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गुरुवार, 27 जनवरी 2022

कैसे 8-10 वर्ष की आयु मे समान आयु वाले से समलैंगिक संबंध बने ?

 प्रयोज्य के परामर्श लेने की दिनांक - 13 / 12 / 21 

प्रयोज्य का नाम - गोपनीय रखने के कारण - 521821

प्रयोज्य की आयु -  25 वर्ष 

प्रयोज्य कार्यभार - किराना का व्यापारी 

प्रयोज्य की समस्या - समलैंगिकता की आदत से छुटकारा पाना 

निदान - प्रयोज्य समलैंगिकता की आदत से परेशान था । शादी करने का मन करता परंतु लड़की मे कोई आकर्षण नहीं होता । प्रयोज्य3-4 कक्षा मे पढ़ता था उस समय 8-10 वर्ष की आयु मे अपने काका के लड़के के साथ आपस मे दोनों ने एक दूसरे के साथ समलैंगिक संबंध बनाए थे । नकारात्मक विचार आते थे । डर, चिंता, तनाव हमेशा सताते थे । बाहर भीड़ वाले स्थान जाने मे डर लगता था । एकांत अच्छा लगता है, लगातार विचार आते की मै किसी काम का नहीं हूँ, घर से निकल जाना चाहिए । समलैंगिक संबंध दो तीन बार ही बनाए थे । लड़की जैसे सोचता था, लड़कियो जैसे जीवन शैली खेले थे । 14-15 साल की आयु मे हस्त मैथुन करना सीखा था । मन मे विचार आता कई कोई पूछ तो नहीं लेगा । एक स्वयं होम्योपैथी दवाई ली pulsatilla आराम नहीं मिला । दो साल पहले चिकित्सक  केलकर से तीन महिना का इलाज लिया, Qutam 25 mg, Estomin  sf tab । दवाई से अच्छा लगता था, परंतु डरता था । प्रयोज्य के एक बड़ा भाई था, दो बड़ी बहिने थी । 

इलाज पहले लेना चाहता था परंतु चिकित्सक कहा, ईलाज कहा होता मुझे मालूम नहीं था । 

निष्कर्ष - प्रयोज्य ऑनलाइन परामर्श लेने के बाद उसकी तबीयत ठीक है । अब लड़की और औरत अच्छी लगती है। अब समलैंगिक बुरे लगते है । अब आत्म विश्वास अच्छा, बहुत अच्छा हो गया है । अब कोई चिंता, डर, तनाव नहीं रहता । अगर कोई भी व्यक्ति संज्ञानात्मक गलत सीख लिया गया हो तो, वह एक आदत बन जाती और आदत को दवाई खाने से नहीं सुधारा जा सकता है । इसके लिए नए तरीके से वापस सीखना पड़ता है ।   

सामाजिक संदेश - अपने परिवार के बच्चो को समाज मे आना जाना रखना चाहिए, जिससे सामाजिक रीतिरिवाजों संस्कारो का ज्ञान हो सके । बच्चो को बाल यौन शोषण से पीड़ित लड़को को ये जो दिक्कते सामने आ रही है, इस अनुसंधान से ज्ञात ये ही होता की छोटे लड़को को अपने निजी अंगो को कोई दूसरा आदमी इसको नहीं छूए जैसे लिंग, यौनि, गुदा और होठ । जब कोई शरीर पर निजी अंगो को हाथ छूने की कोशिश इस प्रकार की चेष्टा करे तो उसका विरोध करना चाहिए और अपने माता पिता और अभिभावक को बताना चाहिए । 

ऑनलाईन परामर्श दाता 

वाट्स एप 091 98290 85951 

बुधवार, 26 जनवरी 2022

कैसे बचपन मे समलैंगिक की आदत लग गई ?

 प्रयोज्य के परामर्श लेने की दिनांक - 03 / 12 / 21 

प्रयोज्य का नाम - गोपनीय रखने के कारण - 5217 

प्रयोज्य की आयु -  23 वर्ष 

प्रयोज्य कार्यभार - बेरोजगार 

प्रयोज्य की समस्या - समलैंगिकता की आदत से छुटकारा पाना 

निदान - डर, तनाव और चिंता से मन नहीं लगता । समलैंगिकता की आदत लग गई, कक्षा सात वी मे पढ़ता था, तब साथी सहपाठी मे गुदा मैथुन किया था। घर की छत पर दो दोस्त आपस मे सो रहे थे तो आपस मे समलैंगिकता के विचार आए और दोनों आपस मे गुदा मैथुन किया था । समझ नहीं थी की इस काम के आगे क्या परिणाम होंगे । भीड़ मे जाने का मन नहीं करता, तनाव ज्यादा होता है, दोस्तो के साथ अच्छा लगता है । मन मे विचार आता की मै ऐसा क्यो, ऐसा क्यो होता है, सब लड़को जैसा मै क्यो नही हूँ । अब तब दो लड़को के संपर्क मे आया । कक्षा 8 मे पढ़ता था तब से हस्त मैथुन करना सीख लिया था, कुछ लोगो को देख कर सीख लिया था, रात मे दो बार हस्त मैथुन करता हूँ। लोगो को देख घबरा जाता हूँ की कई कोई बोल नहीं दे, लोग मेरे बारे मे बात करते होंगे । आत्म हत्या के विचार आते है आगे कुछ दिखता नहीं ।  [ एक बार आत्म हत्या की कोशिश भी की ] ।  [ आत्म हत्या की कोशिश की बात अंतिम परामर्श के बाद बताई थी ]

निष्कर्ष - अब परामर्श लेने के बाद तबीयत ठीक है, अब लडकी और महिला अच्छी लगती है। अब शादी करने का मन करता है । समलैंगिक को नजर अंदाज कर लेता हु, अब समाज मे जाना और भीड़ मे जाना अच्छा लगता आहे । पहले घर मे झगड़ा होता था, अब घर मे झगड़ा नहीं होता, पहले गुस्सा आता था, अब गुस्सा नहीं आता । भाई और माता ने बोला अब तेरे मे परिवर्तन बहुत आया है । पहले तनाव मे रहता था, अब तनाव मुक्त हूँ । 

सामाजिक संदेश - अपने परिवार के बच्चो को समाज मे आना जाना रखना चाहिए, जिससे सामाजिक रीतिरिवाजों संस्कारो का ज्ञान हो सके । बच्चो को बाल यौन शोषण से पीड़ित लड़को को ये जो दिक्कते सामने आ रही है, इस अनुसंधान से ज्ञात ये ही होता की छोटे लड़को को अपने निजी अंगो को कोई दूसरा आदमी इसको नहीं छूए जैसे लिंग, यौनि, गुदा और होठ । जब कोई शरीर पर निजी अंगो को हाथ छूने की कोशिश इस प्रकार की चेष्टा करे तो उसका विरोध करना चाहिए और अपने माता पिता और अभिभावक को बताना चाहिए । 

ऑनलाईन परामर्श दाता 

वाट्स एप 091 98290 85951 

सोमवार, 24 जनवरी 2022

कैसे 12 साल की आयु मे हास्टल मे समलैंगिक बना ?

प्रयोज्य के परामर्श की दिनांक - 14 / 10 / 21 

प्रयोज्य का नाम - गोपनियता के कारण 5015 

प्रयोज्य की आयु - 18 वर्ष 

प्रयोज्य की पढ़ाई - BA प्रथम वर्ष 

निदान - प्रयोज्य को समलैंगिकता के कारण लड़किया अच्छी नहीं लगती थी । शादी करने का मन नहीं करता, डर, घबराहट, और चिंता हमेशा रहती थी । परिवार मे माता अध्यापक थी, पिता खेती करते थे । एक बड़ी बहिन शादी शुदा थी, एक छोटा भाई भी है। 

हॉस्टल मे पढ़ता था, उस समय 12 वर्ष की आयु थी, समान आयु के लड़को ने प्रयोज्य के साथ बहला फुसलाकर गुदा मैथुन कर लिया, उसके बाद समलैंगिक पसंद आते थे । 2 लड़को के संपर्क मे आने के कारण एक और गंदी आदत लग गई हस्त मैथुन करना । बचपने मे लड्की वाले कपड़े पहनता था । [ घर मे बड़ी बहिन हो तो उसका कपड़ा पहनना या पहनाना सामान्य बात होती पर से संज्ञान गलत मानसिकता पैदा करता है ]  इंटरनेट से समलैंगिकता का ज्ञान मिला था । हमेशा ये विचार आते की लोग मेरे बारे मे बाते करते होंगे, कोई कही बोल तो नहीं देंगे, मेरे बाल यौन शोषण  समलैंगिकता के बारे मे अपने परिवार वालो को पता नही था । 

निष्कर्ष - प्रयोज्य सीधा और भोला लड़का था, चतुर चालाक साथी ने बहला फुसलाकर गुदा मैथुन कर दिया, ना समझ मे विरोध नहीं कर सका । फिर गुदा मैथुन करने की एक आदत हो गई, सामाजिक प्रथिष्टा के कारण इस समलैंगिकता की आदत से छुटकारा पाना चाहा । प्रयोज्य मे एक महीन की ऑनलाइन परामर्श लिया अब उसकी तबीयत ठीक है । अब लडकी, महिला अच्छी लगती है । अब पहले से अच्छा आत्म विश्वास है । अब समलैंगिक संबंध बनाने की इच्छा नहीं होती । प्रयोज्य से पूछा की सामाजिक संदेश क्या देना चाहेंगे तो बताया की "बाल यौन शोषण के कारण समलैंगिकता की आदत होती है, इस आदत को मनोवैज्ञानिक परामर्श से आसानी से छोड़ा जा सकता है । 

