कैसे बलवीर्य -वृद्धि, स्तंभन तथा कामोत्तेजना को बढ़ा कर, वीर्य के पतलापन और शीघ्र पतन को दूर किया जाता है । वीर्य विकार होने से वैवाहिक जीवन में स्त्री प्रसंग के समय तुरंत स्खलित होना और शुक्र वाहिनी का कमजोर होने का देशी ईलाज आप इस विडियो में देख सकते हैं और इस विडियो को अंत तक अवश्य देखे एवं अधिक से अधिक शेयर करें ।
AAYURVED, MODREN, NUTRITION DIET & PSYCOLOGY गोपनीय ऑनलाइन परामर्श -- आपको हमारा परामर्श गोपनीयता की गारंटी है. हमारा ब्लॉग्स्पॉट, विश्वसनीय, सुरक्षित, और निजी है. एक उर्जावान, दोस्ताना, पेशेवर वातावरण में भौतिक चिकित्सा के लिए सर्वोत्तम संभव कार्यक्रम प्रदान करना है. "डॉ. रघुनाथ सिंह राणावत: OCD, HOCD और यौन संबंधी समस्याओं के लिए CBT/ERP विशेषज्ञ।"
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बुधवार, 3 मई 2023
सोमवार, 24 सितंबर 2012
वीर्य का उत्पाद बढाये
वीर्य को कैसे बढाये अक्षर सवाल ज्यादा पूछा जाता है =
वीर्य को संतुलित भोजन से बढ़ाया सकता है, जिसमे अनाजों के साथ फल, तरकारियों, दूध, दही, और मांस से आसानी से वीर्य बढ़ाया जा सकता है. आधुनिक खोज में फोलिक एसिड और जिंक की मात्रा वाले भोजन में वीर्य की अधिक मात्रा रहती है. अनाजों मे गेहू और जौ, भिन्डी और शतावरी में उतम फोलिक एसिड पाया जाता है. जो वीर्य बनाने में सहायता करता है, फलो में बढिया गाढ़ा और ज्यादा वीर्य के लिए केला, संतरा ,स्ट्रोबेरी, अंगूर तरबूज और समुद्री शैवाल, लाल मांस, उपरोक्त सन्तुलित आहार वीर्य वृद्धि निर्माण और स्खलन से बचाव करता है. फोलिक एसिड वो पोषक तत्व है जिस से वीर्य को गतिशीलता और शुक्राणु की गतिशीलता में वृदि की मजबूती मिलती है. इनके साथ पूरक पूरक आहार भी लिया जा सकता है ...अगर आप को परामर्श की आवश्यकता है तो घबराने की अब जरूरत नहीं आप हमसे शुल्क दें कर परामर्श ले सकते हैं.
State bank of india [ भारतीय स्टेट बैंक ] के किसी भी शाखाओं के एकाउंट में जमा करने के बाद ईमेल से चिकित्सा परामर्श मिल जायेगा जो पूर्णतया गोपनीय [ गुप्त ] रखा जायेगा.
परामर्श शुल्क 500 / रूपये
State bank of india
Raghunath singh ranawat
Jal chakki - 30397
Account no : 20207607579
रविवार, 5 अगस्त 2012
वीर्य = .वीर्य ही तो समाज का दाता है, वीर्य ही नारी का श्रंगार है, वीर्य ही पिता है. वीर्य हीनता तो विषाद है, वीर्य के अनेक प्रकार है .
वीर्य = वीर्यवान जिस में वीर्य की संतुलित मात्रा हो, नर जात सभी में वीर्य पाया जाता है. पुराने जमाने में आशीर्वादात्मक सुभाशीष देते, आज वीर्य शब्द पर वीर्यपात या पतलापन पर ठगी के प्रचार ज्यादा दीखता है. जिसमे आत्म विश्वास के कमी, डरपोक या वाकई अल्प वीर्यवान इस से पीड़ित है. वे लोग ज्यादा फसते जिस को शर्म का धर्म मान कर किसी को नही बता कर अपने स्वंय के द्धुआरा पत्र-पत्रिका में निदानात्मक उपचार खुद ही करते है, और यह स्वंय का उपचार रोज रोज नई नई खबरों से अपने शरीर पर परीक्षण में हारते जुहारी की भाती दोगुना साहस करते है और अपने आप को आत्मघाती बीमारी की चपेट में ले लेते और फसते जाते है .फिर शीघ्र पतन का होना, गैस का बनना , पेट खराब का होना, कमज़ोरी का होना, कम ताकत का होना ,विश्वास की कमी का होना और अपनी स्त्री के सामने शर्माना इन सभी बीमारियों की बजाय खुल कर अपने माता पिता, दोस्त, भाई को बताने में शर्म नही करनी चाहिए. सामान्य बीमारी होती बस वैसी ही तो बात है .वीर्य ही तो समाज का दाता है, वीर्य ही नारी का श्रंगार है, वीर्य ही पिता है. वीर्य हीनता तो विषाद है, वीर्य के अनेक प्रकार है. इसके लिए जिसमें आप को अतिरिक्त और पूरक भोजन की आवश्यकता हो सकतीं हैं, जो आपके दैनिकों आहारो का मानक आहार विशेषज्ञों से परामर्शदाता के संपर्कों से मिल सकतीं हैं. जल्दी ही हम आप को ईमेलों से निदानात्मक परामर्श सहायतार्थ उपलब्ध होंगें.
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