सोमवार, 11 मार्च 2013

दैनिक जीवन में असामान्य व्यवहार , अशांति ,कलह का पाया जाना = पति-पत्नी और बच्चे से परिवार बना हुआ होता जो कभी कभी अपने माता पिता से अलग होकर सुख शांति से रहना चाहते परन्तु रह नही पाते

दैनिक जीवन में असामान्य व्यवहार , अशांति ,कलह का पाया जाना  = पति-पत्नी और बच्चे से परिवार बना हुआ होता जो कभी कभी अपने माता पिता से अलग होकर सुख शांति से रहना चाहते परन्तु रह नही पाते और पति-पत्नी में विचार खींचतान चलती रहती है , जिसके कारणों को जानना जरूरी होता है .भारतीय समाज पुरुष प्रधान होता है ठीक विपरीत, अंग्रेजी समाज नारी प्रधान होता है जिसके प्रेरणा के प्रभाव के कारण माता का पुत्र-पुत्री के पसंद या मांग की पूर्ति में लगातार हस्तक्षेप या अपनी मौन शक्ति प्रदर्शन को प्रकट करना होता है . अक्षर बच्चे 12 वर्ष से  वर्ष में भावनात्मक परिवर्तन होता है और बच्चा माता को अक्षर जुट बोल कर या बहाना बनाकर अपने समय और रुपया का दुरुपयोग करता है .जैसे पिता में कहा की बेटा पार्टी से शाम 10 बजे तक घर आ जाना .माता की आसक्ति के कारण बेटा देरी से आता है या अपना हाथ खर्च को अधिक वसूल ने के लिए पुस्तक ,पेन फ़ीस आदि की बढ़ोतरी बता कर लेता रहता है .जिस ख़ास कोई हिसाब नही देता है,पिता के पूछे जाने पर तुरंत माता बच्चे की वकालत कर देती है  जिस का बीना सोचे लिए पक्ष का परिणाम गलत ही आता है .जैसे  बच्चा कुआ देखना चाहता  है तो पिता कहता कुआ देखा कर आ जाना जा बेटा कुआ देखता है तो अपने साथियों से कुए को कूदता देखता है तो उस बच्चे की इच्छा कुआ कूद ने की होती है वह माता से कहेगा मेरे दोस्त के साथ क्या मे भी कुआ कुदू तो माता कहेगी , हा  मेरा भी कूद सकता मगर ये ज्ञान नही की कूद ने वाले बच्चे जो कर रहे या तो अनुभवी है या वो भी अपने पिता के विरोध से कूद रहे है[ नशा करना , बुरी आदत बनाना ]  परन्तु ये नही सोचे गी की उस के पिता ने क्या कहा है .यह पिता के सुर की बजाय माता अपने बच्चे के सुर में  हा में सहमति देती यानि पति का विरोध  करना हुआ ,. कोई पिता अपनी औलाद के विरुद्ध नही होता उस को सामाजिक दायित्व के साथ परिवार दायित्व भी ज्ञात होता है और उन में बुरे भलाई का भी ज्ञान होता है , माता  बच्चे के प्रेम के प्रभाव में उनके गलत विचारों जो अनुभव हीनता के कारण नही समझते  हुए उस की मांग पूर्ति पर बल ज्यादा देने से आपसी कलह विवाद इतना बढ़ जाता की घरेलू हिंसा की आवृति कब बढ़ जाती उसका पता ही नही चलता .