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मंगलवार, 24 नवंबर 2015

परामर्श

परामर्श सभी प्राणियों को आवश्यकता पड़ती हैं, नव जात शिशु से वृद्ध व्यक्ति को अपने विकास में समस्या को दूर करने में मददगार होता है, सर्वप्रथम व्यक्तित्व विकास में परामर्शदाता की भूमिका महत्वपूर्ण होती है. शिशु का प्रथम माता पिता ही परामर्शदाता होता है, दूसरा परामर्शदाता गुरु को माना जाता है. तीसरा परामर्शदाता मित्र होता है, फिर भी गुरु का स्थान व्यक्तित्व विकास में सर्वाधिक माना गया है. एक योग्य परामर्शदाता मिल जाने से कमजोर व्यक्ति भी कुशल व्यक्ति को परास्त कर वो अपनी प्रगति का परम प्राप्ति कर लेता हैं.
परामर्श व्यक्ति को बहुत क्षेत्रो में लेना पड़ता है. प्रथम शिक्षा में ही आवश्यक होता हैं. इस प्रकार व्यावसायिक परामर्श, नौकरी हेतु परामर्श, शादी के लिए परामर्श, पारिवारिक परामर्श, समाजिक परामर्श, अपराधियों  के लिए परामर्श, पुलिसकर्मी के लिए परामर्श, सेना के जवानों के लिए परामर्श, नेताओं के लिए परामर्श, अभिनेता के लिए परामर्श, जीवन साथी के लिए परामर्श, माता-पिता के लिए परामर्श, रोगी के लिए परामर्श, और आहार के लिए परामर्श, इन सब में महत्वपूर्ण आहार परामर्श होता है, क्योंकि मनुष्य आहार से ही पहला जीवन शुरू करता है. आहार से जी जीवन बनता है.    
जैसे ; महाभारत काल में कर्ण तीर अंदाजी में सर्व श्रेष्ठ प्रथम श्रेणी का धनुषधारी योद्धा था, दूसरे नम्बर का तीर अंदाजी में धनुषधारी एकलव्य योद्धा था और तीसरे श्रेणी का तीर अंदाजी में धनुषधारी योद्धा अर्जुन था. तीसरी श्रेणी का धनुषधारी योद्धा अर्जुन को युद्ध से पूर्व श्री कृष्ण का परामर्श मिला जो एक मनोस्नायु, मनोविकृति का रोगी जो भ्रम में जीवन जी रहा था. अर्जुन को भ्रम से मुक्ति दिलाई और रण भूमि में कुशल परामर्श दिया और उसका भ्रम दूर किया, और महाभारत का युद्ध जीता था, इसलिए आज भारत में इस परामर्श को अब तक का सर्वश्रेष्ट परामर्श माना जाता है.
मनोविज्ञानिक परामर्श के लिए आप हम से सम्पर्क कर सकते है,
rsranawat09@gmail.com पर सम्पर्क करे.

मंगलवार, 12 मार्च 2013

माता का अति प्यार बच्चे के लिए है, एक कुपोषण व्यवहार का बनता है

माता का अति प्यार बच्चे के लिए है, एक कुपोषण व्यवहार का बनता है .आदते जिस प्रकार से छोटे बबूल के पौधे की भाती होते है. जो बबूल के पौधे के काँटे दीखते नही है ,बबूल का पौधे वृक्ष बन जाता तब पता चलता की काँटे , इस को आम क्यों नहीं बन सकते ! मैने प्यार से ज्ञान के पोषण में कोई कमी नही रखी .अति खर्चीलापन के कारण जो बचपन में गंदी आदत या नशीली सेवन के कारण माता के बाद वह स्वयं की पत्नी से झगड़ा करता जो अब आदत बन चुकी ,पति के कहने पर अंकुश लगाया होता तो आज ये नौबत नही आती .सब्जी में जैसे नमक की आवश्यकता होती है .वैसे ही पिता [ पति ] की डाट के दो बोल पर अमल करली होती. तो आज अच्छा होता. पिता या पति अपने परिवार के विरोधी नही होता बल्कि जवाबदेही के साथ अपना परिवार का निर्वाह करता है.एक अच्छे परिवार के लिए पति-पत्नी में समझ होना जरूरी होता है.

