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मंगलवार, 17 अप्रैल 2012

आधुनिता के रोग = आज जीवन जीने के लिए धीरज की आवश्यकता की जरूरत है .धीरज नही होने से

   आधुनिता के रोग =  आज जीवन जीने के लिए धीरज की आवश्यकता की जरूरत है .धीरज नही होने से शारीरिक तनाव बढ़ जाता है .और इस समय आधुनिक जीवन शैली के कारण समय को ज्यादा महत्व दिया जाता है .खुद को समय जी जरूरत के कारण अपने स्वाथ्य पर बेहतर जीवन का निर्णय कभी नही ले पाने के कारण मोटापा ,ह्रदय रोग डायबिटीज जैसी बीमारियों को निमत्रण देता या स्वागत करता आज का मानव तैयार दिखाई देता है .अगर यह तय करले की मेरा कीमती समय कितना ही हो उस समय में से में मेरे शारीरिक स्वास्थ्य के लिए कसरत या व्यायाम के लिए अतिरिक्त समय निकल ही लुगा क्योकि समय से ज्यादा कीमती मेरा शरीर है, अधिक तरीके निकालने का तो अर्थ यही होता की आप अपने विचारो से असंतुलित है .अपने  विचारो को संतुलित कीजिये एक नई सोच पैदा कीजिये .और अपनी काया कल्प कीजिये .संतुलित भोजन कीजिये .और स्वस्थ संतुलित जीवन जिए .......

शनिवार, 18 फ़रवरी 2012

MY HEALTH = DIET MOTIVATION

कमजोर लक्ष्य = कमजोर आहार लक्ष्य का मूल कारण  मन की अस्थिरता . मन राग ,द्वेस  ,काम ,क्रोध में अटका होने से इन की दिशा में निरंतर गति होने से मन भटकता रहता जैसे  [१ ] राग -किसी न किसी बात को लेकर हमेशा शिकायत बनी रहती  है , [ 2 ] द्वेस - किसी न किसी बात को लेकर  हर दम बदला लेने के विचार आते  रहते है ,[ 3 ] काम - लगातार विकास  सुख  सुविधा  ,नई नई कामनाओ से हर पल भरा मन , [ ४ ] क्रोध -  कल्पना लोक के सपनों के टूटने से उत्त्पन्न क्रोध की अवस्था पैदा होती है , इस कारण से मन में संकल्प शक्ति कमजोर होती है और  सही निर्णय नहीं ले पाने  के कारण   आहार उत्तम नही ले  सकते है ..............................................

शुक्रवार, 17 फ़रवरी 2012

DIET MOTIVATION

 मानव प्रकति = प्रत्येक मानव की प्रकति अलग अलग होती है और जीवन जीने की पद्धति भी प्रत्येक की भिन्न भिन्न होने के कारण खान-पान ,विहार व् मोसम पसंद - नापसंद भी अलग होने के कारण उस के  भोजन से  लाभ किसी को ज्यादा,तो किसी को कम , किसी को जल्दी ,किसी को धीरे धीरे होता है , परन्तु असर अवश्य  होता है .फिर भी उन में अपनी पाचन शक्ति का सामर्थ्य का अध्यन करना होता की भोजन करने के बाद कफ ,पित तथा वात निर्माण कितना होगा ................................................. 

गुरुवार, 16 फ़रवरी 2012

DIET MOTIVATION

स्वतंत्रता =  कितना बड़ा भ्रम पाले आज की युवा शक्ति गुमराह के साथ गुलाम होती जा रही है ,विकास के बात करने वाला युवा विकसित बीमारियों को साथ साथ लिए  घूम रहा है , माता का दूध पिने  वाला बालको को धर का उत्तम आहार की बजाय आज जो कम्पनिया कहती उसका कहना मानना जरूरी समज कर  बाजारू उत्पाद खिलाना पिलाना शान समजते ...............मगर यह तो पराधीनता है ,नाना प्रकार के प्रलोभन हर बार नये नये फ्लेवर  नया स्वाद नया आकर्षक  पेकिंग का , इस प्रकार  युवा एक अपने  को बाध्यकारी समज कर खरीद करता फिर गुणवता की सच्चाई तो जानने बरसों बीत जायेगे .....................................................................

बुधवार, 15 फ़रवरी 2012

DIET MOTIVATION

बीमारी का आत्म ज्ञान =  प्रथम  आदमी अपनी बीमारी को  तीन प्रकार से  बीमारी की दशा [ कर्म संग्रह ]  को  करता है , जिस में {१} ज्ञान का भ्रम का  कर्म कर्ता  {2} जो इन्द्रियों के दुआरा {३} इस शरीर को तृप्त करना का अभ्यास , आदमी को भ्रम रहता की अमुख  मात्रा में प्रोटीन ,कार्बोहाद्रेड ,वसा ,मिनरल इत्यादि खाने से बढिया एनर्जी मिलेगी क्योकि भ्रम के ज्ञान के साथ अपनी इन्द्रियों पर नियन्त्रण नही होकर इन्द्रियों को एक रानी समज  कर अपने को दास  मान  उनकी  आदेश  की पालना करता और इस शरीर को भोजन से तृप्त करता ..........जब की होना यह चाहिए इन पांचो  इन्द्रियों को दासी बना कर रखना  चाहिए  ताकि ये आपने शरीर रूपी राजा की आज्ञा मान सके और आप गुणकारी आहार ले सके ,.................... 

मंगलवार, 14 फ़रवरी 2012

DIET MOTIVATION

पोषण का आत्म ज्ञान = प्रथम पड़ोसी को जीवनशैली  की बीमारी लगी और हार्ट अटेक से मोंत हो गई कारण की उस को  अनाप सनाप भोजन  करने की आदत जो पड़ गई थी ,.जिस को आत्म ज्ञान का अभाव  रहा  अब आज दुसरे पड़ोसी को लगता की कही अब हमारा नम्बर नही आ जाये इस  प्रकार  के भी सकारात्मक और नकारात्मक आत्म ज्ञान उत्त्पन्न होता है कि अब मुझे  क्या  और कितना  खाना  जरूरी है..................................................................................................................................................................   

सोमवार, 13 फ़रवरी 2012

DIET MOTIVATION

पोषण प्रेरणा -  पोषण प्रेरणा में तीन प्रकार के कर्म प्रेरणा होती है [१ ] पोषण  ज्ञाता  [ २ ] पोषण ज्ञान [३] पोषण  ज्ञेय.     प्रथम भूमिका   आदमी खुद अपनी  सकारात्मक या नकारात्मक अवस्था में  उपस्थिति दर्ज करता खाने का कर्म करता है उसे ज्ञाता कहते है   . दितीय भूमिका आदमी जिसके दुआरा खाना खाने के पोषण  का ज्ञान जाना जाता है उसे पोषण का ज्ञान कहते  .तिसरी  आदमी के खाने में पोषण के जानने में आने वाली तत्व का नाम ज्ञेय कहलाता है