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शनिवार, 4 दिसंबर 2021

समलैंगिकता का ईलाज होता है।

 फेसबुक मित्रो को हार्दिक बधाई, धन्यवाद आप लोगो ने धैर्य रख कर मुझे चाहे अनचाए, रुचि अरुचि से मित्रता रखी और कुछ भगोड़े साबित हुए और नए मित्रो को लाने में सहायता की सभी का आभार धन्यवाद । समलैंगिक अनुसंधान लगभग पूरा हुआ जिसमे छोटे बड़े परिवार के पीड़ित सदस्य को जो एक गंदी लत लग गई थी जिसके कारण बल पूर्वक या बहला फुसलाकर गुदा मैथुन कराने की समस्या हल हुई, ये शौध पत्र लिखने में अभी समय लगेगा, जब भी लिखा जाएगा सार्वजनिक किया जाएगा ।।



शुक्रवार, 10 जुलाई 2020

गुदामैथुन समलैंगिकता की समस्या का ईलाज हुआ ।

समलैंगिकता >>> बाल्य काल मे रिश्तेदार ने बलात्कार करने के बाद एक ही मनोवृति हो चुकी ।

1.  मैथुन अभिप्रेरणा ओर निष्पादन [ Sex Motivation and Performance ]
           शोधकर्ता  डाक्टर रघुनाथ सिंह राणावत
           Dietitian & psychologist
          माता आयुर्वेदिक दवाखाना, सापोल, राजसमंद, राजस्थान ।
2. प्रयोज्य परिचय –
प्रयोज्य का नाम - 162 
यौन – पुरुष
आयु – 20  
व्यवसाय - बेरोजगार 
शिक्षा -  BA दूसरा वर्ष विधार्थी  [ प्रयोज्य का नाम गोपनीय रखा गया है । ]
3॰ समस्या परिचय
प्रयोज्य समलैंगिकता से पीड़िता हो चुका अब इस गलत आदत को कैसे छोड़े किस से उपचार कराये, इलाज के लिए रुपया कहा से लाये । इसलिए उसने गूगल ऑनलाइन ढूंढा तो ज्ञात हुआ की अगर आप इस प्रकार कम आयु से पीड़ित है, तो अपने माता पिता को बताओ, प्रयोज्य ने अपनी दादी को बताया तो दादी रुपए दे के मदद की । https://www.youtube.com/c/DrRaghunathSinghRanawat/videos   
6 वर्ष तब 16 वर्ष का एक रिश्तेदार ने बलपूर्वक गुदा मैथुन कर दिया था, और मुख मैथुन भी करवाया था, फिर लगभग 11 वर्ष का हुआ तो कक्षा 6 मे पढ़ता उस समय लगभग 20 - 21 वर्ष के एक रिश्तेदार ने तीन बार गुदा मैथुन किया लिंग पर चुंबन देना, लिंग को मुह मे देना, ये आदत सिखा दिया गया था, दो लड़को से गुदा मैथुन किया और गुदा मैथुन करवाया था। इसी तरह लगातार तीन अन्य व्यक्तियों से संबद्ध हो गए । 
तनाव होने पर नींद नहीं आती, नींद मे बेकार सपने आते, सपनों मे लड़को के साथ समलैंगिक मैथुन होना ही देखता था। 
  ( 1 ) समस्या / कठिनाईया - लड़को के देख कर समलैंगिकता मैथुन की इच्छा होती फिर चिंता, भय, डर सताने लगा, आत्मविश्वास कमजोर होने लगा, लड़कियो मे कोई रुचि नहीं होती थी । 
  ( 2 ) जीवन यापन के लिए लक्ष्य है की विदेश जाने की बड़ी चाहत होती है । 
  ( 3 ) व्यक्तित्व - प्रयोज्य का साधारण व्यक्तित्व था, स्वभाव अशांति प्रिय था, घर मे लड़ाई झगड़ा करना जानता था। परिवार मे धमकी देना आता, रूठता या नाराज होना जानता था । 
बाल्य जीवन से संज्ञानात्मक प्रेरणा और प्रोत्साहन का प्रभाव मैथुन शिक्षण और निष्पादन मे कई रूपो मे पड़ता है। मैथुन सफलता, असफलता, पुरुस्कार, परिणाम के ज्ञान आदि प्रोत्साहन के अनेक रूप है। सहयोग, स्पर्धा, प्रतियोगिता इत्यादि भी प्रोत्साहन के ही रूप है। इनका निश्चित प्रभाव व्यक्ति के मैथुन शिक्षा तथा निष्पादन पर पड़ता है ।
( 1 ) तत्परता से लाभ -- विषम लैंगिक होने के लिए परामर्श के समय जब सही तत्परता रही तब विषम लैंगिक निर्माण के विचार होता जाता था, तब प्रयोज्य सही प्रतिक्रिया विचार करने और समलैंगिक विचारो से अपने आप को बचाने लाभ करता था ।
( 2 ) तत्परता की हानि -- गलत तत्परता उत्पन्न विचार होने से प्रयोज्य गलत दिशा मे प्रयास के विचार आते थे, जिससे समस्या समाधान कठिन लगता था और समस्या के विचार बदल नही जाते तब तक तत्परता को छोडकर सही दिशा मे सक्रिय नही होता था ।

