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शुक्रवार, 9 दिसंबर 2022

बहला फुसलाकर कर समलैंगिक बाध्य जुनून कैसे बनाते और क्यों ?

 मानों या नहीं मानो ?

बच्चा या व्यक्ति अपने हाथ के नाखून दांतो से कुतरते है ।

बच्चा या व्यक्ति अपना अंगूठा चूसने लगे तो ।

तंबाकू सेवन करे, शराब सेवन करें, लिंग विपरित कपड़े पहने अन्य लत हो तो मनोवैज्ञानिक समस्या माना जाता है ।

लेकिन बाल यौन शौषण पीड़ित को दूसरे समलैंगिक व्यक्ति का लिंग चूचने का आदि बनाया जाए तो ये अच्छी बात मानते है आधुनिक काल के डाक्टर और उनके स्वास्थ मंत्री इसको बड़े चाव से कहते ये मैथुन अभिविन्यास है । 

क्यों ऐसा कहते ?

समलैंगिक व्यक्ति बहला फुसला कर बालक / किशोर को मुख मैथुन करवा, गुदा मैथुन करना इसकी आदत लग जाती तो बस बोल दिया ये कोई बीमारी नहीं ये तो मैथुन अभिविन्यास है ।

मैं कहता हूं जो लोग इस प्रकार से प्राकृतिक मानते है, कृपया अपने पुत्रों जो किशोर है उन बच्चों पर प्रयोग सिद्ध कीजिए तो आपकी बात फिर हम सुनेगे और सच दुनियां भी जान जाएगी की मैथुन अभिविन्यास प्राकृतिक होता है ? 

वापस प्रयोग करना चाहिए, तो ही पता चलेगा ।

बहला फुसलाकर कर समलैंगिक बाध्य जुनून कैसे बनाते और क्यों ?

इसका अध्ययन अनुसंधान होना चाहिए ।।

बुधवार, 7 दिसंबर 2022

बाल यौन शौषण समलैंगिक समस्या .

गुदा मैथुन मुख मैथुन - मूर्त और अमूर्त में संघर्ष

बाल यौन शोषण पीड़ित समलैंगिक

मनुष्य एक सामुदायिक प्राणी हैं, संसार में 200 देश हैं, हर देश में राज्यों का समावेश हैं . हर प्रान्त में समाज और उसकी मुलभुत अवधारण हैं. सामाजिक सम्बन्ध निराकार या अमूर्त होते हैं, जो केवल अनुभव से ज्ञात होता है. एक समाज से दुसरे समाज में आश्रिता के साथ जागरूकता होती हैं. समानता और असमानता का सहयोग या असहयोग भी होता हैं.

संसार की सर्वश्रेष्ट सभ्यताओं में भारतीय सभ्यता में जीवन जीने के लिए चार आश्रम व्यवस्थाओं का विकास किया गया हैं. जिसमे जिसमें प्रथम आश्रम ब्रहमचर्य आश्रम में भूमिका पालन के साथ भूमिका वचन होता की कोई भी किशोर अवस्था में बालक बुद्दी निकाल कर ब्रहमचर्य पालन करतें शिक्षा प्राप्त करने में ध्यान लगाएगा और मैथुन प्रवृति से दूर रहेगा और वीर्य रक्षा और करेगा.

25 साल की आयु के बाद वैवाहिक जीवन में अमूर्त मैथुन करेगा जो वंश वृदि में सहायक होगा, नहीं की लैंगिक आनन्द के लिए मैथुन किया जाएगा .

विवाह धार्मिक और वर्तमान क़ानूनी वैधानिक भी है, जो सभी धर्मो में प्रचलित है.

मैथुन एक स्त्री और पुरुष को शारीरिक आवश्यकता भी और सामाजिक आवश्यकता भी है. भारतीय समाज में मैथुन पति पत्नी के रिश्तो से पारदर्शी और आदर्श में माता पिता से प्राप्त होता है. जो सामाजिक स्वीकृत व्यवहार है. वैवाहिक पति पत्नी सम्बन्ध पारिवारिक सामाजिक अलिखित मूल्यों पर निर्धारण है. पति पत्नी मैथुन अमूर्त होते है, जबकि पश्चिमी देश में पशुवत मूर्त रूप से आजकल सार्वजानिक देखने में आते है, पुरुष वेश्या का नाम अभी सुनने में नहीं आया पर आजकल कुछ समिति द्वारा संचालित दिल्ली जैसे शहरों में सुनने को आ रहा है, अश्लील साहित्य और इंटरनेट के माध्यम से नकारात्मक लैंगिक आंनद के साहित्य और वीडियो बहुत उपलब्ध है.

