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शुक्रवार, 5 मई 2023

समलैंगिक समस्या 03 / 22 / 56

मनोवैज्ञानिक परामर्श चिकित्सा 

03-22- 56

प्रयोज्य 02 / 04 / 2022 सम्पर्क किया . 

कार्यभार - B A  पास 

आयु - 20 वर्ष 

भार - 

शादी -

समस्या - समलैंगिक 

पहलीबार बार गुदा मैथुन - 12 वर्ष की आयु में, 

प्रयोज्य की उस समय 12 वर्ष लगभग 

उसके दोस्त ने जिसकी आयु 17-18 वर्ष . 

हस्त मैथुन शुरू किया . 14 वर्ष की आयु में 3 से 4 बार दिन में . 

15 दिन बाद गुदा मैथुन करने की याद आती तो करते थे. 

नोट- प्रयोज्य में अधुरा परामर्श लिया था . 

गुरुवार, 4 मई 2023

समलैंगिक समस्या 2-22,55

 मनोवैज्ञानिक परामर्श चिकित्सा 

2-22,55 

प्रयोज्य 11 / 03 / 2022 सम्पर्क किया . 

कार्यभार - सिलाई 

आयु - 23

भार - 

शादी - 

समस्या - समलैंगिक 

पहलीबार बार गुदा मैथुन - कक्षा 10  में पढता था तब आयु 16 वर्ष  .

प्रयोज्य की उस समय आय 16 वर्ष 

उसके रिश्तेदार के भाई ने जिसकी आयु 19 वर्ष . मामा का लड़का 

हस्त मैथुन कक्षा 9 से शुरू किया 14 वर्ष की आयु में अश्लील वोडियो देखने से 3 से 4 बार दिन में . 

बाईक चलाते डर लगता था. 

स्वप्न दोष समलैंगिक के विचार से आते है. 

परामर्श के बाद  माता पिता से अच्छा व्यवहार शुरू किया. और  उल्टा पुल्टा बोलना बंद किया . 

बाईक चलाने पर डर लगता था. 

अपडेट -

आज 04-05-23 अच्छा हैं. ठीक हुआ . अब मोटर सायकल चला लेता है. पहले बाईक नहीं चला पाता, डर निकल गया . अब समलैंगिकता की मन में नहीं आता . 

गुरुवार, 29 दिसंबर 2022

अक्ल दवा खाने से नहीं आती ।

 संज्ञान और ज्ञान कोई दवा खाने से नहीं बदला जा सकता है, ये अभ्यास का विषय है । गलत संज्ञान का ज्ञान से गलत अभिविन्यास हो सकता तो सही संज्ञान का ज्ञान वापस गलत अभिविन्यास को सुधार कर ठीक किया जा सकता है । 

समलैंगिक अभिविन्यास के प्रकार 

1.1 जन्म से समलैंगिक अभिविन्यास 

1.2 जैविक असंतुलन से समलैंगिक अभिविन्यास

1.3 बाल यौन शौषण से समलैंगिक अभिविन्यास

1.4 गलत पर्यावरण से लैंगिक पहचान विकृति से समलैंगिक अभिविन्यास 

कुछ लोग केवल इतना कहते समलैंगिक अभिविन्यास का कोई उपचार या निदान नहीं । कारणो का कोई उल्लेख नहीं करता ।

जबकि ये बोला जाता की 

2.1 लिंग परिवर्तन कराया जा सकता हैं ।

2.2 परख नली शिशु पैदा किया जा सकता है ।

2.3 मैथुन क्रिया के मैथुन खिलौने खरीदे जा सकते हैं ।

परंतु गलत संज्ञान का समलैंगिक अभिविन्यास नहीं बदलना चाहिए ।

संसार में अधिकतम बाल यौन शौषण पीड़ित समलैंगिक अभिविन्यास है, ये सब व्यक्ति चाहे तो आसानी से विषम लैंगिक अभिविन्यास आसानी से पा सकते है, ये एक खोया हुआ विश्वास है, ये प्यार से आसानी से वैवाहिक जीवन शैली जी सकते है ।

मनुष्य एक हिंसक जानवर को अहिंसक बना सकता तो गलत संज्ञान को सही संज्ञान आसानी से प्राप्त किया जा सकता हैं ।

मैने बहुत बाल यौन शौषण पीड़ित समलैंगिक अभिविन्यास को विषम लैंगिक अभिविन्यास आसानी बनाया है ।।

सोमवार, 10 जनवरी 2022

क्यों आखिर सुधारना नहीं चाहता ?

