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शुक्रवार, 30 दिसंबर 2022

क्या आप तनाव की दवाई खाने में विश्वास रखते है ।

क्या आप तनाव की दवाई खाने में विश्वास रखते है । तनाव एक समस्या का विचार है और लगातार ये छोटा विचार बढ़ता रहता है । दवाई खाना आपके विचारों की श्रृंखला को कम कर सकता परंतु विचारो को बदल नहीं सकता, आजकल दवा माफिया आपको जिंदगी भर दवाई खिलाने में लालायत है, आप अपने कमाई के अहंकार में अपनी समस्या का निदान की बजाय दवाई खाने पर विश्वास रखते है जो शरीर के लिए घातक हो सकता है । अंग्रेजी दवाओं के साइड इफेक्ट्स होते वो आपको तुरंत दिखाई नहीं देते है । आप देखेंगे कैसे दवाई बाजार में उपलब्ध हेरा फेरी होने लगी है, अनचाही दवाई खिलाना में आपका अवचेतन मन के कारण होता है, आप आसानी दे अपना तनाव बिना दवाई के मिटा सकते है ।
 आप देख सकते है, मनोचिकित्सक डॉक्टर तांबी नशीली दवाओं के कारण गिरफ्तार किया जा चुका है । 
22 दिसंबर 2022 के दैनिक भास्कर न्यूज में लिखा है । इसलिए आप तनाव चिंता में दवाई खाने की बजाय योग चिकित्सा पद्धति में उपचार कराए और चिंता से मुक्ति पाएं ।
भारतीय संस्कृति सभ्यता से योग चिकित्सा पद्धति एक जीवन शैली में बदलाव लाकर नई जिंदगी आसानी से किया जा सकता हैं ।। योग चिकित्सा पद्धति अपनाए और स्वस्थ रहे ।।


बुधवार, 18 जुलाई 2018

वृद्धावस्था में तनाव

मानव जीवन मे करीब 65 वर्ष बाद होने की शुरुआत तनाव से होती है, इस आयु में सामाजिक निर्भरता, पारिवारिक निर्भरता बढ़ जाती है । क्यो की शारीरिक परिवर्तन के कारण समायोजन समस्याएं पैदा होती है,
 
1. शारीरिक परिवर्तनों से सम्बन्ध समायोजन समस्याएँ- 
65 वर्ष में बुढ़ापा होता है, इस बुढ़ापे में कई तरह के परिवर्तन होना शुरू हो जाता है, इस उम्र में शारीरिक व मानसिक शक्ति कमजोर हो जाती है, पाचन शक्ति कमजोर हो जाती है, मुँह में दाँत, दाढ़ गिर जाते इस कारण भोजन चबाने में परेशानी आती है, भोजन स्वाद में भी समस्या आती है । साथ ही साथ आँखों में रोशनी कमजोर होने से दिखने में समस्या आती है । कानों में सुनने की क्षमता भी कमजोर हो जाती है, गंध सुगंध, सूंघने में समस्याओं का सामना करना पड़ता है, इस प्रकार प्रत्यक्ष परिवर्तन देखे जा सकते है । इन शारीरिक परिवर्तनों के कारण इनका जीवन समायोजन में कठिनाइयों से गुजरना पड़ता है, इस समय कोई नई मांग को पूरा करना कठिन होता है । स्वयं को असहाय होने के विचारों में जीवन जीना पड़ता है ।

2. आर्थिक सुरक्षा से से सम्बन्ध समायोजन
इस आयु से मासिक आय मिलना बंद हो जाता है, नौकरी-पेशा हाथ से निकल जाता है, संतुलित जीवन जीने के लिए शारीरिक व मानसिक स्वस्थ रखने के लिए पौष्टिक संतुलित भोजन खरीदने के लिए पर्याप्त रुपया भी नही होता है । शारीरिक बीमारी के लिए रुपये की आवश्यकता भी होती है, इन आवश्यकताओं के लिए धन खर्च करने की आवश्यकता भी पड़ती है । धन की कमी असहाय होने को मजबूर करता है ।

3. जीवन साथी के समायोजन की समस्या
पारिवारिक जीवन मे अब नई नई समस्याएँ आने लगती है, अवकाश प्राप्ति होने के कारण अधिकतर समय घर मे ही गुजरना पड़ता है, जीवन साथी से अगर मधुर सम्बन्ध हो तो ठीक नही तो संघर्ष शुरू हो जाता है, सतत अप्रिय वाणी के बोल से दिन बिताने कठिन हो जाता है । किसी किसी के अपने जीवन साथी के बिछड़ जाने से दिन रात अलगाववादी एवं अकेलापन के भाव विकसित हो जाते है, आजकल पुत्रवधुओं की सेवा का अभाव होता जा रहा है ।

4. सन्तान के साथ कि समायोजन की समस्याएं
इस वृद्धावस्था में अपने औलादों से समायोजन करने में काफी समस्या आती है, आधुनिक संस्कृति के कारण सन्तानों की सामाजिक मनोवृति रास नही आती, वृद्ध व्यक्ति के पुराने विचारों और सन्तानों के आधुनिक विचारों के कारण सामाजिक मान्यताओं,, सामाजिक मूल्यों में टकराव आते है , जिसके कारण इन वृद्ध नागरिकों में अंसतोष ज्यादा उत्पन्न होता है, की संतान उनके ऊपर आश्रित होते और आज ये सन्तानों पर अब आश्रित रहना पड़ता है ।अब इन्हें सन्तानों पर आर्थिक व शारीरिक निर्भरता रहनी पड़ती है । इस बातों के कारण असन्तोष ज्यादा उत्पन्न होता है।