आधुनिक मनोविश्लेषण सिद्धात देने वाले वैज्ञानिक फ्रायड ने मन की तीन अवस्था बताई गई है. जो वर्तमान स्कुल, कालेज में पढाया जाता है, जब की 5500 पूर्व लिखित श्री मद्धभागवत गीता जैसे अनमोल शास्त्र को अनदेखा किया गया है, जिसमे पश्चिमी मनोविज्ञान खत्मः होता वहा से भारतीय मनोविज्ञान शुरू होता है.

1.       ईड – अच्छे बुरे का भेद नहीं होता, इस मन की एक ही इच्छा पूर्ति करना होता है. परिणाम के बारे में अज्ञान.

[ बाल यौन शौषण पीड़ित को भी बताया जाता जब की कारणों को कोई जानना नहीं चाहता. ये विकार समलैंगिक व्यक्ति में ब्रेनवाश करके भर दिया गया है. केवल लैंगिक आनंद को मैथुन अभिविन्यास नाम दे दिया गया जो भारतीय समाज संस्कृति के लिए घातक है. ] जो समलैंगिक किसी भी कारण से बना बस आन्नद छोड़ना नहीं चाहता, वैसे सिखा हुआ आचरण मुश्किल से छुटता है.

2.       ईगो – नैतिक अनैतिक ज्ञात लाभ हानि में भी सत्ताधारी बनने की चाहत. ज्ञात लापरवाह माना जा सकता है.

3.       सुपर इगो – प्रकास वान नैतिक मन धर्म सभ्यता, संस्कृति का ध्यान और उसको निभाना होता है.

समिति एक ऐसा संगठन है जो स्वार्थ पूर्ति के लिए बनाया जाता है. जो केवल अपने हितो को पूरा करता है, इनका उद्देश्य अपने सदस्यों सामान्य या विशेष इच्छाओं की संतुष्टि के अलावा कुछ नहीं, अगर कोई समिति के सदस्य बाल यौन शौषण पीड़ित समलैंगिकता उपचार का विरोध करते तो, अपने पुत्र भाई और परिवार के लगभग 12 वर्ष की आयु लडकें का किसी व्यस्क से बाल यौन शौषण करवा कर मुझे गलत साबित कर दे, की बाल यौन शौषण से समलैंगिक नहीं बनते.

रविवार, 9 जनवरी 2022

गुदा मे बोतल डालने के परिणाम क्या होते है ?

प्रयोज्य को परामर्श देने की दिनांक - 11 / 01 / 2021 [ अपडेट 08 / 01 / 2022 ] 

प्रयोज्य का नाम - गोपनीय रखने के कारण 36102 

प्रयोज्य की आयु - 29 वर्ष 

प्रयोज्य की वैवाहिक स्थिति - कुवारा 

प्रयोज्य का काम - कम्यूटर से बिल्डिंग के अमिनेशन 

प्रयोज्य की समस्या - बोतल से गुदा मैथुन करने के कारण अपने आप मे तनाव । 

निदान - शादी करने का कभी मन हा करता, शादी करने का मन कभी ना करता है, परीक्षण मे पाया की प्रयोज्य ने 10 वर्ष पूर्व बोतल से गुदा मैथुन किया था, उसके बाद हस्त मैथुन भी किया जिसके कारण तनाव से रहने लगा, डर, चिंता बहुत रहने लगी । बाहर जाने मे दिक्कत होती थी, घर मे रहना पसंद होता है, घर अच्छा लगता और डर नहीं लगता। बाहर निकालने पर ऐसा लगता कई कोई बोल न दे, कल्पना करता रहता है, नींद की दवाई खाने से चिंता कम होती है । ऐसा लगता है की खुद की पहचान खो गया हूँ, पहले अच्छे से बात करता था, अब गुदा ढीला हो गया ये चिंता रहती है । दो बहनो की शादी हो गई, घर वाले संदेह करते की दोस्त की वजह से मै ऐसा हो गया हूँ, भ्रम की अवस्था मे रहता हूँ, चिंता होती है, ऐसा लगता है, सब सपना है । अच्छा व्यवहार नहीं होने से मनोचिकित्सक से उपचार करवाया, विचार कम होते तो मुह मे छाले हो जाते, घर मे झगड़ा हो जाता है । महिला का पिछवाड़ा अच्छा लगता है, महिला को देखना अपराध लगता है, ऐसा सोचता हूँ की शादी के मंच पर लोग मेरी क्या बात करेंगे । कोई भी मेरी सुनता नहीं ऐसा लगता है, मै बोल रहा हूँ। 2018 मे प्रेमिका थी वो छोड़ कर चली गई, सात - आठ साल से प्रेम था। मम्मी ने मनोचिकित्स के पास उपचार के लिए ले कर गई थी । अप्रेल 2020 मे कोरोना का लॉकडाउन लगा उस समय मम्मी की म्रत्यु हो गई । दो बहने बड़ी थी शादी हो गई, बचपन मे माता बहनो के कपड़े पहना देती थी । प्रयोज्य ने 9 वी ऑनलाईन परामर्श मे बताया की प्रेमिका छोड़ कर चली गई, तो आत्म हत्या के लिए फिनेल पी लिया था । रात्री मे देरी तक मोबाईल फोन देखता था, इसलिए सुबह देरी से उठता था । 