सामाजिक संदेश - जो भी अभिभावक अपने बच्चो को बाहर हॉस्टल मे पढ़ने भेजते तो अपने बच्चो के संपर्क मे लगातार रहना चाहिए । उनके चेहरे के हावभाव को अवश्य देखना चाहिए और बच्चो को बाल यौन शोषण से पीड़ित लड़को को ये जो दिक्कते सामने आ रही है, इस अनुसंधान से ज्ञात ये ही होता की छोटे लड़को को अपने निजी अंगो को कोई दूसरा आदमी इसको नहीं छूए जैसे लिंग, यौनि, गुदा और होठ । जब कोई शरीर पर निजी अंगो को हाथ छूने की कोशिश इस प्रकार की चेष्टा करे तो उसका विरोध करना चाहिए और अपने माता पिता और अभिभावक को बताना चाहिए । 

ऑनलाइन परामर्श दाता 

वाट्स एप 091 98290 85951 

रविवार, 23 जनवरी 2022

कैसे साथी लड़के चुंबन देते थे ।

प्रयोज्य को ऑनलाइन परामर्श देने की दिनांक - 09/ 09/ 21 

प्रयोज्य का नाम - गोपनीय रखने के कारण 4914 

प्रयोज्य की आयु - 20 

प्रयोज्य की शिक्षा - 12 पास आगे पढ़ाई जारी 

निदान - प्रयोज्य कक्षा 7 मे पढ़ता उस समय साथी लड़के चुंबन दिया करते थे । फिर लगता की ये साथी किस दिया करे, यही दिमाग मे रहता था । तब से समलैंगिक मे आकर्षण होता है। परिवार मे चार भाई से छोटा था, तीन भाई प्रयोज्य से बड़े थे, परिवार मे माता को सभी कहते इस बार बेटी होगी, तो घर मे खुशी होती थी । जब प्रयोज्य पैदा हुआ तो घरवालो के लड़की नही होने पर उसको लड़की के कपड़े पहनाते थे । लड़कियो वाले काम कराते थे । अड़ोसी पड़ोसी कहते तुझे तो लड़की होना चाहिए था, स्कूल के साथ भी बोलते तुझे लड्की होना चाहिए था । टीवी पर क्राईम पेट्रोल देख कर, ईंटरनेट से समलैंगिक सेक्स सर्च करता था । शर्म बहुत आती थी, गंदे विचार आते थे, किस्से मैथुन कराऊ, चुंबन दु । लड़कियो मे आकर्षण नहीं होता था । घर से बाहर निकलने का मन नहीं करता । भाई, भूवा [ पिता की बहिन ] बताते की तुझे बचपन मे लड़कियो के पकड़े पहनाते थे । एक सप्ताह पहले दवाई खाई उससे कोई आराम नहीं मिला, फिर भी गंदे विचार आते थे । स्कूल मे सभी चिड़ाते इसलिए खेल भी नहीं खेलता । 15 वर्ष की आयु मे हस्त मैथुन करना सीखा था, जब हस्त मैथुन करता लड़को को याद करते करता था, एक दो बार बिस्तर पर रगड़ कर करता था । स्वपन्नदोष भी लड़के स्मरण वाले होते थे । लगातार विचार आते लोग मेरी ही बाते करते होंगे, मेरे बारे मे सोचते होंगे । ऑनलाईन परामर्श की फीस बड़े भाई ने ही दी थी । 

निष्कर्ष - प्रयोज्य के परिवार मे तीन पुत्रो के बाद लड़की की आशा थी, परंतु चौथा लड़का होने पर माता की संतुष्टि के करा बाल आयु मे लड़की के कपड़े पहनाना प्रयोज्य के लिए एक मानसिकता लड़की जैसी हो गई, क्योकी घरेलू लड़कियो वाले काम करना भी एक सामाजिक संदेश भी मानसिक हो गया, स्कूल मे भी ये किसी का विरोध नहीं कर सकता क्योकि प्रयोज्य सीधा सरल व्यक्तित्व का लड़का होना का गलत संज्ञा दिमाग मे सीख गया, परिवार मे आपस मे सुबह का अभिवादन ही नहीं सीखा था, उसको सिखाया की परिवार मे अभिवादन करना तो मासी [ माता की बहिन ] हंसने लगे तो निराशा होना पाया गया। 

ऑनलाइन परामर्श लेने से अब तबीयत ठीक है । अब लडकी अच्छी लगती है, अब शादी करने का मन करता है । अब समलैंगिक अच्छे नहीं लगते । अब अच्छा लगता है, पहले डर लगता था, अब डर नहीं लगता । सामाजिक संदेश मे प्रयोज्य का कहना की मनोवैज्ञानीक परामर्श लेने से सब ठीक हो सकते है । पहले उदास रहता था, अब अच्छा लगता है । फोन से  22 / 01 / 22 को बताया अब ठीक है, पढ़ाई कर रहा हूँ । 

सामाजिक संदेश - लड़को को लड़कियो के परिधान बचपन मे नहीं पहनाना चाहिए, गलत मानसिकता हो जाती है । भारतीय जो अपने समाज मे शरीर जीते और विदेशी मानसिकता रखते तो दो राहे का मार्ग हो जाता क्योकि शरीर भारत मे दिमाग लंदन, अमेरिका मे तो द्विध्रुवी ज़िंदगी की समस्या [ bipolar ] की दिक्कत होती है । लकड़ों को साहस और शौर्य की बात सिखनी चाहिए । ब्रहमचार्य की शिक्षा अवश्य देनी चाहिए । 

ऑनलाईन परामर्श दाता 

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शनिवार, 22 जनवरी 2022

कैसे 8 साल की आयु मे बाल यौन शोषण का शिकार हुआ ?

प्रयोज्य के परामर्श लेने की दिनांक - 14 / 08 / 21 

प्रयोज्य का नाम - गोपनीयता के कारण 2813 

प्रयोज्य की आयु - 19 वर्ष 

प्रयोज्य पढ़ाई - 7 वी पास 

प्रयोज्य का व्यवसाय - सिलाई 

निदान - समलैंगिक से छुटकारा पाना चाहता था, क्योकि विषम लिंग मे आकर्षण नहीं होता था । शादी करने का मन करता था । जब प्रयोज्य की आयु 8 वर्ष थी तब एक पड़ोसी 27 वर्ष का लड़का ने बहला फुसलाकर बाल यौन शोषण [ गुदा मैथुन ] किया था । वह पड़ोसी अब मर चुका है । अब चिंता होती थी की आगे क्या होगा, कैसे होगा । gay कैसे बनते, वजह क्या होती है । आने जाने मे अच्छा नहीं लगता । एकांत अच्छा लगता है, अपने परिवार के साथ अच्छा लगता है । लगातार ये विचार आते है, समलैंगिक प्रेम अच्छा लगता है । तीन समान आयु के लड़को से समलैंगिक संबंध बने थे । 12 बार समान जाति के दो लड़को के साथ, दो बार गैर समाज के लड़के के साथ । 14 वर्ष की आयु मे हस्त मैथुन करना सीखा था, एक दिन छोड़ कर हस्त मैथुन करता था। गुदा मैथुन होने के बाद महिलाओ के कपड़े पहनता था । अंतिम गुदा मैथुन दो वर्ष पूर्व किया था । काम करने का मन नहीं करता, बिस्तर पर पड़े रहना अच्छा लगता है । लोग मेरे बारे मे क्या सोचते, मेरे बारे मे क्या सोचते होंगे । 

निष्कर्ष - प्रयोज्य गरीब परिवार से था, अपने भूवा [ पिता की बहिन ] के पास सिलाई का काम सीखने आया था, प्रयोज्य ऑनलाइन परामर्श लेने के बाद अब तबीयत ठीक है । परामर्श के एक माह तक दोनों लिंग मे आकर्षण था, लड़कियो, औरतों का चेहरा अच्छा लगता है । समलैंगिक अब गंदे लगते है । उसका कहना था समलैंगिक प्राकृतिक नहीं होते है । अब मन काबू करना आया है, सब एक दम तबीयत ठीक है । 21 / 01 /22 को फोन पर बताया अब पूर्ण रूप से ठीक है । समलैंगिक बाल यौन शोषण के कारण होते है, ये आदत हो जाती, इस आदत को आसानी से छुड़ाया जा सकता है । 

सामाजिक संदेश - अपने परिवार के बच्चो को समाज मे आना जाना रखना चाहिए, जिससे सामाजिक रीतिरिवाजों संस्कारो का ज्ञान हो सके । बच्चो को बाल यौन शोषण से पीड़ित लड़को को ये जो दिक्कते सामने आ रही है, इस अनुसंधान से ज्ञात ये ही होता की छोटे लड़को को अपने निजी अंगो को कोई दूसरा आदमी इसको नहीं छूए जैसे लिंग, यौनि, गुदा और होठ । जब कोई शरीर पर निजी अंगो को हाथ छूने की कोशिश इस प्रकार की चेष्टा करे तो उसका विरोध करना चाहिए और अपने माता पिता और अभिभावक को बताना चाहिए । 


ऑनलाईन परामर्श दाता 

वाट्स एप 091 98290 85951 

शुक्रवार, 21 जनवरी 2022

कैसे 14 -15 वर्ष की आयु मे उभयलिंगी बना ?