4॰ उद्देश्य –
प्रस्तुत अनुसंधान का उद्देश्य शिक्षण के अभ्यास से प्रयोज्य के वैवाहिक दांपत्य जीवन मे महिला के प्रति आकर्षण निष्पादन पर परिणाम के ज्ञान [ अभिप्रेरणा ] के प्रभाव को सीखना है । उदेश्य व्यक्ति के ज्ञानात्मक सीखने मे धनात्मक स्थानातरण की घटनात्मक प्रदर्शन का अनुसंधान किया । ओनलाइन परामर्श मोखिक मे धनात्मक स्थानांतरण वास्तव मे उद्दीपक तथा प्रतिक्रिया की समानता पर आधारित हुआ ।

5॰ परिकल्पना – मेरे संगत अध्ययनो के आलोक मे परिकल्पना बनायी की परिणाम के ज्ञान [ अभिप्रेरणा ] के प्रभाव को दिखाना है । जो दो क्रिया के उद्दीपक एकांश भिन्न तथा प्रतिक्रिया एकांश अभिन्न होते है, तो उनके बीच धनात्मक स्थानांतरण होता है । [ समलैंगिकता व्यवहार तथा विचारो का प्रभाव वाला व्यक्तित्व आसानी से बदले जा सकते है । ]
6॰ अनुसंधान की कार्य प्रणाली –
मौखिक अभ्यास के साथ अनुसन्धानात्मक अभिकल्प
योजना – प्रयोज्य के पास एक स्मार्ट फोन, बिना रुकावट बेजिझक स्थान का चयन कर के एक निश्चित समयावधि तय किया गया था । महीने मे 10 ऑनलाइन परामर्श नियंत्रित अवस्था मे प्रयोज्य समझा दिया गया था । फिर प्रयोज्य से अंतनिरीक्षण प्रतिवेदन  लिया गया तथा दोनों अवस्थाओ के परिणामो का तुलनात्मक अध्यन किया फिर देखा की धनात्मक स्थानांतरण धटित हुआ या नही

7॰ परीक्षण सामग्री – मेरे दुवारा निर्मित शाब्दिक श्रवण प्रश्नोत्री आवश्यकता अनुसार स्पष्टीकरण पुछ लिया जाता था । प्रतिक्रियाओ को लिख दिया जाता था ।
( 1 ) व्यक्तित्व के लक्षण  चिंता से ग्रस्त, संदेह की प्रवृति, संवेगात्मक नियंत्रण की कमी देखी, भ्रम  पाया, स्थिरता की मध्यम चिंता, विचारो मे अस्थिरता एवं असंगति, संवेगात्मक अनियंत्रण, कल्पना की अधिकता, एकाग्रता की कमी, कमजोर याददास्त, और तनाव से पीड़ित पाया गया ।

8॰ अंतनिररिक्षण रिपोर्ट – परिणाम एवं व्याख्या
(1) अधिगम स्थानातरण मौखिक सीखने मे धनात्मक स्थानांतरण की घटनाओ को श्रवण शक्ति से कौशल सहायता करता रहा ।
(2) निर्देश निर्देशन की पालना के प्रयोज्य हमेशा तत्पर रहा था ।
“शुरू में ये काम प्रयोज्य को कठिन लगा की ये काम मुझ से होगा की नही लेकिन कुछ समय बाद ये कठिनाई दूर हो गई । पहले कठिन सवाल समस्याओ के समाधान के बाद उसको वैवाहिक ज़िंदगी सुनहरी दिखने लगी ।