प्रयोज्य के परामर्श की दिनांक - 19 / 01 / 21 

प्रयोज्य का नाम - गोपनीय रखने के कारण 37190121 

प्रयोज्य की आयु - 26 वर्ष 

प्रयोज्य की वैवाहिक स्थिति - शादीशुदा 

प्रयोज्य शिक्षा -  अँग्रेजी माध्यम ग्रेजुएट 

प्रयोज्य का व्यवसाय - प्रायवेत नौकरी 

प्रयोज्य की समस्या - समलैंगिक से छुटकारा नहीं चाहता । 

निदान - प्रयोज्य कक्षा 7 वी मे पढ़ता था । उस समय आयु 13 / 14 वर्ष का था, उस समय 22 / 23 साल का लड़के मे बहला फुसला कर गुदा मैथुन कर दिया, अब बाध्यकारी एक जुनून की तरह गुदा मैथुन करना अच्छा लगता है, समलैंगिक अच्छे लगते परंतु सभी नहीं अपनी पसंद का समलैंगिक जो अच्छा लगता उसके साथ गुदा मैथुन करने की ईच्छा होती है । 2013 मे अपने आप फेसबुक से समलैंगिकता की जानकारी मिली, इन्टरनेट से समलैंगिक की विस्तृत जानकारी मिली थी, बचपन मे बड़ी बहिन के कपड़े मम्मी पहनाती थी । पूर्व मे दो मनोवैज्ञानिकों से परामर्श लिया था ।  शादी किए 14 महिना हुआ, पत्नी के साथ पहली बार मैथुन करने की कोशिश मे असफल हुआ, फिर डर बैठ गया । लोगो के बीच मे नहीं रहना चाहता, जल्दी निकालना चाहता हुआ, आत्म हत्या के विचार आते है । मम्मी पापा के लिए जीना चाहता हूँ । मम्मी पापा एक अलग कमरे मे सोते थे, एक दिन प्रयोज्य और उसकी बहिन, के साथ हमेशा सोते थे, एक रात्री मे पिता ने आरोप लगा दिया की भाई बहिन आपस मे मैथुन कर रहे हो, उसी दिन से पिता जी से नफरत हो गई । पिता शक की नजर से हमेशा देखते थे, 2004-2005 भाई बहिन के साथ का आरोप पिता जी ने लगा दिया था । प्रयोज्य ने मान लिया मुझे ठीक नहीं होना, उसका कहना था मुझे नहीं सुधरना, पत्नी के साथ एक बिस्तर पर सोता पर पत्नी से बात नहीं करता, ऑनलाईन उभयलिंग लड़को से बात करता था, घरेलू आवश्यकता के सामान खरीद लाता, पत्नी को बोला तुम जा सकती हो, साथ रहना चाहती तो मुझे आपत्ति नहीं है। उसका हमेशा एक ही वाक्य रहा मुझे समलैंगिक बने नहीं रहूँगा,  समलैंगिक संबंध नहीं रखूँगा और पत्नी चाहे साथ रहे पर किसी भी प्रकार का मैथुन नहीं करूंगा । 

