नाश्ता यानि अल्पाहार = आज कल भाग दौड़ की ज़िंदगी में समय के अभाव में सड़कों पर बने होटलों में नाश्ता करने वालो की भीड़ दिखाई दे रही है .इन होटलों में भोजन विशेषज्ञ ,शेफ ,आदि दावा करते है कि हमारे यह गुणवता किलो कैलोरीयुक्त आप को नाश्ता या जल पान मिलेगा परन्तु क्या आप ने देखा उस नाश्ता में कार्बोहाइड्रेट, वसा और सोड़ियम की मात्रा की भरपूरता होते है जिससे आप का मोटापा बढ़ता ही जाता है जब की आपको जों किलोकैलोरी मात्रा की आवश्यकता है वो कही ज्यादा तो नही हो रही इस का ध्यान पूर्वक मनन करना आप की जवाबदारी बनती है .जिसके पीछे कारण यह नजर आता है की आप के पास समय कम और स्वादिष्ट के चक्कर में जों भोजन करते वो आप को तृप्त नही करता , अगर आप भोजन से तृप्त होंगे तो अलग से भूख भी नही लगेगी कोशिश कीजिये अपने धर का बना खाना ही खाए, तरकारी ,फलो का सेवन करे तो मोटापा और हृदय रोगों से बच सकते है ..
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सोमवार, 15 अक्टूबर 2012
रविवार, 29 जुलाई 2012
नास्ता
नास्ता
वाह ! नाश्ता [ नास्ता ] प्राय सभी को करने की आवश्यकता होती है, ओह यह तो दिन का एक सबसे महत्वपूर्ण भोजन का हिस्सा होता है, कुछ लोग घर का बना और कुछ लोग बाजार का बना नास्ता करते है. नास्ता पौष्टिक, आसानी से हजम होने वाला, त्वरित प्राप्ति होना की लालसा के साथ आवश्यकता बनी रहती है. सुबह का नास्ता की बजाय कभी कभी दिन में भोजन की उपलब्धता नही होने की अवस्था के कारण भी नास्ता की जरूरत पडती है परन्तु इन नास्ता में सभी को अपनी अपनी देह के अनुरूप, कार्य के अनुरूप, और आय श्रोत्र के अनुरूप की आवश्यकता होती, जिसके कारण हमेशा एक दूसरे के लिए भिन्न भिन्न प्रकार के मांग को देखा जाना जरूरी होता है. इस नास्ता में असंतुलन आ जाता तो अल्प पोषण या अति पोषण का मनुष्य से बीमारी का शिकार हो जाता है. मान लो जिस की पाचन शक्ति कमजोर हो वह उच्च किलो कैलोरी का नास्ता की मात्रा लेता है तो निश्चित है आलस आएगा जिस से अपना काम काज में अवरोधन पैदा होगा और उस कर्तव्य कर्म में सफलता नही मिलेगी. और अगर भारी या ज्यादा काम-काज हो तो कम किलो कैलोरी का नाश्ता हो तो भी कर्तव्य कर्म में पूर्णतया सफलता नही मिल पाती है.
वाह ! नाश्ता [ नास्ता ] प्राय सभी को करने की आवश्यकता होती है, ओह यह तो दिन का एक सबसे महत्वपूर्ण भोजन का हिस्सा होता है, कुछ लोग घर का बना और कुछ लोग बाजार का बना नास्ता करते है. नास्ता पौष्टिक, आसानी से हजम होने वाला, त्वरित प्राप्ति होना की लालसा के साथ आवश्यकता बनी रहती है. सुबह का नास्ता की बजाय कभी कभी दिन में भोजन की उपलब्धता नही होने की अवस्था के कारण भी नास्ता की जरूरत पडती है परन्तु इन नास्ता में सभी को अपनी अपनी देह के अनुरूप, कार्य के अनुरूप, और आय श्रोत्र के अनुरूप की आवश्यकता होती, जिसके कारण हमेशा एक दूसरे के लिए भिन्न भिन्न प्रकार के मांग को देखा जाना जरूरी होता है. इस नास्ता में असंतुलन आ जाता तो अल्प पोषण या अति पोषण का मनुष्य से बीमारी का शिकार हो जाता है. मान लो जिस की पाचन शक्ति कमजोर हो वह उच्च किलो कैलोरी का नास्ता की मात्रा लेता है तो निश्चित है आलस आएगा जिस से अपना काम काज में अवरोधन पैदा होगा और उस कर्तव्य कर्म में सफलता नही मिलेगी. और अगर भारी या ज्यादा काम-काज हो तो कम किलो कैलोरी का नाश्ता हो तो भी कर्तव्य कर्म में पूर्णतया सफलता नही मिल पाती है.
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