9॰ विवेचना एवं निष्कर्ष – परिणाम पूछताछ से ज्ञात हुआ कि मेरी परिकल्पना सही प्रमाणित हुई कि परिणाम के ज्ञान [ अभिप्रेरणा ] के मिलने से निष्पादन बेहतर बन जाता है नियंत्रित अवस्था मे प्रयोज्य को उसके दुवारा किए गए निष्पादन के संबंधन मे जानकारी देता रहा था । इस प्रकार से परिणाम ज्ञान हो जाने से अशुद्धि बहुत घट गई और निष्पादन के गुण मे काफी प्रगति या उन्नति हो गई थी ।

प्रयोज्य ने नियंत्रित अवस्था कि अपेक्षा प्रयोगात्मक अवस्था मे बहुत कम त्रुटि की और उसका निष्पादन काफी उन्न्त बन गया । अनुसंधान से ज्ञात हुआ की शिक्षा के अंतनिरीक्षण प्रतिवेदन से भी निष्पादन पर परिणाम के ज्ञान [ अभिप्रेरणा ] का अनुकूल प्रभाव प्रमाणित होता है ।

10॰ निष्कर्ष - प्रस्तुत अनुसंधान के आधार पर निष्कर्ष निकलता है कि परिणाम के ज्ञान [ अभिप्रेरणा ] के कारण निष्पादन उन्न्त बन जाता है । परिणाम के ज्ञान होते रहने पर व्यक्ति को अपनी त्रुटि सुधारने तथा अपने निष्पादन को और भी अच्छा करने का अवसर मिलता है । कुलमिलाकर लड़के की समलैंगिक मानसिकता समाप्त हो चुकी और विषम लिंग मै अभिरुचि आ गई । अब लिंग बदलवाने की इच्छा नहीं  होती है । वह अपना खोया आत्म विश्वास अब आ गया,  मर्द होने का अहसास हो गया । प्रयोज्य की चिंता समाप्त हो चुकी थी। अब खुशी से जी रहा है । 
नोट - सामान्य भाषा मे कहा जा सकता है की मनोवैज्ञानिक परामर्श लेने से प्रयोज्य अब परिवार मे प्रेम से रहने लगा, लड़ाई, झगड़े बंद हो गए, उग्र स्वभाव मे परिवर्तन हो चुका और ठीक हो चुका और समलैंगिकता से विषमलिंग मे आसानी से विचारो की आदत को बदला जा चुका है । अब लड़कियो से मित्रता होने लगी और दो लड़कियो से दोस्ती होने के समाचार भी मुझे सुना दिया ।   
11॰ संदर्भ VMOUKOTA MAPSY 101, MAPSY 10



 वाट्स एप 91 98290 85951

रविवार, 28 जून 2020

मुखमैथुन समलैंगिकता का ईलाज होता है ।

कैसे समलैंगिकता का ईलाज हुआ है ।

समलैंगिकता >>> किस प्रकार मुखमैथुन से समलैंगिक ने मुक्ति पाई ? 
 
1.  मैथुन अभिप्रेरणा ओर निष्पादन [ Sex Motivation and Performance ]

          शोधकर्ता  डाक्टर रघुनाथ सिंह राणावत

                        Dietitian & psychologist

          माता आयुर्वेदिक दवाखाना, सापोल, राजसमंद, राजस्थान ।

2. प्रयोज्य परिचय –

प्रयोज्य का नाम - 149 

यौन – पुरुष

आयु – 20 

भार / वजन  - 100 किलो  

शिक्षा - BA प्रथम वर्ष खुला विश्वविधालय से  [ प्रयोज्य का नाम गोपनीय रखा गया है । ]