सोमवार, 11 मार्च 2013

दैनिक जीवन में असामान्य व्यवहार , अशांति ,कलह का पाया जाना = पति-पत्नी और बच्चे से परिवार बना हुआ होता जो कभी कभी अपने माता पिता से अलग होकर सुख शांति से रहना चाहते परन्तु रह नही पाते

दैनिक जीवन में असामान्य व्यवहार , अशांति ,कलह का पाया जाना  = पति-पत्नी और बच्चे से परिवार बना हुआ होता जो कभी कभी अपने माता पिता से अलग होकर सुख शांति से रहना चाहते परन्तु रह नही पाते और पति-पत्नी में विचार खींचतान चलती रहती है , जिसके कारणों को जानना जरूरी होता है .भारतीय समाज पुरुष प्रधान होता है ठीक विपरीत, अंग्रेजी समाज नारी प्रधान होता है जिसके प्रेरणा के प्रभाव के कारण माता का पुत्र-पुत्री के पसंद या मांग की पूर्ति में लगातार हस्तक्षेप या अपनी मौन शक्ति प्रदर्शन को प्रकट करना होता है . अक्षर बच्चे 12 वर्ष से  वर्ष में भावनात्मक परिवर्तन होता है और बच्चा माता को अक्षर जुट बोल कर या बहाना बनाकर अपने समय और रुपया का दुरुपयोग करता है .जैसे पिता में कहा की बेटा पार्टी से शाम 10 बजे तक घर आ जाना .माता की आसक्ति के कारण बेटा देरी से आता है या अपना हाथ खर्च को अधिक वसूल ने के लिए पुस्तक ,पेन फ़ीस आदि की बढ़ोतरी बता कर लेता रहता है .जिस ख़ास कोई हिसाब नही देता है,पिता के पूछे जाने पर तुरंत माता बच्चे की वकालत कर देती है  जिस का बीना सोचे लिए पक्ष का परिणाम गलत ही आता है .जैसे  बच्चा कुआ देखना चाहता  है तो पिता कहता कुआ देखा कर आ जाना जा बेटा कुआ देखता है तो अपने साथियों से कुए को कूदता देखता है तो उस बच्चे की इच्छा कुआ कूद ने की होती है वह माता से कहेगा मेरे दोस्त के साथ क्या मे भी कुआ कुदू तो माता कहेगी , हा  मेरा भी कूद सकता मगर ये ज्ञान नही की कूद ने वाले बच्चे जो कर रहे या तो अनुभवी है या वो भी अपने पिता के विरोध से कूद रहे है[ नशा करना , बुरी आदत बनाना ]  परन्तु ये नही सोचे गी की उस के पिता ने क्या कहा है .यह पिता के सुर की बजाय माता अपने बच्चे के सुर में  हा में सहमति देती यानि पति का विरोध  करना हुआ ,. कोई पिता अपनी औलाद के विरुद्ध नही होता उस को सामाजिक दायित्व के साथ परिवार दायित्व भी ज्ञात होता है और उन में बुरे भलाई का भी ज्ञान होता है , माता  बच्चे के प्रेम के प्रभाव में उनके गलत विचारों जो अनुभव हीनता के कारण नही समझते  हुए उस की मांग पूर्ति पर बल ज्यादा देने से आपसी कलह विवाद इतना बढ़ जाता की घरेलू हिंसा की आवृति कब बढ़ जाती उसका पता ही नही चलता .   