निष्कर्ष - प्रयोज्य एक निश्चित दायरे मे रहने के कारण से अपने व्यक्तित्व का फ़ैसला नहीं ले सकता था । महानगर जैसे शहर का निवासी होकर एक सीमित अवसर मे ज़िंदगी जी रहा था, जीवन मे अच्छा मित्र होना भी जरूरी होता है । प्रयोज्य के पिता ग्रामीण पृष्ट भूमि से थे परंतु गाँव औए समाज से दूर हो चुके थे, शहर मे एक निश्चित दायरे मे ही रहना दुख दाई हुआ, प्रयोज्य पर दोहरी समस्या आ गई, एक प्रेमिका छोड़ कर चली गई, दुसरा लॉकडाउन मे घर मे रहना पड़ा फिर माता की मृत्यु भी चिंता की बढ़ोतरी हो गई । प्रयोज्य ठीक होना चाहता था, फिनेल पीने का अपने परिवार को नहीं बताया, ना किसी चिकित्सक को बताया, प्रेमिका छोड़ कर चली गई ये बात भी घर वालो को नहीं बताई । आज 08 / 01 /22 को फोन पर ज्ञात हुआ की वो ऑनलाईन परामर्श लेने के बात आसानी से 30 - 35 हजार महिना कमा लेता है । पिता एक प्रायवेट बैंक मे नौकरी थी, लॉकडाउन मे नौकरी भी चली गई थी, मैने एक महिना की बजाय इस को दो महिना ऑनलाईन परामर्श दिया, एक अतिरिक्त महिना मेरी तरफ से क्योकि माता थी नहीं पिता को हो घर का काम करना पड़ता था, इसकी बहन से भी संपर्क मे दिशा निर्देश दिया था । प्रयोज्य के पिता से लगातार संपर्क मे रहने से प्रयोज्य के लिए दिये गए दिशा निर्देश का पालन होता था, प्रयोज्य मे काफी सुधार आया, ऑनलाईन परामर्श के समय ही उसको भी ओंनलाइन बिल्डिंग फिल्म एमिनेशन का काम मिला जो काफी समय से बंद था। इसकी दिन चर्या भी बिगड़ी हुई थी वो अब ठीक हो चुकी है । 

सामाजिक संदेश - कमाई के लिए अपना गाँव भले छोड़ना पड़े परंतु लगातार गाँव के सामाजिक और संस्कृतिक कार्यक्रम मे अपने परिवार को जरूर ले जाना चाहिए । सामाजिक रिश्स्तेदारी सौहार्द हमेशा बनाए रखने के अदृश्य और अगिनित लाभ भी होते है । 

ऑनलाईन परामर्श दाता 

091 98290 85951 

बुधवार, 5 जनवरी 2022

कैसे समय पर शादी नहीं होने से समलैंगिक बने ।

प्रयोज्य के ऑनलाईन परामर्श दिनांक - 28 / 11 / 20 । [ अपडेट 0 4/ 01 / 22 ]