सपने - IPS, UPS, APS 

3॰ समस्या परिचय 
प्रयोज्य 8 वर्ष पूर्व मे 12 वर्ष की आयु का था तब मौसी के लड़के जिसकी आयु 15 वर्ष थी उसने अपने लिंग से मुखमैथुन करना सीखा दिया था । 8 वर्ष से इस मुखमैथुन की समस्या से पीड़ित था, स्कूल के साथियो से मानसिक लगाव हमेशा रहता था उनके शरीर पर हाथ घुमाना अच्छा लगता था । दो तीन बार उसके पिता का लिंग भी पकड़ लिया था, इतना बेशर्म हो चुका था, जिस पर मैने पूछा वाकई हरकत अच्छी नही थी, तब उसने बताया की फिर मुझे अपने आप पर घृणा आने लगी । मुखमैथुन के इस क्रम को लगातार करता रहा, अनगिनत कई बार मुखमैथुन के समय उनका पेशाब और वीर्य भी पीया । माता पिता की ये एकलौती संतान था, पिता व्यवसायी है, माता ग्रहणी बताई । मैने  उससे पूछा  के ये मुख मैथुन कब कहा करते तो उसने ये बताया की एक एप ..........{ एप गोपनीय रखता हूँ } से अपने निकटतम साथ समलैंगिक का पता लग जाता है, मैने पूछा ये प्रयोग कहा करते हो तब उसने कहा मम्मी जब भक्ति भाव से गुरुजी के पास जाती तब समलैंगिक को घर बुलाकर मुखमैथुन कर लेता था। कभी कभी ये भी अपनी माता के साथ प्रवचन सुनने जाता था, नित्य पुजा पाठ भी करता था पर मन अस्थिर हो जाता था । ये बिलकुल बेशर्म हो चुका था । स्कूल मे ये हरकत होती रहती थी । स्थायी कोई दोस्त नही था । घर मे माता से अक्सर लड़ाई होती थी । स्त्री स्मरण कभी चाहत नहीं होती थी, पुरुष से चाहत होने पर उत्तेजना आती थी । 
मेरा वीडियो देखने के बाद उसको असामान्य से सामान्य बनने की चाह के कारण परामर्श के लिए समपर्क किया । 


4॰ समस्या समाधान 
प्रयोज्य को परामर्श शुरू किया जिसमे संतुलित आहर का डाइट चार्ट दिया क्योकि इसका 100 किलो वजन था, अब 60 किलो वजन का लक्ष्य मैने बताया तो उसने 80 किलो वजन की चाहत रखी । 15 दिन मे वजन 7 किलो कर कर दिया था । पहले दिन के परामर्श से काफी सुधार हुआ, माता से झगड़ा करना बंद कर दिया, पहले घरेलू काम मे मन नहीं करता पर अब आसानी से माता के रसोई काम या घरेलू काम कर लेता, माता भी खुश होती, और अब माता खुश रहती, माता से लड़ाई नहीं होती । घर का वातावरण अच्छा हो गया, कोचिंग सेंटर मे लड़कियो से आसानी से बात कर लेता है, लड़कियो पहले आँख नहीं मिला सकता था पर अब हंसी मज़ाक भी कर लेता है। साथी लड़किया अच्छी लगती है। अब मन हल्का हो गया, मुख मैथुन से छुटकारा मिल गया अब कालेज वाली अच्छी ज़िंदगी की चाहत बढ़ गई । इस प्रकार से मुख मैथुन की समस्या हल हो गई, मानसिक तनाव मिट गया, पढ़ाई मे अब मन लगता है, पहले शादी करने का मन नहीं होता था, पर ऑनलाईन परामर्श के कारण माता के सपने शादी के प्रस्ताव अब स्वीकार कर लिया । अच्छे नए दोस्त भी बनाना शुरू कर दिया । 

5॰ निष्कर्ष - दिशा बदलने से प्रयोज्य की दशा बदल गई, नजर बदलने से नजारे बदल गए । 





शनिवार, 20 जून 2020

समलैंगिकता का ईलाज होता है, देखिये एक शौध पत्र । निम्न तीन प्रकार की आधुनिक दवाईयां 1. Megiplex10 Mg tab, 2. Halotil 10mg tab, 3. flunil 20mg cap उपरोक्त दवाईया से छुटकारा मिल गया, ये आधुनिक औषधि लगभग डेढ़ वर्ष खाई थी ।




1.  मैथुन अभिप्रेरणा ओर निष्पादन [ Sex Motivation and Performance ]