प्रयोज्य को परामर्श की दिनांक - 09 / 08 / 2021 

प्रयोज्य का नाम - गोपनियता के कारण 471221 

प्रयोज्य की आयु - 29 वर्ष 

प्रयोज्य का व्यवसाय  - निजी स्कूल मे अध्यापक 

प्रयोज्य की वैवाहिक स्थिति - शादी शुदा 

प्रयोज्य की समस्या - समलैंगिक आकर्षण 

निदान - प्रयोज्य ने शादी जनवरी 2021 मे कर ली थी, प्रयोज्य अपनी पत्नी की बजाय समलैंगिक के गुदा मैथुन करने की इच्छा रहती थी । शादी के पाँच दिन बाद पत्नी ने अपने परिवार से अलग रहने को बाध्य किया था, पर प्रयोज्य भाई के परिवार के साथ ही रहना चाहता था । प्रयोज्य ने 14-15 साल की आयु मे पहली बार गुदा मैथुन किया फिर लगातार 15 लड़को के गुदा मैथुन किया ये एक आदत हो चुकी थी, पर कभी गुदा मैथुन करवाया नहीं । जवान लड़को को देख कर आकर्षण आता है। इसलिए चिंता, डर और भय हमेशा रहता है । एक महिला मित्र के अलावा दूसरी लड़कियो के साथ संभोग किया था, परंतु पत्नी के साथ संभोग तो होता पर मन नहीं करता, क्योकि संतोष और खुशी नहीं मिलती । विग्रा टेबलेट खाई पर कोई लाभ नहीं मिला, दवा दो महिना मे कभी कभी खाया, सुबह सिर दर्द होता था । अश्लील फिल्म देखें से लिंग मे उत्तेजना आती है । 14 वर्ष की आयु मे दोस्त की अश्लील पुस्तक देख कर हस्त मैथुन करना सीखा । समाज मे आना जाना नहीं होता, शर्म आती है । मन मे लगातार ये विचार आते की की कई कोई मेरे बारे मे बोल तो नही दे, लोग मेरे बारे मे ही विचार करते होंगे । 24 / 08 / 21 को पत्नी के पिता का परिवार [ पीहर ] से सूचना आई की पति पत्नी को संतुष्ट नहीं करता इसलिए प्रयोज्य का मर्दाना टेस्ट करना है । 02 / 09 / 21 पत्नी के पिता ने कहा हिंझड़ा [ transgender ]  से शादी कराई, अब इसके पोस्टर लगेंगे, इस बात से अधिक तनाव आया । 

निष्कर्ष - प्रयोज्य को  पहले से मानसिक तनाव अधिक था, प्रयोज्य उभयलिंग था, परंतु शादी के पाँच दिन बाद ही अपने भाई के परिवार अलग होने को पत्नी बाध्य कर रही थी, भाई ने ही प्रयोज्य का पालन पोषण किया तो कैसे इतना जल्दी अपने परिवार से कैसे अलग हो जाए, प्रयोज्य गुदा मैथुन के साथ यौनि मैथुन आराम से कर लेता था, केवल असफल पत्नी के साथ रहा जिसक मूल कारण तनाव का होना, कोई भी स्वस्थ व्यक्ति भी तनाव के कारण संभोग नहीं कर सकता ।  पत्नी के साथ पत्नी के पिता भी मानसिक तनाव पैदा करने मे सहायक हुए । इधर परामर्श के समय पत्नी के पीहर पक्ष ने आधुनिक चिकित्सा के पैथोलोजी जांच कराने का समाचार दिया उससे बहुत तनाव मे आ गया । प्रयोज्य को आश्वासन दिया आप मर्द हो चिंता क्यो करते हो, प्रयोज्य चिंता करता मुझ से बात करता, फिर लेब ले बाहर मुझे से लगातार संपर्क मे था, मैने कहा चिंता मत कर पूर्ण मर्द हो सब सकारात्मक रिपोर्ट आएगी फिर लेब मे पहुंचा तो फोन पर वार्तालाप से चिंता बता रहा था, पर जब दो दिन लगातार सब जाँचे हो गई और फिर दो दिन बाद रिपोर्ट आई सब उसमे सकारात्मक था, फिर भी मैने बोला अपने स्थानीय चिकित्सक को बताओ, उन्होने स्थानीय चिकित्सक को रिपोर्ट सकारात्मक बताया तो संतुष्टि मिली, अब रही उनके सामाजिक दोनों परिवार मे बाजी पलट चुकी थी, पत्नी के पीहर पक्ष अब माफी मांग रहे थे । प्रयोज्य के भाई ने अब ताव दे कर कहा, जब तक चिकित्सा रिपोर्ट नहीं आई थी तब तक तो मेरा भाई नामर्द था, एक चिकित्सा रिपोर्ट आने के बाद मर्द कैसे हो गया, मेरा भाई पहले भी मर्द था, बाद भी मर्द हम लड़की को तलाक देंगे ।  प्रयोज्य मुझे पूछा क्या करू आप बताए तो मैने बोला ये आपका पारिवारिक और सामाजिक मामला है । अपने बड़े भाई जो कहे वो करो । 

परामर्श पूर्ण होने पर प्रयोज्य की तबीयत ठीक होना बताया । 90 % gay अब अच्छे नहीं लगते । आत्मविश्वास बढ़िया हुआ, समाज मे अब जाने का मन करता है । उसने बताया की मन का वहां होने से दिमाग खराब होता है । समलैंगिक की आदत आसानी से छुड़ाया जा सकता है । प्रयोज्य के भाई का परिवार शहर मे बस गया था, सामाजिक रिश्तेदारी मे आने जाने कोई समय नहीं निकाल पाते थे । 

सामाजिक संदेश - अपने परिवार के बच्चो को समाज मे आना जाना रखना चाहिए, जिससे सामाजिक रीतिरिवाजों संस्कारो का ज्ञान हो सके । बच्चो को बाल यौन शोषण से पीड़ित लड़को को ये जो दिक्कते सामने आ रही है, इस अनुसंधान से ज्ञात ये ही होता की छोटे लड़को को अपने निजी अंगो को कोई दूसरा आदमी इसको नहीं छूए जैसे लिंग, यौनि, गुदा और होठ । जब कोई शरीर पर निजी अंगो को हाथ छूने की कोशिश इस प्रकार की चेष्टा करे तो उसका विरोध करना चाहिए और अपने माता पिता और अभिभावक को बताना चाहिए । 

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शुक्रवार, 14 जनवरी 2022

कैसे समान आयु ले लड़को ने समलैंगिक बनाया ?

कैसे समान आयु ले लड़को ने समलैंगिक बनाया ? 

प्रयोज्य के परामर्श की दिनांक - 27 / 04 / 21 [ अपडेट 13 / 01 / 22 ] 

प्रयोज्य का नाम - गोपनीय रखने के कारण 40050421 

प्रयोज्य की आयु - 22 वर्ष 

प्रयोज्य की शिक्षा -  b tech हिन्दी माध्यम 

प्रयोज्य का व्यवसाय - बेरोजगार 

निदान - प्रयोज्य हिन्दी माध्यम से b tech किया । महिलाओ मे आकर्षण की कमी थी, समलैंगिक बूढ़े आदमियो मे आकर्षण होता है, इसलिए पढ़ाई के बाद प्रतियोगीय परीक्षा मे मन नहीं लगता, शादी करने का मन नहीं करता,  क्योकि 19 वर्ष की समान आयु के लड़को ने जबरदस्ती से गुदा मैथुन किया और मुख मैथुन करवाया, साहस नही था इसलिए विरोध नहीं किया, अब भीड़ भाड़ जगह से थोड़ी घबराहट होती है, समलैंगिक के विचार आते की कोई मेरे गुदा मैथुन कर दे, एक लड़के से लगातार संपर्क रहा। कक्षा 11 मे पढ़ता था तब अश्लील वीडियो देख कर हस्त मैथुन सीखा था, दिन मे तीन से चार बार हस्त मैथुन करता । समलैंगिक शब्द का ज्ञान पहले नहीं था, समलैंगिक संबंध बनाने के बाद ही दोस्त ने बताया था । शर्म बहुत आती है। घबराहट होने से मन मे विचार आते की कई कोई बोल तो नही देगा या मेरे बारे मे ये लोग सोचते होंगे । 

निष्कर्ष - प्रयोज्य मे रूठने की प्रवृति पाई थी, निर्णय लेने मे देरी देखि गई, थोड़ा अहंकार भी पाया गया, [ इस समय मुझे कोरोना हो गया था इसलिए ऑनलाईन परामर्श देने मे विलंब भी हुआ था प्रयोज्य को बता दिया था की मुझे बोलने मे दिक्कत हो रही थी ] ऑनलाईन परामर्श लेने के बाद अब तबीयत ठीक है, प्रयोज्य को शादी करने का मन होता है, महिलाओ मे आकर्षण होता है, समलैंगिक अब बुरे लगते है। अब आत्म विश्वास अच्छा हुआ, अब गुदा मैथुन मुख मैथुन करने की कोई ईच्छा नहीं होती, भीड़ मे जाने की थोड़ी झिझक होती है । दूसरों को संदेश देना चाहूँगा की समलैंगिकता गलत विचार है, इस प्रकार की मानसिकता का उपचार होता है । 

निष्कर्ष - बच्चो को हस्त मैथुन करने से रोकने का ज्ञान देना चाहिए, कोई लड़का अगर किसी लड़के के साथ बहला फुसला कर समलैंगिकता के संबंध बनाते है तो उसका विरोध करना सिखाना चाहिए । गुदा मैथुन, मुख मैथुन को कैसे रोके का ज्ञान समाज मे फैलना चाहिए । 

ऑनलाइन परामर्श दाता 

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मंगलवार, 11 जनवरी 2022

कैसे समलैंगिक की आदत सुधरी ?