मंगलवार, 22 मई 2012

बाजार उत्पादित आहारो को देखकर खरीदे

आज के जमाने में विज्ञान की विकास यात्रा में आहार का भी बाज़ारीकरण तीव्रता से मुनाफाखोरी के कारण नाना प्रकार के प्रलोभनों से उपभोगताओं से आकर्षित किया जाता, जिस से बच्चे जल्दी प्रभावित होते और नई नई आहार जन्य बीमारियों को आमंत्रण स्वीकार करते अचेतन अवस्था में अभिभावक अपना तथा अपने परिवार का स्वास्थ्य लाभ भी दर दर ठूंठते नजर आ रहे है .बाजार उत्पाद में स्वाद या आकर्षण के अलावा पोषक तत्व की जानकारी का ज्ञान भी होना जरूरी होता की ख़रीदा जा रहा आहार में अपनी आवश्यकता के अनुसार पोषक तत्व उपलब्ध है अथवा नही और निर्माण विधि में गुणवत्ता का कोई मानक प्रबंधक प्रमाण है की नही. खरीदे जाने से पूर्व उत्पादन की दिनांक, वजन और अंतिम खराब की दिनांक लिखी होने चाहिए . 

सोमवार, 23 अप्रैल 2012

पोषक आहार विरोधी व्यक्तित्व = इस के अंदर जो व्यक्ति आते वो मुनाफाखोरी के चक्र में जनता से जंक फ़ूड का उत्पाद व क्रय-विक्रय करने वाले हो

पोषक आहार विरोधी व्यक्तित्व =  इस के अंदर जो व्यक्ति आते वो मुनाफाखोरी के चक्र में जनता से जंक फ़ूड का उत्पाद व क्रय-विक्रय  करने वाले होते है .और गलत प्रेरणा से सिखा आचरण वाले लोग और बचपन में सिखा आचरण भी प्रभावी ज्यादा करता है .जो निरंतर आयु के साथ उस को दिशा की वृदि मिलती रहती है .                              1.अंतरात्मा का अपर्याप्त विकास  indiquate conscince development वो लोग पोष्टिक आहार को नैतिक तो स्वीकार करते परन्तु अंतरात्मा से नैतिक मूल्यों को स्वीकार नही करते .इन जंक आहार के उत्पादक तथा प्रचारक के बोद्धिक विकार और उनकी अंतरात्मा में बहुत अंतर होता है .ये विज्ञापनों के सहारे आकर्षणों के प्रलोभन से जनता को फसाकर धोखा देते है .                                                                                                     2.सरकारी नियम कुंठा सहनशीलता -सरकारी नियम कायदे तोड़ने के लिए जुठे संकल्प दिखावा तो कर लेते परन्तु उत्तरदायत्व आने पर कर्मचारी पर बोज़ डाल देते या चेतावनी देकर सही पढ़ा नही गया का हवाला देकर इति श्री कर लेते .                                                                                                                                             3.आत्म केन्द्रित आवेगी और अनुउत्तरदाई -जनता से मुनाफा तो लेना जानते है और राजनैतिक तथा क़ानूनी मदद तो लेते और जब उत्तर दायित्व पर वैधानिक  चेतावनी को सही नही पढ़ी गई कह कर अनुउत्तरदायी हो जाते .                                                                                                                                                                     4.चिंता एवं अपराध  भावना का अभाव - जंक आहार उत्पादकों में चिंता ,तनाव और अपराध की नाम  मात्र की भावना पाई जाती है .कारण की इन में मुनाफाखोरी  तथा राजनैतिक  सरंक्षण मिला होता है ,इसलिए अपराध भावना होती ही नही ,उन उत्पादकों में ईमानदारी और दिखाने का व्यवहार ऐसा होता की गलत और अमान्य पोषक माप के लिए जनता को शक  करना कठिन होता है क्योकि भ्रामक पोष्टिक मान लिखा हुआ भी है तो इसका भोतिक सत्यापन जनता को करना कठिन होता है .                                                                               5.तर्क देने की क्षमता -वो इस प्रकार तर्क देते है की प्रमाणों का अम्बार लगा होता है और वाक़ चातुर्य पूर्वक होती है .                                                                                                                                                                    6. राजनैतिक पहुच अच्छी होती - जिससे कम्पनी की साख बनी रहे के लिए समय समय पर चंदा राजनैतिक  पार्टियों को दिया जाता है जिससे नियम कायदे का तिरस्कार बना रहे .                                                                     7. स्वार्थ सिद्धि के लिए अच्छा अभ्यास जिससे दुसरे प्रभावित हो उसके लिए मधुर बनावटी और लुभावने विज्ञापन सहारे समजाईस होती है 