          शोधकर्ता  डाक्टर रघुनाथ सिंह राणावत

                        Dietitian & psychologist

          माता आयुर्वेदिक दवाखाना, सापोल, राजसमंद, राजस्थान ।

2॰ समस्या समलैंगिकता

पुरुष समलैंगिकता से विषम लैंगिकता मे परिवर्तन करना था 

3॰ परिचय जन्म से मनुष्य एक सामुदायक व्यक्ति होता हैजिसमे एक घर परिवार मे पारिवारिक जीवन शैली से वंश वृदी होना एक प्राकृतिक सुख की अनुभूति है भारतीय संस्कृति मे वैवाहिक जीवन मे पति पत्नी दोनों के लिए संतान उत्तप्ति के लिय कुशल मैथुन प्रेरणा शिक्षण या निष्पादन का कारक या निर्धारक होता है । मिल्टन ने कहा था कि “प्रेरणा सीखने कि एक आवशयक शर्त है” जब की मेरा मानना है कि पीड़ित व्यक्ति कुशल विषमलिंगी मैथुन शिक्षण के लिय उत्प्रेरित हो ।

बाल्य जीवन से संज्ञानात्मक प्रेरणा और प्रोत्साहन का प्रभाव मैथुन शिक्षण और निष्पादन मे कई रूपो मे पड़ता है । मैथुन सफलता, असफलता, पुरुस्कार, परिणाम के ज्ञान आदि प्रोत्साहन के अनेक रूप है । सहयोग, स्पर्धा, प्रतियोगिता इत्यादि भी प्रोत्साहन के ही रूप है । इनका निश्चित प्रभाव व्यक्ति के मैथुन शिक्षा तथा निष्पादन पर पड़ता है ।

व्यक्तिव विकास के समय अज्ञान के कारण मौज मस्ती के परिणाम से अज्ञात होने के बाद जानकारी मिलना की उसका कार्य कितना अच्छा हुआ कितना बुरा हुआ, उसमे कितनी शुद्धि और कितना अशुद्धि हुई । भारतीय समाज मे प्रयोज्य को दोनों प्रकार का ज्ञान बताया जाता है की नकारात्मक से सकारात्मक तुलनात्मक किए गए कार्य या निष्पादन की शुद्धता और अशुद्धता की जानकारी दी जाती हें दोनो प्रकार की अवस्थाओ मे परिणाम के ज्ञान का अनुकूल प्रभाव निषपादन देखा जाता है । फिर भी प्रत्येक प्रयास के निष्पादन की जानकारी मिलते रहने से अधिक लाभ होता है । कारण प्रयोज्य निरंतर अपने कार्य सतर्क तथा उत्प्रेरित रहा करता है । आकर्षण परिणाम के ज्ञान का प्रभाव निष्पादन पर दो रूपो मे पड़ता है । एक तो पुरस्कार के रूप मे तथा दूसरा दंड के रूप मे होता है । जब ये बताया जाता है कि उसका कार्य अच्छा हो रहा है, तो वह पुरुस्कार के रूप मे पुरुस्कृत महसूस करने लगता है । अतः वह अपने कार्य के प्रति अधिक प्रेरित हो उठता है, फलत: उसका उसका कार्य या निष्पादन बेहतर बन जाता है । दूसरी तरफ प्रयोज्य को जब यह पता चलता है की उसका कार्य या निष्पादन घटिया हो रहा हो तो अशुद्धिया हो रही हो तो उसे दंड का अनुभव होता है । अतः वह अपने निष्पादन मे सुधार लाने का प्रयास के साथ सतर्क तथा प्रेरित हो उठता है । फलत: अगले प्रयास मे उसका निष्पादन अपेक्षाकृत बेहतर बन जाता है । स्पष्ट हुआ कि प्रयोज्य को अपने निष्पादन के संबद्ध मे चाहे शुद्धता का ज्ञान मिले या अशुद्धता का दोनों अवस्थाओं मे उसका निष्पादन बेहतर या उन्नत बन जाता है । निष्पादन की प्रगति पर शुद्धता के प्रभाव का प्रत्यक्ष रूप से तथा अशुद्धता से ज्ञान का प्रभाव अप्रत्यक्ष रूप से पड़ता है ।  

1 तत्परता से लाभ विषम लैंगिक होने के लिए परामर्श के समय जब सही तत्परता रही तब विषम लैंगिक निर्माण के विचार होता जाता था, तब प्रयोज्य सही प्रतिक्रिया विचार करने और समलैंगिक विचारो से अपने आप को बचाने लाभ करता था ।

2 तत्परता की हानि गलत तत्परता उत्पन्न विचार होने से प्रयोज्य गलत दिशा मे प्रयास के विचार आते थे, जिससे समस्या समाधान कठिन लगता था और समस्या के विचार बदल नही जाते तब तक तत्परता को छोडकर सही दिशा मे सक्रिय नही होता था