प्रयोज्य का नाम -  गोपनीय रखने के कारण 32197 । 

प्रयोज्य की आयु - 30 वर्ष । 

प्रयोज्य की शिक्षा - 10 वी । 

प्रयोज्य का काम - दैनिक मजदूर । 

प्रयोज्य की समस्या - समलैंगिकता से परेशानी । 

निदान - प्रयोज्य की आयु 16 वर्ष होने पर अपने दोस्त की प्रेरणा से हस्त मैथुन शुरू किया था, दिन मे कभी दो बार कभी एक बार रोज हस्त मैथुन करता था, और ये हस्त मैथुन लगातार जारी है। जब 28 की आयु होने पर समान आयु के पड़ौसी गाँव के लड़के से दोनों ने आपस मे मिलकर एक दूसरे के गुदा मैथुन किया, फिर ये एक आदत बन गई फिर दो वर्ष लगातार समलैंगिकता का संबंध बना रहा, आपस मे गुदा मैथुन 2 से 5 मिंट आराम से कर लेते थे ।  भीड़ मे जाने का मन नहीं करता एकांत अच्छा लगता था । घर मे काका को लगा की उसका भतीज नपुसंक हो गया है । फिर तहसील के चिकित्सक को दिखाया की लिंग मे जोश नहीं आता, आधुनिक अग्रेजी दवाई लिखी परंतु उससे आराम नहीं मिला । महिलाओ से नजर नहीं मिला सकता था, शर्म आती थी । वीर्य की रक्षा करनी चाहिए का ध्यान नहीं था । 

निष्कर्ष - प्रयोज्य कम आयु मे अधिक हस्त मैथुन करने से, एकांत मे और शीघ्रता से करने के कारण एक शर्म और डर बैठ गया था । ऑनलाइन परामर्श लेने के कारण अब तबीयत थी है, महिलाए अब अच्छी लगने लगी, लड़कियो मे आकर्षण होता है, दिनांक 08 /09 / 21 अपडेट होने पर बताया की अब लड़की को देख कर लिंग मे तनाव आता है और एक लड़की से प्रेम हुआ और उसके साथ संभोग किया। समय पर शादी नहीं होने के कारण निष्कर्ष निकाला की एक हस्त मैथुन अल्प आयु मे शुरू होने के साथ युवा आयु मे समलैंगिक संबंध बनाना एक मजबूरी हो गई, क्योकि गाँव मे किसी गैर लड्की के साथ सहवास नहीं कर सकते थे । 

सामाजिक संदेश - माता पिता को चाहिए की जवान होने पर अपने बेटे - बेटी की समय पर शादी कर देनी चाहिए ।जिस प्रकार इस प्रयोज्य लड़के की समय पर शादी नहीं होने के कारण अपने समान आयु के लड़के के साथ आपस मे एक दूसरे के गुदा मैथुन कर लिया था, फिर ये एक आदत हो गई । कुछ लोग आजकल दूसरे के बेटे बेटियो को बिगड़ने मे सहायता कर रहे है, क्योकि बिगाड़ने मे भी उनको रुपया मिल रहा है ।  

ऑनलाइन परामर्श दाता 

091 98290 85951 

रविवार, 28 जून 2020

मुखमैथुन समलैंगिकता का ईलाज होता है ।

कैसे समलैंगिकता का ईलाज हुआ है ।

समलैंगिकता >>> किस प्रकार मुखमैथुन से समलैंगिक ने मुक्ति पाई ? 
 
1.  मैथुन अभिप्रेरणा ओर निष्पादन [ Sex Motivation and Performance ]

          शोधकर्ता  डाक्टर रघुनाथ सिंह राणावत

                        Dietitian & psychologist

          माता आयुर्वेदिक दवाखाना, सापोल, राजसमंद, राजस्थान ।

2. प्रयोज्य परिचय –

प्रयोज्य का नाम - 149 

यौन – पुरुष

आयु – 20 

भार / वजन  - 100 किलो  

शिक्षा - BA प्रथम वर्ष खुला विश्वविधालय से  [ प्रयोज्य का नाम गोपनीय रखा गया है । ]