प्रयोज्य के परामर्श की दिनांक - 22 / 02 / 21 [ अपडेट 08 / 09 / 21------- अपडेट 11 / 01 / 22  ] 

प्रयोज्य का नाम - गोपनीय रखने के कारण 3803 

प्रयोज्य की आयु - 20 वर्ष 

प्रयोज्य की शिक्षा - 10 वी 

प्रयोज्य का व्यवसाय - निजी नौकरी 

प्रयोज्य की समस्या - समलैंगिक समस्या से छुटकारा पाना । 

निदान - प्रयोज्य निजी नौकरी करता उसको समलैंगिक आकर्षण की समस्या होती है, डर, चिंता होती और गुस्सा बहुत आता है । भीड़ भाड़ वाला स्थान अच्छा नहीं लगता, लगातार एक ही विचार आते है की लड़को से लिपटा रहु । समलैंगिक की प्रेरणा यूट्यूब से मिली लगातार यू ट्यूब देखता रहा । फिर एक जगह ईलाज कराया 5000 रुपया खर्च किया पर कोई लाभ नहीं मिला । कक्षा 8 मे पढ़ता था, उस समय 13 वर्ष की आयु थी उस समय हस्त मैथुन शुरू किया था । मन मे ये विचार आते की कई कोई कड़वी बात, बोल नही दे, जब बाहर निकलता तो ऐसा लगता की लोग मेरे बारे मे बाते करते होंगे । वीर्य की रक्षा करना, समय से पहले वीर्य खर्च नहीं करने का कोई ज्ञान नहीं था, हस्त मैथुन की आदत हो चुकी थी । प्रयोज्य जहा काम करता को एक निजी कालेज था उसमे पानी सप्लाई मोटर का संचालन करता था । आफिस मे 5 महिला कर्मी थी, उसमे से एक महिला अधिकारी के लिए घर से छाछ लाता था, बाकी महिला अधियाकरी से कभी बात नहीं होती ।  ( छोटी आयु मे इन्टरनेट से गलत संदेश, गलत शिक्षा भी मिलती है, इसके लिए नियंत्र भी आवशयक होना चाहिए । )

निष्कर्ष - प्रयोज्य मे ऑनलाईन परामर्श लेने से बहुत आराम मिला, परिवार मे बोलने का तरीका अच्छा सुधार हुआ, गुस्सा नियंत्रण मे आया, ऑनलाईन परामर्श के समय ही स्टाफ की चार महिलाए ने मुझे अपने आफिस मे बुलाया, फिर बैठा कर चाय पिलाई, पूछा तेरे मे एकदम बदलाव कैसे आया, क्योकि पहले उदास रहता और चिंता मे डूबा रहता था । एक दिन पुजा मेम [ पुजा नाम काल्पनिक है ] को मैने गिफ्ट दी तो पुजा मेम ने मुझे भी गिफ्ट दी, मेरे उनकी आंखे मे देखने पर पुजा मेम बोली मै तुझ से पटने वाली नहीं, मेरी शादी मेरे समाज मे ही होंगी, फिर मेरे दिशा निर्देश को उसको बता दिया था, तो पुजा मेम खुश हुई, पुजा मेम की शादी हो गई मै [ प्रयोज्य ] शादी मे भी गया । अब प्रयोज्य मुसकुराते अपनी निजी नौकरी करता है । मैने उसको बोला था की ओपन स्कूल से 12 कक्षा का प्रायवेट फार्म भरना और पढ़ाई करना, उस बात को मान कर अब 12 कक्षा मे पढ़ाई कर रहा है। 

प्रयोज्य अब एक दम ठीक है, अब महिलाओ मे आकर्षण होता है, उसका कहना है की "मै अब होश हवास से कह सकता हूँ, अब ठीक हूँ"। अब भीड़ से भय नहीं लगता, अच्छा लगता है, कोई तखलिफ और परेशानी नहीं, अब शादी करने का मन करता है । उसके अंतिम कथन "ठीक हो सकते है, ये आदत बन जाती है, आदत सुधारी जा सकती है"  अब ये आराम से मैदान मे खेल सकता है, पहले नहीं खेलता था । ( अपडेट - 08 / 09 / 21 बहुत अच्छा है, ऑनलाइन परामर्श का अहसान मानता है । [ अपडेट 11 / 01 /22 ]

सामाजिक संदेश - अपने बच्चो को बिना शिक्षा के अलावा स्मार्ट मोबाईल पर इन्टरनेट का उपयोग लेने नहीं देना चाहिए अन्यथा बच्चो के बिगड़ने के अवसर जायदा होता है । 

ऑनलाईन परामर्श दाता 

What's app 091 98290 85951 

सोमवार, 10 जनवरी 2022

क्यों आखिर सुधारना नहीं चाहता ?

प्रयोज्य के परामर्श की दिनांक - 19 / 01 / 21 

प्रयोज्य का नाम - गोपनीय रखने के कारण 37190121 

प्रयोज्य की आयु - 26 वर्ष 

प्रयोज्य की वैवाहिक स्थिति - शादीशुदा 

प्रयोज्य शिक्षा -  अँग्रेजी माध्यम ग्रेजुएट 

प्रयोज्य का व्यवसाय - प्रायवेत नौकरी 

प्रयोज्य की समस्या - समलैंगिक से छुटकारा नहीं चाहता । 

निदान - प्रयोज्य कक्षा 7 वी मे पढ़ता था । उस समय आयु 13 / 14 वर्ष का था, उस समय 22 / 23 साल का लड़के मे बहला फुसला कर गुदा मैथुन कर दिया, अब बाध्यकारी एक जुनून की तरह गुदा मैथुन करना अच्छा लगता है, समलैंगिक अच्छे लगते परंतु सभी नहीं अपनी पसंद का समलैंगिक जो अच्छा लगता उसके साथ गुदा मैथुन करने की ईच्छा होती है । 2013 मे अपने आप फेसबुक से समलैंगिकता की जानकारी मिली, इन्टरनेट से समलैंगिक की विस्तृत जानकारी मिली थी, बचपन मे बड़ी बहिन के कपड़े मम्मी पहनाती थी । पूर्व मे दो मनोवैज्ञानिकों से परामर्श लिया था ।  शादी किए 14 महिना हुआ, पत्नी के साथ पहली बार मैथुन करने की कोशिश मे असफल हुआ, फिर डर बैठ गया । लोगो के बीच मे नहीं रहना चाहता, जल्दी निकालना चाहता हुआ, आत्म हत्या के विचार आते है । मम्मी पापा के लिए जीना चाहता हूँ । मम्मी पापा एक अलग कमरे मे सोते थे, एक दिन प्रयोज्य और उसकी बहिन, के साथ हमेशा सोते थे, एक रात्री मे पिता ने आरोप लगा दिया की भाई बहिन आपस मे मैथुन कर रहे हो, उसी दिन से पिता जी से नफरत हो गई । पिता शक की नजर से हमेशा देखते थे, 2004-2005 भाई बहिन के साथ का आरोप पिता जी ने लगा दिया था । प्रयोज्य ने मान लिया मुझे ठीक नहीं होना, उसका कहना था मुझे नहीं सुधरना, पत्नी के साथ एक बिस्तर पर सोता पर पत्नी से बात नहीं करता, ऑनलाईन उभयलिंग लड़को से बात करता था, घरेलू आवश्यकता के सामान खरीद लाता, पत्नी को बोला तुम जा सकती हो, साथ रहना चाहती तो मुझे आपत्ति नहीं है। उसका हमेशा एक ही वाक्य रहा मुझे समलैंगिक बने नहीं रहूँगा,  समलैंगिक संबंध नहीं रखूँगा और पत्नी चाहे साथ रहे पर किसी भी प्रकार का मैथुन नहीं करूंगा । 

