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शुक्रवार, 14 जनवरी 2022

कैसे समान आयु ले लड़को ने समलैंगिक बनाया ?

कैसे समान आयु ले लड़को ने समलैंगिक बनाया ? 

प्रयोज्य के परामर्श की दिनांक - 27 / 04 / 21 [ अपडेट 13 / 01 / 22 ] 

प्रयोज्य का नाम - गोपनीय रखने के कारण 40050421 

प्रयोज्य की आयु - 22 वर्ष 

प्रयोज्य की शिक्षा -  b tech हिन्दी माध्यम 

प्रयोज्य का व्यवसाय - बेरोजगार 

निदान - प्रयोज्य हिन्दी माध्यम से b tech किया । महिलाओ मे आकर्षण की कमी थी, समलैंगिक बूढ़े आदमियो मे आकर्षण होता है, इसलिए पढ़ाई के बाद प्रतियोगीय परीक्षा मे मन नहीं लगता, शादी करने का मन नहीं करता,  क्योकि 19 वर्ष की समान आयु के लड़को ने जबरदस्ती से गुदा मैथुन किया और मुख मैथुन करवाया, साहस नही था इसलिए विरोध नहीं किया, अब भीड़ भाड़ जगह से थोड़ी घबराहट होती है, समलैंगिक के विचार आते की कोई मेरे गुदा मैथुन कर दे, एक लड़के से लगातार संपर्क रहा। कक्षा 11 मे पढ़ता था तब अश्लील वीडियो देख कर हस्त मैथुन सीखा था, दिन मे तीन से चार बार हस्त मैथुन करता । समलैंगिक शब्द का ज्ञान पहले नहीं था, समलैंगिक संबंध बनाने के बाद ही दोस्त ने बताया था । शर्म बहुत आती है। घबराहट होने से मन मे विचार आते की कई कोई बोल तो नही देगा या मेरे बारे मे ये लोग सोचते होंगे । 

निष्कर्ष - प्रयोज्य मे रूठने की प्रवृति पाई थी, निर्णय लेने मे देरी देखि गई, थोड़ा अहंकार भी पाया गया, [ इस समय मुझे कोरोना हो गया था इसलिए ऑनलाईन परामर्श देने मे विलंब भी हुआ था प्रयोज्य को बता दिया था की मुझे बोलने मे दिक्कत हो रही थी ] ऑनलाईन परामर्श लेने के बाद अब तबीयत ठीक है, प्रयोज्य को शादी करने का मन होता है, महिलाओ मे आकर्षण होता है, समलैंगिक अब बुरे लगते है। अब आत्म विश्वास अच्छा हुआ, अब गुदा मैथुन मुख मैथुन करने की कोई ईच्छा नहीं होती, भीड़ मे जाने की थोड़ी झिझक होती है । दूसरों को संदेश देना चाहूँगा की समलैंगिकता गलत विचार है, इस प्रकार की मानसिकता का उपचार होता है । 

निष्कर्ष - बच्चो को हस्त मैथुन करने से रोकने का ज्ञान देना चाहिए, कोई लड़का अगर किसी लड़के के साथ बहला फुसला कर समलैंगिकता के संबंध बनाते है तो उसका विरोध करना सिखाना चाहिए । गुदा मैथुन, मुख मैथुन को कैसे रोके का ज्ञान समाज मे फैलना चाहिए । 

ऑनलाइन परामर्श दाता 

व्हाट्स एप 091 98290 85951 

मंगलवार, 4 जनवरी 2022

कैसे बाल यौन शौषण से समलैंगिक बना ?

प्रयोज्य को ऑनलाइन परामर्श की दिनांक - 19 / 11 / 20  । [ अपडेट 03 / 01 / 22 ] 

प्रयोज्य का नाम - गोपनीय रखने के कारण 195 । 

प्रयोज्य की आयु - 26 वर्ष । 

प्रयोज्य का व्यवसाय - सरकारी नौकरी । 

प्रयोज्य की समस्या - समलैंगिकता से छुटकारा पाना चाहता । 

निदान - प्रयोज्य को समलैंगिक मे आकर्षण होता था, प्रयोज्य शादीशुदा सरकारी नौकरी मे था, तीन साथी समान आयु, एक ही जाती संप्रदाय के थे, एक दिन अपने साथी से गुदा मैथुन करने का आग्रह किया, तो साथी ने समझाया की ये कार्य अनुचित है । फिर साथी ने ऑनलाइन समलैंगिकता का ईलाज से मेरे नंबर प्राप्त कर प्रयोज्य को दिया । प्रयोज्य ने फिर मुझ से संपर्क करके मुझे बताया की > प्रयोज्य की पढ़ाई कक्षा 2 मे पढ़ता उस समय उसकी आयु 6 / 7 वर्ष थी तब चाचा का लड़का 30 वर्ष का उसके साथ बहला फुसलाकर गुदा मैथुन किया, फिर निरंतर गुदा मैथुन करने की आदत हो गई, अब तक 10 व्यक्ति जिसमे समान आयु और कुछ बड़े आयु के व्यक्तियों से गुदा मैथुन कराया । समलैंगिकता की प्रेरणा चाचा के लड़के से मिल चुकी थी, उसी समय मौसी के लड़के से हस्त मैथुन की प्रेरणा मिल गई, हस्त मैथुन से भी चरम सुख मिलता था, शादी हो चुकी थी, चिंता और डर हमेशा लगा रहता था, इसलिए मनोचिकित्सक से आधुनिक दवाओ का उपयोग किया, दवाई चार महिना खाई, दवाई से कोई आराम नहीं मिला, दवाई खाने से सिर दर्द होता, सिर भारी होता था, आधुनिक दवाई 50 हजार की खा चुका था, क्योकि सरकारी नौकरी थी, रुपयो का अभाव नहीं था, परंतु पूरा रुपया व्यर्थ गया । पत्नी से बात करना अच्छा नहीं लगता था, चिढ़ आती थी, शक्ल अच्छी नहीं लगती । [ जब की पत्नी खूब सूरत थी, उसका फोटो मुझे कई बार बताया था । ]। बचपन मे लड़कियो के कपड़े माता पहनाती थी, बचपन मे लड़कियो वाले खेल भी खेलता था । ऑनलाईन ईलाज लेने मे शंका हुई की ये दस हजार रुपए व्यर्थ तो नहीं जाएंगे, फिर विचार किया जब 50 हजार खर्च किया तो 10 हजार की और रिस्क लेलु, ये फोन से कैसे उपचार करेंगे, आखिर विश्वास किया, और सफल उपचार हुआ । 