सपने - IPS, UPS, APS 

3॰ समस्या परिचय 
प्रयोज्य 8 वर्ष पूर्व मे 12 वर्ष की आयु का था तब मौसी के लड़के जिसकी आयु 15 वर्ष थी उसने अपने लिंग से मुखमैथुन करना सीखा दिया था । 8 वर्ष से इस मुखमैथुन की समस्या से पीड़ित था, स्कूल के साथियो से मानसिक लगाव हमेशा रहता था उनके शरीर पर हाथ घुमाना अच्छा लगता था । दो तीन बार उसके पिता का लिंग भी पकड़ लिया था, इतना बेशर्म हो चुका था, जिस पर मैने पूछा वाकई हरकत अच्छी नही थी, तब उसने बताया की फिर मुझे अपने आप पर घृणा आने लगी । मुखमैथुन के इस क्रम को लगातार करता रहा, अनगिनत कई बार मुखमैथुन के समय उनका पेशाब और वीर्य भी पीया । माता पिता की ये एकलौती संतान था, पिता व्यवसायी है, माता ग्रहणी बताई । मैने  उससे पूछा  के ये मुख मैथुन कब कहा करते तो उसने ये बताया की एक एप ..........{ एप गोपनीय रखता हूँ } से अपने निकटतम साथ समलैंगिक का पता लग जाता है, मैने पूछा ये प्रयोग कहा करते हो तब उसने कहा मम्मी जब भक्ति भाव से गुरुजी के पास जाती तब समलैंगिक को घर बुलाकर मुखमैथुन कर लेता था। कभी कभी ये भी अपनी माता के साथ प्रवचन सुनने जाता था, नित्य पुजा पाठ भी करता था पर मन अस्थिर हो जाता था । ये बिलकुल बेशर्म हो चुका था । स्कूल मे ये हरकत होती रहती थी । स्थायी कोई दोस्त नही था । घर मे माता से अक्सर लड़ाई होती थी । स्त्री स्मरण कभी चाहत नहीं होती थी, पुरुष से चाहत होने पर उत्तेजना आती थी । 
मेरा वीडियो देखने के बाद उसको असामान्य से सामान्य बनने की चाह के कारण परामर्श के लिए समपर्क किया । 


4॰ समस्या समाधान 
प्रयोज्य को परामर्श शुरू किया जिसमे संतुलित आहर का डाइट चार्ट दिया क्योकि इसका 100 किलो वजन था, अब 60 किलो वजन का लक्ष्य मैने बताया तो उसने 80 किलो वजन की चाहत रखी । 15 दिन मे वजन 7 किलो कर कर दिया था । पहले दिन के परामर्श से काफी सुधार हुआ, माता से झगड़ा करना बंद कर दिया, पहले घरेलू काम मे मन नहीं करता पर अब आसानी से माता के रसोई काम या घरेलू काम कर लेता, माता भी खुश होती, और अब माता खुश रहती, माता से लड़ाई नहीं होती । घर का वातावरण अच्छा हो गया, कोचिंग सेंटर मे लड़कियो से आसानी से बात कर लेता है, लड़कियो पहले आँख नहीं मिला सकता था पर अब हंसी मज़ाक भी कर लेता है। साथी लड़किया अच्छी लगती है। अब मन हल्का हो गया, मुख मैथुन से छुटकारा मिल गया अब कालेज वाली अच्छी ज़िंदगी की चाहत बढ़ गई । इस प्रकार से मुख मैथुन की समस्या हल हो गई, मानसिक तनाव मिट गया, पढ़ाई मे अब मन लगता है, पहले शादी करने का मन नहीं होता था, पर ऑनलाईन परामर्श के कारण माता के सपने शादी के प्रस्ताव अब स्वीकार कर लिया । अच्छे नए दोस्त भी बनाना शुरू कर दिया । 

5॰ निष्कर्ष - दिशा बदलने से प्रयोज्य की दशा बदल गई, नजर बदलने से नजारे बदल गए । 





बुधवार, 17 जून 2020

समलैंगिकता का ईलाज होता है ।

मनोवैज्ञानिक शौध पत्र


समस्या 

प्रयोज्य समलैंगिकता से पीड़ित था । चिंता से परेशान होता पढ़ाई मे मन नही लगता था ।
प्रयोज्य का नाम - 118
प्रयोज्य की -  आयु 22 वर्ष
प्रयोज्य की शिक्षा - स्थानक विज्ञान तृतीय वर्ष
निवास स्थान - अज्ञात [ गोपनीय रखा गया ]

समस्या परिचय 

ऑनलाइन परामर्श से प्रयोज्य ने बताया की वह समलैंगिकता से पीड़ित था, जिसकी वजह से पढ़ाई करने मे मन नहीं लगता था । जिसकी वजह से मानसिक तनाव भी रहता था, शादी की चिंता होती थी। ऑनलाइन समलैंगिता की सभी भ्रामक जानकारी से भी परेशान था । समलैंगिता से विषम लैंगिकता आना चाहता था। भीड़ समूह अच्छे नही लगते थे ।