पारिवारिक निदान - प्रयोज्य के पिता अपनी जवानी मे राज्य मे पुलिस की नौकरी लगाने के बाद अपनी पत्नी को शहर लेकर आ गए, पत्नी सरकारी अध्यापिका की नौकरी लग गई, एक लड़की दो लड़के हो गए, फिर कभी अपने पैतृक गाँव नहीं गए, भाई चारा किसी से नहीं था, अपनी पुलिस की नौकरी होने के कारण समय नहीं मिलता, नौकरी और घर के अलावा कही भी आना जाना नहीं था, बच्चे जैसे बड़े होते गए अँग्रेजी स्कूल मे पढ़ते अपनी शिक्षा ली, बड़ी बहिन की शादी हो चुकी थी, प्रयोज्य ने भी शादी की, शादी के बाद ससुराल गया, पत्नी अपने वैचारिक आधार पर मन पसंद नहीं थी । बहन, बहनोई बड़े सुलझे दिमाग के थे, छोटा भाई भी संतुलित था, प्रयोज्य को पढ़ाई के लिए बाहर भेजा वहा किसी ने बहला फुसलाकर गुदा मैथुन किया उसकी लत लगी साथ, पिता के द्वारा हमेशा प्रताड़ित होना एक स्त्री संबंध मे अरुचि हो गई थी, पिता पुत्र मे आपस मे नहीं बनती थी, छोटा भाई बाहर नौकरी करता, घर मे चार लोग प्रयोज्य के पिता, माता, पत्नी और खुद, पर आपस मे किसी के तालमेल नहीं था, पिता पुलिस की नौकरी से रीडयार्ड हो गए थे, माता अध्यापिका जरूर थी परंतु सुबह का अभिवादन एक दूसरे को कोई नहीं करता था, पिता नौकरी से निवृत जरूर हुए परंतु स्वभाव से आज भी कडक पुलिस वाल हो जैसे रहते है, पदौसी घर पर आता तो प्रयोज्य पर गुदा मैथुन का शक करते है, प्रयोज्य की माता ने बताया की मेरे पति मुझे किसी दूसरे आदमी से साथ समान्य बात करते देखते तो शंका करते किससे बात करती क्यों बात करती । प्रयोज्य के पिता अपनी कमाई से घर चलाते, प्रयोज्य भी रसोई घर का समान ले आता । प्रयोज्य के पिता से पूछा की आप की पत्नी और बेटे की कमाई किसके पास रहती तो बोले अपने अपने पास, पत्नी रुपयो का क्या करती तो बोले मुझे नहीं मालूम। प्रयोज्य सब्जी पकाने मे कुशलता हासिल थी, कभी अपनी पसंद का खाना बना भी लेता, पत्नी के हाथ का खाना भी खाता, पत्नी प्रयोज्य के कपड़े भी धोती थी, पत्नी साथ रहे कोई आप्ति नहीं है। प्रयोज्य के पिता पुत्र वधू को उसके पीहर जाने देना नहीं चाहते, क्योकि दहेज का मुकदमा होने का डर रहता था। पिता बो बताया गया की आपका लड़का शारीरिक से घर पर है पर मानसिक तौर से ये खो गया है, जैसे मेले मे बालक अपने अभीभावक का हाथ छुडाकर अपने आंखो से देखि वस्तु के लिए भटक जाता और अभिभावक भी अपनी चेतना दूसरी जगह लगाई घूमते है, जब याद आता तो पता चलता मेरा पुत्र किधर खो गया, इस बात पर पिता ने बताया की मेरा पुत्र इसी प्रकार उसके बचपन मे हम किसी शादी मे नदी पार किसी गाँव मे जा रहे थे तो बारिश आ गई जल्दबाज़ी मे हम अपना बेटा भूल गए पति पत्नी एक दूसरे पर भरोषे रहे, जब चेतन अवस्था मे आए तो पता चला की पुत्र कहा है, नाव मे, बस मे या स्थानीय बाजार मे फिर ढूंढा तो किसी दुकानदार के पास बैठा बिस्कुट खा रहा था, पुत्र रो भी नहीं रहा था, अर्थात पिता पुत्र आज भी अचेतन अवस्था मे जी रहे है । 

निष्कर्ष - संयुक्त परिवार का अभाव  था, पारिवारिक और सामाजिक रिश्तो मे आने जाने का अभाव था, प्रयोज्य को एक बाध्यात्मक जुनून हो चुका था, अब पिता का शक बहुत दुख देता था, पिता भी हठीला और जिद्दी हो चुका एक ही बात मेरे बेटे ने मेरी बेटी के साथ मैथुन किया, जब की बहिन भाई दोनों साथ मैथुन करने का साफ साफ इंकार करते ऐसे कुछ भी नहीं हुआ, ये बात प्रयोज्य को बड़ी दर्द भरी लगती है । एक मकान मे चार लोग रहते है, चारो किसी से भोजन के मतलब के अलाव कोई किसी से बात नहीं करता है। प्रयोज्य के इच्छा अनुसार मकान नहीं बना बताया, उसके ईच्छा के अनुसार डाईनिंग लगाने की बात मे सुधार करवाया, फिर बोला गमले मे कोई पनि नहीं पिलाता, तो उसकी भी निगरानी बताई, चारो लोग एक दुसरे को आपस मे सुबह का अभिवादन करना नहीं आता उसको बताया, प्रयोज्य के बहन बहनोई को बुलाकर सभी साथ साथ भौजन करना बताया, देव स्थान और पर्यटन स्थान घूमने के सुझाव मे स्वीकार किया, पर्यटन स्थान घूमने से पूरे परिवार मे रोचकता रही, नया अहसास हुआ । पर पिता पुत्र का अहंकार आपस मे मेल नहीं खाता, पिता पूर्व की बाते भूलने मे असमर्थ और पुत्र भी पूर्व की बाते भूलने मे असमर्थ, ये आपस मे बाध्यकारी दोनों का अहंकार प्रयोज्य को सुधरने नहीं दे रहा है, प्रयोज्य के पिता ने सामाजिक और सांस्कृतिक जवाबदारी नहीं निभाई । परिवार एक घर नहीं होकर होटल बन चुका है । 

अगर पति पत्नी को साथ रहना तो धेर्य की आवश्यकता है, पिता को पूर्व की बातों को भूलना होगा, पुत्र को खोया प्यार देना होगा, घर परिवार मे मेहमानो की ईज्ज्त करनी होगी, आने जाने वाले और घर के सदयों पर शंका करना बंद करना होगा, पारिवारिक परामर्श से परिवार मे धीमी गति से संचार हो रहा उसको बढ़ाने और गति देने की आवश्यकता है । प्रयोज्य को सांसारिक और सामाजिक नैतिक ज़िम्मेदारी सीखने की आवश्यकता है, ये सीखते ठीक हो सकता है, ईंटरनेट से भी दूर रखने की आवश्यकता है, घर मे समय पर सोए, हास्य विनोद की भी आवशयता है, परिवार मे घुल मिल कर वोल चाल के साथ सामाजिक आना जाना रहना जरूरी है । 

परामर्श दाता 

What's app 091 98290 85951  

गुरुवार, 6 जनवरी 2022

कैसे 13 वर्ष की आयु मे समलैंगिक संबंध बने ?

प्रयोज्य के परामर्श की दिनांक - 08 / 12 / 20  

प्रयोज्य का नाम - गोपनीय रखने के कारण 33198 

प्रयोज्य की आयु -  21 वर्ष 

प्रयोज्य की शिक्षा - polytechnic 3 

प्रयोज्य की समस्या - समलैंगिक से छुटकारा पाना । 

निदान - प्रयोज्य 7-8 वर्ष का था उस समय उसके काका ने उसके साथ गुदा मैथुन कर लिया था ।  समझता नहीं था, विरोध नहीं कर सका, उस समय गुदा मैथुन करने की आदत हो गई, डेढ़ साल काका से गुदा मैथुन कराया, 30 वर्ष का एक अन्य गाँव का आदमी से डेढ वर्ष गुदा मैथुन कराया, समलैंगिकता की प्रेरणा अपने काका से मिली। समलैंगिकता मे रुचि रहती और विषम लिंग अच्छे नहीं लगते, विषम लिंग मे आकर्षण नहीं होता था । शादी करने का मन नहीं करता । आत्म विश्वास कमजोर हो गया, डर, चिंता सताती थी, एकांत मे रहने का मन करता । चिंता होती आगे क्या होगा । वीर्य रक्षा करने के बारे मे कोई जानकारी नहीं थी । बचपन मे काका का लड़का फ़्राक पहनता था तो उसको देख मेरी भी ईच्छा फ़्राक पहनने की होती थी । 12 वर्ष की आयु मे हस्त मैथुन करना सीख गया था । पेशाब करता तो दूसरे लड़को के लिंग से मेरे लिंग की तुलना करता तो मेरा लिंग छोटा लगता था, समान नहीं दिखने से हीनता आती थी की मेरा लिंग छोटा क्यो है। 

निष्कर्ष - प्रयोज्य की हालत दूबला और दो आषाढ़ जैसी हो गई थी । ऑनलाईन परामर्श लेने से तबीयत ठीक हुई, अब लड़किया अच्छी लगने लगी, लड़कियो मे आकर्षण होने लगा, शादी करने का मन करता परंतु अभी शादी नही करेगा, क्योकि पढ़ाई पूरी करके प्रतियोगिता परीक्षा देनी है । समलैंगिक अब अच्छे नहीं लगते, उनसे दूर रहने का मन करता है । 

सामाजिक संदेश - अपने बच्चो पर विशेष पालन पोषण का ध्यान रखे, काका जैसे पवित्र रिश्तेदार हो अगर गलत कर देंगे तो बहुत गलत होता है । सामाजिक लोकलाज की शिक्षा अवश्य देनी चाहिए, बच्चे के साथ कोई गलत हरकत करे तो विरोध करना सिखाए । 

ऑनलाईन परामर्श दाता 

091 98290 85951 

रविवार, 2 जनवरी 2022

कैसे हस्त मैथुन के कारण समलैंगिक बना ?

