सोमवार, 22 सितंबर 2014

एक प्रकार का पागलपन

मनोजन्य मनोविक्षिप्तता
कैटाटानिक मनोविदिलता इस प्रकार की बीमारी अचानक रूप से विकसित हो जाती हैं. जिसकी दो अवस्था होती हैं. प्रथम मूर्छित अवस्था और दूसरी उत्तेजित अवस्था. एक अवस्था में दूसरी अवस्था और दूसरी अवस्था में से पहली अवस्था में पहुंच सकता हैं. किसी रोगी में एक अवस्था अधिक समय और दूसरी कम समय रह सकती हैं.
मुर्च्छित अवस्था - में रोगी घंटो तक बैठा रहता हैं, बैठे रहने से पैरो पर सूजन आ जाती हैं, पाँव नीले पड़ जाते हैं. रोगी पर आदेश, धमकिया और वेदनापूर्ण उत्तेजना का कोई प्रभाव नहीं देता हैं.
उत्तेजित अवस्था -क्रियाशील स्थिति बहुत बढ़ जाती हैं, बेतुकी, अस्पष्ट, और जोर जोर से बाते करता हैं. दुसरो के सामने गन्दा व्यवहार जैसे हस्त मैथुन भी कर सकता हैं. गतिशीलता बनी रहती हैं, स्वंय पर आक्रमण कर सकता हैं. बातचीत निम्न प्रकार से करता हैं .
प्रश्न - आप क्या कर रहें हैं.
रोगी - बुराइयों से लड़ा रहा रहा हूँ. अपराधियों से लड़ा रहा हूँ 
प्रश्न - बुराईया और अपराधी क्या होते. 
रोगी - आप जानते हैं, भगवान जानते हैं. आप को मेरा पाँव छूना चाहिए, आप को मेरी आराधना करनी चाहिए ?