पारिवारिक निदान - प्रयोज्य के पिता अपनी जवानी मे राज्य मे पुलिस की नौकरी लगाने के बाद अपनी पत्नी को शहर लेकर आ गए, पत्नी सरकारी अध्यापिका की नौकरी लग गई, एक लड़की दो लड़के हो गए, फिर कभी अपने पैतृक गाँव नहीं गए, भाई चारा किसी से नहीं था, अपनी पुलिस की नौकरी होने के कारण समय नहीं मिलता, नौकरी और घर के अलावा कही भी आना जाना नहीं था, बच्चे जैसे बड़े होते गए अँग्रेजी स्कूल मे पढ़ते अपनी शिक्षा ली, बड़ी बहिन की शादी हो चुकी थी, प्रयोज्य ने भी शादी की, शादी के बाद ससुराल गया, पत्नी अपने वैचारिक आधार पर मन पसंद नहीं थी । बहन, बहनोई बड़े सुलझे दिमाग के थे, छोटा भाई भी संतुलित था, प्रयोज्य को पढ़ाई के लिए बाहर भेजा वहा किसी ने बहला फुसलाकर गुदा मैथुन किया उसकी लत लगी साथ, पिता के द्वारा हमेशा प्रताड़ित होना एक स्त्री संबंध मे अरुचि हो गई थी, पिता पुत्र मे आपस मे नहीं बनती थी, छोटा भाई बाहर नौकरी करता, घर मे चार लोग प्रयोज्य के पिता, माता, पत्नी और खुद, पर आपस मे किसी के तालमेल नहीं था, पिता पुलिस की नौकरी से रीडयार्ड हो गए थे, माता अध्यापिका जरूर थी परंतु सुबह का अभिवादन एक दूसरे को कोई नहीं करता था, पिता नौकरी से निवृत जरूर हुए परंतु स्वभाव से आज भी कडक पुलिस वाल हो जैसे रहते है, पदौसी घर पर आता तो प्रयोज्य पर गुदा मैथुन का शक करते है, प्रयोज्य की माता ने बताया की मेरे पति मुझे किसी दूसरे आदमी से साथ समान्य बात करते देखते तो शंका करते किससे बात करती क्यों बात करती । प्रयोज्य के पिता अपनी कमाई से घर चलाते, प्रयोज्य भी रसोई घर का समान ले आता । प्रयोज्य के पिता से पूछा की आप की पत्नी और बेटे की कमाई किसके पास रहती तो बोले अपने अपने पास, पत्नी रुपयो का क्या करती तो बोले मुझे नहीं मालूम। प्रयोज्य सब्जी पकाने मे कुशलता हासिल थी, कभी अपनी पसंद का खाना बना भी लेता, पत्नी के हाथ का खाना भी खाता, पत्नी प्रयोज्य के कपड़े भी धोती थी, पत्नी साथ रहे कोई आप्ति नहीं है। प्रयोज्य के पिता पुत्र वधू को उसके पीहर जाने देना नहीं चाहते, क्योकि दहेज का मुकदमा होने का डर रहता था। पिता बो बताया गया की आपका लड़का शारीरिक से घर पर है पर मानसिक तौर से ये खो गया है, जैसे मेले मे बालक अपने अभीभावक का हाथ छुडाकर अपने आंखो से देखि वस्तु के लिए भटक जाता और अभिभावक भी अपनी चेतना दूसरी जगह लगाई घूमते है, जब याद आता तो पता चलता मेरा पुत्र किधर खो गया, इस बात पर पिता ने बताया की मेरा पुत्र इसी प्रकार उसके बचपन मे हम किसी शादी मे नदी पार किसी गाँव मे जा रहे थे तो बारिश आ गई जल्दबाज़ी मे हम अपना बेटा भूल गए पति पत्नी एक दूसरे पर भरोषे रहे, जब चेतन अवस्था मे आए तो पता चला की पुत्र कहा है, नाव मे, बस मे या स्थानीय बाजार मे फिर ढूंढा तो किसी दुकानदार के पास बैठा बिस्कुट खा रहा था, पुत्र रो भी नहीं रहा था, अर्थात पिता पुत्र आज भी अचेतन अवस्था मे जी रहे है । 

निष्कर्ष - संयुक्त परिवार का अभाव  था, पारिवारिक और सामाजिक रिश्तो मे आने जाने का अभाव था, प्रयोज्य को एक बाध्यात्मक जुनून हो चुका था, अब पिता का शक बहुत दुख देता था, पिता भी हठीला और जिद्दी हो चुका एक ही बात मेरे बेटे ने मेरी बेटी के साथ मैथुन किया, जब की बहिन भाई दोनों साथ मैथुन करने का साफ साफ इंकार करते ऐसे कुछ भी नहीं हुआ, ये बात प्रयोज्य को बड़ी दर्द भरी लगती है । एक मकान मे चार लोग रहते है, चारो किसी से भोजन के मतलब के अलाव कोई किसी से बात नहीं करता है। प्रयोज्य के इच्छा अनुसार मकान नहीं बना बताया, उसके ईच्छा के अनुसार डाईनिंग लगाने की बात मे सुधार करवाया, फिर बोला गमले मे कोई पनि नहीं पिलाता, तो उसकी भी निगरानी बताई, चारो लोग एक दुसरे को आपस मे सुबह का अभिवादन करना नहीं आता उसको बताया, प्रयोज्य के बहन बहनोई को बुलाकर सभी साथ साथ भौजन करना बताया, देव स्थान और पर्यटन स्थान घूमने के सुझाव मे स्वीकार किया, पर्यटन स्थान घूमने से पूरे परिवार मे रोचकता रही, नया अहसास हुआ । पर पिता पुत्र का अहंकार आपस मे मेल नहीं खाता, पिता पूर्व की बाते भूलने मे असमर्थ और पुत्र भी पूर्व की बाते भूलने मे असमर्थ, ये आपस मे बाध्यकारी दोनों का अहंकार प्रयोज्य को सुधरने नहीं दे रहा है, प्रयोज्य के पिता ने सामाजिक और सांस्कृतिक जवाबदारी नहीं निभाई । परिवार एक घर नहीं होकर होटल बन चुका है । 

अगर पति पत्नी को साथ रहना तो धेर्य की आवश्यकता है, पिता को पूर्व की बातों को भूलना होगा, पुत्र को खोया प्यार देना होगा, घर परिवार मे मेहमानो की ईज्ज्त करनी होगी, आने जाने वाले और घर के सदयों पर शंका करना बंद करना होगा, पारिवारिक परामर्श से परिवार मे धीमी गति से संचार हो रहा उसको बढ़ाने और गति देने की आवश्यकता है । प्रयोज्य को सांसारिक और सामाजिक नैतिक ज़िम्मेदारी सीखने की आवश्यकता है, ये सीखते ठीक हो सकता है, ईंटरनेट से भी दूर रखने की आवश्यकता है, घर मे समय पर सोए, हास्य विनोद की भी आवशयता है, परिवार मे घुल मिल कर वोल चाल के साथ सामाजिक आना जाना रहना जरूरी है । 