प्रयोज्य के परामर्श दिनांक - 29 / 10 / 20 

प्रयोज्य का नाम - गोपनीय रखने के कारण - 29190 

प्रयोज्य की आयु - 33 वर्ष 

प्रयोज्य की शिक्षा -  10 + 2 = 12 PBC 

प्रयोज्य की समस्या - समलैंगिक से छुटकारा पाना चाहता है । 

निदान - कक्षा 10 वी मे पढ़ता था, उस समय छोटे लड़को से हस्त मैथुन करने की आदत पड़ गई थी, पड़ोसी लड़को से हस्त मैथुन करवाने की आदत हो गई थी । प्रयोज्य की आयु से छोटे लड़को से हस्त मैथुन करने की आदत हो गई थी । लड़कियो मे जाने से हिचकिचाहट होती थी, लड़कियो और महिलाओ मे आकर्षण नहीं होता, 25-30 वर्ष के समलैंगिक लड़के अच्छे लगते है । 17 साल हस्त मैथुन पड़ोसी लड़को से करवाया क्योकि कोई लड़की नहीं मिलती थी । लगातार विचार आते की कोई लड़का आए और उसका लिंग पकड़ लू । 7-8 व्यक्तियों के प्रयोज्य ने भी हस्त मैथुन किया । दोस्त की प्रेरणा से हस्त मैथुन करना सीखा था । 40 दिन आयुर्वेदिक दवा खाने से स्वपन्नदोष शीघ्रपतन मे आराम मिला ।  महिला संभोग मे शीघ्रपतन का पहली बार अनुभव हुआ । 

निष्कर्ष - प्रयोज्य अपने से छोटे लड़को से हस्त मैथुन करने की आदत होने के कारण, इसलिए अपनी आयु से छोटे समलैंगिक लड़के ही आकर्षण का कारण हुआ । ऑनलाईन मनोवैज्ञानिक परामर्श लेने से अब तबीयत ठीक है, महिलाओ मे आकर्षण होने लगा, अब समलैंगिक अच्छे नहीं लगते । आत्मविश्वास बढ़ा, भीड़भाड़ मे अब जाने से कोई दिक्कत नहीं होती । प्रयोज्य ने बताया इस प्रकार कोई समलैंगिक हो तो मनोवैज्ञानिक परामर्श अवश्य लेना चाहिए । 

सामाजिक संदेश - अपने बच्चो को कभी एकांत मे नहीं रखना चाहिए, पारिवारिक, सामाजिक ज्ञान के साथ वीर्य रक्षा के बारे मे अवश्य शिक्षा देनी चाहिए । 

परामर्श दाता 

091 98290 85951 



शनिवार, 1 जनवरी 2022

कैसे समलैंगिक अपने आपको लड़की समझता था ? ये भ्रम दूर हुआ और सामान्य होकर जीवन जी रहा है ।

प्रयोज्य के परामर्श दिनांक 27 / 10 / 20 

प्रयोज्य का नाम - गोपनीय रखने के कारण 28189 [ 0 8/ 0 9 /2021, ने बताया चार महिला मित्र बनाया, आराम से विषम लिंग की ज़िंदगी जी रहा है । ] 

प्रयोज्य की आयु - 19 साल 

प्रयोज्य की शिक्षा - BA  दूसरा साल । 

प्रयोज्य का कार्यभार -  विध्यार्थी । 

प्रयोज्य की वैवाहिक स्थिति - कुवारा । 

समस्या -- लड़की हूँ, लड़की हूँ, बाहर किसी को बताने की हिम्मत नहीं - समलैंगिक । 

नैदानिक - बाल यौन शौषण, जब14 वर्ष की आयु मे, 16 वर्ष का लड़का जिसको दोस्त मानता था, उसने प्रयोज्य के साथ गुदा मैथुन किया, नासमझ होने के कारण विरोध नहीं किया, ये समलैंगिक अभ्यास शुरू किया था । 8 लड़को से संपर्क मे रहा, आठ लड़के प्रयोज्य के साथ गुदा मैथुन करते थे । समलैंगिकता की लत लगी थी, इसमे रुचि होने से समलैंगिक व्यक्ति मे आकर्षण होता था । लड़की, स्त्री मे कोई रुचि नहीं रहती । 14 वर्ष की आयु मे हस्त मैथुन सीख लिया था, सारे दिन चिंता सताती थी, अपने आपको लड़की समझता था । गुस्सा आता, चिड़चिड़ा स्वभाव हो चुका था, फिर दो वर्ष पहले अपने माता पिता को समलैंगिक संबंध होने का बताया, घर वालों ने मनो चिकित्सक को दिखाया, दवाई खाने से चक्कर आते, बेहोशी रहती, आंखो पर नशा रहता था, मर्जी का मालिक समझता था। साल भर दवाई खाई पर कोई आराम नहीं मिला, फिर लिंग परिवर्तन के लिए दिल्ली दो बार गया तो सर्जन चिकित्सक बोले आयु कम है, अपने मातापिता को अभिभावक के रूप मे साथ लाओ, अन्यथा लिंग परिवर्तन नहीं होगा । तीसरी बार वापस लिंग परिवर्तन के लिए गया चिकित्सक बोला आप शादी करलों आपकी श्रीमति हस्ताक्षर कर देगी तो आपरेशन कर दूंगा, फिर अपनी पत्नी से तलाक ले लेना । थक हार के मै घर से भाग गया और पुलिस ठाने मे मुक़द्दमा दर हुआ, मेरी लोकेशन ट्रेक हो रही थी, पर मुझे मालूम नहीं था, फिर भी मै सच बोला पुलिस ने भी सच जाना, पिताजी ने आश्वाशन दिया तुम घर आ जाओ तुम जो कहोंगे वो करेंगे, तुम्हारा लिंग परिवर्तन कराएंगे। एक बार घर आ जाओ, मै घर आया, पिता बोले एक ऑनलाइन मनोवैज्ञानिक परामर्श दाता एक महीने में समलैंगिकता की आदत छुड़ा देते है, मैने कहा एक महीने मे मेरे विचार नहीं बदले तो आपको मेरा कहा मानना पड़ेगा । इस प्रकार से प्रयोज्य से संपर्क हुआ । 

प्रयोज्य के पिता ने ओंनलाईन परामर्श शुल्क जमा कराया था, आज 01 / 01 / 2022  प्रयोज्य के पिता से फोन से अपडेट हो कर ये अनुसंधान लिखा जा रहा है । प्रयोज्य से भी लगातार संपर्क मे हूँ, अब उसने चार महिला मित्र बना चुका है, आराम से अपनी बदली जीवन शैली से मस्त जी रहा है । 

निष्कर्ष - प्रयोज्य ऑनलाइन परामर्श लेने से एक दम ठीक है, समलैंगिकता की आदत छुट गई, विषम लैंगिक मे आकर्षण बढ़ गया, अब विषम लिंग मे आकर्षण होता है, समलैंगिक से घ्रणा होती है, पहले शादी करने का मन नहीं करता, परंतु अब शादी करने का मन करता है, पर अभी शादी योग्य आयु नहीं, पहले पढ़ाई भी पूर्ण करनी है । अब पूर्ण आत्म विश्वास होता है, चिंता, डर मिट गए । अब तबीयत अच्छी है, अब गुदा मैथुन कराने का मन नहीं करता । समलैंगिता का प्रचार नहीं होना चाहिए ।  

सामाजिक संदेश - दो बाल किशोर को एकांत मे जाने नहीं देना चाहिए, सार्वजनिक खेलकुद मे बढ़ावा देना चाहिए, वीर्य रक्षा की शिक्षा देनी चाहिए। कोई समलैंगिक की बाते करे तो उसका विरोध करना सिखाना चाहिए । 

अनुसंधान कर्ता 

091 98290 98951 

गुरुवार, 30 दिसंबर 2021

किशोर आयु मे समलैंगिक कैसे बनते है ?

 कैसे हम आयु के किशोर अवस्था मे लैंगिक भटकाव होता है ? 

परामर्श दिनांक - 03 / 10 / 2020  [ अपडेट 29 / 12 / 2021 ]

प्रयोज्य का नाम - गोपनीयता के कारण 26185 -- । 

प्रयोज्य की आयु - 20 वर्ष । 

कार्यभार -  विधार्थी कक्षा द्वितीय वर्ष BA । 

वैवाहिक स्थिति - कुवारा । 

समस्या - समलैंगिकता से छुटकारा पाना चाहता है । 

आवश्यकता - पढ़ाई मे मन लगे और डिप्टी कलेक्टर बनने के लक्ष्य मे समलैंगिक बाधा को दूर करना । 

निदान -परामर्श के समय बताया की समलैंगिक आकर्षण से परेशान होता है । लड़की और महिला मे कोई रुचि और आकर्षण नहीं होता । जब 15 साल का था तब उससे पहले लड़कियो मे आकर्षण होता था, परंतु सहपाठी समान आयु एक दूसरे को किस करते, हमेशा साथ साथ रात्री मे सोते थे, आपस मे किस करते थे, उसी समय हस्त मैथुन करना सीख गए । दोस्तो के तीन बार गुदा मैथुन किया था ।  कक्षा 10 तक पढ़ाई मे मन लगता था, जब से दोस्तो के संपर्क आया पढ़ाई मे मन नहीं लगता । आत्म विश्वास कमजोर हो गया, शंका होने लगी की डिप्टी कलेक्टर की मेडिकल मे अयोग्य नहीं हो जाऊ । एक बार चिकित्सक के पास गया तो चिकित्सक बोले दुबले बहुत हो, प्रोटीन बाहर जा रहा है, ये बताया तो डर गया। दोस्तो के साथ सोने की ईच्छा रहती, गे से प्यार करने की ईच्छा । उसका दोस्त लड्की से प्यार करता था । प्रयोज्य हस्त मैथुन करते समय समलैंगिक की कल्पना करके हस्त मैथुन करता । 

निष्कर्ष - ऑनलाईन परामर्श का परिणाम अच्छा रहा, समलैंगिकता की मानसिकता हट गई । समलैंगिकता की आदत छुट गई, पढ़ाई मे मन लगने लगा । अभिभावक के ध्यान नहीं देने के कारण हम उम्र के लड़को के साथ मैथुन करने के गलत तरीको को अपना लिया, जिसके कारण समलैंगिकता की आदत पड़ गई, अगर प्रयोज्य को मैथुन करने को लड़की मिलती तो समलैंगिकता की लग नहीं लगती और सामान्य विषमलिंग से संभोग करने की सकारात्मक लत लग जाती । किशोर आयु मे वीर्य बनना प्राररंभ हो जाता है, इस समय ब्रहमचार्य की शिक्षा देने की आवश्यकता होती है । 

परामर्श दाता - ऑनलाइन 091 98290 85951 

मंगलवार, 28 दिसंबर 2021

कैसे समलैंगिक तनाव की दवाओ से छुटकारा मिला ?