निष्कर्ष - प्रयोज्य बचपन मे बाल यौन शौषण से पीड़ित था, अनुसंधान मे देखा गया की एक बार गुदा मैथुन होता तो गुदा मैथुन की आदत बन जाती है, प्रयोज्य बचपना से बड़े होने तक 10 व्यक्तियों से गुदा मैथुन करने का आदि हो चुका था, सरकारी नौकरी लग गई, उस समय शादी भी हो गई, परंतु अनेक प्रकार की दवाई खाने से अपनी स्त्री के साथ यौनि मैथुन करने मे असफल हुआ, अपने साथी कर्मचारी जो कमरे का साथी था, उसको गुदा मैथुन करने का आग्रह किया, उसने मना भी किया और ऑनलाइन परामर्श जो समलैंगिक का इलाज करने का ढूंढ कर मुझ तक पहुंचा जिसका फायदा इस प्रयोज्य को मिला और समलैंगिक दासता से छुटकारा मिला, उसको यथा योग्य आहार व्यवस्था बताई गई, एक महिना ऑनलाइन उपचार के समय एक बार गुदा मैथुन करने के लिए मुझ से क्षमा भी मांगी, फिर ये कभी भी गुदा मैथुन नहीं करवाया, अपनी पत्नी को अब अपनी सरकारी नौकरी पर साथ ले आया, अब अपनी पत्नी अच्छी लगती है, पत्नी से प्रेम करता है, एक वर्ष मे चार बार उसके फोन आए थे, आज संतुलित संतुष्टि पूर्वक अपनी पत्नी के साथ पारिवारिक जीवन बिता रहा है, आज मैने 03 / 01 /22 को फोन करके सम्पूर्ण स्थिति का वार्तालाप किया । 

सामाजिक संदेश - सावधान अपने बच्चो की परिवार मे भरण पोषण के साथ उनकी मनोदशा का भी अध्यन करते रहे, आजकल बाल यौन शौषण बहुत हो रहे है, बच्चो को एकांत मे नहीं रहने दे, सार्वजनिक खेलकुद मे भेजे। अन्यथा समलैंगिक प्राकृतिक होता कहने वाले रुपए कमा रहे है, आग मे घी डालने और आपके बच्चे को बिगड़ने मे सहायता करने वाले गिरोह के रूप मे कमा रहे है ।   

ऑनलाइन परामर्श दाता 

091 98290 85951 

अपडेट 04 / 11 / 2022

प्रयोज्य पिता बन चुका, खुशी की बात है ।

शुक्रवार, 24 जुलाई 2020

गे रुचि

प्रत्येक व्यक्ति के जीवन मे रुचियो का एक महत्व पूर्ण स्थान होता है । जब कोई कार्य करने का निर्धारण कर्ता तो वो विचार करता की क्या करेगा, क्यो करेगा। रुचि सीखी हुई एक अभी प्रेरणा होती है, तो जब वो व्यक्ति अपनी पसंद बना लेता है, तो पसंद के आधार पर कार्य करने को आदि हो जाता है। फिर रुचि वास्तविक जीवन मे स्थायी हो जाती है। इसलिए व्यक्ति के जीवन मे महत्वपूर्ण ये भी है की सीखने के लिए अभिप्रेरणा स्त्रोत भी है।
गिलफोर्ड 1964 के अनुसार "रुचि वह प्रवृति है जिससे हम किसी व्यक्ति, वस्तु या क्रिया की और ध्यान देते है, जिससे आकर्षित होते है या संतुष्टि प्राप्त करते है।"
आइजेनिक और उनके साथियो 1972 के अनुसार, "रुचि व्यवहार की वह प्रवृति है, जो कुछ वस्तुओ,  क्रियाओ या अनुभवो के प्रति कार्य कर सकते मे समर्थ होती है। यह प्रवृति तीव्रता [ और सामान्यकरण ] मे व्यक्ति मे परिवर्तित होती रहती है।"

निष्कर्ष -
किसी भी समलैंगिक को समलैंगिक मे रुचि क्यो होती, क्योकि जिसका कारण एक किसी की प्रेरणा के कारण सीखा हुआ आचरण होता है, इन प्रेरणाओ को बदला जा सकता है ।