उपचार उद्देश्य 

समलैंगिकता से विषम लैंगिता मे आना चाहता था, ऑनलाइन सर्च से ज्ञात हुआ समलैंगिकता का ईलाज हो सकता है । शादी की इच्छा पर लड़कियो के प्रति आकृषण नहीं होना से परेशान हो जाता था । कक्षा 6 मे पढ़ता तब से गुदा मैथुन साथी से पीड़ित था। अब इस आदत से छुटकारा पाना चाहता था ।

परिकल्पना 

पूर्व प्रयोज्य के निदान हो चुके थे उनके अनुसार इसका भी उपचार हो सकता है ।

निष्कर्ष 

प्रयोज्य व्यक्ति भूल या भ्रम से पीड़ित समलैंगिक बन गया जिसके बाद एक आदतन गुदा मैथुन का अभ्यास होता रहा, अज्ञान के कारण ये समलैंगिता चुपके से करने से डर, भय, चिंता से परेशान था । ऑनलाइन मे भ्रामक लेख दिये हुए थे की समलैंगिकता का कोई ईलाज नही, फिर मेरे यू ट्यूब चैनल से वाट्स एप नंबर 91 98290 85951 से संपर्क परामर्श हुआ। उसके बाद ऑनलाइन एक महीने का परामर्श लेने से ठीक हो गया, प्रयोज्य दिशा निर्देशन का पालन किया साथ ही आवश्यक संतुलित आहार के दिशा निर्देशन का भी पालन करने से वर्तमान मे ठीक है। चिंताए अब मिट चुकी और महिलाओ मे रुचि पैदा हो गई । 

बुधवार, 13 मई 2020

गुदा मैथुन छोटे बच्चों के साथ

बाल रति Pedophilia
इस प्रकार के कामुक व्यक्ति का मुद्दा एक बालक होता है । अथवा किशोरावस्था के लड़कों को ज्यादातर व कुछ लड़कियों भी कामुक सम्बन्ध पाये गए है । छोटे बच्चों के साथ कामुक संतुष्टि को मिटाने के लिए बहुत प्रकार से बाल व्यभिचारी अपनी कोशिश करता है । ज्यादातर बाल व्यभिचारी पुरुषों का होना पाया गया है, जो अपना लिंग को हाथों से सहलाने का क्रिया करता व अपना लिंग को बच्चों के मुख में रखने के बाद मुख मैथुन करने का प्रयास करता है । इसी प्रकार से उन छोट बच्चों के साथ गुदा मैथुन भी व्यभिचारी व्यभिचार करता है । इस प्रकार के भ्रष्ट आचरण करने वाले कि औसत आयु 40 वर्ष देखी गई होती है । एक अध्ययन में Rivitch & Weiss, 1962 में यह देख गया था कि अधिक आयु के भ्रष्ट आचरण अधिक आयु के लोग छोटे छोटे बच्चों के साथ व्यभिचार करते है । जब कि जवान लड़के भी अपने से छोटी लड़कियों के साथ भी गलत अमान्य मैथुन करते देखे गए । इस प्रकार के कामुक सम्बन्धो से बालकों के ऊपर एक प्रकार की लत लगना शुरू हो जाती भी देखी गई है, जिसके कारण से वह पीड़ित लड़का चिंता, भय व आत्मघाती प्रभाव पड़ता भी है ।
ये मानसिक विकारों में होते हुए भी आजकल इस पर अनुसंधान नहीं होने के कारण समाज विरोधी गतिविधियों के मैथुन को आज आपराधिक मामलों की बजाय इसको सामाजिक मान्यताओं में संख्या बल के कारण वोटो की राजनीति से सामान्य आचरण मान कर अपराध मुक्त कर दिया परन्तु पीड़ित बालक अब व्यक्ति हो चुका होता है, जो अपनी व्यथा किसी को बता नही सकता । वैवाहिक संबंधों में दरारें आती व मानसिक नपुंसकता को लेकर दुखी रहता और अपनी पहचान खो चुका होता है ।
मेरा ये अनुसंधान है, जो मानसिक स्वास्थ्य से अपने आपको समलैंगिक संबंधों से नपुंसक अपने आप समलैंगिक मानता तो वो पूर्ण मर्द होते है। खोया व्यक्तित्व वापस पाया जा सकता है । जो जन्म से मर्द होते है, बस उसके लिए एक माह का ऑनलाइन काउंसिलिंग की आवश्यकता होती हैं । फिर वैवाहिक जीवन मे अपनी मर्दानगी का जीवन जि सकता है ।
वाट्स एप 091 9829085951