4॰ उद्देश्य

प्रस्तुत अनुसंधान का उद्देश्य शिक्षण के अभ्यास से प्रयोज्य के वैवाहिक दांपत्य जीवन मे महिला के प्रति आकर्षण निष्पादन पर परिणाम के ज्ञान [ अभिप्रेरणा ] के प्रभाव को सीखना है । उदेश्य व्यक्ति के ज्ञानात्मक सीखने मे धनात्मक स्थानातरण की घटनात्मक प्रदर्शन का अनुसंधान किया । ओनलाइन परामर्श मोखिक मे धनात्मक स्थानांतरण वास्तव मे उद्दीपक तथा प्रतिक्रिया की समानता पर आधारित हुआ ।

5॰ परिकल्पना  मेरे संगत अध्ययनो के आलोक मे परिकल्पना बनायी की परिणाम के ज्ञान [ अभिप्रेरणा ] के प्रभाव को दिखाना है । जो दो क्रिया के उद्दीपक एकांश भिन्न तथा प्रतिक्रिया एकांश अभिन्न होते है, तो उनके बीच धनात्मक स्थानांतरण होता है । [ समलैंगिकता व्यवहार तथा विचारो का प्रभाव वाला व्यक्तित्व आसानी से बदले जा सकते है । ]

6॰ प्रयोज्य परिचय –

प्रयोज्य का नाम - 127 

यौन – पुरुष

आयु – 22 

शिक्षा - उच्च माध्यमिक  [ प्रयोज्य का नाम गोपनीय रखा गया है । ]

7॰ सामग्री –

स्मार्ट फोन व वाट्स एप

[ ऑनलाइन काउन्सलिन्ग के लिए ] रजिस्टर लेखन के लिए

8॰ अनुसंधान की कार्य प्रणाली –

मौखिक अभ्यास के साथ अनुसन्धानात्मक अभिकल्प

योजना – प्रयोज्य के पास एक स्मार्ट फोन, बिना रुकावट बेजिझक स्थान का चयन कर के एक निश्चित समयावधि तय किया गया था । महीने मे 10 ऑनलाइन परामर्श नियंत्रित अवस्था मे प्रयोज्य समझा दिया गया था । फिर प्रयोज्य से अंतनिरीक्षण प्रतिवेदन  लिया गया तथा दोनों अवस्थाओ के परिणामो का तुलनात्मक अध्यन किया फिर देखा की धनात्मक स्थानांतरण धटित हुआ या नही । अग्रेजी आधुनिक दवाओ की लत से छुटकारा दिलाना था ।

1, Megiplex Tab व्यापारी नाम [ Propranolol (40mg) + Flunarizine (10mg) ]

2, Halotil 10 mg व्यापारी नाम [ Escitalopram Oxalate (10mg) ]

3, Flunil 20 mg  व्यापारी नाम [ Fluoxetine (20mg) 

9॰ परीक्षण सामग्री – मेरे दुवारा निर्मित शाब्दिक श्रवण प्रश्नोत्री आवश्यकता अनुसार स्पष्टीकरण पुछ लिया जाता था । प्रतिक्रियाओ को लिख दिया जाता था ।

1 व्यक्तित्व के लक्षण लज्जा, गंभीरता, संकोचशीलता, रूढ़िवाद, स्नायुविकृति - [ neuroticism ] स्नायु विकृति की पहचान अधिक देखी गई चिंता से ग्रस्त, संदेह की प्रवृति, संवेगात्मक नियंत्रण की कमी देखी, भ्रम के साथ विभ्रम भी पाया, स्थिरता की मध्यम चिंता, विचारो मे अस्थिरता एवं असंगति, संवेगात्मक अनियंत्रण, कल्पना की अधिकता, एकाग्रता की कमी, कमजोर याददास्त, और तनाव से पीड़ित पाया गया । बोलने की प्रवृति उपचार लेने के कारण सच धीरे धीरे झूठ से सच मे अग्रसर हुआ ।

 

10॰ अंतनिररिक्षण रिपोर्ट – परिणाम एवं व्याख्या

1 अधिगम स्थानातरण मौखिक सीखने मे धनात्मक स्थानांतरण की घटनाओ को श्रवण शक्ति से कौशल सहायता करता रहा ।

