है । 
समस्या समाधान 
ऑनलाइन सभी समस्या को धीरज से सुना गया, लड़के को डर भय से मुक्त किया, आत्मविश्वास दिलाया गया । जिससे लड़के मे हिम्मत आई और धैर्य बढ़ा, संतुलित आहार का दिशा निर्देशन का चार्ट दिया गया था जिससे निरंतर खोया विश्वास वापस आने लगा और वो लड़का वापस अपने आप को सकारात्मक विचारो से स्वस्थ महसूस करने लगा और अब वह लड़का ठीक हो चुका है । 

नाम 92 B 1 
आयु 28 वर्ष 
निवास भारत 
 गोपनियता की नीति की वजह से पीड़ित व्यक्ति का गोपनीय रखा गया है । 

गुरुवार, 7 मई 2020

समलैंगिकता का ईलाज होता है ।

समलैंगिकता एक लत होती है जो भ्रम या दुर्घटनाओं के घटने के कारण ये व्यक्ति शिकार हो जाते है । जिसका मूल कारण अनुसंधान से ज्ञात हुआ है कि बचपन में किसी रिश्तेदार, नौकर, पड़ोसियों, अध्यापक, या किसी साथियों दुवारा गुदा मैथुन के कारण से एक प्रकार की गुदा मैथुन कराने की लत पड़ चुकी होती है । ये लत गुप्त होती है, फिर व्यक्ति एक समलैंगिक संबंध बनाने में आतुर रहता है । फिर व्यक्ति अपने मर्द वाली पहचान खो देता हैं, और एक दूसरी समलैंगिक पहचान में विस्थापित हो जाता है । फिर उसके गुदा मैथुन में आनन्द आने की वजह से वो ये भूल जाता है कि वो एक मर्द है और उसको विवाह करना है और वैवाहिक जीवन से पारिवारिक जीवन बढ़ते क्रम को आगे बढ़ाना है, इस विकृत गुदा मैथुन की लत से उसके साथियों की तलाश में एक प्रकार से अफीम, चरस जैसे नशे की लत में पागलपन हो जाता है, परिवार वाले अगर शादी की बात करते तो वो इनकार करता है ।उसके बाद, चिंता भय, डर, तनावग्रस्त होकर आत्म हत्या जैसे विचारों में उलझ जाता है। समलैंगिक व्यक्ति अपनी आप बीती की कहानी किसी को बता नहीं सकता है । इन लोंगो ले लिए कोई मार्गदर्शन नहीं होता है, जो भी इंटरनेट पर ढूंढता उसमे ये समलैंगिकता को प्राकृतिक रूप ही बताते है फिर निराधार निराशा के बादल मंडराने लगते है। अब आप बीती लड़का बता नहीं सकने के कारण वो विमार्ग पर जा चुका होता है, कुछ समझदार होते है निदान ढूंढते है पर रास्ता नहीं मिलता, इंटरनेट पर उपलब्ध सामग्री सभी समलैंगिक प्राकृतिक व सामान्य बताया जाता है । पर मेरा मानना है ये सब गलत व भ्रामक बताया गया है, ये पीड़ित व्यक्ति ठीक होते है, मैं ठीक किये है । इसमें समय लगता है धैर्य व विश्वास रखना पड़ता है, मेरे यूट्यूब वीडियो पर मैंने बोला है कि पीड़ित व्यक्ति अपने माता पिता को अपने साथ हुई दुर्घटनाओं को बताओ । जो लड़के कमाते नहीं, जिनके पास कोई आय नहीं वो, सर्वप्रथम माता अपने पुत्र के खोए विश्वास में आगे आती है, उसने जन्म दिया वो उपचार भी करवाती है । जो अपनी कमाई पर है वो आसानी से अपना इलाज करा सकते है और वैवाहिक जीवन सुख से जी सकते है ।
समलैंगिकता का इलाज होता है ।

बुधवार, 6 मई 2020

आखिरी समलैंगिकता होता क्या है ?

आखिरी समलैंगिकता होता क्या है ?  काफी लोगो के दिमाग मे ये सवाल होता है
एक स्त्री दूसरी स्त्री से कामुक  आकर्षण
एक पुरुष दूसरे पुरुष से कामुक आकृषण
आज कल समलैंगिकता के बारे मे काफी सुनने मे आता है, जो पीड़ित है उनके बारे मे उनके प्रति कोई भी पीड़ित व्यक्ति की दबी भावनाओ को समझने वाला भी नही होता हें, भारत मे काफी लड़को के साथ बलात्कार हुआ होता है जिसके कारण उन लड़को मे एक प्रकार से गुदा मैथुन करवाने की लत / आदत पड़ चुकी होती है । इस आदत मे मानसिकता एक स्थायी घर कर जाता है की वो अपनी विकृत पहचान बना चुका होता है जिसके कारण विपरीत लिंग मे आकृषण खो चुका होता है, व्यक्ति अपनी खोई हुई पहचान वापस प्राप्त कर सकता।