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मंगलवार, 23 सितंबर 2014

एक प्रकार का पागलपन

मनोजन्य मनोविक्षिप्तता
पैरानाइड मनोविदिलाता 
     इस प्रकार की मनोविदिलाता अन्य प्रकार से अधिक मात्रा में पायी जाती हैं. इन मनोविदिलाता में रोगी अनेक प्रकार से व्यामोह से पीड़ित होता हैं. जो अर्थहीन और तुरंत परिवर्तन होने वाले व्यामोह होते हैं.
 इन के व्यक्तिगत सम्बन्ध बिगड जाते हैं, इन रोगी को वहम या शंका रहती की उनके रिश्तेदार उन पर निगरानी करते हैं. वो सोचता रहता की सम्बधि मेरे ही बारे में बाते करते हैं. मुझे जहर दे कर कही मार ना दें. 
     रोगी स्वंय को महानतम का व्यामोह भी पाया जाता हैं. रोगी को सुनने और देखने से सम्बन्धित विभ्रम अनुभव होता हैं. विचित्र आवाज़ सुनने के बाद तुरंत तोड़-फोड़ करना शुरू कर देता हैं. 
प्रश्न - आप कैसा अनुभव करते हो ?
रोगी - मेरा अनुमान हैं ...अब बिलकुल ठीक 
प्रश्न - विचित्र आवाज़ आप को सुनाई देती क्या ?
रोगी - नहीं कभी नहीं . मुझे सुनने में कोई रूचि नहीं.
प्रश्न - आप कैसा लगता हैं 
रोगी -  मुझे नहीं मालूम, मै बिलकुल ठीक हूँ.. मुझे कोई परवाह नहीं.   

सोमवार, 22 सितंबर 2014

एक प्रकार का पागलपन

मनोजन्य मनोविक्षिप्तता
कैटाटानिक मनोविदिलता इस प्रकार की बीमारी अचानक रूप से विकसित हो जाती हैं. जिसकी दो अवस्था होती हैं. प्रथम मूर्छित अवस्था और दूसरी उत्तेजित अवस्था. एक अवस्था में दूसरी अवस्था और दूसरी अवस्था में से पहली अवस्था में पहुंच सकता हैं. किसी रोगी में एक अवस्था अधिक समय और दूसरी कम समय रह सकती हैं.
मुर्च्छित अवस्था - में रोगी घंटो तक बैठा रहता हैं, बैठे रहने से पैरो पर सूजन आ जाती हैं, पाँव नीले पड़ जाते हैं. रोगी पर आदेश, धमकिया और वेदनापूर्ण उत्तेजना का कोई प्रभाव नहीं देता हैं.
उत्तेजित अवस्था -क्रियाशील स्थिति बहुत बढ़ जाती हैं, बेतुकी, अस्पष्ट, और जोर जोर से बाते करता हैं. दुसरो के सामने गन्दा व्यवहार जैसे हस्त मैथुन भी कर सकता हैं. गतिशीलता बनी रहती हैं, स्वंय पर आक्रमण कर सकता हैं. बातचीत निम्न प्रकार से करता हैं .
प्रश्न - आप क्या कर रहें हैं.
रोगी - बुराइयों से लड़ा रहा रहा हूँ. अपराधियों से लड़ा रहा हूँ 
प्रश्न - बुराईया और अपराधी क्या होते. 
रोगी - आप जानते हैं, भगवान जानते हैं. आप को मेरा पाँव छूना चाहिए, आप को मेरी आराधना करनी चाहिए ?  

बुधवार, 17 सितंबर 2014

एक प्रकार का पागलपन

मनोविदिलता
मनोविदिलता के लक्षण के धीरे-धीरे उत्पन्न और विकसित होते हैं, रोगी को वातावरण के प्रति रुचियाँ संकीर्ण होती रहती.धीरे-धीरे सामाजिक समन्वय टूटने लगते हैं. विपरीत लिंग के प्रति रूचि कम होती हैं. रोगी अपनी काल्पनिक दुनिया में खोया रहना अधिक पसंद करता हैं. रोगी चिडचिडा और मुड़ी हो जाता हैं. सफलता या असफलता के प्रति परवाह और रूचि धीरे-धीरे कम होने लगती हैं. वह किसी प्रकार की से अपने दायित्वों की जवाबदेही नहीं लेता किसी प्रकार की कोई जवाबदारी के परिणामों परवाह नहीं करता, परिवार के लोगो पर आक्रमण करता. परिवार में तोड़-फोड़ भी करता जिसके कारण में समन्वय की कमी पाई जाती हैं. इस प्रकार के रोगी से बातचीत का व्यवहार निम्न प्रकार से होता हैं.
प्रश्न - आप कैसा अनुभव करते हैं ?  
रोगी - मेरा अनुमान हैं ........बिलकुल ठीक .
प्रश्न - क्या आप को विचित्र आवाज़ सुनाई देती हैं.
रोगी - नहीं, कभी नहीं, मैं सुनने में इच्छुक ही नहीं.
प्रश्न - आप को यहाँ पर कैसा लगता हैं.
रोगी - मुझे नहीं मालूम, मुझे कोई परवाह नहीं. बिलकुल ठीक.
अगर आपके परिवार के किसी सदस्य को इस प्रकार से कोई शिकायत हैं तो आपके निकट मनोविज्ञानी से सम्पर्क करे.