2 निर्देश निर्देशन की पालना के प्रयोज्य हमेशा तत्पर रहा था ।

शुरू में ये काम प्रयोज्य को कठिन लगा की ये काम मुझ से होगा की नही लेकिन कुछ समय बाद ये कठिनाई दूर हो गई । पहले कठिन सवाल समस्याओ के समाधान के बाद उसको वैवाहिक ज़िंदगी सुनहरी दिखने लगी ।

11॰ विवेचना एवं निष्कर्ष परिणाम पूछताछ से ज्ञात हुआ कि मेरी परिकल्पना सही प्रमाणित हुई कि परिणाम के ज्ञान [ अभिप्रेरणा ] के मिलने से निष्पादन बेहतर बन जाता है नियंत्रित अवस्था मे प्रयोज्य को उसके दुवारा किए गए निष्पादन के संबंधन मे जानकारी देता रहा था । इस प्रकार से परिणाम ज्ञान हो जाने से अशुद्धि बहुत घट गई और निष्पादन के गुण मे काफी प्रगति या उन्नति हो गई थी ।

प्रयोज्य ने नियंत्रित अवस्था कि अपेक्षा प्रयोगात्मक अवस्था मे बहुत कम त्रुटि की और उसका निष्पादन काफी उन्न्त बन गया । अनुसंधान से ज्ञात हुआ की शिक्षा के अंतनिरीक्षण प्रतिवेदन से भी निष्पादन पर परिणाम के ज्ञान [ अभिप्रेरणा ] का अनुकूल प्रभाव प्रमाणित होता है ।

निम्न तीन प्रकार की आधुनिक दवाईयां  

1. Megiplex10 Mg tab,  

2. Halotil 10mg tab, 

3. flunil 20mg cap 

उपरोक्त दवाईया से छुटकारा मिल गया, यो आधुनिक औषधि लगभग डेढ़ वर्ष खाई थी, द्वाईया छोडते वक्त थोड़ी कठिनाई आई पर पूरक पोषक तत्व देने से पूर्ण सफलता मिल गई । मानसिक तनाव चिंता से मुक्ति मिली वर्तमान वैवाहिक जीवन कुशलता पूर्वक हर्ष से बीते की योजना बना रहा हें । 

12॰ निष्कर्ष  प्रस्तुत अनुसंधान के आधार पर निष्कर्ष निकलता है कि परिणाम के ज्ञान [ अभिप्रेरणा ] के कारण निष्पादन उन्न्त बन जाता है । परिणाम के ज्ञान होते रहने पर व्यक्ति को अपनी त्रुटि सुधारने तथा अपने निष्पादन को और भी अच्छा करने का अवसर मिलता है ।

13॰ संदर्भ VMOUKOTA MAPSY 101, MAPSY 10

 

वाट्स एप 9829085951

 नोट ये लड़का अत्यधिक वाचाल, अत्यधिक अविश्वासी था, अपने आप पर भरोषा नही कर पाता जिसका एक मूल कारण था, उसने छ महीने बाद एक उसकी समलैंगिक मित्र के साथ की दोस्ती को छिपा दिया था । पर अब वर्तमान वो बिलकुल ठीक है। ।

अपडेट -- 25 / 05 / 2022 

इस लड़के की शादी 9 मई 2022 को हो गई, वैवाहिक जीवन से यह लड़का खुश है ।

 

शुक्रवार, 19 जून 2020

समलैंगिकता का इलाज होता है ।

लघु मनोवैज्ञानिक शौध पत्र 

समस्या 
प्रयोज्य समलैंगिकता की समस्या से परेशान था, जिसके कारण मानसिक परेशानी होती थी । 
नाम- 125 [ गोपनीय रखा गया ]
आयु - 28 वर्ष 
शिक्षा - BA / DLA 
व्यवसाय - शिक्षक 
निवास स्थान - अज्ञात [ गोपनीय रखा गया ] 

समस्या परिचय 
प्रयोज्य ने ऑनलाइन परामर्श से बताया की लगभग 12 वर्ष की उम्र मे उसके साथ जाती समाज के शिक्षक मे बलात्कार कर दिया था जिसकी आयु लगभग 40 वर्ष थी । ये व्यक्ति निरंतर प्रयोज्य के साथ गुदा मैथुन करता था जिससे वो समलैंगिता से आदि हो गया था । इस समलैंगिकता के कारण निरंतर तनाव रहता था, चिंता होती थी । चिड़चिड़ा स्वभाव हो गया था, इस लिए दुखी रहता था । प्रयोज्य समलैंगिक निष्क्रिय व समलैंगिक सक्रिय भूमिका निभाता था । 