रविवार, 22 अप्रैल 2012

माता का प्यार = माता का प्यार अँधा होता यह संसार में सभी जानते .परन्तु माता भी दो प्रकार की होती 1.ज्ञान वाली माता, 2. विज्ञानं वाली माता

माता का प्यार = माता का प्यार अँधा होता यह संसार में सभी जानते .परन्तु माता भी दो प्रकार की होती 1.ज्ञान वाली माता, 2. विज्ञान वाली माता ,पहली ज्ञान वाली माता पुत्र मोह में जो पुत्र कहेगा या करेगा उसका समर्थन करेगी की मेरा बेटा जो खायेगा पियेगा वही दूंगी .उस माता को भले पत्ता है की जो मेरा बेटा भोजन कर रहा वह गलत है.और बीमारी का कारण भी बने, तो भी अचेतन अवस्था के कारण परिवार का सदस्य के विरुद्ध भी होते अपने लड़के की इच्छा पूर्ति करेगी कारण की अँधा प्यार बेटे के प्रति अधिक आसक्ता दर्शाती है. जो माता दूसरी विज्ञान वाली होती विवेक जाग्रत वान होती है.चेतन अवस्था में रहती है .और अपने बच्चे को उस की ज़िद को समजाती है की बेटा मे तेरे से बड़ी ,बड़ों को ज्ञान ज्यादा होता, देख किंग अंकल की तरह बोड़ी [ शरीर ] बनानी हो तो वैसा आहार ले जिस से शरीर मजबूत बनता हो.  नये अनुसन्धानो को समझाती है.और अपने बेटे को वो आहार खिलाती जिस से अपने पुत्र का हित लाभ ने अच्छा स्वस्थ्य ,सुंदर स्वास्थ्य ,उर्जा वान ,तथा बल बुद्धिमान प्राप्त करती ...

शनिवार, 21 अप्रैल 2012

गुप्त रोग = गुप्त रोग के नाम से कोई बड़ी बीमारी नही होती सिर्फ यह हो मात्र शर्म के जो भाव होते उसका विकास ज्यादा होने से आत्म ब

गुप्त रोग = कई बार पुरुष वर्ग अपनी नादानियो के कारण हस्तमैथुन, स्वप्नं दोष, शिघ्रपतन के कारण किसी को नही बता पाने से उस बात को गुप्त रखता इस गुप्त बात का किसी को पता नही लगे इस कारण इस बीमारियों को गुप्त रोग कहते परन्तु गुप्त रोग के नाम से कोई बड़ी बीमारी नही होती सिर्फ यह हो मात्र शर्म के जो भाव होते उसका विकास ज्यादा होने से आत्म बल कमजोर हो जाता और कमजोर आत्मबल वाले किसी से अपनी बात बताने में अति विचारो के कारण निर्णय लेने में देरी करते करते एक अभ्यास हो जाता है. जो मन की बात मन से नही निकलती और वैसे तडपते जैसे जल बिन मछली. डरिये मत पहले अपनी शर्म को दूर कीजिये अगर कोई परेशानी होतो हम आप को जवानी की ग़लतियों के कारण अगर आप ने अपना जीवन बर्बाद कर दिया हो तो घबराने की अब जरूरत नहीं आप हमसे शुल्क दें कर परामर्श ले सकते हैं.
  State bank of india [ भारतीय स्टेट बैंक ] के किसी भी शाखाओं के एकाउंट में जमा करने के बाद ईमेल से चिकित्सा परामर्श मिल जायेगा जो पूर्णतया गोपनीय [ गुप्त ] रखा जायेगा.
परामर्श शुल्क 500 / रूपये
 State bank of india
Raghunath singh ranawat
Jal chakki - 30397
Account no : 20207607579