5. अर्थोपार्जन की समस्या 
कुछ वृद्ध लोग अपने अर्थोपार्जन के लिए कोशिश करते पर सन्तान इस विषय का विरोध करते है, इन को रोका और टोका जाता है, कुछ सामाजिक व्यक्ति भी अर्थोपार्जन में इनकार करते है, तो ग्लानि भी उत्पन्न होती है ।

6. शारीरिक मानसिक असंतुलन
इस उम्र में शारीरिक दोष उत्पन्न होने से मानसिक विचारों में कुंठाएँ पैदा होती है, मानसिक स्वास्थ्य में गिरावट होने पर शारीरिक क्रिया करने में परेशानियों का सामना करना पड़ता है ।

शुक्रवार, 8 जुलाई 2016

मधुमेह तनाव

तनाव हमारे दैनिक जीवन में  एक बहुत ही सामान्य प्रक्रिया है, यह एक तनाव एक समस्या है या विकार यह हमारे शारीरिक को और मानसिक को प्रभावित करता है जब ये उत्पन्न हो जाता है.
तनाव शारीरिक मापदंडों जैसे अनसुलझे मुद्दे, बुरा रिश्ता, आंतरिक दर्द, मृत्यु  भय, डर चिंता, घर में अपने प्रभाव का नहीं होना के कारण होता है.
एक मधुमेह के रोगी के लोगों में, तनाव पर ध्यान दिए बिना मधुमेह रोगियों में यह चिंता और अवसाद की वृद्धि दर के लिए अग्रसर तनाव का एक प्रमुख कारण होने से होता है, फिर यह उच्च रक्त शर्करा के स्तर की ओर बढ़ जाता है.
तनाव कैसे बीमार के जीवन को प्रभावित करता है ?
जब हमारे शरीर को तनाव का अनुभव होता है, तब वह एक प्रकार से हमला होता हैं, इसका रोगी और भोगी ध्यान नहीं होता या नहीं देता हैं, जब ध्यान की अनूस्थिति या अनूउपस्थिति में शारीरिक हमला करने से गुप्त उच्च रक्त शर्करा बढ़ जाती हैं, और ईन्सुलिन की कमी पड़ जाती हैं.
जब रक्त ग्लूकोज अधिक बढ़ जाता है, तो पर्याप्त इसके लिए इन्सुलिन नहीं होता जिस कारण से रक्त ग्लूकोज स्थानातरण अन्य कोशिकाओं तक नहीं हो पता है.
तनाव की लंबी अवधि में रोगी  का दिमाग एक चुनौती देता है, की अधिक इन्सुलिन पैदा करना, जब ईन्सुलिन पर्याप्त उत्पन्न नहीं होता है तो इस विफलता के कारण रक्त शर्करा का स्तर बढ़ जाता हैं. अथवा अन्य बीमारियों की चुनौतियों में विफलता मिलती है तो भी रक्त शर्करा बढ़ जाती हैं.
नैदानिक उपाय
ऐसे बहुत तरीके के उपाय हैं जिसमें आप योग की तरह विश्राम उपायों की तरह तनाव को कम कर सकते हैं, प्रणायाम से ध्यान कर आप सकारात्मक जीवन शैली को परिवर्तन करके अपने आनंद के स्तर पर आप आध्यात्मिक शांति को पूरा करने में वृद्धि कर सकते हैं. एवं आप तनाव के पीछे छिपे अन्य कारण की पहचान और सुधारने  में आप स्वंय साधक हो सकते हैं. इस प्रकार आप 30-35 प्रतिशत चिंता को कम करके रक्त शर्करा को कम कर सकते हैं.


मंगलवार, 22 जुलाई 2014

तनाव

दो रास्ते 
मानव जीवन कभी-कभी दो राह पर आ जाता, तब निर्णय करना में समझदारी की आवश्यकता पड़ जाती है, की किस एक रास्ते को छोड़कर दूसरे रास्ते पर जाए. चाहे पारिवारिक मामला हो या शारीरिक मामला या प्रतियोगिताओं का मामला हो. इसका मूल कारण होता तर्क शक्ति का कमजोर हो जाना, बार बार दो प्रकार के विचार आते एक सहमति का दूसरा, असहमति है, फिर मन भटकता है, और लगातार भटकाव के रास्ते चलता रहता है, इस प्रकार से जीवन चेतन अवस्था में नहीं होता,  यानि मानव जाग्रत नहीं हो कर स्वप्न अवस्था में भी नहीं होता हैं. इन दोनों अवस्था में मध्य अर्ध-चेतन अवस्था होने की स्थित होती हैं, तब दो राह पर निर्णय देरी से या गलत हो सकता है अथवा तनाव की स्थिति पैदा हो सकती है. इस प्रकार से तनाव को फिर रोकने में असफल होते है,
प्रथम रास्ता स्वप्न से निकल कर चेतन अवस्था में आ कर अपने किसी दोस्त से परामर्श, माता पिता से परामर्श, मनोवैज्ञानिक से परामर्श लेने से जल्दी सफलतापूर्वक तनाव को दूर किया जा सकता है.