बुधवार, 25 अप्रैल 2012

पित्त रोधक दूर्वा = अम्ल जब बढ़ जाता या सिने की जलन में इस का स्वरस पिने से आराम आता है .

पित्त रोधक दूर्वा = पित्त रोधक दूर्वा को दूब ,हरियाली के नाम से जाना जाती यह मधुर ,कषाय, तिक्त, शीतवीर्य,जीवन शक्ति को बढ़ाने वाली ,कफ तथा पित्त का नाश करनेवाली , रक्तविकार को मिटाने वाली , दाह को शांत कारक, रक्त पित्त को मिटाने वाली और त्वचा रोगों को मिटाने वाली ,इस दूर्वा को घोड़े बड़ी चाव से खाते ,यह तक की राहु नक्षत्र को भी प्रिय होती एवं इस को पूजा के कामो में भी ली जाती ,बडो के आशीर्वाद छोटो को दूर्वा की तरह फैलाव वाला वंश का आशीष कहते है .इस से मूत्र का प्रमाण बढ़ता है .जब मूत्र मार्ग में जलन हो तो  इस को पिने से आराम आता है .बवाशिर [ मस्सा ] के जलन पर इस की कल्क का लेप किया जाता है .उन्माद ,अत्यातर्व ,मिर्गी में स्वरस पिलाते है .अम्ल जब बढ़ जाता या सिने की जलन में इस का स्वरस पिने से आराम आता है .

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