 समलैंगिक और तनाव की दवाओ से छुटकारा मिला ।

परामर्श दिनांक - 20 / 09 / 20  [ अपडेट 27 / 12 / 21 फोन से वार्तालाप हुआ ] । 

प्रयोज्य का नाम - गोपनीय रखने के कारण 187 । 

पढ़ाई - 10 + 2 आईटीआई । 

वैवाहिक स्थती - सगाई हुई । 

समस्या - समलैंगिकता से छुटकारा । 

आवश्यकता - वैवाहिक जीवन मधुर रहे । 

निदान - महिलाओ से ज्यादा आकर्षण समलैंगिक मे होता है । शादी करने का मन करता है, सगाई हो गई । कक्षा 5 मे पढ़ता था, 10 से 12 वर्ष का था तब समान आयु के रिश्तेदार ने गुदा मैथुन किया । समान आयु के लोगो के साथ गुदा मैथुन करवाया और स्थानीय दो वर्ष बड़े लड़के भी थे और दोस्त के साथ सोते थे । कुछ साथियो की शादी हो गई कुछ कुंवारा है। स्कूल मे खेल कूद और बाहर के लोग अच्छे नहीं लगते थे । कक्षा 10+2 तक गाँव मे ही था, रात को नींद नहीं आती थी, दिन भर थकान लगती थी । 10 वर्ष गुदा मैथुन किया, एक दो बार मुख मैथुन किया । तनाव मे था, पढ़ाई नहीं कर पा रहा था, बार बार समलैंगिकता के विचार आते थे । दुखी रहने के कारण, माता के साथ डॉक्टर के पास गए, उनके काउन्सलर मे बताया ऐसे ही रहो,  ब्लेड से हाथ काटे  दो बार आत्म हत्या का प्रयास किया   । भुवनेश्वर से चिकित्सक से 5000 रुपए की दवाई लाई चार महिना ईलाज चला, 

1 - Cap - prodep  bd 

2 - Tab - nexito ls  [clonozepam ] 

3 - Tab - nexipride 50 mg -------------- चार महिना दवाई खाई था, तनाव दूर हुआ । लोक डाउन से तनाव कम हुआ । 

विचार कम आते पर विचार नहीं बदले । दवाईया छोड़ने पर नींद नहीं आती । चार समलैंगिक के संपर्क मे रहे । एक वर्ष पूर्व हैदरबाद नशे मे मुख मैथुन किया । घर वालो की मेरे समलैंगिक होने का पता नहीं था । 

निष्कर्ष - सफलता - अच्छी आहार चिकित्सा परामर्श दिया । दवाईया छुट गई, सामाजिक लोग बोलने लगे पहले कम बोलता था, अब अधिक बोलने लगा, 12 वर्ष बाद अच्छे हालात हुए, पहले लड़कियो जैसे विचार आते [ समलैंगिकता के विचार ] अब डर दूर हुआ और जोश आने लगा । 10 बजे नींद की दवाई खा कर सोता सुबह 7 सात बजे उठता, दवाईया बंद कारवाई, आयुर्वेदिक चूर्ण दिया, आराम से नींद आने लगी। जीवन शैली मे बदलाव आया  । महिलाओ मे आकर्षण और रुचि बढ़ी, मार्च 2021 मे शादी हो गई, वैवाहिक संबंध अच्छे है, पत्नी से प्रेम करता है । आजीविका के लिए मेरे बताए आदर्श बच्चो को ट्यूशन कराता है । पारिवारिक और सामाजिक जीवन से अब संतुष्ट है । 


परामर्शदाता - 091 98290 85951 


सोमवार, 27 दिसंबर 2021

समलैंगिकता कैसे विकसित हुई ? 179

समलैंगिकता बाल यौन शौषण से विकसित होती है । 

परामर्श दिनांक - 22 / 08 / 20 [ अपडेट 26 / 12 / 21 फोन से ] 

नाम - गोपनीय रखने के कारण 23 / 129 

प्रयोज्य की आयु 24 वर्ष 

वैवाहिक स्थती - तलाक [ सामाजिक मे आम बात होती है ] 

समस्या - समलैंगिकता से छुटकारा चाहता है । 

आवश्यकता - वैवाहिक जीवन मधुर रहे । 

निदान - कक्षा 5 मे पढ़ता था, तत्कालीन एक गाँव का दूसरा व्यक्ति जो 24 वर्ष का था । वह एकांत मे उसका अपना लिंग प्रयोज्य के हाथ मे पकड़ता था, फिर लिंग हाथ मे हिलाने को बोलता था, युही कभी कभार ऊपर चढ़ता था। तीन वर्ष ये क्रिया चलती थी । कक्षा 8 पास करके कमाने एक राज्य से दूसरे राज्य चला गया, उस समय 14-15 वर्ष की आयु थी, कार्मिक स्थल पर एक 30 वर्ष का व्यक्ति था, वो मज़ाक मस्ती करता था, गुदा मस्ती भी करता था । एक दिन साथ साथ स्नान कर रहे थे तो उसने गुदा मस्ती करते करते, नहाते समय उसने गुदा मे अंगुली डाल दी, अपना लिंग हाथ मे दिया और फिर उसका लिंग प्रयोज्य के गुदा मे डाल दिया, और गुदा मैथुन का प्रारम्भ हो गया। फिर बहला फुसला कर लिंग हाथ मे देता और मुख मैथुन भी करावा दिया,  फिर समलैंगिकता की आदत पड़ गई ।  

बाद मे गुदा मैथुन छोड़े 5 वर्ष हो गए, शादी हो गई, साल भर पत्नी के साथ रहा, फिर कमाने जाना पड़ा चार महीने बाद वापस आता पत्नी के साथ रात्री मे एक बार आसानी से मैथुन कर लेता था, कभी एक दो दिन बाद सेक्स करता था । [ समाज मे तलाक होना आम बात होती है ] अंतिम बार सेक्स किया उस दिन असफलता मिली [ जो चिंता, तनाव से असफलता आम लोगो मे भी होता है ] तो हीनता महसूस की, लिंग मे तनाव क्यो नहीं आया, इस विचार से लगा नपुश्ङ्कता महसूस हुई । सुबह लिंग मे तनाव आता था । समलैंगिक व्यक्ति को देख लिंग मे तनाव आता था । ये समस्या किसी को नहीं बता सकता था । 

समाधान = ऑनलाइन परामर्श से समलैंगिकता के विचारो से छुटकारा मिला, एक प्रेमिका से मैथुन किया, गाँव मे लोक लाज करना किसी से सेक्स आग्रह नहीं कर सकता, अप्रेल मे वापस शादी करना है । 

सुझाव निष्कर्ष - किशोर बच्चों को बाल यौन शौषण से बचाना चाहिए, दो दोस्तो को एकांत मे रहने बैठने का अवसर नहीं देना चाहिए । सार्वजनिक खेलकुद मे प्रतियोगिता अवसर देना चाहिए, वीर पुरुषो का आदर्श, ज्ञान-विज्ञान मे शिक्षा देनी चाहिए । 


रविवार, 26 दिसंबर 2021

समलैंगिकता का सफल उपचार कैसे हुआ ?

 

समलैंगिकता कैसे विकसित हुई ?  