परामर्श दाता 

What's app 091 98290 85951  

शनिवार, 4 दिसंबर 2021

समलैंगिकता का ईलाज होता है।

 फेसबुक मित्रो को हार्दिक बधाई, धन्यवाद आप लोगो ने धैर्य रख कर मुझे चाहे अनचाए, रुचि अरुचि से मित्रता रखी और कुछ भगोड़े साबित हुए और नए मित्रो को लाने में सहायता की सभी का आभार धन्यवाद । समलैंगिक अनुसंधान लगभग पूरा हुआ जिसमे छोटे बड़े परिवार के पीड़ित सदस्य को जो एक गंदी लत लग गई थी जिसके कारण बल पूर्वक या बहला फुसलाकर गुदा मैथुन कराने की समस्या हल हुई, ये शौध पत्र लिखने में अभी समय लगेगा, जब भी लिखा जाएगा सार्वजनिक किया जाएगा ।।



सोमवार, 27 सितंबर 2021

Homosexuality is treated

 Homosexuality is treated.

  Homosexuality, being gay has been found to be child sexual abuse.  This is a shocking research done.  First you should know how to become gay, why the common man does not know this.


 Homosexual is not a person, homosexual is a mentality.  The victim has an addiction or habit, this habit can be easily weeded out with psychological counseling.


 Homosexuals are treated, but people do not know about this treatment.


 Human civilization does not develop through homosexuality.


 Homosexuals are not born, they become habitual etc. after suffering from anal sex by force or coercion from their close relatives, friends or acquaintances.  Then by having an addiction or habit of getting them anal sex, they push themselves towards slavery, they would have ended their self-respect, often the simple and timid kind of emotional and timid people living in an unconscious state continue to be sexually abused.  How will you see in this that, A is a boy who has a child age, B can be another teenager, young boy and person or even a mature man, B person because of his sexuality, because of the strong production of semen, a woman needs a vagina to remove it.  Will seek, but if the female sex is not available easily and simply, then [the person who is shy, will resort to masturbation and ] is of a shameless and clever type, then by force or coercion to a simple emotional, weak boy.  Will make that A boy a victim by having anal sex again, now A type of boy cannot resist being weak personality, but he also has a gender, if he was a child, he would not tell anyone out of fear, or if he is young, then he also has  If semen would be produced, he would have some courage even in A type, then he would have anal sex with his partner, otherwise he would destroy his semen by masturbating, in immature age there is destruction of semen and weakness, the penis becomes small,  Then the comparatively normal person who did not masturbate considers the penis smaller, which leads to a feeling of inferiority, but there is no concern.  Not only this, but now due to confusion, A type of person was weak, weak, fearful, now his anxiety also increases, if balanced diet is not found then digestion will also be bad, sleep will also decrease, restlessness also increases again.  The social danger increases, he is not able to even meet his loved ones.  Feels solitude, thoughts of suicide come.


 They are told by spreading the wrong illusion that homosexual is natural, which I believe is completely wrong, I cured the boys suffering in this way, used to eat modern English medicines of stress and anxiety, they have been freed from modern English medicines.  The boys who refused to marry have agreed to get married, those who got married had conceived their wife and became father, I have proof of this.


 The lifestyle that is taught in India is not taught anywhere in the world, Indian civilization is a civilization of the Vedic period, from the birth of human life, sixteen rites and 36 virtues are taught, taught about four ashrams  Goes to, 1॰ Brahmacharya ashram 2. Grihastha ashram, 3 vanaprastha ashram, 4. Sanyas ashram.


 In Brahmachari Ashram, the benefits of semen protection and semen are explained and explained.  Due to lack of knowledge of this, the child sexually abused homosexual victim continues to be exploited by people of type B.


 Due to the slander of the family and society, people do not come forward.


 You know the benefits of semen protection.


 Semen protection is not taught anywhere in the modern world except India.


 Hanuman ji has become the master of incomparable force, he went to the sea with his semen protection, when Lakshman fainted, he flew to the Himalayan mountain from Sri Lanka and brought the part of the small mountain.  Shri Ram Chandra ji was alone with a brother but never worried, remained fearless, did not suffer any fear, but had come after conquering Lanka by damming a bridge in the sea.  The whole world knows about Swami Vivekananda.


 A rotten fruit, keeping good fruits in a basket makes all the fruits rot, and a dirty fish pollutes the whole pond.


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