बीमारी आमन्त्रण = [ १ ] आहार का स्वतन्त्रं अवस्था में चुनाव मानव जिस समय खाना खाते उस समय मन में जो भी आता वही भोजन करने पर उतारू हो जाते है, नफा - नुकसान के बारे में नही विचार करके तय शुदा विचारो का गुण गान के स्वाद में आदमी भर पेट भोजन कर जाता है , [ २ ] प्रेरणा वशीभूत अवस्था मानव जब कभी अवसरवाद के कारण प्रेरणा के वशीभूत जैसा जो मिलता उस भोजन को दम-दमन की जो स्थति अनुकूल बनते ही उस भोजन को प्राप्त करने की पूरी कोशिश करता है, और मनोवृति अपने माता पिता या दोस्त से जो आहार ग्रहण करना सिखा उसी को स्थान्तरण अपने अनुजो को प्रदान करता है [ ३ ] प्रतिरोध की अवस्था शर्मनाक एवं चिंता उत्पन्न करने वाले आहार की बात आती तो वह भोजन करने वाला उसकी जगह पर शरीर में उन आहारो के प्रति उसकी जगह बनावटी पोष्टिक आहार की बात करने लगता है ...
AAYURVED, MODREN, NUTRITION DIET & PSYCOLOGY गोपनीय ऑनलाइन परामर्श -- आपको हमारा परामर्श गोपनीयता की गारंटी है. हमारा ब्लॉग्स्पॉट, विश्वसनीय, सुरक्षित, और निजी है. एक उर्जावान, दोस्ताना, पेशेवर वातावरण में भौतिक चिकित्सा के लिए सर्वोत्तम संभव कार्यक्रम प्रदान करना है. "डॉ. रघुनाथ सिंह राणावत: OCD, HOCD और यौन संबंधी समस्याओं के लिए CBT/ERP विशेषज्ञ।"
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रविवार, 11 मार्च 2012
गुरुवार, 8 मार्च 2012
Abillity motivatin
बिमारी आमन्त्रण = आप का बच्चा अधिक मात्रा में जब खाना खाता है , और उस के पेट दर्द की शिकायत करता, अथवा अधिक खाने से आलस ,के कारण बच्चो को स्कुल जाने से अगर रोकते है,तो वह बच्चा आदतन सावेगिक प्रस्थति का अभ्यास करने का उपक्रम जारी रखता है, तो उन बच्चो के आमाशय में गेस,पेट दर्द ,पेट खराब जैसी विक्रतिया उत्पन्न होने की संभावना बढ़ जाती है , क्योकि एक नया अभ्यास में माता पिता उस विकर्त आदत के लिए सहायक की भूमिका अदा करते है और बच्चा बहाने बाज़ी करते करते,कब बहाने बाज बन जाता और एक पेट का रोगी भी और जब पत्ता चले तब तक देर हो चुकी होती है ...
बुधवार, 7 मार्च 2012
CULTURAL DIET LEARNING
भोजन में सामाजिक योगिता = कई बार समाज में व्याप्त ऐसी परम्परा होती है कि उस सामाजिक मान्यता के कारण उस भोजन में कुपोषणता में सहायक होती है ,जिसमे आत्म-संयम, आत्म-रक्षा, आत्म=निर्भता, आत्म-सन्मान तथा आत्मविश्वास के गुनौ का गुण-गान का प्रचारण का पारम्परिक स्थान्तरण होता रहता है कि ,किसी प्रकार के सामाजिक लोक रीति-रिवाजो के भोजन के तौर कायम परम्परा का अनुसरण करते गौर्न्वित महसूस करते मान देखा जाता है. वहा नई शिक्षा या नया ज्ञान को हीनता किं नजर या विरोधी नजर से देखा जाता है.वहा सिमित प्रेरणा एवं संवेग के कारण अच्छे लक्ष्य के पोषण को प्राप्त कि कमी पाई जाती है और दुसरे सामाजिक रीति-रिवाज के भोजनों का अवरोधं माना जाता है...
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