परामर्श दिनांक 22 / 07 / 20 [ अपडेट 26 / 12 /21 फोन लगाकर पता किया ]

नाम गोपनीय रखने के कारण 22-175

प्रयोज्य की आयु 29 वर्ष

वैवाहिक स्थती – एकल

समस्या – समलैंगिक रुझान केवल हस्त मैथुन करना । विपरीत लिंग मे रुचि नहीं ।

आवश्यकता – विपरीत लिंग मे रुचि और आकर्षण बढ़ाना ।

नैदानिक – शादी करने की इच्छा नहीं होती, समलैंगिकता मे रुचि, मित्र दूर हो तो अच्छा नहीं लगता । समलैंगिक साथी को भूल नहीं पाते, तनाव रहता है, हमेशा तनाव और चिंता सताती है ।

15 वर्ष से समस्या है, लड़को के प्रति रुझान [ आकर्षण ] रहता है । लड़की को देख कर कोई आकर्षण नहीं होता ।

समस्या कैसे विकसित हुईलगभग 14 वर्ष की आयु मे साथी समकक्ष के मिल कर एक दूसरे के लिंग पकड़ते थे फिर धीरे धीरे हस्त मैथुन करना सीख लिया । पेट के बल सोने मे दिक्कत होती थी एक बार गुदा मैथुन किया और एक बार गुदा मैथुन करवाया भी, फिर ज़्यादातर गुदा मैथुन की ईच्छा होती थी । वर्ष 2008-2012 तक बहुत बार हस्त मैथुन किया था ? आपस मे दोनों साथी समलैंगिक साथ होने मे रुचि रहती थी । दो तीन साथी भी थे सभी का एक ही समान रुचि थी, सभी का एक ही काम था । सभी आपस मे हस्त मैथुन करना होता था । वर्ष 2016 के बाद किसी से संपर्क मे नहीं आए । चिंता तनाव के साथ थकान होती थी, पेट के बल लिंग को रगड़ने से शीघ्रपतन होता था ।

ऑनलाइन परामर्श परिणाम अच्छा रहा, गलत सीखा मे सुधार हुआ, समलैंगिकता की आदत छुट गई  अभी सरकारी नौकरी की प्रतियोगिता परीक्षा दे रहा है

निष्कर्ष – सामाजिक परिवेश मे आदर्श नियम की पालना और अभिभावक का अपने औलाद के पालनपोषण मे सतर्कता नहीं होने की वजह से किशोर गलत प्रेरणा से नकारात्मक समलैंगिकता का गलत शिक्षण ले कर गलत मैथुन करना सीख लेते । फि ये एक नशे की तरह आदत पड़ जाती है।   

अभिभावकों को सुझाव किशोर बालको को बाल यौन शौषण होने से पहले ब्रहचर्य की शिक्षा अवश्य देनी चाहिए, अन्यथा वैवाहिक जीवन मे शीघ्रपतन से अशांति, कलह पैदा होते है ।

 

बुधवार, 22 दिसंबर 2021

कैसे समलैंगिकता की आदत बनी और कैसे समलैंगिता की आदत से छुटकारा मिला ?

 मेरे पास ऑनलाइन परामर्श  संपर्क किया था, अब इसका लगभग 21 महीने बाद समलैंगिकता से विषम लैंगिक होने और पूर्ण ठीक होने के बाद, अब कोई दिक्कत नहीं होने का अपडेट लिखा जा रहा है ।   

लड़के का गोपनीय नाम 163 रखा गया है । 

दिनांक 18 / 05 / 20 को एक लड़का इसने बताया की शादी करने की इच्छा नहीं होती, समलैंगिक आकर्षण होता है । 

 समस्या = समलैंगिकता से गुदा मैथुन करवाने की एक बाध्यकारी लत पड़ गई थी । जिसके कारण चिंता और डर हमेशा हमेशा लगा रहता था । 

मेरे पास ऑनलाइन परामर्श के लिए संपर्क किया था, उस समय 18/05/20 को पुछे जाने पर ये बताया की 8 / 10 वर्ष की आयु मे उसके चाचा का लड़का जिसकी आयु 15 वर्ष थी, चचेरे भाई ने एक रोज रात्री मे वीडियो दिखाया फिर गुदा मैथुन करने का आग्रह किया उस समय नासमझ होने से इंकार नहीं कर सका और गुदा मैथुन करवाया  । भाई पुरुष के रूप मे ये लड़का स्त्री रूप मे आपसी समलैंगिक मैथुन कराते थे । ये प्रयोज्य हमेशा निष्क्रिय रहता और उसका भाई सक्रिय गुदा मैथुन करता था । कभी कभार ये सिलसिला 8 / 10 वर्ष चला । 

उसके भाई की शादी हो गई तो भाई ने समलैंगिकता का संबंध छोड़ दिया तो अब उसकी याद बहुत आती थी । भाई की शादी हुए साल भर हो गया, अब कोई भी लड़का दिखता तो गुदा मैथुन कराने की ईच्छा होती थी । फिर दूसरे लड़के से संपर्क हुआ और लगभग 10 बार समलैंगिकता संबंध बनाए । गुदा मैथुन कराने का कोई शुल्क भी नहीं लेता । ये बाध्यकारी लत लग चुकी थी, इससे छुटकारा पाना चाहता था, इसलिए ऑनलाइन परामर्श ढूंढा और मुझ तक पहुंचा। 

 ईलाज से ठीक होने लगा तो इसके छोटे दादाजी ने कहा था की "ये मुरझाया फूल कैसे खिल गया" ? 

प्रयोज्य 21 माह से पूर्ण ठीक है, इसने अपना व्यवसाय शुरू कर दिया है, अब महिलाए, लड़कियां अच्छी लगती है, अब शादी करने का मन करता है और शादी अब जरूर करेगा ।

अब समलैंगिकता की लत छुट चुकी है ये लड़का अपना व्यवसाय को विस्तार दे चुका है । 

निष्कर्ष - लड़को के साथ बाल यौन शौषण  होने पर गुदा मैथुन कराने की एक बाध्यकारी जुनून की लत लग जाती है, कुछ व्यक्ति आत्मबल अच्छा होने से उभयलिंगी बन जाते है । कुछ सामाजिक मान मर्यादा के कारण अपना उपचार ढूंढते उनको उपचार मिल जाते, जिनको उपचार नहीं मिलता उनकी मुझे जानकारी नहीं है । कुछ लोगो ने भ्रम फैला रखा है की समलैंगिकता कोई बीमारी नहीं, जबकि बाल यौन शौषण  के बाद का अनुसंधान किसी के पास नहीं है । 


शनिवार, 4 दिसंबर 2021

समलैंगिकता का ईलाज होता है।

 फेसबुक मित्रो को हार्दिक बधाई, धन्यवाद आप लोगो ने धैर्य रख कर मुझे चाहे अनचाए, रुचि अरुचि से मित्रता रखी और कुछ भगोड़े साबित हुए और नए मित्रो को लाने में सहायता की सभी का आभार धन्यवाद । समलैंगिक अनुसंधान लगभग पूरा हुआ जिसमे छोटे बड़े परिवार के पीड़ित सदस्य को जो एक गंदी लत लग गई थी जिसके कारण बल पूर्वक या बहला फुसलाकर गुदा मैथुन कराने की समस्या हल हुई, ये शौध पत्र लिखने में अभी समय लगेगा, जब भी लिखा जाएगा सार्वजनिक किया जाएगा ।।



सोमवार, 27 सितंबर 2021

Homosexuality is treated

 Homosexuality is treated.

  Homosexuality, being gay has been found to be child sexual abuse.  This is a shocking research done.  First you should know how to become gay, why the common man does not know this.


 Homosexual is not a person, homosexual is a mentality.  The victim has an addiction or habit, this habit can be easily weeded out with psychological counseling.


 Homosexuals are treated, but people do not know about this treatment.


 Human civilization does not develop through homosexuality.


 Homosexuals are not born, they become habitual etc. after suffering from anal sex by force or coercion from their close relatives, friends or acquaintances.  Then by having an addiction or habit of getting them anal sex, they push themselves towards slavery, they would have ended their self-respect, often the simple and timid kind of emotional and timid people living in an unconscious state continue to be sexually abused.  How will you see in this that, A is a boy who has a child age, B can be another teenager, young boy and person or even a mature man, B person because of his sexuality, because of the strong production of semen, a woman needs a vagina to remove it.  Will seek, but if the female sex is not available easily and simply, then [the person who is shy, will resort to masturbation and ] is of a shameless and clever type, then by force or coercion to a simple emotional, weak boy.  Will make that A boy a victim by having anal sex again, now A type of boy cannot resist being weak personality, but he also has a gender, if he was a child, he would not tell anyone out of fear, or if he is young, then he also has  If semen would be produced, he would have some courage even in A type, then he would have anal sex with his partner, otherwise he would destroy his semen by masturbating, in immature age there is destruction of semen and weakness, the penis becomes small,  Then the comparatively normal person who did not masturbate considers the penis smaller, which leads to a feeling of inferiority, but there is no concern.  Not only this, but now due to confusion, A type of person was weak, weak, fearful, now his anxiety also increases, if balanced diet is not found then digestion will also be bad, sleep will also decrease, restlessness also increases again.  The social danger increases, he is not able to even meet his loved ones.  Feels solitude, thoughts of suicide come.


 They are told by spreading the wrong illusion that homosexual is natural, which I believe is completely wrong, I cured the boys suffering in this way, used to eat modern English medicines of stress and anxiety, they have been freed from modern English medicines.  The boys who refused to marry have agreed to get married, those who got married had conceived their wife and became father, I have proof of this.


 The lifestyle that is taught in India is not taught anywhere in the world, Indian civilization is a civilization of the Vedic period, from the birth of human life, sixteen rites and 36 virtues are taught, taught about four ashrams  Goes to, 1॰ Brahmacharya ashram 2. Grihastha ashram, 3 vanaprastha ashram, 4. Sanyas ashram.


 In Brahmachari Ashram, the benefits of semen protection and semen are explained and explained.  Due to lack of knowledge of this, the child sexually abused homosexual victim continues to be exploited by people of type B.


 Due to the slander of the family and society, people do not come forward.


 You know the benefits of semen protection.


 Semen protection is not taught anywhere in the modern world except India.


 Hanuman ji has become the master of incomparable force, he went to the sea with his semen protection, when Lakshman fainted, he flew to the Himalayan mountain from Sri Lanka and brought the part of the small mountain.  Shri Ram Chandra ji was alone with a brother but never worried, remained fearless, did not suffer any fear, but had come after conquering Lanka by damming a bridge in the sea.  The whole world knows about Swami Vivekananda.


 A rotten fruit, keeping good fruits in a basket makes all the fruits rot, and a dirty fish pollutes the whole pond.


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