उपचार उद्देश्य 
समलैंगिकता से छुटकारा पाकर विषम लैंगिक होना चाहता था, अपना शारीरिक व मानसिक स्वस्थ को ठीक रख के विषमलिंगी बनना चाहता था । क्योकि समलैंगिकता की गलतिया निरंतर प्रयोज्य से रही थी, वह सुधार अपनी जीवन शैली सुधारना चाहता था । विषम लैंगिक बनना चाहता था ।  

परिकल्पना  
पूर्व प्रयोज्यों को ऑनलाइन परामर्श से ठीक किया जा चुका था का संदर्भ । 

निष्कर्ष 
प्रयोज्य को प्रथम दिन के ऑनलाईन परामर्श से काफी चिंता कम हुई, तनाव हल्का हो चुका था। प्रफुलित रहने लगा था। इस प्रकार से छ ऑनलाइन परामर्श चला, फिर ऑनलाइन परामर्श बंद कर दिया था क्योकि प्रयोज्य के परामर्श शुक्ल का भी अभाव था, शुल्क मांगे जाने पर परामर्श लेना बंद कर दिया था। तीन बार फोन करने पर जवाब ही दिया, फोन sms का जवाब नहीं दिया, वाट्स एप sms का जवाब नहीं दिया । 

गुरुवार, 11 जून 2020

समलैंगिकता से वैवाहिक जीवन मै समस्या आती

समस्या 
समलैंगिकता से वैवाहिक जीवन मे समस्या उत्पन्न होती है, इसका समाधान दीजिए ? 
उपरोक्त सवाल अपनी समस्या को लेकर एक व्यक्ति ने फोन पर बताया । 
नाम - 17 A आयु 38 
निवास स्थान अज्ञात [ गोपनीय नीति के तहत पहचान छिपाए गए है ] 

समस्या अध्यन [ परिचय ] 
समस्या अनुसंधान से ज्ञात किया गया इस व्यक्ति की समलैंगिकता की तरफ रुझान बढ़ा कैसे ? 
ऑनलाइन फोन परामर्श वार्तालाप से उसने बताया की वह गरीबी अवस्था मे बाल मजदूरी के लिए एक होटल मे नौकरी की शुरुआत की थी, तब होटल मालिक ने उसके साथ गुदा मैथुन को बलपूर्वक कर दिया, पहली बार दर्द, भय, चिंता हुई लेकिन किसी को बता नही सका था, क्योकि होटल मालिक ही ब्लात्कार किया था, मै बाल अवस्था मे गरीब मजबूर था । ब्लात्कारी वो एक राज्य दूसरे राज्य मे होटल व्यवसाय मालिक धनी था । मजबूरी मे होटल नौकरी करनी पड़ी जिसका निरंतर वो होटल मालिक मेरा शोषण करता रहा और मै आदि हो चुका था, जो एक प्रकार से आदतन लत लग चुकी और अब मै अपनी वैवाहिक जीवन सुधारना चाहता हुआ, इस समलैंगिकता के दलदल से बहार आना चाहता हु ? आप मेरी मदद कीजिए ? 

उपचार उद्देश्य 
वैवाहिक जीवन मे दिक्कत आना, पत्नी से शर्म दूर करना, चिंता झिझक व डर मिटाना । सामाजिक जीवन मे ग्लानि को दूर करना, आत्म सम्मान को बढ़ा कर स्वस्थ सामान्य जीवन जी सकना ।  

परिकल्पना 
संगत अध्ययन देखा की आदत हर प्रकार से बदती रहती है, समय बदलता, आयु बदलते देखा, मौसम बदलते देखा, हार्मोन्स बदलते फिर ये गुदा मैथुन की लत, आदत कैसे नहीं बदल सकती । 
सकल पदार्थ है जग माही । 
कर्म हीन नर पावत नाही ॥ 
फिर जब प्रयोज्य के लक्ष्य हो तो समलैंगिक व्यवहार हो विषम लिंग व्यवहार आसानी से स्थानन्तरण किए जा सकते है । 

निष्कर्ष 
प्रयोज्य को जो दिया गया परामर्श उसकी पालना की जिससे उसके आदत मे धीरे धीरे परिवर्तन होने लगा और व्यक्ति ठीक हो गया ।